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चुदाई की कहानी पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 878 बार

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-36

पिंकी सेन

02 Dec 2025 को प्रकाशित

रैगिंग ने रंडी बना प्रिया-36
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अब तक की इस सेक्स स्टोरी में आपने पढ़ा था कि दीपक ने नेहा की कमसिन चुत में काफी अन्दर तक लंड पेल प्रिया था और अन्दर-बाहर करने लगा था.. उधर नेहा बेहोश हो चुकी थी.अब आगे..

जब नेहा वैसे ही बेजान पड़ी रही तो उसको अहसास हुआ कि नेहा अब भी बेहोश है, तो उसने पास पड़ी पानी की बोतल से थोड़ा पानी नेहा के चेहरे पे गिराया, जिससे वो होश में आई.

दीपक ने अब तक पूरा लौड़ा फिट कर प्रिया था और वो नेहा के होंठ चूसने लगा था. नेहा पानी के कारण अब जाग गई थी.. और उसको अभी भी बहुत दर्द हो रहा था, मगर वो चिल्ला नहीं रही थी. उसने इशारे से दीपक को हटने के लिए कहा.. तो वो हट गया.

नेहा- उउउ उउउ आह.. एमेम मामू आह.. एमेम मेरी आह.. ज्ज़ान निकाल जाएगी उउउ प्लीज़ आह.. निकाल लो ना आह.. उउउ उउउ..दीपक- अरे मेरी प्यारी नेहा, तू तो बहुत बहादुर है ऐसे नहीं रोते, अब कुछ नहीं होगा.. जो दर्द होना था हो गया. देख मेरा पूरा लंड अन्दर घुसा हुआ है.. अब बस मज़े ही आएँगे समझी.

दीपक की बात सुनकर नेहा ने गौर किया तो उसको अहसास हुआ कि सच में पूरा लंड चुत की गहराई में है.नेहा- आह.. ये तो पूरा घुस गया.. तभी आह.. मेरी जान निकली मामू उफ़ आह..दीपक- देख ये पूरा अन्दर है.. अब तू कहे तो आगे-पीछे करूँ.. बस थोड़ा सा दर्द होगा तुझे.. उसके बाद नहीं होगा.नेहा- ठीक है आह.. मामू आह.. लेकिन ससस्स आह.. ज़्यादा दर्द होगा तो आह.. आप रुक जाना.दीपक- ठीक है मेरी जान.. तू बोलेगी तब रुक जाऊंगा मगर ज़्यादा दर्द हो तभी रोकना.. थोड़ा तो होगा तू सह लेना ओके.

नेहा ने ‘हाँ’ का इशारा किया तो दीपक फिर शुरू हो गया. वो धीरे-धीरे चुदाई करने लगा.. नेहा को दर्द तो हो रहा था मगर उन 5 मिनटों में दीपक ने स्पीड से लौड़ा अन्दर-बाहर किया था, जिससे अब चुत में लौड़ा बराबर फिट हो गया था और आराम से तो नहीं मगर टाइटली अन्दर-बाहर हो रहा था. इस वक़्त तो नेहा को कुछ मज़ा नहीं आ रहा था.. बस हल्का मीठा-मीठा सा दर्द हो रहा था.ऐसे ही 10 मिनट गुजर गए. अब दीपक ने थोड़ी स्पीड भी बढ़ा दी थी और नेहा भी मस्ती में आने लगी थी.नेहा- आह.. आ सस्स मामू आह.. ऐसे ही करो.. उफ़ आह.. दर्द के साथ आह.. थोड़ा आह.. मज़ा भी आने आह.. सस्स उ लगा है आह.. करो.दीपक- मैंने कहा था ना.. उहह उहह मज़ा आएगा आह.. ले नेहा आह.. सच में आह.. तेरी आह..चुत बहुत टाइट हैउफ़ आह.. साला लौड़ा आह.. फँसा हुआ है.. आह ले आह.. ले..

नेहा अब कमर को हिलाने लगी, उसकी चुत अब पानी छोड़ने लगी थी. वो उत्तेज़ित हो गई और चुत के पानी चोदने से लंड को भी फिसलने में मदद मिल गई.नेहा- आह.. अब ज़ोर से करो आह.. मामू उई नहीं आह.. सस्स ज़ोर से ककककरो आह.. पानी आह.. आआ आआ आने वाला आह.. ज़ोर से आह.. करो मामू एयेए एयेए.

