होम पर वापस जाएं
बाप बेटी की चुदाई पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 944 बार

मेरा गुप्त जीवन- 177

यश देव

27 May 2026 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन- 177
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

यह तो ऋषि वात्सयायन का बहुत भला हो जिन्होंने काम शास्त्र की रचना कर के भारतवासियों और विदेशी पंडितों को काम कला के नए तरीके सिखाए और काम कला के साथ जुडी सैंकड़ों भ्रान्तियाँ दूर की।

मैं जब वृन्दा भाभी को घोड़ी बना कर चोदने लगा तो गौरी और नन्दा भाभी भी आकर खड़ी हो गई और हमारी चुदाई को बड़े ध्यान से देखने लगी।

जब मैंने अपना लण्ड वृन्दा भाभी की गांड में ना डाल कर उसकी चूत में पीछे से डाला तो दोनों भाभियों ने हाथ लगा कर महसूस किया कि क्या मेरा लण्ड वाकयी में वृन्दा भाभी की चूत में गया है या फिर कहीं गांड में तो नहीं घुस गया।

वृन्दा भाभी की घुड़ चुदाई के दौरान दोनों भाभियाँ वहीं खड़ी रही और बड़ी उत्सकता से चुदाई का नज़ारा देखती रहीं।तभी गौरी भाभी बोली- वृन्दा, तुम ना चुदाई कराते हुए ही अपनी कहानी सुनाना शुरू कर दो, सोमू तुम अपने धक्के ज़रा धीरे धीरे मारो ताकि भाभी अपनी कहानी भी सुनाती रहे और तुमसे चुदती भी रहे! कर सकोगे ऐसा सोमू?

मैंने दोनों भाभियों को आँख मारी और हाँ में सर हिला प्रिया।

अब वृन्दा भाभी ने बोलना शुरू किया।

जब मैंने होश सम्भाला तो मैं मम्मी पापा के साथ ही एक कमरे में सोती थी लेकिन एक अलग पलंग पर, उनके साथ नहीं।रात को जब भी नींद खुलती तो मैं अक्सर धुंधले में मम्मी पापा को चुदाई करते ही देखती थी लेकिन मुझको यह समझ नहीं आता था कि दोनों क्या कर रहे हैं।

फिर एक दिन जब मैं स्कूल जा रही थी तो रास्ते में हम सब लड़कियों ने एक कुत्ते और कुतिया को आपस में करते हुए देखा, कुत्ता बिलकुल ऐसे ही कुतिया पर चढ़ा था जैसे सोमू अब मेरे ऊपर चढ़ा है।

तब हम सब लड़कियां हँसते हुए स्कूल चली गई हालाँकि इसका मतलब क्या होता है, यह हम समझ नहीं पाई थीं।भाभी मेरी तरफ मुंह करके बोली- सोमू तुम अपने धक्के मारते रहो, मुझको बड़ा आनन्द आ रहा है।

भाभी ने फिर कहानी जारी रखते हुए कहना शुरू किया- हाँ तो, कुछ दिनों बाद एक रात जब मेरी नींद अचानक खुल गई तो मैंने देखा कि पापा मेरी मम्मी के ऊपर ऐसे ही चढ़े थे जैसे कुत्ता कुतिया पर चढ़ा था और मेरे पापा बड़े तेज़ और ज़ोरदार धक्के मार रहे थे और मेरी मम्मी हल्के हल्के हाय हाय कर रही थी।

मेरी इच्छा हुई कि पूछूं कि पापा आप मम्मी को क्यों धक्के मार रहे हो पर फिर पापा के डर के कारण मैं चुप रह गई और कुछ भी नहीं बोली।

वृंदा भाभी फिर बोली- सोमू यार, तेज़ तेज़ धक्के मारो, मेरा छूटने वाला है… उफ़ उफ़… मेरी माँ, मज़ा आ गया सोमू यार और तेज़ मारो पूरा अंदर डाल कर मारो धक्का… ओह्ह मैं गई रे… उफ़ मेरी माँ… ओह्ह ओह्ह!

