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गुरु घण्टाल पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 817 बार

मेरा गुप्त जीवन- 91

यश देव

30 Dec 2025 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन- 91
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गाड़ी अपने ठीक समय पर लखनऊ पहुँच गई और हम सब एक दूसरे से विदा लेकर घर पहुँच गए।कम्मो और पारो ने हमारा भाव भीना स्वागत किया और हम दोनों को गर्म गर्म चाय पिलाई।

वंदना अपने कमरे में फ्रेश होने चली गई और कम्मो मेरे साथ मेरे कमरे तक आई।कम्मो ने बताया कि कोठी में सब ठीक ठाक रहा और मम्मी जी का फ़ोन आता रहता था और वहाँ भी सब कुशल मंगल है।तब मैंने उसको याद दिलाया- निर्मला मैडम तुमको याद कर रही थी, आज उनको फ़ोन ज़रूर कर लेना।कम्मो ने बताया कि दो और सेठानियों से उसकी बात हुई है और वो मुझसे मिलना चाहती हैं।तब मैंने कहा निर्मला मैडम के साथ उनका भी प्रोग्राम बना लो।लेकिन प्रश्न यह था कि वंदना के होते हुए यह संभव नहीं था तो मैंने कहा कि अभी समय है कुछ न कुछ सोचते हैं।

इतनी देर से कम्मो से बात हो रही थी लेकिन मैंने उसको ध्यान से नहीं देखा था और जब देखा तो वो बेहद सेक्सी लगी।मैंने लपक कर उसको बाँहों में भर लिया और उसके लबों पर कई चुम्मियाँ दे डाली और उसके धोती में लिपटे हुए गुदाज़ जिस्म को टटोलने लगा।उसके मुम्मे वैसे ही सॉलिड थे और चूतड़ों की वही बहार थी फिर भी मैंने उसको जी भर के हाथों से महसूस किया।

तब कम्मो बोली- रहने दो छोटे मालिक, मैं गर्म हो जाऊँगी और आपके कॉलेज जाने का टाइम भी तो हो रहा है। दिन को मैं आपको दिल खोल कर चोदूंगी।मैं कहाँ मानने वाला था, उसकी धोती को ऊपर उठा कर और अपनी पैंट और अन्डरवीयर को नीचे कर के अपने खड़े लौड़े के दर्शन उसको करवाये और फिर उसकी एक टांग को अपनी बगल में लेकर उसकी चूत में लंड घुसेड़ प्रिया, अपने दोनों हाथों को उसके चूतड़ों के नीचे रख कर मैं खुद ही आगे पीछे होकर उसको चोदने लगा।

जल्दी ही वो भी गर्म हो गई और वो भी मेरा साथ पूरी तरह देने लगी। मैंने अपने होंट उसके होटों पर रख दिए और अपनी जीभ को उसके मुंह में डाल कर आहिस्ता से चूसने लगा।

कम्मो इतने दिनों से चुदी नहीं थी, वो भी बड़ी कामुक हो रही थी और मेरी थोड़ी देर की चुदाई से ही वो झड़ गई।हम दोनों ने कपड़े ठीक किये और तभी ही वंदना भी आ गई कमरे में और बड़ी उदास होकर बोली- अभी घर से फ़ोन आया है कि मेरी मम्मी बहुत बीमार है, मुझको तो अभी ही गाँव जाना होगा।यह कहते हुए वो रोने लगी।

मैंने और कम्मो ने उसको चुप करवाया और उसको तसल्ली दी कि सब ठीक हो जाएगा।वो जल्दी से अपना जाने का छोटा सा बैग तैयार करके ले आई और मैं उसको बस स्टैंड पहुँचा आया और उसके गाँव की बस में भी बिठा आया और उसको कुछ रूपए भी दे दिए ताकि रास्ते में कष्ट ना हो, यह भी कहा कि वो मुझको घर पहुँच कर फ़ोन ज़रूर करे और मम्मी का हाल भी बता दे।

कोठी आकर मैं आराम से नहाया और नाश्ता करने लगा, फिर आराम करने लगा क्यूंकि आज कॉलेज में ट्रिप वाले छात्रों की छुट्टी थी।कम्मो ने थोड़ी देर बाद निर्मला मैडम से बात की और सब पूछताछ करने के बाद उसने कहा- अगर आप आज आ सकती हैं तो आ जाइए मैं फिर आप का चेकअप कर लेती हूँ, जैसा हुआ वैसा प्रोग्राम बना लेंगे।

तब कम्मो ने बताया दो सेठानियों ने भी अपना चेकअप करवाया है और वो दोनों भी गर्भाधान के लिए तैयार हैं लेकिन पहले वो आप से मिलना चाहती हैं।मैंने कहा- आने दो, लेकिन पहले मैडम का काम कर लेते हैं फिर दूसरे के बारे में सोचेंगे।

