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भाई बहन पठन समय: 17 मिनट पढ़ा गया: 1,104 बार

मेरा गुप्त जीवन- 176

यश देव

25 May 2026 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन- 176
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तीनों भाभियाँ अपनी अपनी चुदाई कहानियाँ सुनाने को राजी हो गई।हम सब की नज़रें गौरी भाभी के सुंदर गोल चेहरे पर टिकी हुई थी और उन्होंने मेरे हाथों से खेलते हुए बोलना शुरू किया:

मेरा छोटा भाई राजू मुझ से तीन साल छोटा है और मेरे जैसा ही गोरा चिट्टा है लेकिन कद में काफी लम्बा है, करीब करीब वो सोमू जैसी लम्बाई का मालिक है। राजू बड़ा ही नट खट और चंचल स्वभाव का था और मैं काफी ठहरे हुए और गम्भीर स्वभाव की थी।

मैं और मेरा भाई मेरे मम्मी पापा के साथ एक ही कमरे में सोते थे, वे एक पलंग पर साथ साथ सोते थे और दूसरे पर हम दोनों भाई बहन एक साथ सो जाते थे।जब भी हम सोते थे तो राजू अपनी बाहें अक्सर मेरे गले में डाल कर सोता था।

जब हम कुछ बड़े हुए तो मेरी मम्मी ने हम दोनों को साथ वाले बैडरूम में शिफ्ट कर दिया जहाँ हम एक ही पलंग पर सोते रहे।मुझको अच्छी तरह याद है कि राजू अक्सर अपने हाथ मेरे पेट पर रख कर सोता था और अपनी टांगें भी मेरे पेट पर रख देता था।मैं रात को फ्रॉक पहनती थी और राजू निक्कर में सोता था।

कई बार मैंने महसूस किया कि सोते हुए उसका हाथ मेरे पेट से खिसक कर मेरी चूत पर आ जाता था लेकिन मुझको यह कुछ भी अजीब या गलत नहीं लगता था।

मैंने अपनी चूत पर छोटे छोटे बालों को उगते हुए देखा और मेरी छाती पर चूचियाँ भी उभरना शुरू हो गई थी।और रात को कई बार मैं ने उस की लुल्ली को अपने शरीर से रगड़ खाते हुए महसूस किया था।

मैंने कई बार अपने मम्मी पापा को सेक्स करते हुए देखा था लेकिन वो कुछ धुंधला हुआ करता था क्यूंकि कमरे में कोई लाइट नहीं होती थी।उनकी तेज़ चलती हुई सांसें और फुसफुसाहट मुझको सुनाई देती थी जिससे मुझ को अपनी योनि में कुछ अजीब सा महसूस हुआ करता था।

एक रात सोये हुए मैं ने महसूस किया कि कोई सख्त चीज़ मेरे चूतड़ों पर लग रही है। मैंने सोये हुए हाथ से टटोला तो वो राजू की लुल्ली थी जो काफी सख्त हो रही थी, वो कभी मेरे चूतड़ों से रगड़ा खा रही थी और कभी वो मेरे चूतड़ों की दरार में भी घुस रही थी।

एक दो बार जब वो सोया होता था तो मैं उसकी निक्कर में हाथ डाल उसकी लुल्ली को छुआ करती थी और उसको ऊपर नीचे भी किया किया करती थी।ऐसा करना मुझको अच्छा लगने लगा और मैं अक्सर रोज़ रात को जब वो गहरी नींद में होता तो मैं उसकी लुल्ली के संग खेलती थी और साथ ही अपनी चूत पर भी ऊँगली से मसलती थी जो मुझ को बहुत अच्छा लगता था।

एक रात को राजू ने अपना हाथ सोये हुए ही मेरी चूत पर रखा और उसको मसलने लगा और मेरी चूत के बालों को अपनी उँगलियों में लपेटने लगा।

राजू की लुल्ली अब धीरे धीरे एक छोटे से लण्ड का रूप ले रही थी जो ज़रा भी छूते ही टन से खड़ा हो जाता था लेकिन शायद यह बात राजू को नहीं मालूम थी।अब वो रात को सोते सोते मुझ से लिपट जाता और मेरी छातियों पर भी कई बार हाथ फेरता था।

