अब तक की इस सेक्स स्टोरी में आपने पढ़ा था कि साधना के पापा ने उसको मॉल में ले जाकर किसी दूसरे की बेटी के लिए कह कर साधना से ही उसके लिए बहुत शॉपिंग करवा ली थी।अब आगे..
साधना और गुलशन जी बिल की लाइन में लग गए, जब उनका नंबर आया और बैगों से सामान निकाल कर प्राइस कोड मारा गया, तब गुलशन जी तो देखते रह गए। साधना ने एक से बढ़कर एक ड्रेस ली थीं। फिर ब्रा-पेंटी के सेट्स आए और वो सेक्सी नाइटी.. तो बस गुलशन जी आपे से बाहर हो गए। ना जाने क्या सोच कर उनका लंड पेंट में तन गया। उनके दिमाग़ में साधना को लेकर कुछ नहीं था मगर वो कपड़े देख कर वो उत्तेजित हो गए। इधर बेचारी साधना का शर्म से बुरा हाल था.. वो नजरें झुकाए खड़ी रही।
सब सामान लेकर गुलशन जी ने कार में रखा और घर की तरफ़ चल पड़े। पूरे रास्ते साधना सोच रही थी कि पापा ने मुझे कुछ भी लेने को नहीं कहा, क्या वो मुझसे प्यार नहीं करते। अरे मॉर्डन नहीं तो कोई सिंपल ड्रेस ही दिलवा देते।
गुलशन- क्या सोच रही है मेरी लाड़ली? घर आ गया है, चलो उतरो.. ये सब बैग उठाओ.. अन्दर लेकर जाना है।साधना- अन्दर क्यों पापा.. ये उनको देना है ना.. तो आप अपने साथ ले जाओ?गुलशन- अरे नहीं अभी नहीं.. वो खुद आ जाएँगे लेने.. चलो अब।हेमा- आ गए आप लोग, बहुत टाइम लगा प्रिया आपने.. कहाँ गए थे?गुलशन- अपनी बेटी से पूछो, इतना टाइम कैसे लग गया। मैं तो थक गया हूँ अब तो मैं चेंज करके थोड़ा आराम ही करूँगा। अब दुकान जाने की हिम्मत नहीं है, मैं गोपी को फ़ोन कर देता हूँ.. वो देख लेगा।
इतना कहकर गुलशन जी अपने कमरे में चले गए और कपड़े बदलने लगे। इधर साधना का मूड ऑफ था, उसने सामान वहीं हॉल में रखा और जाने लगी।हेमा- अरे साधना.. ये सब यहाँ क्यों रख प्रिया तूने? ये सब अन्दर ले जा।साधना- अन्दर क्यों.. कौन सा मेरा सामान है, पापा के दोस्त की बेटी का है आप रख दो कहीं भी.. वो आकर ले जाएँगे।
हेमा समझ गई कि गुलशन जी ने उसे उल्लू बनाया है, वो अनजान बनकर बोली- कौन दोस्त? मुझे नहीं पता तू ही बता मुझे?साधना ने सारी बात अपनी माँ को बताई तो हेमा मुस्कुराने लगी।
साधना- आप क्यों खुश हो रही हो? पापा ने मुझे कुछ भी नहीं दिलवाया इसलिए ना?हेमा- पागल है तू एकदम.. हा हा हा… छोटे बच्चे की तरह बिहेव कर रही है। अरे मेरी बेटी कोई दोस्त नहीं है, ये सब तेरे ही लिए है.. तेरे पापा कल की बात से शरमिंदा थे.. तुझ पर गुस्सा जो किया था। ये सब तेरे लिए किया सरप्राइज है बेटा हा हा हा हा तू उल्लू बन गई।
हेमा की बात सुनकर साधना के तो पैरों तले ज़मीन ही निकल गई, उसको यकीन ही नहीं हुआ कि इतने मॉर्डन ड्रेस वो पहनेगी और भी इतने सारे।
साधना- सीसी क्या सच माँ.. प्लीज़ आप सही बताओ.. ये सब मेरे लिए है?हेमा- हाँ साधना सब तेरा है, यकीन नहीं तो अपने पापा से पूछ लो।
साधना भागती हुई अपने पापा के पास गई। उससे पूछा भी नहीं गया वो बस बोलने की कोशिश कर रही थी, मगर अल्फ़ाज़ है कि निकलने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
साधना- पापा ये सब एम्म मेरे व्व..वो माँ क्क्क..कह रही हैं.. सस्स सब एमेम..!गुलशन- हा हा हा.. अरे कंट्रोल कर.. हाँ सब तेरे लिए ही लिया है, मेरी लाड़ली को पसंद आए वही सब मैंने दिलवाया.. अब तो खुश ना!
