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बाप बेटी की चुदाई पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 1,354 बार

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-91

पिंकी सेन

29 Apr 2026 को प्रकाशित

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-91
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अब तक इस बाप बेटी की सेक्स कहानी में आपने पढ़ा साधना और उसके पापा आज रात अकेले थे क्योंकि उनकी मम्मी अपनी माँ के घर चली गई थीं. साथ ही पापा जी एक पुराने दोस्त ने बियर की बोतलें भी थमा दी.आज रात क्या हंगामा होने वाला है, इसका आगे मजा लेते हैं.

तो दोस्तो सेक्स स्टोरी को शुरू करने से पहले आपको बता दूँ कि वैसे तो कॉलेज के बाद एक और भी घटना हुई थी. मगर वो अभी आपको बताऊंगी तो आप साधना और उसके पापा की कहानी का पूछोगे तो शुरूआत वहीं से करते हैं, जहाँ कल कहानी रुक गई थी.

घर आने के बाद साधना ने बियर के बारे में अपने पापा से पूछा- ये क्या है पापा आप पहले शराब पीते थे क्या?पापा- अरे ये शराब नहीं है बेटा.. ये तो बियर है, इससे नशा नहीं होता है.साधना- नहीं पापा, मैंने सुना है ये अच्छी चीज नहीं होती है.पापा- मेरा यकीन कर साधना ये बुरी चीज नहीं है, पहले बस ऐसे ही शौकिया पीता था, अब तो काफ़ी साल हो गए है.साधना- नहीं पीनी थी तो आपने ये ली ही क्यों?पापा- उसने ज़िद की, तो ले ली. अब काफ़ी सालों बाद मौका मिला है तो थोड़ी ले लूँगा ना.साधना- अच्छा ये बात है तो मैं भी इसे पीऊंगी. आपने कहा ना ये शराब नहीं है.

गुलशन जी ने साधना को समझाया कि वो नहीं पी सकती, उसको नहीं जमेगी मगर वो नहीं मानी तो गुलशन जी ने रात का कहकर उसको टाल प्रिया क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि साधना बियर पिए.

हेमा के जाने से दोनों बाप-बेटी बहुत रिलेक्स फील कर रहे थे. साधना ने नाइटी पहनी हुई थी और खाना तैयार कर रही थी और पापा जी तो वही अपनी लुंगी में मस्त थे. अब हेमा नहीं है तो आज वो खुलकर मज़ा लेने के मूड में थे.

साधना रोटी बना रही थी और उसकी गांड पीछे को निकली हुई थी, जिसे देख कर पापा जी का मन मचल गया, वो उसके पीछे गए और लंड को लुंगी से बाहर निकाल कर उन्होंने धीरे से साधना की नाइटी ऊपर की.. तो देख कर खुश हो गए कि उसने भी अन्दर कुछ नहीं पहना था. फिर उन्होंने लंड को दोनों जाँघों के बीच फंसाया और साधना से चिपक कर खड़े हो गए.

साधना को जब गर्म अहसास हुआ वो समझ गई कि पापा जी ने लंड को कैसे फँसाया हुआ है मगर वो अनजान बनी रही.साधना- क्या पापा क्यों परेशान कर रहे हो.. मुझे रोटी बनाने दो ना.पापा- अरे तो किसने रोका है.. तू अपना काम कर, मैं तो बस तुझे देख रहा हूँ.साधना- लेकिन आप मुझसे चिपके हुए हो.. मुझे दिक्कत हो रही है ना.पापा- अरे इसमें दिक्कत कैसी.. तू अपना काम कर, मैं अपना कर रहा हूँ.साधना- आप बहुत शरारती हो पापा.. अभी जाओ यहाँ से.. आपका काम मैं खाने के बाद कर दूँगी ना.. ऐसे तो मुझसे रोटी ही नहीं बनेगी.पापा- तूने कल भी नहीं किया था.. बस नींद का बहाना मार प्रिया.साधना- अच्छा मेरे अच्छे पापा आज पक्का कर दूँगी.. अब आप यहाँ से जाओ.

पापा जी का लंड चुत से रगड़ खा रहा था, जिससे साधना को भी मज़ा आ रहा था. उसकी चुत एकदम गीली हो गई थी.

पापा- अरे रहने दे ना और वैसे भी तुझे भी तो मेरा ऐसे चिपकना अच्छा लग रहा है.. फिर हटा क्यों रही है.साधना- नहीं मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा.. आप बस जाओ यहाँ से.पापा- अच्छा, बिना मज़ा आए ही तेरा रस टपक रहा है क्या?