नेहा के मस्ती में आते ही दीपक ने उसकी कमर को पकड़ा और दे.. दनादन शॉट मारने लगा. अब लौड़ा 200 पम्प प्रति मिनट की स्पीड से अन्दर-बाहर होने लगा. नेहा तो सच में हवा में उड़ने लगी थी.. उसकी चुत से रस का झरना बहने लगा. उसको ऐसा मज़ा शायद पहले चुत चटवाकर भी नहीं आया होगा.. वो बस आँखें मींचे झड़ रही थी.

दीपक तो झटके मारने में बिज़ी था उसको ऐसी कच्ची चुत जो मिल गई थी. इधर नेहा झड़ गई और निढाल पड़ गई.

दीपक समझ गया कि ये ठंडी हो गई है, तो उसने अपनी रफ़्तार कम कर दी और नेहा के होंठ चूसने लगा. उसके छोटे-छोटे निप्पलों को उंगली से सहलाने लगा, कभी उसके बूब्स को पूरा मुँह में लेता, तो कभी जीभ से निप्पल को घुमाता.. बस एक लड़की को गर्म करने के लिए और क्या चाहिए.

नेहा- आह.. सस्स मामू उफ़ आह.. करो आह.. ऐसे ही चूसो आह.. आपने आह.. सही कहा था मामू उफ़फ्फ़ बहुत मज़ा आ रहा है आह.. और करो मामू उफ़ मेरी चुदाई करो आह..दीपक- क्यों मेरी जान.. अब तुझे दर्द नहीं हो रहा क्या.. बोल ज़ोर से करूँ अब?नेहा- आह.. दर्द तो हो रहा है मामू सस्स मगर आह.. दर्द के साथ जो उफ़फ्फ़ मज़ा मिल रहा है आह.. वो ज़्यादा अच्छा है उह धीरे करो.. काटो मत आह.. ज़ोर से करो ना आह..

नेहा फिर से उत्तेज़ित हो गई थी. इधर नेहा की टाइट चुत की गर्मी से दीपक का लौड़ा भी बेहाल हो गया था. वो अपने चरम पे पहुँच गया था.दीपक- ले मेरी जान उहह उहह आज तेरी चुत की आह.. आ सारी क्सावट आह.. खत्म आह.. कर दूँगा आह.. उहह फिर आह.. तुझे रोज चोदूंगा आह.. मज़े से आह.. तेरी जवानी को आह.. भोगूंगा.नेहा- आह.. मामू मैं आपकी ही हूँ आह.. उई रोज चोदना उफ़फ्फ़ ससस्स आह.. फास्ट मामू फास्ट आह.. मेरी चुत में जोरों से खुजली होने लगी.. फास्ट मामू चोदो हाँ ऐसे ही आआह आईईइ दर्द होता है आह.. ऐसे नहीं उफ़फ्फ़ ससस्स..

दीपक ने स्पीड तेज कर दी और नेहा के पैर कंधे पर रख कर वो घोड़े की तरह उसको चोदने लगा. जल्दी ही उसके लंड ने जवाब दे प्रिया और इतना रस फेंका, जिससे नेहा की चुत का कोना-कोना भर गया. गर्म वीर्य जब चुत की दीवारों से टकराया.. साथ में नेहा भी झड़ गई.

दोनों के पानी का मिलन हो गया. दीपक जैसे ही उठा.. फच्च की आवाज़ के साथ लौड़ा बाहर निकाला, जिस पर खून और वीर्य लगा हुआ था. ये इन दोनों की चुदाई की कहानी ब्यान कर रहा था.

नेहा- आ.. आह.. धीरे मामू दर्द होता है उफ़ निकाला तो जान निकल गई.

दीपक वैसे ही बैठा रहा और नेहा की चुत को देखने लगा.. जो खून और वीर्य से सनी हुई थी. दीपक ने नीचे टी-शर्ट को भी देखा, उस पर भी बहुत खून पड़ा था. यानि सील टूटने से कुछ ज़्यादा ही खून बह गया. दीपक ने सोचा कि अब अगर नेहा इसे देखेगी तो डर जाएगी, यह सोच कर उसने नेहा को बताना ठीक समझा.