साधना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वो भाग कर अपने पापा से चिपक गई और गाल पर एक जोरदार किस कर प्रिया।
साधना- ओह पापा.. आप कितने अच्छे हो.. आप दुनिया के सबसे अच्छे पापा हो।
साधना ने गुलशन जी को इतना कस कर पकड़ा हुआ था कि उसके चूचे वो अपने सीने में धंसते हुए साफ महसूस कर रहे थे। फिर इस वक्त उन्होंने सिर्फ़ बनियान और लुंगी ही पहनी हुई थी, जिससे जवान जिस्म की गर्मी उनको पागल बना रही थी। उनका लंड तन गया था और साधना की नाभि को चुत समझ कर उसमें घुसने की कोशिश कर रहा था।
साधना को इस बात का अहसास हुआ या नहीं.. ये तो पता नहीं, मगर गुलशन जी को ज़रूर पता लग गया कि उनकी बेटी जवान हो गई है और अगर ज़्यादा देर वो उससे चिपके रहे तो गड़बड़ हो जाएगी। बस यही सोचकर उन्होंने साधना को अपने से अलग किया।
साधना जब अलग हुई, तो अचानक उसकी नज़र लुंगी में बने टेंट पर गई और उसको समझने में देर नहीं लगी कि वो क्या चीज है। इधर गुलशन जी भी अपनी हालत समझ रहे थे। वो जल्दी से बेड पे बैठ गए और लुंगी को इस तरह समेट लिया, जिससे उनका खड़ा लंड साधना को ना दिखे। मगर उनको क्या पता था कि साधना तो कबकी उस फुंफकारते लंड को देख चुकी है।
गुलशन- क्यों कैसा लगा पापा का सरप्राइज?साधना- बहुत अच्छा पापा.. मैं बता नहीं सकती, मुझे कितनी खुशी हुई है।गुलशन- बस मेरी बेटी ऐसे ही खुश रहा कर.. और दोबारा ऐसा कभी ना करना कि तुम मुझसे बिना बात किए चली जाओ।साधना- सॉरी पापा.. मुझसे ग़लती हो गई, अब मैं कभी ऐसा नहीं करूँगी।
साधना के चेहरे की खुशी देख कर गुलशन जी भी बहुत खुश थे।
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गुलशन- अच्छा ठीक है अब तुम भी आराम कर लो बेटा.. थक गई होगी।साधना- पापा एक बात कहनी थी आपसे।गुलशन- हाँ कहो बेटी क्या बात है?साधना- पापा वो सब ड्रेस तो मैंने आपकेदोस्त की बेटीके हिसाब से लिए है, वो लन्दन से आई है ये सोच कर मैंने इसमें कुछ ज़्यादा ही मॉर्डन ड्रेस ले लिए हैं।गुलशन- अरे तो क्या हुआ.. तू किसी अँग्रेज़ी मेम से कम है क्या.. तेरे सामने वो भी फीकी लगें.. मेरी प्यारी बेटी सब तुझे पसंद है ना.. तो बस पहन के एंजाय कर। तेरे पापा के पास पैसों की कमी है क्या.. सब तेरे ही लिए है। समझी.. अब जा किसी बात को दिल पे मत लेना।
साधना ने एक बार फिर पापा को हग किया और खुशी-खुशी वहाँ से चली गई और गुलशन जी अपने लंड को एड्जस्ट करने लगे.. वो फिर खड़ा हो गया था।
गुलशन- ये आज इसे क्या हो रहा है.. क्यों बार-बार खड़ा हो रहा है। कहीं मेरे दिल में साधना के लिए तो कुछ.. छी: छी: मैं भी क्या सोचने लगा, वो मेरी बेटी है।काफ़ी देर तक गुलशन जी कसमकस में रहे, उनका दिमाग़ कुछ कहता और दिल कुछ कहता। आख़िर एक बाप की जीत हुई.. सारे बुरे ख्याल दिल से निकल गए और वे सो गए।
दोस्तो दोपहर को इनकी शॉपिंग तो देख ली.. मगर दीपक ने भी कुछ किया तो उसको भी देख लेते हैं।
