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बाप बेटी की चुदाई पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 1,073 बार

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-70

पिंकी सेन

04 Mar 2026 को प्रकाशित

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-70
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अब तक की इस बाप बेटी सेक्स कहानी में आपने पढ़ा था कि साधना ने अपनी पापा की गोद में बैठ कर खुद अपनी चुत को पानी-पानी कर लिया था और गुलशन जी के लंड को भी उत्तेजित कर प्रिया था. इसके बाद वो अपने कमरे में आकर उसी विषय में सोच रही थी.अब आगे..

साधना ऐसे ही ख्यालों में एक घंटे तक बिस्तर पर पड़ी रही, फिर अचानक उसने बाहर कुछ आहट सुनी तो वो जल्दी से उठी और बाहर गई. उसने देखा कि उसके पापा किचन से पानी ले रहे थे.

साधना- अरे पापा आप सोये नहीं अभी तक..?गुलशन- बस अब सोने जा रहा हूँ.. मगर तू क्यों जागी हुई है? तुझे नींद नहीं आ रही क्या?साधना- कब से सोने की कोशिश कर रही हूँ.. मगर नींद आती ही नहीं.गुलशन- अच्छा ये बात है तो चल आज मैं तुझे सुला देता हूँ जैसे पहले सुलाता था.साधना- ओह वाउ पापा.. रियली मज़ा आएगा.. आज कितने टाइम बाद आपकी गोद में सर रख कर सोऊंगी और आप मेरे बालों में हाथ घुमा कर मुझे सुलाओगे.

गुलशन जी साधना के कमरे में आकर बेड पर पालथी मारकर बैठ गए और साधना उनकी जाँघ पर सर रख कर लेट गयी.गुलशन- अब तू अपनी आँख बंद करके सोने की कोशिश कर.. मैं तेरे सर को सहला कर तुझे सुलाता हूँ.. ठीक है ना!साधना ने ‘ठीक है..’ कहा और आँखें बंद करके सोने की कोशिश करने लगी. थोड़ी देर ये सब चलता रहा गुलशन जी बड़े प्यार से उसके सर पर हाथ घुमा रहे थे.

साधना को अचानक अहसास हुआ कि वो पापा के लंड के कितने करीब है. वैसे तो उस वक़्त लंड सोया हुआ था, मगर साधना के दिल में आया कि ये अच्छा मौका है, वो लंड के एकदम करीब है. अगर थोड़ी कोशिश करेगी तो उसके मुँह से लंड टच हो जाएगा.. मगर उसके लिए पहले लंड को खड़ा करना जरूरी है. फिर उसके दिमाग़ में एक आइडिया आया.

साधना- पापा मेरे मुँह पर कोई कपड़ा डाल दो ना.. ऐसे तो मुझे नींद ही नहीं आएगी.गुलशन- अच्छी बात है.. तो ऐसा कर कोई दुपट्टा डाल ले या फिर ये चादर डाल कर सो जा, मैं चादर के ऊपर से तेरा सर सहला दूँगा और तुझे नींद आ जाएगी.साधना- हाँ ये ठीक रहेगा और पापा सिर्फ़ सर मत सहलाना.. गर्दन और कंधे भी दबाना.. मुझे अच्छा लगता है.गुलशन- अच्छा कर दूँगा. चल अब ये चादर डाल ले और सोने की कोशिश कर.

साधना ने मुँह पर चादर डाल ली और गुलशन जी उसके सर को सहलाने लगे. अब साधना ने अपने हाथ चादर के अन्दर कर लिए थे और बहुत हल्के से वो लुंगी के ऊपर से लंड को छूने लगी. यानि कुछ इस तरह से छूने लगी कि गुलशन जी को जल्दी समझ में नहीं आता कि वो टच कर रही है या उनका लंड ही वहाँ है.

साधना की कोशिश कामयाब होने लगी. लंड महाराज इतनी सी छुवन भी भाँप गए और बस ख़ुशी के मारे फूलने लगे. अब गुलशन जी का लंड खड़ा होगा तो उन्हें तो पता होगा ही ना, बस वो बेचैन हो गए और उन्होंने चादर में हाथ डाल कर लंड को एड्जस्ट किया ताकि साधना को पता ना लगे. मगर साधना तो अब फास्ट हो रही थी, तो फ़ौरन उसने गुलशन जी को टोक प्रिया.

साधना- पापा आप सर दबाओ ना.. चादर के अन्दर क्यों हाथ ला रहे हो.गुलशन- अरे वो थोड़ी खुजली हो रही थी तो बस खुजाने के लिए लाया था. तू सोने की कोशिश कर.. ऐसे ही बोलती रहेगी क्या?साधना- अच्छा अच्छा सो रही हूँ मगर अबकी बार आपको खुजली हो, तो मुझे बता देना.. मैं कर दूँगी. आप बस मेरा सर सहलाओ.