यह बोलते हुए वृंदा भाभी एकदम अकड़ी और एक ज़ोरदार कंपकंपी के बाद ढीली पड़ करके लेट गई।लेकिन अपना मुंह पीछे मेरी तरफ कर के बोली- सोमू, अपना लंड निकालना नहीं, पड़ा रहने दो इसको चूत के अंदर थोड़ी देर और अभी… ओह्ह ओह्ह!

दोनों भाभियाँ भी काफी गर्म हो चुकी थी और दोनों के हाथ अपनी बालों से भरी रस भरी चूतों पर फिसल रहे थे और दोनों ही कभी कभी मेरे चूतड़ों और अंडकोषों के ऊपर भी हाथ फेर रही थी।

जैसे ही नन्दा भाभी मेरे निकट आई, मैंने उसको मम्मों से पकड़ लिया और अपने पास खींच कर उनके मम्मों को चूसने लगा जबकि मेरा लण्ड वृन्दा भाभी की टाइट चूत में अभी भी आहिस्ता से आगे पीछे हो रहा था।

वृन्दा भाभी के गोल और मोटे चूतड़ एकदम मेरे लण्ड के साथ चिपके हुए थे और मैं उनकी सुंदरता निहार भी रहा था और महसूस भी कर रहा था।

वृंदा भाभी अपनी कहानी जारी रखते हुए बोली- इस तरह तकरीबन हर रात मैं मम्मी पापा को चोदते हुए देखती और सोचती कि मेरे साथ ऐसा कौन करेगा। यह काम कला का खेल कई बार देखने का मौका मिला और यह निहायत ही रसीला खेल देखते हुए ही मैं बड़ी हो गई और मेरा पहला पीरियड शुरू हुआ।

अब मेरी मम्मी ने मुझ को एक अलग कमरे में सुलाना शुरू कर प्रिया लेकिन मैं मम्मी पापा के काम कलाप को हर रोज़ देखने से वंचित रह गई। मेरे मेरे मन में यह तीव्र इच्छा पैदा हो रही थी कि काश मेरे पापा मुझको मम्मी की तरह ही चोद सकते।

जब मैं कॉलेज में पहुँची तो मुझको यौन कला का काफी ज्ञान हो चुका था और यह ज्ञान मुझको शौक़ीन सहेलियों ने प्रिया था जो एक दो बार चुदाई का मज़ा ले चुकी थी।

फिर एक दिन मेरी मम्मी मेरी बीमार नानी को देखने के लिए पास ही के एक दूसरे शहर में गई चली गई और मुझे आगाह कर गई कि मैं पापा के खाने पीने का ध्यान रखूँ और वो जल्दी ही वापस लौट आयेंगी।

उस रात मैं पापा को खाना खिलाने के बाद अपने कमरे में आ कर पढ़ रही थी कि पापा ने आवाज़ दी और मैं उनके कमरे में गई।पापा मुझको देख कर बोले- वृन्दि ज़रा मेरा सर तो दबा दे, बड़ी पीड़ा हो रही है।

मैं उनके बिस्तर पर बैठ कर उनका सर दबाने लगी और पापा आँखें बंद किये चुपचाप मुझ से सर दबवाते रहे।थोड़ी देर बाद वो बोले- अब आई हुई हो तो टांगें भी दबा दे, बड़ी दर्द कर रही हैं।

यह भी पढ़ें (Recommended)

Meri pyaari betiya Ayushi

अब मैं उनकी टांगें दबाने लगी। मैं सर झुकाए हुए उनकी टांगें दबाने में लगी थी कि अचानक मेरे पापा ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझ को अपने आलिंगन में ले लिया और मेरे होटों को बेतहाशा चूमने लगे।

मैं एकदम हक़्क़ी बक्की हुई बैठी रही लेकिन फिर मैं थोड़ी देर बाद संभल गई और सोचने लगी पापा ने तो मेरे दिल की मुराद पूरी कर दी।