साधना जल्दी से पलटी और अपने पापा को धक्का देकर अलग किया. तभी उसकी नज़र उनके लंड पर चली गई जो एकदम तना हुआ खड़ा था. आज पहली बार साधना ने लाइट की रोशनी में पापा का लंड देखा था. वो बस पापा का मूसल लंड देखती ही रह गई. जब गुलशन जी को यह अहसास हुआ तो उन्होंने जल्दी से लुंगी ठीक की.साधना- पापा आप बहुत बदमाश हो.. कुछ भी बोल देते हो, अब जाओ यहाँ से.

गुलशन जी ने रुकना चाहा मगर साधना ने ज़िद की तो वो बाहर चले गए और फ्रीज़ से बियर की बोतल निकाल कर बैठ गए.

उधर साधना तो बस लंड के बारे में ही सोच रही थी. आज उसने उस भीमकाय लंड को ऐसे तना हुआ देखा था. साधना सोचने लगी कि वाउपापा का लंडतो बहुत प्यारा है.. आज तक बस अँधेरे में उसको चूसा है, मगर आज तो ऐसे ही देख कर मज़ा लूँगी मैं.. और आज ही पापा को फ्लॉरा के लिए मना भी लूँगी.

गुलशन जी लंड सहलाते हुए बुदबुदा रहे थे- बस साधना, ये लुका-छिपी बहुत हो गई. आज तो तुझे चुदने के लिए बोल ही देता हूँ. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता.

अन्दर साधना कुछ और सोच रही थी और बाहर गुलशन जी कुछ और. अब थोड़ी देर में पता लग ही जाएगा कि किसकी सोच पूरी होती है. तब तक हम लोग थोड़ा सा.. ना ना ज़्यादा नहीं, बस थोड़ा सा घूम कर आते हैं.

रात को गोपाल चला गया तो मोना अब नीतू को गोपाल से चुदने के लिए मना रही थी. मगर वो डर रही थी. तब मोना ने उसको गोपाल की जान ख़तरे में हैं, वो बात बताई और साथ में ढेर सारे पैसे देने का वादा किया तो वो मान गई.

अब बस मोना को साधु बाबा के आने का इन्तजार था.

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बस हो गया ब्रेक ख़त्म तो देखो अब बाप-बेटी के बीच में क्या होता है.

साधना का खाना रेडी हो गया था. जब वो बाहर आई, तो उसके पापा जी मज़े से बियर पी रहे थे.साधना- ओह.. पापा.. ये क्या है आप अभी क्यों पीने लगे.. पहले खाना तो खा लेते. उसके बाद आराम से पी लेते और मैंने भी तो कहा था मैं भी पीऊंगी.पापा- साधना, ये चाय नहीं जो खाने के बाद पी जाए. ये बियर है बेटा इसको खाने के पहले ही पीते हैं.साधना- तो ठीक है लाओ मुझे भी दो.. मैं भी तो देखूं ये क्या है.पापा- ये तेरे काम की नहीं है बेटा.. तुझे इससे नशा हो जाएगा.साधना- आपने तो कहा था ये शराब नहीं है.. फिर नशा कैसे होगा?

गुलशन जी ने साधना को बहुत समझाया कि पहली बार पीने से नशा होता है मगर वो नहीं मानी और गिलास में बियर डालकर पीने लगी. पहली बार तो उसको ये बहुत अजीब लगी मगर धीरे-धीरे इसका टेस्ट साधना को भा गया. उसने आधी बोतल गटक ली.पापा- बस कर.. नहीं तो यहीं लुढ़क जाएगी. चल अब खाना लगा बहुत भूख लगी है. उसके बाद आज तुझे मेरे साथ ही सोना है.. तेरी माँ तो है नहीं ना..!साधना- हिच हिच.. नहीं मैं आपके साथ नहीं सोऊंगी.. आप मुझे.. हिच हिच.. परेशान करोगे.साधना की आँखें नशे से लाल हो गई थीं.. उसकी ज़ुबान भी लड़खड़ा रही थी.

पापा- मैंने कहा था ना मत पी, अब चढ़ गई ना.. देख सोना तो तुझे मेरे साथ ही पड़ेगा.. आज मुझे मज़ा देने का तेरा अपना पक्का वादा याद है ना?साधना- हाँ याद है.. हिच एमेम मगर वो करने के बाद मैं अपने कमरे में सो जाऊँगी.. हिच.. नहीं तो आप पूरी रात सताओगे.पापा- तुझे बहुत चढ़ गई है. तू यहाँ बैठ मैं खाना लगाता हूँ और तेरा इलाज भी करता हूँ. नहीं तो तू ऐसे ही हिचकियां लेती रहेगी और मेरा भी मूड खराब करेगी.

