अब तक की इस सेक्स स्टोरी में आपने पढ़ा था कि दीपक ने घर के सभी लोगों के सो जाने के बाद अपनी भांजी नेहा की चुत चोदने का मन बना लिया था और अब वे दोनों चुदाई का खेल शुरू करने वाले हैं.अब आगे..
नेहा खुद मस्त चुदाई के मूड में थी- अच्छा ये बात है.. तो मेरे प्यारे मामू, कपड़े मैं निकालूं या आप निकालोगे?दीपक- तू इत्ती सी है मगर बहुत पॉवर वाली लड़की है. तेरा इस उम्र में ये हाल है.. तो बड़ी होकर पता नहीं क्या गुल खिलाएगी?नेहा- मुझे अपने ही ऐसा बनाया है मामू अब बोलो ना.. मैं अपनी चुत का ढक्कन निकालूं क्या?दीपक- अब निकाल भी दे क्या पूछ रही है.. आज तुझे जमकर चोदना ही पड़ेगा, तब तू शांत होगी. नहीं तो कल फिर तू शुरू हो जाएगी.
नेहा को कपड़े उतारने की कहने की देर थी.. वो झट से नंगी हो गई. तब तक दीपक ने भी कपड़े निकाल लिए थे और वो खड़ा ही रहा ताकि नेहा आराम से उसके लंड को चूस सके.
नेहा मज़े से दीपक के लंड को चूसने लगी और उसकी आँखों में अब नशा चढ़ गया था. थोड़ी देर बाद वो खड़ी हो गई और दीपक को किस करने लगी.दीपक- क्यों मेरी जान, तेरी चुत में आज बड़ी आग लगी है.नेहा- जब पता है.. तो क्यों आप तड़पा रहे हो. अब तो मुझे आपके लंड से चुदे बिना रात को नींद भी तो नहीं आती.दीपक- अच्छा ये बात है तो मेरी जान आज तेरी गांड का भी मुहूर्त कर ही देता हूँ.नेहा- नहीं मामू.. वहाँ बहुत दर्द होगा और घर में सबको पता चल जाएगा.
दीपक- देख कल.. पापा का फ़ोन आया था, वो दो दिन के लिए गए थे, मगर उनको वहाँ काम के चक्कर में ज़्यादा रुकना पड़ गया. मगर अब उनका काम हो गया, तो अब वो कभी भी वापस आ सकते हैं. उनके आने के बाद हम रात को चुदाई नहीं कर पाएँगे.नेहा- ऐसा क्यों मामू, रात को क्या होगा?दीपक- अरे पागल लड़की तुम्हारे पापा आ जाएँगे तो तुम यहाँ थोड़ी रहोगी रात को!नेहा- ओह हाँ सॉरी.. भूल गई थी तो फिर?दीपक- उनके आने से पहले तेरी गांड का भी मुहूर्त कर ही देता हूँ फिर आराम से हम दोनों दोपहर में मज़ा करेंगे.नेहा- लेकिन अगर मैं चिल्लाई तो क्या होगा?दीपक- अरे पगली उस वक़्त तो नादान थी मगर अब तो चुदवा कर तुझे पता चल गया है. बस थोड़ी हिम्मत से काम लेना.. मैं आराम-आराम से तेरी गांड मारूंगा.नेहा- ठीक है मामू मगर पहले मेरी चुत ही मार लो.. चुत में बहुत खुजली हो रही है.
दीपक ने नेहा को बेड पे लिटाया और उसकी चुत को हवा में उठाकर चूसने लगा.नेहा- उफ मामू आह.. प्लीज़ आह.. ऐसे नहीं आह.. लंड डालो ना आह..
थोड़ी देर चुत चूसने के बाद दीपक ने अपना लंड उसकी चुत में पेल प्रिया और ज़बरदस्त चुदाई करने लगा.नेहा- आह.. आह चोदो मेरे प्यारे मामू आह.. अपनी प्यारी भांजी को आह.. सस्स एयेए नहीं उफ आह.. जोर से चुदाई करो आह..
दीपक ने 15 मिनट तक नेहा की जमकर चुदाई की, फिर उसे घोड़ी बना प्रिया और लंड पेल प्रिया.नेहा- आह.. मामू आराम से चुत चुदाई करो उफ आह.. मज़ा आ रहा है चोदो पूरा चुत के अन्दर तक पेलो.. आह..
दीपक चुदाई के साथ-साथ नेहा की गांड के छेद पर भी अपने मुँह से गीली करके उंगली घुमा रहा था. जब उंगली अन्दर घुसने लगी तो वो धीरे-धीरे उंगली को अन्दर-बाहर करने लगा.नेहा- आह.. आ उई मामू नहीं आह.. दर्द हो रहा है आह.. चुत में तेज करो आह.. मामू मेरा आह.. पानी आ रहा है फास्ट करो आह..