नेहा- उफ़ मामू ज़ोर से सूसू आह.. रही है आह.. टॉयलेट कहाँ है?दीपक- मेरी जान हिल मत.. पहले तू मेरी बात गौर से सुन ओके.. फिर मैं तुझे बाथरूम लेके जाता हूँ.नेहा- क्या बात है मामू.. मुझे सूसू करना है.. आकर सुना देना.दीपक- प्लीज़ एक मिनट सूसू रोक ले और सुन, पहली बार लंड जब चुत में जाता है तो अन्दर से लाल रस निकलता है.नेहा- लाल रस क्यों मामू लाल तो खून होता है.. तो क्या मेरे भी खून निकला है?

नेहा उठकर देखना चाहती थी मगर दीपक ने उसको रोक प्रिया और उसको अच्छी तरह समझाया कि ये सबके साथ होता है, तेरे में से भी निकला.. तू इसे देख कर घबराना मत.. आज के बाद दोबारा नहीं आएगा.

नेहा ने हामी भरी तब दीपक ने उसका हाथ पकड़ कर उसको बैठाया. नेहा ने टी-शर्ट का हाल देखा.. साथ अपनी चुत को भी देखा.

नेहा- ऊह मम्मी ये क्या इतना खून मामू.. मेरी चुत फट गई है अब समझी मैं.. आप क्यों बोल रहे थे चुत फट जाएगी?

दीपक- अरे पागल अभी इतना समझाया कुछ नहीं फटी.. तू पानी से साफ करके देख लेना.. जैसे पहले थी वैसी ही है.नेहा- मामू सच्ची मुझे डर लग रहा है.. ये नहीं फटी ना?दीपक- अरे कुछ नहीं हुआ चल तुझे साफ करके दिखाता हूँ.. तब मानेगी तू!

दीपक ने उसको गोदी में लिया और प्यार से उसको वॉशरूम ले गया, वहां पहले उसको साइड में बैठा कर अपना लंड साफ किया, फिर उसकी चुत पे पानी डाल कर हल्का सा रगड़ा क्योंकि खून जम गया था.

नेहा- आह.. मामू धीरे दुखता है.. मैंने कहा था ना चुत फट गई अब क्या होगा?दीपक- कुछ भी मत बोल देख सही है.. ये रस जम गया तो दर्द हुआ अब साफ हो गई ना.. देख कहाँ फटी है.

लंड की चोट से चुत सूज कर लाल हो गई थी मगर खुलने के बाद वो ऐसी लग रही थी, जैसे अभी-अभी ताज़ा गुलाब खिला हो, उसे देख कर दीपक को उस पर बड़ा प्यार आया उसने एक प्यारा सा किस चुत पे कर प्रिया.

नेहा- सससा आह मामू आपके किस से कितना सुकून मिला मुझे.. और करो ना!दीपक- तुझे सूसू आया था ना.. वो कहाँ गया.. मेरे मुँह में मूतने का इरादा है क्या तेरा हा हा हा..नेहा- छी: मामू आप भी ना.. मैं ऐसा क्यों करूँगी, सूसू तो आ रहा है आप उठाओ तो करूँ ना.. मुझसे उठा भी नहीं जा रहा है. मेरे पैरों में और चुत में बहुत ज़ोर का दर्द है.

दीपक ने उसको उठा कर खड़ा किया और उसकी चुत से लौड़ा टच करके कहा- अब इस पर सूसू कर.. तेरी गर्म सूसू से लंड को आराम मिलेगा.. बेचारा तेरी टाइट चुत को खोलने के चक्कर में घुट गया था.

नेहा ने हल्की सी मुस्कान दी और लंड पर सूसू करने लगी, जो दीपक को बहुत अच्छा लग रहा था. उसके बाद दीपक ने उसको और खुद को अच्छे से साफ किया और वापस नेहा को उठा कर बेड पर ले आया. फिर वहां से वो खून वाली टी-शर्ट हटा दी और नेहा के पास लेट कर उसके मम्मों को सहलाने लगा.

नेहा- मामू आपको मेरे दूधू अच्छे लगते हैं क्या.. जो बार बार इनसे चिपक जाते हो.दीपक- अब बच्चों जैसी बातें मत किया कर.. ये दूधू नहीं चूचे हैं या चूचियां बोल दे. अब तू चुत और लंड के खेल को खेल चुकी है.. बहुत जल्द तेरे ये मम्मों को दबा-दबा कर इतने बड़े कर दूँगा कि तू दिखने में आयशा टकिया जैसी लगेगी.

साथियो, आप मुझे मेरी इस सेक्स स्टोरी पर मर्यादित भाषा में ही कमेंट्स करेंsupport@mohakkisse.comकहानी जारी है.

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

रॉकी सिन्हा

3 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

मुकेश 1985

3 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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