जब मुझको पीरियड्स शुरू हुए तो हम दोनों को मम्मी ने अलग अलग पलंग पर सुलाना शुरू कर दिया।लेकिन मैं हर रात को उठ कर राजू के लंड को ज़रूर छेड़ती थी और उसके साथ खेलती थी।

इसी छेड़ाछेड़ी में तकरीबन एक साल और निकल गया और हम दोनों का एक दूसरे के साथ वही रोज़ वाल कार्यक्रम चलता रहा।फिर एक रात राजू के लंड को छेड़ते हुए और उसको धीरे धीरे से मुट्ठी मारते हुए उसका लण्ड एकदम बहुत सख्त हो गया और फिर उस में से बड़ा ही गाड़ा सफ़ेद पदार्थ निकलने लगा, और राजू ने सोये हुए ही मुझको कस कर अपनी बाहों में बांध लिया।

मैं सकपका गई लेकिन चुपचाप उसकी बाहों में बंधी रही, जब उसने मुझको छोड़ा मैं अपने पलंग पर आ गई और पहली बार चूत में अपनी भग को उंगली से रगड़ा और एक बहुत ही रसीला स्खलन पहली बार महसूस किया।

अगली रात राजू जब गहरी नींद में सोया था तो मैं उठ कर उसके पलंग पर जाने लगी। मैं यह देख कर हैरान रह गई कि राजू के पैजामे में टेंट नुमा उभार आया हुआ था।

उस रात मैंने राजू को बिल्कुल नहीं छेड़ा और अगली रात भी मैं राजू से दूर रही लेकिन उसके बाद वाली रात में जब मैं गहरी नींद में सोई हुई थी तो मैंने महसूस किया कि कोई मेरे स्तनों और चूत पर हाथ फेर रहा था।

मैं डर गई और आँखें बंद कर के लेटी रही और हाथ लगा कर देखा तो पाया कि राजू मेरे साथ ही पलंग पर लेटा था और आँखें बंद किये ही मुझसे छेड़छाड़ कर रहा है।राजू ने मेरी नाइटी ऊपर उठा रखी थी और अपने लण्ड को पजामे से बाहर निकाल कर वो मेरी चूत पर रगड़ रहा था।उसके ऐसा करने से मुझको बहुत अधिक आनन्द की अनुभूति हो रही थी।

मैं चुपचाप इस आनन्द की अनुभूति को सहन करती रही।मैंने भी उसके पजामे में बने हुए टेंट को टटोला, उसके लण्ड को पजामे से बाहर निकाल लिया और उसको मुट्ठी से ऊपर नीचे करने लगी।

थोड़ी देर में ही राजू का लण्ड एकदम अकड़ा और फिर उसमें से सफ़ेद पानी जैसा गाढ़ा फव्वारा छूटा जो सारा मेरे हाथ में फ़ैल गया।

और जैसे ही राजू का वीर्य छूट गया, वो मुंह फेर कर फिर गहरी नींद में सो गया।

कुछ दिन बाद यह कहानी फिर दोहराई गई।हम अब दोनों एक दूसरे के शरीर से परिचित हो चुके थे लेकिन हम दोनों को लण्ड और चूत का उपयोग नहीं पता था।

फिर एक रात मेरी नींद खुली तो साथ वाले कमरे में से मम्मी पापा की आवाज़ें आ रही थी और मैं बड़ी सावधानी से उठ कर उनके बैडरूम के दरवाज़े के पास खड़ी हो गई और उनकी बातें सुनने की कोशिश करने लगी।

दरवाज़े में थोड़ा गैप मुझको मिल गया और मैं उसमें से झाँकने लगी और नाईट लाइट की हल्की रोशनी में यह देख कर हैरान हो गई कि वो दोनों ही अल्फ नंगे हुए एक दूसरे से लिपटे हुए थे।पापा का काला, लम्बा और मोटा लण्ड देख कर मैं एकदम से भयभीत हो गई और जब मैंने उस लण्ड को मम्मी की बालों से ढकी चूत में जाते हुए देखा तो मेरी हैरानी और भी बढ़ गई।