जल्दी ही पापा ने मुझ को लिटा प्रिया और मेरी साड़ी को ऊपर करके मुझको अधनंगी कर प्रिया और मेरी सफाचट चूत पर हाथ फेरने लगे।जब वो ऐसा कर रहे थे तो मुझको पहले कुछ अजीब लगा लेकिन थोड़ी देर बाद मुझ को आनन्द की अनुभूति होनी शुरू हो गई और मैं अपनी आँखें बंद करके पापा के हाथों का कमाल का स्पर्श महसूस करने लगी।

मैंने महसूस किया कि पापा बड़े प्यार से मुझको कामकला के लिए तैयार कर रहे थे और कोशिश कर रहे थे कि मुझको भी हर क्षण पूरा आनन्द प्राप्त होता रहे।

पापा मेरा ब्लाऊज खोल कर मेरे छोटे लेकिन काफी सख्त मम्मों को भी चूस रहे थे और अपनी ऊँगली से मेरी चूत में स्थित भग को भी रगड़ रहे थे जिससे मेरे चूतड़ अपने आप ऊपर उठ रहे थे और पापा की उंगली फिसल कर मेरी चूत के अंदर चली जाती थी जिससे मुझको थोड़ा दर्द भी होता था।

पापा ने इस दौरान मेरे हाथ को अपने नंगे हुए लंड के ऊपर रख प्रिया और मेरे हाथ को गोल करके मुट्ठी मारने का तरीका समझाने लगे।

उनके लण्ड की मोटाई और लम्बाई को महसूस करके मैं एकदम भयभीत हो गई और सोचने लगी कि इतना मोटा और लम्बा लिंग मेरी चूत में कैसे जाएगा।अपनी चूत पर हाथ लगाया तो उसको एकदम गीला पाया और उसमें से रस बिस्तर पर टपक रहा था।

अब पापा ने अपने सब कपड़े उतार दिए और मुझे भी पूरी नंगी कर लिया।थोड़ी देर मेरे होटों पर चुम्बन देने के बाद पापा ने मेरी टांगों को फैला प्रिया और वो उनके बीच में बैठ कर अपने मोटे लण्ड को मेरी चूत के मुख पर रख प्रिया और धीरे से एक हल्का धक्का मारा।

मुझको काफी तीव्र पीड़ा का अनुभव हुआ और मेरी टांगें अपने आप सिकुड़ कर बंद हो गई।कुछ देर सोचने के बाद पापा उठे और ड्रेसिंग टेबल से कोल्ड क्रीम की शीशी उठा लाये और काफी मात्रा में क्रीम मेरी चूत के अंदर और बाहर लगा दी।

फिर वो दुबारा मेरी टांगों को चौड़ा करके उनके बीच में बैठ गए और अपने अकड़े हुए लण्ड को पुनः मेरी चूत के मुंह पर रख प्रिया और फिर बहुत ही धीरे धीरे उसको मेरी चूत में घुसेड़ने लगे।

हर बार लण्ड रुक जाता था क्यूंकि मेरी चूत के अंदर वाली झिल्ली काफी सख्त थी और वो उनके लण्ड के हल्के प्रहार से फट नहीं रही थी।

फिर उन्होंने अपने लण्ड पर भी कोल्ड क्रीम लगाई और फिर एक ज़ोरदार धक्का मारा और चररर की आवाज़ से मेरी चूत की झिल्ली फट गई और पापा का लण्ड मेरी चूत में पूरा घुस गया और मैं दर्द से एकदम चिल्ला पड़ी.

पापा ने अब मुझको धीरे धीरे से चोदना शुरू किया और थोड़ी देर बाद मुझ को भी इस चुदाई में आनन्द आने लगा और मैं भी अपने चूतड़ हिला हिला कर चुदाई का आनन्द लेने लगी।

थोड़ी देर के ज़ोरदार धक्कों के बाद पापा के अंदर से कुछ गर्म पानी मेरी चूत में गिरा और वो मेरे ऊपर से उठ कर बाथरूम में चले गए और मैं भी वहाँ से उठ कर अपने कमरे में आ गई, आकर अपनी चूत को देखा तो वो एकदम खून से लथपथ हो रही थी।