गुलशन जी ने ‘ठीक है..’ कहा और फिर सर को सहलाने लगे. अब साधना फिर से लंड पर उंगली घुमा रही थी और लंड था कि बस अकड़े जा रहा था.

गुलशन जी ने बहुत ध्यान लगाया कि लंड से कुछ टच हो रहा है मगर साधना इतने हल्के तरीके से छू रही थी, जिससे गुलशन जी को समझ नहीं आ रहा था कि साधना छू रही है या कपड़े की रगड़ से लंड खड़ा हुआ है.

अब गुलशन जी साधना के कंधे दबाने लगे और साधना के चिकने जिस्म पर उनका हाथ लगते ही लंड ने जोरदार अंगड़ाई ली. अब लंड अपने पूरे शवाब पर आ गया था. साधना को अब भी पता नहीं चल रहा था कि लंड किस पोज़िशन में है, वो बस हल्की सी उंगली टच कर रही थी. फिर उसने करवट लेने के बहाने जल्दी से पूरा हाथ लंड पर लगा प्रिया और उसको ये जानकार झटका लगा कि पापा का लंड काफ़ी बड़ा और एकदम कड़क है.ये इतना अचानक हुआ कि गुलशन भी समझ नहीं पाए कि साधना ने जानबूझ कर लंड छुआ या अंजाने में हो गया.

साधना के करवट लेने के बाद सारा मामला ही बदल गया. गुलशन जी की लुंगी थोड़ी सरक गई और लंड का टोपा बाहर निकल आया. ये बात दोनों को ही नहीं पता थी. मगर जब साधना थोड़ी आगे हुई उसके होंठ सीधे सुपारे से टच हुए. तो उसी पल गुलशन जी भी समझ गए कि लंड बाहर निकल गया है. मगर वो कुछ नहीं बोले और वैसे ही साधना की टी-शर्ट में हाथ डालकर उसकी गर्दन और पीठ को सहलाते रहे.

साधना ने सोचा ऐसा मौका दोबारा नहीं मिलेगा. उसने धीरे से अपनी जीभ निकाल कर सुपारे पर घुमाई और गुलशन जी फ़ौरन हरकत में आ गए.गुलशन- साधना सो गई क्या.. कुछ बोल तो?साधना ने सांस रोक ली और चुपचाप वैसे ही पड़ी रही.

गुलशन जी को लगा कि साधना शायद सो गई है. उन्होंने धीरे से चादर हटाई तो अन्दर का नजारा देख कर उनके होश उड़ गए.

साधना करवट लेकर सोई हुई थी और लंड पूरा बाहर था. साधना के होंठ लंड से एकदम सटे हुए थे.

साधना इस हमले के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी. वो घबरा गई और जल्दी से सीधी होकर लेट गई. अब उसकी साँसें तेज चल रही थीं और उसके चूचे साँसों के साथ ऊपर-नीचे होने लगे.

गुलशन जी ने जल्दी से लुंगी ठीक की और लंड को अन्दर कर लिया. मगर उनकी नज़र अब साधना के मदमस्त मम्मों पर जा टिकी.

गुलशन जी ने एक-दो बार साधना को आवाज़ दी. उसे हिलाया.. मगर वो जस की तस रही. अब सोई होती तो शायद जाग जाती.. मगर जागती हुई को कैसे जगाया जाए.

गुलशन जी को जब यकीन हो गया कि साधना सो गई है.. उन्होंने डरते हुए अपना एक हाथ साधना के एक चूचे पे रख प्रिया, मगर उन्होंने कोई हरकत नहीं की, बस चूचे पर हाथ रखे हुए साधना के चेहरे को देखते रहे.

साधना अपने मन में सोचने लगी कि ओह गॉड.. पापा ये क्या कर रहे हो. मेरे चूचे पे हाथ क्यों रख प्रिया.. उफ़ अब मैं क्या करूँ?

साधना सोच ही रही थी कि क्या करूँ तभी उसके कान में गुलशन जी की धीमी आवाज़ आई- ओह साधना.. तुम अब बड़ी हो गई हो.. उफ़ तेरे जिस्म में कितनी आग है.. देखो मेरा हाथ तेरे चूचे पे रखा हुआ कैसे जल रहा है. तूने तो आज मेरी आग भड़का दी है.. काश तेरी माँ भी तेरे जैसी गर्म होती. अब मैं क्या करूँ.. कहाँ जाऊं.. कैसे अपने इस लंड को शांत करूँ.