पापा मम्मी के ऊपर लेट कर अपने लण्ड को मम्मी की चूत में अंदर बाहर कर रहे थे और मम्मी भी हल्के हल्के से सिसकारी भर रही थी।यह देखते हुए मेरा हाथ अपने आप मेरे चूत के द्वार पर चला गया और मैं उसको हल्के से मसलने लगी।

उस रात मैंने पहली बार अपनी चूत में से रसदार पानी को निकलते हुए महसूस किया।जब मैंने कमरे में पुनः झाँक कर देखा तो पापा बड़ी तेज़ी से मम्मी की चूत में अपने मोटे लण्ड को पेल रहे थे और मम्मी भी अपने चूतड़ों को ऊपर उठा उठा कर पापा के लण्ड को झेल रही थी।

थोड़ी देर की इस उठक पटक के बाद पापा ने एक ज़ोर की हुंकार भरी और वो मम्मी के गोरे शरीर पर पूरे तरह से छा गये और उधर मम्मी के शरीर में भी बड़ा ही तीव्र कम्पन हुआ और उन्होंने पापा को कस कर अपने शरीर से चिपका लिया।

मैं यह देख कर बड़ी गर्म हो गई थी और फ़ौरन पलंग पर जाकर चादर ऊपर औढ़ कर तेज़ी से चूत में उंगली करने लगी।उस रात को मैंने राजू का लण्ड हाथ से नापने की कोशिश की लेकिन समझ नहीं आया कि पापा के लण्ड के मुकाबले कितना बड़ा था वो फिर भी वो मेरे हाथ की लम्बाई जितना तो था ही।

अब मन ही मन मैं राजू के साथ वही करने की सोचने लगी जो मैंने मम्मी पापा को एक दूसरे के साथ करते हुए देखा था।

एक दो बार मैंने अपनी उंगली अपनी चूत में डालने की कोशिश की लेकिन वहाँ हमेशा दर्द होने लगता तो मैं रुक जाती थी।यह बात मैं ने अपनी एक अंतरंग सहेली से की तो उसने बताया कि चूत में जब भी लण्ड जाएगा तो उसमें दर्द भी होगा और खून भी निकलेगा पहली बार… लेकिन बाद में कोई तकलीफ नहीं होगी और बहुत ही मज़ा आएगा।

अब मैं सोचने लगी कि कैसे राजू के साथ वो सब किया जाए जो मम्मी पापा कर रहे थे और भरपूर आनन्द लिया जाए।तकरीबन दो साल हम ऐसे ही एक दूसरे के साथ रात को मस्ती करते रहे लेकिन यौन सम्बन्ध नहीं बना पाये।

फिर एक दिन मम्मी पापा ने दो दिन के लिए किसी रिश्तेदार की मृत्यु के कारण दूसरे शहर जाने की मजबूरी बताई और मेरे से पूछा कि क्या मैं पीछे से अपना और राजू का ध्यान रख सकूँगी?

मैंने मम्मी को भरोसा दिलाया कि हम दोनों मिल कर एक दूसरे का ध्यान रखेंगे और आप बेफिक्र होकर जाइए।

खाना खाने के बाद हम दोनों कुछ देर रेडियो सुनते रहे फिर हम अपने बैडरूम में आ गए।

मैं बाथरूम में जाकर अपने कपड़े बदल कर और नाइटी पहन कर आ गई।उधर राजू भी अपना बनियान और पजामे को पहन कर आ गया।

मैं चुपचाप अपने बिस्तर पर लेट गई लेकिन मेरी नज़रें राजू पर ही लगी हुई थी और यह देखने की कोशिश कर रही थी कि राजू के मन में क्या चल रहा है।

राजू अपने बिस्तर पर लेटते ही गहरी नींद में सो गया और कुछ देर बाद मैं भी उठ कर उसके बिस्तर पर जा लेटी और उसके बैठे लण्ड के साथ खेलने लगी।

थोड़ी देर बाद मैंने भी महसूस किया कि राजू का हाथ भी मेरी नाइटी के अंदर प्रवेश कर गया और मेरे बालों से भरी चूत के साथ खेलने लगा, वो पूरी तरह से जागा हुआ था।