अगली रात पापा ने फिर मुझ को अपने कमरे में बुलाया और मैं डरते हुए उनके कमरे में गई और उन्होंने बड़े प्यार से फिर वही चुदाई का खेल खेला मेरे साथ और हर रात खेलते रहे जब तक मम्मी वापस नहीं आ गई।

मैं डर के मारे पापा के सामने ना जाने की कोशिश करती थी लेकिन मुझ को उनके द्वारा चुदाई के दौरान अतीव आनन्द का अनुभव होता था हर बार और वो किसी ना किसी बहाने मुझको अपने कमरे में बुला ही लेते और मैं ख़ुशी ख़ुशी फिर से उनसे चुदने के लिए उनके पास चली ही जाती थी।

जैसे कि आमतौर पर होता है, पापा ने मुझ को अच्छी तरह से समझा प्रिया था कि मैं मम्मी को हमारे इस प्यार के बारे में कतई कुछ ना बताऊँ और पूरी तरह से चुप रहने के लिए पक्की हिदायत कर दी।

यह भी धमकी भी दी कि अगर मैंने इस बात को कभी मम्मी को बताया तो वो मुझको फिर कभी प्यार नहीं करेंगे।

शुरू में तो मुझको पापा से काफी शिकायत थी कि उन्होंने मेरी नादानी का खूब फायदा उठाया लेकिन जैसे जैसे पापा मुझको चोदते रहे मुझको बहुत आनन्द आने लगा और फिर मैं उनकी चुदाई की आदी हो गई।

और इस तरह मैं पापा से चुदती रही जब भी उन को मौका मिलता और यह सिलसिला चलता रहा जब तक मेरी शादी नहीं हो गई।

