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बाप बेटी की चुदाई पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,186 बार

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-92

पिंकी सेन

02 May 2026 को प्रकाशित

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-92
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इस बाप बेटी सेक्स कहानी में आप पढ़ चुके हैं कि गुलशन जी अपनी बेटी को चोदने की फिराक में थे और वे उससे साफ़ साफ़ चुदाई के लिए कह भी रहे थे, लेकिन साधना मना कर रही थी.अब आगे:

साधना के चेहरे पर डर साफ नज़र आ रहा था.पापा- देख साधना, तू मेरी बात सुन आज नहीं तो कल तुझे चुदाई करनी ही होगी. मुझसे नहीं तो किसी और से.. या शादी के बाद अपने पति से तो चुदेगी ही, तब क्या होगा.. सोच?साधना- पापा, पता नहीं मुझे इससे इतना डर क्यों लगता है.पापा- अच्छा तुझे कैसे पता दर्द का.. कुछ तो हुआ होगा? तू खुलकर मुझे बता ना!

साधना ने बताया वो एक बार नहा रही थी तब नीचे साबुन लगाते टाइम ग़लती से उसकी उंगली अन्दर चली गई तो बहुत दर्द हुआ था.. तब से उसको डर लगता है. साधना ने एक झूठी कहानी सुनाई मगर उसमें जो दर्द हुआ वो सच था आपको भी याद होगा कहानी पढ़ते टाइम साधना ने चुत में उंगली की थी.

गुलशन जी समझ गए कि साधना को सेक्स फोबिया है यानि इंसान किसी भी चीज का वहाँ अपने मन में तय कर लेता है, फिर वही उसका डर बन जाता है. हालांकि साधना ने कभी चुदाई नहीं की थी मगर एक बार चुत रगड़ते टाइम उसकी उंगली जरा सी अन्दर घुस गई थी बस उसी पल से उसको अहसास हुआ कि ये छोटी सी उंगली से इतना दर्द हुआ तो लंड से कितना होगा और यही डर धीरे-धीरे उसको चुदाई के खिलाफ कर चुका था.

पापा- अच्छा ये बात है.. चल जाने दे मैं तेरी चुदाई नहीं करूंगा मगर तुझे मैं खुलकर प्यार तो कर सकता हूँ ना.. उसमें तो तू मेरा साथ देगी ना.साधना- हाँ पापा, सेक्स के अलावा आप कुछ भी कहो… मैं करने को रेडी हूँ.पापा- तो ठीक है ये नाइटी निकाल दे, मैं रोशनी में तेरे जिस्म को देखना चाहता हूँ.. इसे चूसना चाहता हूँ तेरे निपल्स को निचोड़ कर इनका रस पीना चाहता हूँ.साधना- चुप करो पापा, मुझे आप से शर्म आ रही है.

गुलशन जी ने अपनी लुंगी उतार दी और लंड को हाथ से सहलाते हुए बोले- अरे लंड चूसने में शर्म नहीं आई तो देखने में कैसी शर्म? ये देख कैसे मेरा लंड तुझे बुला रहा है.. चल अब निकाल दे.साधना- पापा आप ही निकाल लो ना प्लीज़.

साधना ने इशारा दे प्रिया तो गुलशन जी आगे बढ़े औरबेटी को नंगी कर प्रियाअब वो ऊपर से नीचे तक साधना को निहार रहे थे और मन ही मन अपनी कामयाबी पे खुश हो रहे थे, उन्होंने साधना को बिस्तर पर लेटाया; उसके नर्म होंठों को अपने होंठों से जकड़ लिया और फिर एक लंबी किस के बाद वो साधना की जीभ को चूसने लगे.अब साधना भी खुलकर उनका साथ दे रही थी.

अब गुलशन जी उसके मम्मों पर टूट पड़े और निप्पलों को ऐसे चूसने लगे जैसे कोई बच्चा दूध पी रहा हो.साधना- आह.. पापा नहीं.. आह.. मज़ा आ रहा है.. आप बहुत अच्छे हो.. आह.. चूसो उफ्फ ऐसे ही दबाओ इन्हें आह..गुलशन जी मंजे हुए खिलाड़ी थे और साधना नादान कली थी, उसको तो मज़ा आना ही था. अब गुलशन उसके गले पर सीने के ऊपर पेट पर हर जगह चूम रहे थे, चाट रहे थे और साधना तड़प रही थी.