मैंने धीरे से उसके पजामे को उतार दिया और उसकी बनियान भी हटा दी और उसने भी मेरी नाइटी उतार फैंकी।अब हम दोनों पहली बार एक दूसरे के सामने अल्फ नंगे थे।

राजू का गोरा शरीर अब मेरे बराबर हो चुका था और उसके पेट के नीचे उसका लण्ड लहलहा रहा था।राजू का लण्ड अब पूरा जवान रूप ले चुका था और खूब अकड़ कर खड़ा था।

राजू ने आगे बढ़ कर मेरे को अपनी बाहों में ले लिया और मैंने भी उसके गोरे शरीर का आलिंगन किया।हम दोनों ही एक दूसरे में गुत्थम गुत्था हुए, लिपटे हुए और एक दूसरे को बेतहाशा चूम रहे थे।

मैंने अपनी चूत में हाथ लगाया तो वो एकदम से गीली हो चुकी थी और और राजू का लण्ड भी तैयार था तो मैंने राजू को इशारे से अपने ऊपर आने के लिए कहा और वो भी बिल्कुल अन्जान होने के कारण मेरे ऊपर आकर लेटा रहा।

मैं समझ गई कि सारा काम तो मुझको ही करना पड़ेगा, मैं राजू के होंटों पर लगातार चुम्बन दे रही थी और वो भी मुझको बेतहाशा चूम रहा था।

फिर मैंने उसको अपनी टांगों के बीच में बैठने के लिए कहा और उसके लण्ड को हाथ से पकड़ कर अपनी चूत के मुंह पर रख कर राजू से ज़ोर का धक्का मारने को कहा और उसने वैसे ही किया।किन्तु मेरी चूत के परदे पर आकर रुक गया, मैंने उसको ज़ोर लगाने के लिए कहा और उसके हाथों को अपने चूतड़ों के नीचे रख कर मेरी चूत को एकदम लण्ड के साथ जोड़ दिया।

मुझको तीव्र पीड़ा का सामना करना पड़ा लेकिन मैंने उस पीड़ा को सहन कर लिया और राजू ने एक पूरे मर्द के सरीखे अपने लण्ड के धके मारने शुरू कर दिए लेकिन बहुत ही जल्दी ही राजू का वीर्य स्खलन हो गया।

राजू ने अपने लण्ड को बाहर नहीं निकाला और पुनः धक्के मारने शुरू कर दिए और इस तरह राजू ने मुझको एक बहुत ही सुखद पहले स्खलन का अनुभव करवाया।

उस दिन के बाद हम दोनों हर रात काम कला का आनंद लेने लगे और यह सिलसिला आज तक चल रहा है हालाँकि हम दोनों अब शादी शुदा हैं।

जब कभी राजू को ज़रूरत होती तो वो मुझ को अपने घर बुला लेता और हम बेख़ौफ़ यौन आनन्द लेते और जब मेरे पति कहीं जाते तो राजू मुझ को घर आकर खूब चोदता था।

यह राज़ अभी तक सुरक्षित है लेकिन आज इसका उद्घाटन आप सबके सामने कर दिया तो मैं उम्मीद करती हूँ आप मेरे इस राज़ को राज़ ही रखेंगे।

इस कहानी के दौरान मेरे हाथों ने भाभी की साड़ी के अंदर जाकर उसकी चूत को खूब मसला और उसके भग को भी रगड़ा जिसके कारण गौरी भाभी तीव्र रूप से उत्तेजित हो चुकी थी।

बाकी दोनों भाभियाँ भी अपने हाथों का इस्तेमाल कर रही थी और अपने हाथों को साड़ी में डाल कर अपनी चूतों को खूब मसल रही थी और उनके चेहरे भी कामवासना से एकदम लाल हो चुके थे।

मैंने गौरी भाभी से कहा- आपकी कहानी ने तो सारे शरीर में आग लगा दी है भाभी जी… बड़ी ही सेक्सी कहानी है यह! अच्छा यह बतायें आपने अपने भाई के साथ कब सेक्स किया था आखिरी बार?

