अब तक की इस सेक्स स्टोरी में आपने पढ़ा था कि साधना के पिता गुलशन जी ने उसे अपने साथ चलने को कहा तो वो कुछ कन्फ्यूज सी हो गई।अब आगे..
हेमा तो जानती थी कि वो उसे कहाँ लेकर जा रहे हैं मगर साधना इस बात से अनजान थी तो उसने पूछ ही लिया- पापा इस वक़्त आप मुझे कहाँ लेकर जा रहे हो?गुलशन- तू सवाल बहुत करती है, बस तू जल्दी से तैयार हो जा, देर मत कर!
साधना बेचारी क्या बोलती, वो अपने कमरे में गई और जल्दी से तैयार होकर बाहर आ गई। अब गुलशन जी उसे लेकर सीधे एक बड़े से शॉपिंग मॉल में ले गए। साधना के मन में बहुत से सवाल उठ रहे थे मगर उसने सोचा वो अपने पापा से पूछेगी तो वो फिर नाराज़ हो जाएँगे बस यही सोच कर वो चुप रही।
मॉल में हर चीज के लिए अलग-अलग एरिया बने हुए थे तो गुलशन जी साधना को एक मॉर्डन ड्रेस वाले एरिया में ले गए।गुलशन- बेटा तुझे मेरी हेल्प करनी है इसी लिए मैं तुझे यहाँ लाया हूँ।साधना- मैं कुछ समझी नहीं पापा.. कैसी हेल्प चाहिए आपको?
गुलशन- अरे वो मेरे कपड़ा व्यापार के एक बहुत बड़े सेठ हैं, उनकी बेटी लन्दन से आई हुई है.. अब यही आगे की पढ़ाई करेगी, तो उसके पापा उसको सरप्राइज देना चाहते हैं। बस उन्होंने मुझे ये काम सौंप प्रिया और मैं तुझे यहाँ ले आया हूँ।साधना- पापा मेरी तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा, आपके दोस्त की बेटी लन्दन से यहाँ आई तो मेरा उसमें क्या काम?
गुलशन- अरे मेरी भोली साधना.. उस लड़की की उम्र, हाईट, बॉडी सब तेरे से मिलती है, उसके लिए कुछ मॉर्डन कपड़े लेने हैं। अब भाई तुम लड़कियों को क्या पसंद आता है.. ये मुझे कैसे मालूम होगा? तो तू ही उसके लिए अच्छे कपड़े पसंद कर दे।
गुलशन जी की बात सुनकर एक बार तो साधना को गुस्सा आया कि उसको तो पहनने नहीं देते और दूसरों के लिए उसी से शॉपिंग करवा रहे हैं। फिर उसने सोचा चलो इसी बहाने वो भी मॉर्डन कपड़े पहन कर देख तो लेगी कि उस पर जमते हैं या नहीं।
साधना- ठीक है पापा.. मगर उम्र और हाईट से कुछ नहीं होता, पसंद सबकी अलग होती है और वो इतनी दूर से आई है तो क्या अपने कपड़े नहीं लाई होगी?गुलशन- अरे तू तेरी पसंद के ले.. देखना उसको भी पसंद आ जाएँगे और दूसरी बात उसका बैग एयरपोर्ट पर खो गया इसी लिए ये सब करना पड़ रहा है। समझी.. अब कोई सवाल नहीं, चल कपड़े देख जल्दी.. मुझे वापस दुकान पर भी जाना है।
साधना ने एक ब्लैक जींस और लाइट पिंक टी-शर्ट ली, फिर उसको ट्रायल रूम में चैक किया। वो उस पर बिल्कुल फिट बैठी और उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। इन कपड़ों में वो एक सेक्स बम लग रही थी। वो बाहर आई और गुलशन जी ने उसे देखा तो उनकी तो आँखें ही चुंधिया गईं। साधना को उस ड्रेस में देखकर वो बस देखते जा रहे थे।
साधना- क्या हुआ पापा.. सही नहीं है क्या?गुलशन- अरे नहीं.. बहुत अच्छा है तू इसमें बहुत सुन्दर लग रही है।साधना- थैंक्स पापा.. अब कुछ और ट्राइ करूँ?गुलशन- देख तू ट्राई कर ले, मुझे मत दिखा.. तुझे पसंद आए बस वो ले ले।
बस फिर क्या था, उसने और भी कपड़े ट्राई किए, कुछ स्कर्ट्स भी लिए। साधना के दिमाग़ में लन्दन की लड़की की इमेज थी तो उसने कुछ सेक्सी शॉर्ट स्कर्ट्स और टॉप भी ले लिए।