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

मेरा गुप्त जीवन

कुल भाग: 189
भाग 1
भाग 1: पढ़ें
भाग 2
भाग 2: पढ़ें
भाग 3
भाग 3: पढ़ें
भाग 4
भाग 4: पढ़ें
भाग 5
भाग 5: पढ़ें
भाग 6
भाग 6: पढ़ें
भाग 7
भाग 7: पढ़ें
भाग 8
भाग 8: पढ़ें
भाग 9
भाग 9: पढ़ें
भाग 10
भाग 10: पढ़ें
भाग 12
भाग 12: पढ़ें
भाग 13
भाग 13: पढ़ें
भाग 14
भाग 14: पढ़ें
भाग 15
भाग 15: पढ़ें
भाग 16
भाग 16: पढ़ें
भाग 17
भाग 17: पढ़ें
भाग 18
भाग 18: पढ़ें
भाग 19
भाग 19: पढ़ें
भाग 20
भाग 20: पढ़ें
भाग 21
भाग 21: पढ़ें
भाग 22
भाग 22: पढ़ें
भाग 23
भाग 23: पढ़ें
भाग 24
भाग 24: पढ़ें
भाग 25
भाग 25: पढ़ें
भाग 26
भाग 26: पढ़ें
भाग 27
भाग 27: पढ़ें
भाग 28
भाग 28: पढ़ें
भाग 29
भाग 29: पढ़ें
भाग 30
भाग 30: पढ़ें
भाग 31
भाग 31: पढ़ें
भाग 32
भाग 32: पढ़ें
भाग 33
भाग 33: पढ़ें
भाग 34
भाग 34: पढ़ें
भाग 35
भाग 35: पढ़ें
भाग 36
भाग 36: पढ़ें
भाग 37
भाग 37: पढ़ें
भाग 38
भाग 38: पढ़ें
भाग 39
भाग 39: पढ़ें
भाग 40
भाग 40: पढ़ें
भाग 41
भाग 41: पढ़ें
भाग 42
भाग 42: पढ़ें
भाग 43
भाग 43: पढ़ें
भाग 44
भाग 44: पढ़ें
भाग 45
भाग 45: पढ़ें
भाग 46
भाग 46: पढ़ें
भाग 47
भाग 47: पढ़ें
भाग 48
भाग 48: पढ़ें
भाग 49
भाग 49: पढ़ें
भाग 50
भाग 50: पढ़ें
भाग 51
भाग 51: पढ़ें
भाग 52
भाग 52: पढ़ें
भाग 53
भाग 53: पढ़ें
भाग 54
भाग 54: पढ़ें
भाग 55
भाग 55: पढ़ें
भाग 56
भाग 56: पढ़ें
भाग 57
भाग 57: पढ़ें
भाग 58
भाग 58: पढ़ें
भाग 59
भाग 59: पढ़ें
भाग 60
भाग 60: पढ़ें
भाग 61
भाग 61: पढ़ें
भाग 62
भाग 62: पढ़ें
भाग 63
भाग 63: पढ़ें
भाग 64
भाग 64: पढ़ें
भाग 65
भाग 65: पढ़ें
भाग 66
भाग 66: पढ़ें
भाग 67
भाग 67: पढ़ें
भाग 68
भाग 68: पढ़ें
भाग 69
भाग 69: पढ़ें
भाग 70
भाग 70: पढ़ें
भाग 71
भाग 71: पढ़ें
भाग 72
भाग 72: पढ़ें
भाग 73
भाग 73: पढ़ें
भाग 74
भाग 74: पढ़ें
भाग 75
भाग 75: पढ़ें
भाग 76
भाग 76: पढ़ें
भाग 77
भाग 77: पढ़ें
भाग 78
भाग 78: पढ़ें
भाग 79
भाग 79: पढ़ें
भाग 80
भाग 80: पढ़ें
भाग 81
भाग 81: पढ़ें
भाग 82
भाग 82: पढ़ें
भाग 83
भाग 83: पढ़ें
भाग 84
भाग 84: पढ़ें
भाग 85
भाग 85: पढ़ें
भाग 86
भाग 86: पढ़ें
भाग 87
भाग 87: पढ़ें
भाग 88
भाग 88: पढ़ें
भाग 89
भाग 89: पढ़ें
भाग 90
भाग 90: पढ़ें
भाग 91
भाग 91: पढ़ें
भाग 92
भाग 92: पढ़ें
भाग 93
भाग 93: पढ़ें
भाग 94
भाग 94: पढ़ें
भाग 95
भाग 95: पढ़ें
भाग 96
भाग 96: पढ़ें
भाग 97
भाग 97: पढ़ें
भाग 98
भाग 98: पढ़ें
भाग 99
भाग 99: पढ़ें
भाग 100
भाग 100: पढ़ें
भाग 101
भाग 101: पढ़ें
भाग 102
भाग 102: पढ़ें
भाग 103
भाग 103: पढ़ें
भाग 104
भाग 104: पढ़ें
भाग 105
भाग 105: पढ़ें
भाग 106
भाग 106: पढ़ें
भाग 107
भाग 107: पढ़ें
भाग 108
भाग 108: पढ़ें
भाग 109
भाग 109: पढ़ें
भाग 110
भाग 110: पढ़ें
भाग 111
भाग 111: पढ़ें
भाग 112
भाग 112: पढ़ें
भाग 113
भाग 113: पढ़ें
भाग 114
भाग 114: पढ़ें
भाग 115
भाग 115: पढ़ें
भाग 116
भाग 116: पढ़ें
भाग 117
भाग 117: पढ़ें
भाग 118
भाग 118: पढ़ें
भाग 119
भाग 119: पढ़ें
भाग 120