धीरे-धीरे गुलशन जी अब नीचे चुत पर आ गए और साधना की जांघें चूसने लगे. अब साधना की उत्तेजना बहुत बढ़ गई थी चुत के बाँध को रोके रखना अब उसके बस का नहीं था.साधना- ससस्स पापा आह नहीं.. आह.. उफ़फ्फ़.. मेरा पानी निकालने वाला है.गुलशन जी समझ गए कि अब रस की धारा आने वाली है, वो जल्दी सेबेटी की चुतसे चिपक गए और चुत को होंठों में दबा कर चूसने लगे. उसी पल साधना की चुत का लावा बह गया वो कमर को हिला हिला कर झड़ने लगी और गुलशन जी सारा रस चाट गए.

साधना- आह.. पापा उफ़फ्फ़.. बस भी करो जान निकाल कर मानोगे क्या.. आह.. आज तो आपने मेरी चाटे बिना ही पानी निकाल प्रिया.पापा- क्या चाटे बिना.. चुत बोल साधना.. मुझे तेरे मुँह से सुनकर अच्छा लगेगा.साधना- नहीं मुझे शर्म आती है.पापा- अरे नंगी चुत को चटवा सकती है तो पापा की ख़ुशी के लिए बोल नहीं सकती.साधना- अच्छा ठीक है चुत को आपने चाटा.. मुझे अच्छा लगा. बस अब आप खुश..!पापा- हाँ मेरी जान खुश. अब तू क्या करेगी.. वो भी बोल कर बता.साधना- मैं आपके इस लंबे लंड को चूस कर ठंडा करूंगी और आपका रस पीऊंगी.पापा- आह.. मज़ा आ गया तेरे मुँह से ये चुत और लंड सुनना कितना अच्छा लगता है.साधना- चलो अब आप लेट जाओ और मैं भी आपको उसी तरह मज़ा दूँगी जैसे अपने मुझे अभी प्रिया है.पापा- ठीक है साधना जैसा तेरा मन करे, तू कर ले.. निकाल ले अपने मन की.

गुलशन जी लेट गए तो साधना उन्हें किस करने लगी. उनके सीने पर भी किस किया.. फिर उसकी लंड चूसने की ललक उसको नीचे ले गई और वो मज़े से लंड को चूसने लगी. साथ ही साथ वो गोटियां भी चूस रही थी.

पापा- आह.. साधना आज तूने मेरी बरसों की तमन्ना पूरी कर दी.. आह.. उफ्फ.. चूस मेरी जान आ चूस.पापा की बातें साधना को और जोश दिला रही थी. अब वो और तेज़ी से लंड को चूस रही थी.पापा- आह.. साधना चूस.. तेरे होंठों में इतनी गर्मी है..तो तेरी चुत कैसी होगी उफ्फ चूस आह…

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काफ़ी देर तक ये चुसाई चलती रही उसके बाद गुलशन जी झड़ गए. साधना ने उनका पूरा वीर्य गटक लिया और लास्ट बूँद भी जीभ से छत कर साफ कर दी.

पापा- साधना तुम बहुत अच्छी तरह लंड चूसती हो.. ये कहाँ से सीखा तुमने?साधना- मैं कहाँ से सीखूँगी.. आपने ही पहले चुसाया था.. तब से सीखी हूँ बस.पापा- अरे मैं कोई इल्ज़ाम नहीं लगा रहा बेटी.. बस मैं तो ऐसे ही पूछ रहा था.साधना- पापा मैंने आपको सब बताया ना कि मैंने ये सब क्यों किया था. अब आप प्लीज़ मान जाओ ना.पापा- यार कैसे मान जाऊं और कौन है तेरी फ्रेंड जो मुझसे ऐसे ही चुदवा लेगी?साधना- वो सब मेरी टेंशन है.. बस आप एक बार हाँ कहो.पापा- नहीं साधना किसी बाहर वाली से अच्छा है कि मैं तुझे ही चोदूँ.. ताकि घर की बात बाहर ना जाए.साधना- नहीं पापा मैंने बताया तो है आपको.. मुझे डर लगता है.पापा- अरे शादी के बाद पति रहम नहीं करेगा.. वो तो ज़बरदस्ती तेरी चुत में लंड घुसा देगा और तब ज़्यादा दर्द होगा. इससे अच्छा तू मुझसे चुदवा ले. मैं तेरा बाप हूँ तुझे बहुत प्यार से चोदूँगा समझी.