गुलशन जी बस इधर-उधर घूम रहे थे, उनको नहीं पता था कि साधना क्या-क्या ले रही है। जब काफ़ी देर हो गई तो वो साधना के पास गए और उससे पूछा- कितना टाइम लगेगा?साधना- बस हो गया पापा.. दस ड्रेस मैंने पसंद किए हैं, एक बार आप देख लो उसमें से कितने लेने हैं?गुलशन- अरे कितने क्या.. सारे लेने हैं। चल कुछ अच्छे जूते और सेंडिल भी ले लेते हैं।
साधना को क्या ऐतराज होना था, वो दूसरे साइड में चली गई और वहाँ से कुछ अच्छे जूते भी ले लिए। फिर उसको सामने ब्रा-पेंटी का बहुत बड़ा डिपार्टमेंट दिखा। साधना को जब उसके बाहर शो केस में एक बहुत ही फैन्सी ब्रा टंगी दिखी तो वो सोचने लगी कि उस लड़की के पास ब्रा-पेंटी भी तो नहीं होगी, मगर ये बात पापा को कैसे बताए। दूसरी बात ये कि उसने खुद आज तक ये चीजें नहीं खरीदी थीं.. बस इसी सोच में वो उधर देखती हुई उस एरिया से बाहर निकली। मगर उसको ये नहीं पता था कि उसके पापा उसको देख रहे हैं और उसकी नज़र का पीछा करके वो समझ गए हैं कि उसके दिमाग़ में क्या चल रहा है। मगर हिम्मत उनकी भी नहीं थी कि वो साधना को बोल पाते।
तभी वहाँ एक 22 साल की लड़की आ गई, उसकी हाईट काफ़ी अच्छी थी, वो दिखने में एकदम गोरी और बिल्कुल कैटरीना कैफ़ जैसी थी। उसका 34-30-34 का फिगर भी मस्त था।
वो गुलशन जी के पास से गुज़री और जैसे ही गुलशन जी की नज़र उस पर पड़ी।गुलशन- सुनीता, तुम यहाँ क्या कर रही हो?सुनीता- वो मैं कुछ कपड़े लेने आई थी।साधना- हो गई पापा पूरी शॉपिंग.. अब घर चलें या कुछ और भी लेना है?
साधना की आवाज़ सुनकर दोनों ही झेंप गए।सुनीता- उह तो ये है आपकी बेटी साधना..! ये तो बहुत खूबसूरत है।
गुलशन जी कुछ बोल पाते, तब तक सुनीता ने साधना से ही हैलो कर लिया।साधना- सॉरी, मैंने आपको पहचाना नहीं!सुनीता- आप बताओगे साधना को.. या मैं बताऊं कि मैं कौन हूँ।गुलशन- ये व्व..वो मेरे एक दोस्त की बेटी है सुनीता.. अच्छा साधना सब हो गया या कुछ और भी लेना है?साधना- मुझे क्या पता पापा.. आप मुझे यहाँ लाए हो, अब जिसके लिए ये सब लिया है ये तो उसी को पता होगा ना।सुनीता- किसके लिए शॉपिंग हो रही है.. मैं कुछ समझी नहीं?
गुलशन जी कुछ बोलते इससे पहले साधना ने सारी कहानी बता दी।
सुनीता- उह अच्छा.. ये बात है तो ड्रेस और चप्पल से क्या होगा, उसको और कुछ भी चाहिए होगा ना!
सुनीता ने ये बात सामने अंडरगार्मेंट्स के डिपार्टमेंट को देख कर कही थी, जिसे बाप और बेटी दोनों समझ गए।
बीवी की चुदाई गैर मर्द से
गुलशन- साधना एक काम करो ये बहुत सामान हो गया है, ये सब बैग मुझे दो और मेरे लिए एक पानी की बोतल ले आओ.. बड़ी प्यास लगी है।साधना- पापा पानी तो शायद नीचे मिलेगा, यहाँ तो सिर्फ़ गारमेंट्स और शूज ही हैं।सुनीता- अरे तो नीचे से ले आओ, जाओ मुझे भी बहुत प्यास लगी है।
साधना अब आगे क्या बोलती, वो पानी लाने नीचे चली गई।