गौरी भाभी मुस्कराते हुए बोली- जिस दिन मैंने दिल्ली जाना था, उस दिन मेरे पति किसी काम से लखनऊ से बाहर गए हुए थे और वो मेरे भाई को बोल गए थे कि वो मुझको गाड़ी में बिठा आये… तो वो शाम को ही मेरे घर पहुँच गया था, आते ही उसने मुझको पकड़ लिया, सीधा बैडरूम में ले गया और मेरे सारे कपड़े उतार कर मुझको अँधाधुंध चोदने लगा और दो तीन बार मेरा छुटाने के बाद ही उस ने अपना वीर्य मेरी चूत के अंदर छुटाया।

वृंदा और नंदा भाभी ने एक साथ पूछा- गौरी भाभी, तो फिर आपको अभी तक कोई बच्चा क्यों नहीं हुआ? दो दो लंड पेलने वाले थे आपके पास?

गौरी भाभी बोली- यह बात हम सबको अभी तक समझ नहीं आई कि बच्चा क्यों नहीं हुआ मेरा अभी तक? हालांकि मेरी शादी क़ो 5 साल हो चले हैं और भाई के भी अपने दो बच्चे हो चुके हैं। शायद मेरे अंदर ही कुछ खराबी होगी?

मैं बोला- भाभी अगर आपकी इच्छा हो तो आप मुझको लखनऊ में ज़रूर मिलना क्यूंकि हमारी नौकरानी कम्मो इस मामले की बहुत जानकारी रखती है, आप उसको एक बार ज़रूर दिखा देना, शायद वो कुछ मदद कर सके। अच्छा यह बताइये अब आप कैसे चुदना चाहती हैं?

गौरी भाभी ने झट मुझ को पकड़ कर अपने आलिंगन में ले लिया और एक हॉट चुम्मी होटों पर देते हुए बोली- सोमू, तुम्हारी शक्ल मेरे भाई से बहुत मिलती है और उसको मुझको खड़ी करके बेड पर हाथों से टेक लगा कर चोदना बहुत पसंद है तो तुम भी मुझको उसी तरीके से चोदो प्लीज!

अब मैंने गौरी भाभी को ट्रेन की सीट को पकड़ कर खड़ा किया और पीछे से उसकी चूत में अपने खड़े लण्ड को डाल कर काफी तीव्र चुदाई आरम्भ कर दी।

गौरी भाभी के एकदम सफ़ेद और गोल चूतड़ों की दरार में से लण्ड के ज़ोरदार धक्के मारने लगा और दोनों भाभियाँ भी मेरे निकट आ कर गौरी भाभी के गौरवर्ण चूतड़ों पर हाथ लगा कर उनकी मुलामियत को महसूस करने लगी।

मैं गौरी भाभी के मम्मों को उनके ब्लाउज और ब्रा को ऊँची करके नंगे कर के बहुत ही आनन्द से मसल रहा था।मेरी ज़ोरदार चुदाई से बेहद गर्म हुई गौरी भाभी जल्दी ही स्खलित हो गई और काम्पते हुए मेरे शरीर से चिपक गई।

जब वो कुछ संयत हुई तो मैंने उनको अपनी सीट पर लिटा दिया।थोड़ी देर बाद जब वो सामान्य हुई तो उसने मुझको इशारे से अपने पास बुलाया और उठ कर मेरे को बहुत ही कामुक आलिंगन और चुम्बन दे दिया और फुसफुसा कर मुझसे कहा- थैंक यू मेरे भाई!

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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मेरा गुप्त जीवन

कुल भाग: 189
भाग 1
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भाग 6
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भाग 14
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भाग 26
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भाग 29
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भाग 30
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भाग 31
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भाग 32
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भाग 33
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भाग 40
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भाग 43
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भाग 44
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भाग 45
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भाग 46
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भाग 47
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भाग 48
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भाग 49
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भाग 50
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भाग 51
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भाग 52
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भाग 53
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भाग 55
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भाग 56
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भाग 57
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भाग 61
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भाग 68
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भाग 81
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भाग 82
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भाग 83
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भाग 84
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भाग 85
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भाग 86
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भाग 87
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भाग 88
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भाग 91
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भाग 92
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भाग 93
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भाग 94
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भाग 95
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भाग 96
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भाग 97
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भाग 98
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भाग 99
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भाग 100
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भाग 101
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भाग 102
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