दीपक ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और नेहा की चुत बहने लगी फिर दीपक ने उसको सीधा लेटा कर काफ़ी देर चोदा, तब जाकर उसका पानी निकाला. लंड का पानी निकाल कर दीपक भी नेहा के बराबर में लेट गया.
दीपक- मेरी जान तुम्हें कितना भी चोद लूँ मगर तुम थकती नहीं हो, ऐसा क्या है तुम्हारे अन्दर.. समझ नहीं आता.नेहा- हा हा हा ऐसा क्या होगा, कुछ भी नहीं.. बस आप बहुत अच्छे से चोदते हो.दीपक- अबकी बार तेरी गांड मारूँगा तब बोलना मैं अच्छा हूँ या बुरा.नेहा- मामू एक बात कहूँ.. प्लीज़ आज रहने दो.. आप मेरी चीख तो दबा दोगे मगर वहाँ बहुत दर्द होगा और मेरी चाल भी बदल जाएगी, इससे कहीं मेरी मॉम को पता ना लगा जाए.
दीपक ने नेहा की बात पे गौर किया तो उसे लगा वो ठीक कह रही है. कहीं सुबह कुछ गड़बड़ हो गई तो लेने के देने पड़ जाएँगे.दीपक- सही कहा तुमने.. मैंने ये बात सोची ही नहीं, तुझे कैसे ये बात सूझी?नेहा- आप भूल गए उस दिन मेरी चुत फाड़ी थी, कितना दर्द हुआ था. वही हाल गांड का भी होगा तो बस मैंने आपको बता प्रिया और वैसे भी दर्द मुझे हुआ था आपको नहीं.. फिर ये बात आपको क्यों याद रहेगी.दीपक- अरे अरे मेरी जान को इतना दर्द हुआ था.. चल आज तेरी चुत को ही ठंडा करता हूँ.. गांड का प्रोग्राम अपने उसी घर में फिर कभी बना लेंगे.
नेहा- हाँ ठीक है यही सही रहेगा.. अबकी बार तो मैं आपके ऊपर बैठ कर चुदूँगी.दीपक- जैसी तेरी मर्ज़ी चुद लेना, चल थोड़ा गर्म कर दे लंड को, फिर मैं तेरी दुबारा चुदाई करता हूँ.
नेहा ने फिर लंड चूसना शुरू कर प्रिया और जल्दी ही उसे खड़ा कर प्रिया. फिर दोनों 69 के पोज़ में आ गए और मस्ती करने लगे.दीपक ने थोड़ी देर बाद नेहा को अपने लंड पे बैठा लिया और उसकी चुदाई शुरू हो गई.दो घंटे में दीपक ने नेहा को 3 बार चोदा उसको एकदम थका प्रिया और फिर दोनों चिपक कर सो गए.
दोस्तो, इनकी तो चुदाई हो गई चलो थोड़ा सा ध्यान टीना पर भी डाल देते हैं.रात को टीना और मॉंटी कमरे में लेटे हुए थे.
दीदी गर्लफ्रेण्ड बन कर चुदी -2
मॉंटी- दीदी आज साधना दीदी ने पहले मेरा इलाज किया, फिर मैंने उनका किया उसमें बहुत मज़ा आया मुझे.. और फिर मेरी लूली खड़ी हुई तो दीदी ने फिर इसको चूस कर रस निकाला.टीना- अच्छा इसका मतलब आज तो तूने बड़े मज़े लिए!मॉंटी- दीदी एक बात बताओ.. आपने तो मेरा ऐसा इलाज कभी नहीं किया और आपको खुजली नहीं होती क्या.. मैं आपका भी इलाज कर दूँगा.टीना- अच्छा बेटे, साधना से मन नहीं भरा जो अब तू मुझे नंगी करके मज़ा लेना चाहता है?मॉंटी- तो इसमें क्या है दीदी आप तो मेरी सग़ी दीदी हो.. आपका हक़ तो ज़्यादा है ना.टीना- अच्छा अच्छा जब खुजली होगी तो तुझे बता दूँगी.. अभी सो जा, सुबह स्कूल भी जाना है समझे!
चलो दोस्तो, रात तो ख़त्म हुई सबके चुदाई के प्रोग्राम आपने देख लिए.. अब सीधे सुबह ही देखते हैं कि आज का सूरज किस-किस की लाइफ में क्या-क्या रोशनी बिखेरेगा.
रोज की तरह गुलशन जी चाय पी रहे थे, आज साधना भी जल्दी उठ गई थी, वो अपने पापा के पास आई और उन्हें ‘गुड मॉर्निंग’ कहा.गुलशन- वाह भाई.. आज मेरे बुलाने के पहले ही तुम रेडी हो गई.. मगर साधना तूने नए वाले ड्रेस क्यों नहीं पहने?साधना- पहनना तो मुझे ही है, पापा मगर आज नहीं उसका सही वक़्त आएगा तब मैं पहनूंगी.गुलशन- अब आज पहन या कल, तेरी मर्ज़ी है. वैसे आज तू जल्दी कैसे उठ गई?