गुलशन जी ने खाना लगाया और साधना को नींबू काट कर चूसने को प्रिया, जिससे उसका नशा थोड़ा कम हो और एक गिलास में नींबू पानी भी बना के उसको पिला प्रिया, जिससे उसकी हिचकी बंद हो गई.

दोनों ने जमकर खाना खाया. फिर गुलशन जी साधना को अपने कमरे में ले गए. बियर का नशा अभी भी साधना पर था मगर बहुत कम हो गया था. अब वो अपने पापा से ठीक से बात कर रही थी- पापा लाइट बंद कर दो ना ऐसे हम दोनों को नींद कैसे आएगी?पापा- अरे अभी से सोने की बात कर रही है.. मुझे आराम तो दे दे पहले.. या पहले मैं तुझे मज़ा दूँ?साधना- ये सब बाद में.. पहले लाइट बंद कर दो आप.. ओके..!पापा- अरे अंधेरे में तो रोज ही करती हो.. आज ऐसे ही करो ना साधना.साधना- नहीं पापा मुझे शर्म आती है.

गुलशन जी ने साफ़ साफ़ कह प्रिया- ये क्या बात हुई साधना, तुम मेरा लौड़ा कई बार चूस चुकी हो और मुझसे अपनी चुत चटवा चुकी हो.. अब कैसी शर्म?साधना- छी: पापा ये आज आप कैसी बातें कर रहे हो.. मैं नहीं सोती यहाँ.. मैं जा रही हूँ.

साधना उठ कर जाने लगी तो गुलशन जी ने उसे पकड़ लिया और बिस्तर पे गिरा कर खुद उसके ऊपर आ गए और अब दोनों की गर्म साँसें एक-दूसरे के होंठों पे पड़ रही थी. बस किसी के पहल करने की देर थी.

साधना- नहीं पापा.. ये ग़लत है आप ऐसा नहीं कर सकते.. मैं आपकी बेटी हूँ.पापा- साधना कुछ ग़लत नहीं है. इन दिनों हम दोनों ने जो किया, वो यही तो था. बस हम दोनों अनजान बने हुए थे और आज खुलकर मज़ा करेंगे.साधना- आप एक मिनट हटो तो.. मुझे आपको कुछ समझाना है.. प्लीज़ एक बार हटो तो सही!

गुलशन जी हट गए तो साधना उनके पास बैठ गई और शुरू से सारी बात उन्हें बताईं कि कैसे उसने उस रात उनकी और माँ की बात सुनी थी. फिर अपनी सहेली के साथ मिलकर उसने ये प्लान बनाया और आज ये जो हो रहा है ये सब बस वो गुलशन जी को तड़पाने के लिए उसने किया था ताकि वो किसी और के साथ अपनी भूख शांत कर लें और उनका गुस्सा ठंडा हो जाए.

पापा- मेरी बेटी, तुम कितनी अच्छी हो. तुमने मेरे बारे में इतना सोचा आई लव यू डार्लिंग मगर तुम शायद ये भूल गई कि अगर तुम मुझे ऐसे तड़पाओगी तो तुम भी तो साथ में तड़पोगी ना.. अब तुम्हें भी तो लंड की जरूरत पड़ेगी तो कोई और क्यों? तुम ही मेरे साथ कर लो ना.. ताकि घर की बात घर में ही रहे.साधना- नहीं पापा मुझे डर लगता है.. इससे बहुत दर्द होता है.. नहीं नहीं.. मैं नहीं करूँगी.पापा- अरे तूने कभी किया ही नहीं तो तुझे क्या पता दर्द होगा.साधना- पापा मैं कोई बच्ची नहीं हूँ. इतना तो पता ही है, इसके लिए करना जरूरी नहीं है.पापा- अच्छा तू किसी और पे भरोसा मत कर.. मैं तेरा बाप हूँ मुझपे तो तुझे भरोसा है ना, मैं बहुत आराम से करूंगा… एकदम धीरे-धीरे..!साधना- पापा, मैं आपका लंड चूस कर पानी निकाल देती हूँ ना.. प्लीज़ मुझे बहुत डर लग रहा है. मेरा सेक्स करने का कोई इरादा नहीं था, आप समझो ना प्लीज़.

लो दोस्तो साधना ने तो मना कर प्रिया अब ये चुदेगी या नहीं इसका जबाव अगले पार्ट में मिलेगा ओके.

प्यारे साथियो, आप बाप बेटी सेक्स का आनन्द लें और कमेंट्स करें.

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