गुलशन जी की बात सुनकर साधना को बहुत दुख हुआ और वो अपनी माँ को कोसने लगी. फिर उसने डिसाइड किया कि अब जो हो देखा जाएगा. बस वो आज तो अपने पापा को शांत करके ही सोएगी.

गुलशन जी ने अपना हाथ वापस हटा लिया, शायद वो डर रहे थे और साधना को लगा कि अब शायद वो चले जाएँगे.

साधना मन में बुदबुदाने लगी- ओह गॉड पापा तो जा रहे हैं.. ऐसे तो सारी रात ये परेशान ही रहेंगे. क्या करूँ साधना.. कुछ कर तू.. ओह दीदी लगता है आपकी बात पूरी करनी होगी. मुझे पापा को कुछ नजारा दिखाना ही होगा.

साधना ने पेट पर खुजली के बहाने टी-शर्ट को ऊपर कर प्रिया और थोड़ी देर खुजा कर वो शांत हो गई. मगर उसके आधे चूचे अब नंगे हो गए और गुलशन जी उन्हें देख कर अपने होश खो बैठे.

गुलशन- हे भगवान ये आज मेरे साथ क्या हो रहा है.. मैं जितना साधना से दूर जाना चाहता हूँ, हालात मुझे इसके और करीब ला रहे हैं. अब ऐसा नजारा सामने है, मैं जाऊं या रुकूं.. क्या करूँ.

गुलशन जी दुविधा में थे. उनका लंड तो अकड़ कर उन्हें इशारा दे रहा था कि कली सामने है और तू जा रहा है.. मसल दे. मगर दिल बोल रहा था कि नहीं वो तेरी बेटी है, ये ग़लत है.. यहाँ से जा चला जा.

गुलशन जी अभी किसी नतीजे पे पहुँच पाते, तब तक साधना ने दूसरा धमाका कर प्रिया.

साधना ने धीरे से आँख खोल कर देखा तो गुलशन जी खड़े हुए कुछ सोच रहे थे. साधना अपने मन में बोल रही थी- लगता है पापा इतने से नहीं रुकेंगे.. कुछ और करना होगा.

साधना ने फिर खुजने के बहाने से अबकी बार अपने पजामे में हाथ डाल प्रिया और उसे थोड़ा नीचे कर प्रिया यानि पजामे को बस दो इंच और नीचे करती तो उसकी चुत का दीदार उसके पापा को हो जाता. मगर साधना इतना कैसे कर रही थी, ये वही जानती थी. बिना चुदे ही उसकी गांड फट रही थी. ये तो टीना की बातें और पिछले दिनों की कुछ गंदी हरकतें थीं, जो उसमें इतनी हिम्मत आ गई. फिर भी डर से उसकी साँसें तेज हो गई थीं.

अब नजारा कुछ ऐसा था टी-शर्ट पूरी ऊपर.. और पजामा नीचे सरका हुआ था, जिससे साधना का पूरा पेट नंगा और आधे मम्मों की झलक दिख रही थी. इसी के साथ उसकी चुत के ऊपर का हिस्सा भी दिख रहा था. इस हालत में एक बाप अपने अन्दर के मर्द के सामने हार गया.

अब गुलशन की आँखों में सिर्फ़ वासना नज़र आ रही थी. वो धीरे से बिस्तर पर बैठ गए और साधना की टी-शर्ट को पूरा ऊपर कर प्रिया. अब उस कमसिन कली के 30″ के दिल को छू लेने वाले चूचे पूरे नंगे होकर गुलशन जी के सामने थे. वो नजारा देख कर उनके होंठ सूख गए. उनका मन कर रहा था कि जल्दी से साधना के पिंक निप्पलों को चूस लें, मगर वो उठ ना जाए.. ये डर भी उनके मन में था.

वो थोड़ी देर ऐसे ही उस नजारे को देखते रहे, फिर हिम्मत करके उन्होंने एक चूचे को हाथ में लिया और धीरे-धीरे उसे दबाने लगे.साधना की तो हालत खराब थी, वो मुँह को कसके भींचे हुए पड़ी थी कि उसकी कहीं सिसकी ना निकाल जाए.

बस बस कहानी खत्म हो गई.. सॉरी दोस्तो वर्ड्स लिमिट खत्म, बाकी का नजारा कल देख लेना.

मेरे प्यारे साथियो, आप मुझे मेरी इसबाप बेटी सेक्स कहानीपर कमेंट्स कर सकते हैं.. पर आपसे एक इल्तिजा है कि आप लेखिका के बारे में कोई आपत्तिजनक कमेंट्स मत करें.

support@mohakkisse.comबाप बेटी सेक्स की कहानी जारी है.

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