भाग 120: पढ़ें
भाग 121
भाग 121: पढ़ें
भाग 122
भाग 122: पढ़ें
भाग 123
भाग 123: पढ़ें
भाग 124
भाग 124: पढ़ें
भाग 125
भाग 125: पढ़ें
भाग 126
भाग 126: पढ़ें
भाग 127
भाग 127: पढ़ें
भाग 128
भाग 128: पढ़ें
भाग 129
भाग 129: पढ़ें
भाग 130
भाग 130: पढ़ें
भाग 131
भाग 131: पढ़ें
भाग 132
भाग 132: पढ़ें
भाग 133
भाग 133: पढ़ें
भाग 134
भाग 134: पढ़ें
भाग 135
भाग 135: पढ़ें
भाग 136
भाग 136: पढ़ें
भाग 137
भाग 137: पढ़ें
भाग 138
भाग 138: पढ़ें
भाग 139
भाग 139: पढ़ें
भाग 140
भाग 140: पढ़ें
भाग 141
भाग 141: पढ़ें
भाग 142
भाग 142: पढ़ें
भाग 143
भाग 143: पढ़ें
भाग 144
भाग 144: पढ़ें
भाग 145
भाग 145: पढ़ें
भाग 146
भाग 146: पढ़ें
भाग 147
भाग 147: पढ़ें
भाग 148
भाग 148: पढ़ें
भाग 149
भाग 149: पढ़ें
भाग 150
भाग 150: पढ़ें
भाग 151
भाग 151: पढ़ें
भाग 152
भाग 152: पढ़ें
भाग 153
भाग 153: पढ़ें
भाग 154
भाग 154: पढ़ें
भाग 155
भाग 155: पढ़ें
भाग 156
भाग 156: पढ़ें
भाग 157
भाग 157: पढ़ें
भाग 158
भाग 158: पढ़ें
भाग 159
भाग 159: पढ़ें
भाग 160
भाग 160: पढ़ें
भाग 161
भाग 161: पढ़ें
भाग 162
भाग 162: पढ़ें
भाग 163
भाग 163: पढ़ें
भाग 164
भाग 164: पढ़ें
भाग 165
भाग 165: पढ़ें
भाग 166
भाग 166: पढ़ें
भाग 167
भाग 167: पढ़ें
भाग 168
भाग 168: पढ़ें
भाग 169
भाग 169: पढ़ें
भाग 170
भाग 170: पढ़ें
भाग 171
भाग 171: पढ़ें
भाग 172
भाग 172: पढ़ें
भाग 173
भाग 173: पढ़ें
भाग 174
भाग 174: पढ़ें
भाग 175
भाग 175: पढ़ें
भाग 176
भाग 176: पढ़ें
भाग 177
भाग 177: पढ़ें
भाग 178
भाग 178: पढ़ें
भाग 179
भाग 179: पढ़ें
भाग 180
भाग 180: पढ़ें
भाग 181
भाग 181: पढ़ें
भाग 182
भाग 182: पढ़ें
भाग 183
भाग 183: पढ़ें
भाग 184
भाग 184: पढ़ें
भाग 185
भाग 185: पढ़ें
भाग 186
भाग 186: पढ़ें
भाग 187
भाग 187: पढ़ें
भाग 188
भाग 188: पढ़ें
भाग 189
भाग 189: पढ़ें
भाग 190
भाग 190: पढ़ें
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

Meri pyaari betiya Ayushi
बाप बेटी की चुदाई

Meri pyaari betiya Ayushi

Hello DK readers, mera naam Mahesh hai, meri height 5’8″ hai , peshe se mai ek businessman hu aur apni beti se pyaar karne ke pahle neeyat ka shareef bhi tha. hamari family mai hum 4 log hai. Mai, Meri wife Devi, Mera beta Veer aur beti Ayushi. ma...

14 मिनट 760
पापा की परी से पापा की दुल्हन-2(Papa ki pari se papa ki dulhan-2)
बाप बेटी की चुदाई

पापा की परी से पापा की दुल्हन-2(Papa ki pari se papa ki dulhan-2)

पिछला भाग पढ़े:-पापा की परी से पापा की दुल्हन

8 मिनट 728
Biwi Ki Jagah Beti Ko Pakad Liya
बाप बेटी की चुदाई

Biwi Ki Jagah Beti Ko Pakad Liya

Hello dosto, main Rajendra apni kahani dusra part lekar ek bar phir hazir hu, jesa ki aap sab log jante hai ki mai uss din apni biwi ko lagbhag 3 mahine ke bad chodne ke liye betab tha or thoda sa nashe mai hi tha.

10 मिनट 898

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।