गुलशन- ये क्या है सुनीता.. ज़रा भी शर्म नहीं करती हो, उधर देख कर क्या बोल रही थी तुम?सुनीता- रिलॅक्स.. ऐसा क्या बोला मैंने? अब उसको इन सबकी भी तो जरूरत होगी ना.. खाली कपड़ों और जूतों से क्या होगा?गुलशन- ऐसा कुछ नहीं है, कोई लड़की नहीं है.. ये सब साधना के लिए ही है, बस मैं उसको सरप्राइज दे रहा हूँ।सुनीता- वाउ… आपकी आदत गई नहीं सरप्राइज देने की.. गुड मगर ये सब लिया तो अंडरगार्मेंट्स भी दिला दो ना। उसकी भी इच्छा होगी ना, मगर आप को किसी की इच्छा से क्या लेना-देना है।गुलशन- सुनीता, तुम ज़्यादा बोल रही हो, मैंने कब तुम्हारी इच्छा को दबाया बोलो? आज जो तुम ये मॉर्डन कपड़े पहन कर घूम रही हो, ऐश कर रही हो.. सब मेरी वजह से, समझी! नहीं तो पता नहीं इस वक़्त कहाँ होती।सुनीता- बस बस मेरा मुँह मत खुलवाओ.. आप कोई सुनेगा तो हँसेगा।
गुलशन- ओके बंद करो ये बकवास.. साधना आ रही है वो सुन लेगी।सुनीता- हाँ मेरी बातें तो आपको बकवास ही लगेंगी ना, अच्छा मैं चलती हूँ, मुझे तो नई ब्रा लेनी है, आप जाओ अपनी प्यारी बेटी के साथ।गुलशन- रूको तुम सही कह रही हो, साधना को भी नई ब्रा-पेंटी ले लेनी चाहिए। मैं पानी लेकर वहाँ खड़ा हो जाऊंगा, तुम उसको साथ ले जाना और जो चाहिए उसको दिला देना।सुनीता- ये हुई ना बात.. अब बने आप उसके असली पापा।गुलशन- फिर बकवास की तुमने.. असली का क्या मतलब है तुम्हारा? हाँ?सुनीता- अरे कुछ नहीं.. अब सौतेली बेटी और असली बेटी में इतना फ़र्क तो होता ही है।गुलशन- सुनीता, तुम हद पर कर रही हो, अब वो आ गई, उसके साथ अगर कोई भी ऐसी-वैसी बात की ना.. तो सोच लेना तेरी माँ की तरह तू भी उसी जगह पहुँच जाएगी।
सुनीता कुछ जवाब देती, तब तक साधना उनके बिल्कुल पास आ गई थी।
गुलशन जी ने साधना से पानी की बोतल ली और कहा- तुम सुनीता के साथ जाकर कुछ और शॉपिंग कर आओ, मैं तब तक वहाँ आराम करता हूँ।
साधना- लेकिन अब क्या बाकी रह गया? मैंने तो सब ले लिया।सुनीता- अरे तुम आओ तो मेरे साथ.. आप जाइए, उधर जाकर थोड़ा रुकिए, हम दोनों अभी आते हैं।
साधना को तो कुछ समझ ही नहीं आया और सुनीता भी उसके लिए अनजान थी। बस वो उसके पीछे चली गई, जब वो उस जगह पहुँची, तब उसको समझ आया कि माजरा क्या है, मगर सुनीता के सामने उसको बहुत शर्म आई।
सुनीता- साधना शरमाओ मत, अपना साइज़ बताओ, उसी हिसाब से मैं तुम्हें कुछ अच्छे सैट दिलवा दूँगी।
साधना ने शर्माते हुए अपना साइज़ बता प्रिया, फिर क्या था सुनीता ने एक से बढ़कर एक सैट उसको दिलवाए, जिसे देख कर साधना भी खुश हो गई। फिर उसको ख्याल आया कि ये तो किसी और के लिए हैं.. बस फिर क्या था उसका मूड खराब हो गया।
साधना- बस बहुत ले लिया, अब चलो यहाँ से चलते हैं.. मुझे घर जाकर पढ़ाई भी करनी है।सुनीता- अरे रूको, एक-दो नाइटी भी ले लो ना।
साधना का मन नहीं था मगर सुनीता ने ज़बरदस्ती उसको 2 सेक्सी नाइटी दिलवा दीं।
सारा सामान लेकर वो दोनों गुलशन जी के पास आ गए, फिर सुनीता ने बहाना बना कर उनसे विदा ली और चली गई।
गुलशन- क्यों बेटा हो गई शॉपिंग.. अब घर चले या कुछ और लेना है?साधना- अब जो लेना था ले लिया, बाकी उसको कुछ चाहिए होगा तो वो खुद ले लेगी।
साधना को बहुत गुस्सा आ रहा था कि उसके पापा ने एक बार भी उसको ये नहीं कहा कि तुम भी अपने लिए कुछ ले लो।
गुलशन- ठीक कहा तुमने, कुछ रह गया होगा तो वो खुद ही लेने आ जाएगी, चलो नीचे बिल करवा लेते हैं.. फिर मुझे भी वापस दुकान जाना है।
मेरे प्रिय पाठको, आप मुझे मेरी इस सेक्स स्टोरी पर कमेंट्स कर सकते हैं.. पर आपसे आग्रह है कि आप मर्यादित भाषा में ही कमेंट्स करें.
support@mohakkisse.comकहानी जारी है।