साधना ने थोड़ी देर सोचा कि पापा सही कह रहे हैं और पापा से चुदवाने में एक फायदा और भी है. क्योंकि अब वो अच्छी तरह समझ गई थी कि दीपक और उसके दोस्त भी उसको चोदना चाहते हैं. अगर वो पापा से चुदवा कर एक्सपर्ट हो जाए, फिर मौका आने पर वो उन सब को भी संभाल सकती है.

पापा- क्या सोच रही हो साधना. ये दुनिया बहुत खराब है, इसमें जीना है तो इसके तौर-तरीके सीखने जरूरी है. नहीं तो बाद में तुम्हें मौका नहीं मिलेगा.साधना- ठीक है पापा, मैं आपकी बात मान लेती हूँ.. मगर आपका लंड बहुत बड़ा है और मुझे पता है एक बार तो ये मेरी जान निकाल ही देगा और कल कॉलेज में मेरा जाना बहुत जरूरी है तो आज आप बस ऐसे ही मज़ा ले लो, कल आप मेरी चुत मार लेना.

पापा- थैंक्स बेटा मुझे ये मौका देने के लिए.. अब इतना वेट किया है तो एक दिन और सही.. बस कल देखना मैं तुझे कैसे कली से खिलता हुआ गुलाब बना देता हूँ.साधना- ठीक है पापा आपकी बातों से चुत में फिर हलचल शुरू हो गई है. एक बार और इसको चूस कर ठंडा कर दो ना.पापा- क्यों नहीं मेरी जान तेरी चुत को तो पूरी रात चूस सकता हूँ.. मगर बदले में तुझे भी कुछ करना होगा.साधना- नहीं पापा आपका पानी बहुत देर से निकलता है और दूसरी बार तो पता नहीं कितनी देर लगेगी. फिर मुझे सुबह जल्दी उठने में तकलीफ़ हो जाएगी.

पापा- अरे मैं लंड चूसने को नहीं बोल रहा.. पहले मेरी बात सुन तो लेती.साधना- अच्छा तो फिर क्या बात है.पापा- आज रात तू ऐसे ही नंगी मेरे साथ चिपक कर सोएगी, यहीं इसी कमरे में.साधना- नहीं पापा पूरी रात ऐसे नंगी.. नहीं नहीं.. रात को आपका दिमाग़ घूम गया और अपने मेरी चुत में लंड घुसा प्रिया तो?पापा- अरे मैं तेरा पापा हूँ कोई जल्लाद नहीं और तुम्हें मुझपे इतना भी भरोसा नहीं है क्या? ऐसी हरकत मैं क्यों करूँगा?

साधना- सॉरी पापा ग़लती हो गई अच्छा ठीक है हम ऐसे ही सोएंगे.. चलो अब जल्दी से मेरी चुत को ठंडा करो.पापा- पहले मैं अपना लंड चुत पे रगड़ता हूँ.. फिर चाट लूँगा.. ठीक है.साधना- नहीं आप फिर गर्म हो जाओगे तो मुझे भी आपका पानी निकालना पड़ेगा. आप ऐसे ही कर दो फिर चुपचाप सो जाएँगे.

पापा मान गए और अबकी बार उन्होंने जीभ से चुत को कुरेद कर साधना को मज़ा प्रिया. फिर अच्छे से चुत की चुसाई की और उसको ठंडा किया.

साधना- थैंक्स पापा.. अब हम सो जाएं मगर आपका लंड तो बहुत कड़क हो गया.पापा- कोई बात नहीं बेटा, इसको ऐसे सूखा रहने की आदत है.. मगर बस आज की बात है. कल से तो इसकी हर रात रंगीन हो जाएगी.साधना- हाँ पापा, मैं कोशिश करूंगी कि आपको कभी सूखा ना रहना पड़े लेकिन माँ के आने के बाद हम कैसे करेंगे?पापा- जैसे अभी कर रहे हैं.. वैसे ही करेंगे.साधना- ओके पापा जी.पापा- बस मेरी जान अब कल का इन्तजार है. उसके बाद सब कमी दूर हो जाएगी.

गुलशन जी ने साधना को अपने से चिपका कर सुला लिया. साधना तो दो बार झड़ने के कारण थक गई थी, तो उसको जल्दी नींद आ गई. मगर गुलशन जी सोने की कोशिश करते रहे. वैसे तो ऐसी कली पास में हो और वो भी नंगी, तो किस पागल को नींद आएगी मगर गुलशन जी ने अपने ज़ज्बात पर काबू रखा और देर से ही सही, उनको भी नींद आ ही गई.

साथियो, आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है? आनन्द लें और कमेंट्स करेंsupport@mohakkisse.comबाप बेटी सेक्स कहानी जारी है.

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