साधना- कुछ खास नहीं पापा ऐसे ही उठ गई. और आप बताओ आपका मूड कैसा है?गुलशन- अरे भाई मेरे मूड को क्या होगा.. अच्छा ही है. कुछ चाहिए क्या तुम्हें.. सीधे ही बोल दो हा हा हा हा.साधना- नहीं पापा, मुझे कुछ नहीं चाहिए बस मेरे लिए आपका प्यार ही बहुत है. अगर आप बुरा ना मानो तो आपको हग कर लूँ, मैं आज आप बहुत अच्छे वाले पापा लग रहे हो. कल आपने मुझे कितना अच्छा सरप्राइज प्रिया था ना..!गुलशन- हा हा हा… अरे कल तो तूने इतना थैंक्यू बोल प्रिया था. चल तेरा मन है तो आ जा लग जा मेरे गले से!
साधना के मन में क्या था ये तो भगवान ही जाने या फिर साधना जाने, चलो आगे देखो अब ये क्या गुल खिलाती है.
साधना अपने पापा से जोर से लिपट गई और उसका पूरा ध्यान सिर्फ़ पापा की पैन्ट में फूले रहे उनके लंड पर ही था. उसने जो सोचा, वही हुआ भी, उसके चिपकते ही गुलशन जी के लंड में तनाव आने लगा. लंड का तनाव महसूस करते ही साधना और कसके अपने पापा से अपने दूध रगड़ते हुए चिपक गई. साधना इतनी जोर से चिपकी थी कि उसके चूचे गुलशन के सीने में चुभने लगे थे. साधना पर उत्तेजना सवार थी, जिससे उसके निप्पल एकदम हार्ड हो रहे थे.
गुलशन जी को लगा कि उनका लंड पैन्ट फाड़ कर बाहर आ जाएगा और साधना को पता चल जाएगा कि उसका अपना बाप उसके जिस्म की गर्मी से पागल हो रहा है.गुलशन- बस हो गया.. चल अब मुझे जाने दे, देर हो रही है.
गुलशन जी ने साधना को अलग कर प्रिया मगर अपनी पैन्ट का उभार साधना से ना छुपा सके.. साधना की नज़र वहीं लंड पर टिकी थी.
गुलशन- अच्छा अब मैं चलता हूँ.साधना- ओके पापा आप जाओ और कोई परेशानी हो, तो मुझे बता देना. मैं आपकी ‘मदद’ कर दूँगी. ठीक है..!साधना ने यह बात कुछ अलग अंदाज से कही थी, जो गुलशन जी को भी अजीब लगी. वो कुछ नहीं बोले बस मन में कुछ दुविधा लिए वहाँ से चले गए.
हेमा किचन में काम कर रही थी तो साधना उनके पास चली गई और काम में उनका हाथ बंटाने लगी.हेमा- अरे रहने दे मैं कर लूँगी.. तुझे क्या आज कॉलेज नहीं जाना?साधना- अभी टाइम है.. मैं चली जाऊंगी ना.. काम के बहाने आपसे बात भी कर लूँगी.
दोनों माँ-बेटी बातें करने लगीं. अचानक साधना को ना जाने क्या सूझा कि उसने अपनी माँ से ऐसा सवाल कर लिया जिसकी उम्मीद उसकी माँ को बिल्कुल भी नहीं थी कि साधना कभी ये सवाल भी पूछेगी.साधना- माँ एक बात है जो अक्सर मेरे दिमाग़ में आती है, कई बार मैंने सोचा आपको पूछूँ… फिर भूल जाती हूँ.हेमा- अरे ऐसी क्या बात है जो मेरी बेटी को परेशान कर रही है, चल आज पूछ ही ले तू!साधना- माँ आप मेरी बात का बुरा तो नहीं मनोगी ना… पहले प्रॉमिस करो!हेमा- अरे तू ऐसा क्या पूछने वाली है जो मुझे बुरा लगे, चल पूछ मैं तुझे कुछ भी नहीं कहूँगी.साधना- माँ, मैं आपकी एक ही बेटी हूँ.. कोई और भाई-बहन क्यों नहीं है?हेमा- ये कैसा सवाल है? भगवान की मर्ज़ी नहीं हुई बस!साधना- प्लीज़ माँ आप नाराज़ मत हो.. क्या बाद में हुए नहीं.. या आपने और पापा ने और बच्चे किए नहीं? बताओ ना माँ प्लीज़..!
मित्रो, आपसे एक इल्तिजा है कि आप मेरी सेक्स स्टोरी पर मर्यादित भाषा में ही कमेंट्स करें.
support@mohakkisse.comकहानी जारी है.