कॉलेज के बाद दीपक घर चला गया और हमेशा की तरह लंच के बाद नेहा उसके कमरे में आ गई। नेहा ने ग्रे कलर की जींस की हाफ पेंट और ब्लैक टी-शर्ट पहनी हुई थी। उसके बाल खुले हुए थे.. आज तो वो बहुत ही सुन्दर लग रही थी।दीपक- क्या बात है मेरी नेहा रानी.. आज तो बड़ी चमक रही है.. क्या इरादा है?नेहा- आपको तो पता ही है मेरे मामू जान.. आपके लंड के बिना मुझे सुकून कहाँ मिलता है, अब तो मैं उसकी आदी हो गई हूँ।दीपक- अच्छा ये बात है.. तो आजा मेरी जान तेरे लिए तो लंड हमेशा तैयार है।नेहा- मामू आज हम कुछ नया करेंगे।दीपक- अच्छा ये बात है.. तो बता तेरा आज क्या करने का इरादा है?नेहा- पहले अपने कपड़े तो निकाल दो मामू.. फिर बताती हूँ कि क्या करना है।
दीपक ने अपने कपड़े निकाल दिए, तब तक नेहा भीएकदम नंगी हो गई थी।
दीपक- ले मेरी जान हो गया नंगा.. अब बता तूने आज करने को क्या सोच रखा है?नेहा- मामू बिस्तर पर तो रोज ही करते हैं.. आज हम कुत्ता और कुतिया बनेंगे.. उसमें मज़ा आएगा, आप सब वैसे ही करना।दीपक- हा हा हा ये तुझे क्या हो गया.. आज कुछ भी हा हा हा इसमें क्या नया है.. जैसे तुझे घोड़ी बनाता हूँ वैसे ही तू कुतिया बन जाएगी.. तो इसमें नया क्या हुआ?नेहा- नहीं ऐसे डायरेक्ट नहीं.. जैसे कुत्ता अपनी कुतिया को पटाता है.. वैसे पहले मुझे आप पटाओ।दीपक- ठीक है डार्लिंग.. जैसी तेरी इच्छा.. चल बन जा कुतिया अभी तुझे पटा कर चोद देता हूँ।
नेहा घुटनों पर होकर कमरे में चलने लगी और दीपक उसके पीछे-पीछे घुटनों पे चलने लगा। साथ ही वो नेहा की चुत को सूंघने लगा और थोड़ा जीभ से चाट भी लेता।
नेहा- उहूँ हू हूँ.. जाओ यहाँ से कुत्ते कहीं के.. क्यों मुझे परेशान कर रहे हो.. हूँ हू हूँ।दीपक- गुर्र गुर्र गुर उहूँ हू.. साली ऐसे चुत खुली लेकर घूमेगी तो मेरे जैसे कुत्ते का लंड खड़ा होगा ही ना उहूँ हू हूँ।नेहा- अच्छा दिखा तो तेरा लंड कितना बड़ा है और कितना मोटा है?
नेहा चलकर दीपक के पास आई और उसी पोज़िशन में झुक कर लंड को चूसने लगी।
दीपक- हा हा हा कुतिया.. कब से कुत्ते का लंड चूसने लगी हा हा हा..नेहा- चुप रहो आप.. मज़ा आ रहा है..
दीपक ने सोचा चलो इसकी इच्छा पूरी कर ही देता हूँ। बस वो दोनों काफ़ी देर तक ये कुत्ते वाला गेम खेलते रहे। फिर दीपक ने नेहा को बेड पे घोड़ी बनाया और लंड उसकी चुत में पेल प्रिया।
नेहा- आह आ मामू.. रोज चोदते हो आह फिर भी ये दर्द क्यों होता है.. आह आह..दीपक- तेरी उम्र के हिसाब से ये लंड थोड़ा बड़ा है.. इसलिए दर्द होता है, ले अब संभाल स्पीड बढ़ा रहा हूँ।दीपक ने नेहा की कमर को कस कर पकड़ लिया और स्पीड से लंड अन्दर-बाहर करने लगा। नेहा भी गांड हिला-हिला कर चुदने लगी थी और साथ में जोर-जोर से दीपक को बोल कर उकसा रही थी।नेहा- आह आ मामू आह.. लगता है आपका जोश ठंडा हो गया है आह.. जोर से करो ना.. नहीं आह और जोर से आह आह..
नेहा की बात से दीपक भी जोश में आ गया और उसने नेहा की चुत रेल बना दी। अब चुदाई का तूफान जोरों पर था। पूरे कमरे में बस दोनों की मिली-जुली आवाजें और ठप-ठप की मिक्स आवाज़ गूँजने लगी थीं।
नेहा- आह गुड मामू.. आह ऐसे ही चोदो आह आपकी भांजी आह आपकी दीवानी है आह चोद दो.. आह फाड़ दो मेरी चुत को.. अह..
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