एक घंटे के बाद ही निर्मला मैडम आ गई और कम्मो उनको लेकर दूसरे बैडरूम में चली गई।कोई 15 मिन्ट बाद ही वो दोनों बाहर आ गई।फिर हम सब मिल कर बैठक मैं चाय पीने लगे और तब कम्मो बोली- मैंने कल का टाइम मैडम के साथ फिक्स किया है, वो आज से स्पेशल डाइट खा कर कल आएँगी।मैडम ने हामी में सर हिला प्रिया।

कम्मो ने कहा- ऐसा है मैडम जी, मेरा यह सिस्टम 100% सही नहीं होता। हाँ 50-60 % यह सही बैठ रहा है और वो भी अगर सोमू वीर्य दान करे तो! मैंने इसका वीर्य लैब में चेक करवाया था और जो रिपोर्ट आई थी उसमें साफ़ लिखा था कि सोमू के स्पर्म्स बड़े ही शक्तिशाली हैं और पूरी तरह से गर्भ के लिए सक्षम हैं। इसीलिए अब तक जितनी भी सोमु के वीर्य से गर्भाधान की कोशिश की हैं वो सब 100% कामयाब हुई हैं। आशा है मैडम जी, आपके केस में भी पूरी सफलता मिलेगी हमको!

निर्मला मैडम बोली- नहीं नहीं, मुझको तुम्हारे चेकअप और ट्रीटमेंट पर कोई शक नहीं है लेकिन यह जान कर मुझ को तसल्ली मिल रही है कि सोमू की वजह से मैं माँ बन सकती हूँ अगर प्रभु चाहें तो।कल आने का वायदा कर के मैडम चली गई और हम सब अपने कामों में लग गए।

मैं खासतौर पर राम लाल चौकीदार से मिला और उसको थोड़ा बहुत इनाम भी प्रिया और कहा कि तुम्हारी होशियारी के कारण मेरा मन बड़ा शांत रहता है कि आप कोठी का पूरा ध्यान रख रहे हो।

अगले दिन मैं कॉलेज से मैडम के साथ ही निकला और घर आकर हम दोनों को कम्मो ने स्पेशल डाइट का लंच करवाया।और फिर हम दोनों मेरे ही बैडरूम में सो गए, तकरीबन एक घंटे बाद ही हम जागे, फिर कम्मो ने हम दोनों को निर्वस्त्र कर प्रिया।

मैंने मैडम को बाँहों में भर लिया और उनके होटों को लगातार चुम्मियों से तर कर प्रिया और उनके गोल और सॉलिड मुम्मों को काफी देर सहलाया और चूसा।मम्मों की दोनों चूचियाँ एकदम से लंड की माफिक अकड़ गई थी और उनको चूसने के बाद में नीचे बैठ गया और मैडम की चूत में मुंह डाल कर चूत के लबों को चूसा और फिर उसकी भग को काफी देर अपने दोनों लबों में लेकर चूसता रहा और मैडम बार बार मेरा सर पकड़ कर मेरे मुंह को हटाती थी लेकिन मैं फिर भी अलमस्त होकर चूसता ही रहा।

अब मैंने मैडम को अपने हाथों में उठा लिया और बिस्तर पर ले गया, धीरे से उनको वहाँ लिटा प्रिया और अपने लौड़े को सीधा तान कर उनकी जांघों के बीच बैठ कर लंड को चूत के अंदर डाल प्रिया।तपते हुए लोहे को चूत में जाते ही मैडम हाय हाय करने लगी और मुझको अपने मुम्मों के बीच लिटा कर मेरे मुंह को बेतहाशा चूमने लगी।

कम्मो के सिखाये मुताबिक़ मैं पहले धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा और मैडम की गर्म और एकदम गीली चूत का आनंद लेने लगा।फिर उनके मुम्मों को चूसते हुए अपनी स्पीड धीरे धीरे तेज़ करने लगा और जब मैडम नीचे से मेरा साथ देने लगी तो मैंने अपनी स्पीड और भी तेज़ कर दी। मेरी कोशिश थी कि मैडम पूरे कामुकता के जोश में आ जाएँ तो मैं अपना असली हथियार फेंकू।

थोड़ी देर में मैडम अपने पूरे जोश-ओ-खरोश में आ गई तो धक्कों की स्पीड बहुत ही तेज़ कर दी और जल्दी ही मैडम का पानी छूट गया और उन्होंने अपनी जांघों कस कर मेरे इर्द गिर्द लॉक कर दीं।

लेकिन मेरा मिशन तो अभी अधूरा था, मैं पूरी अपनी यौन शक्ति के साथ फुल स्पीड चुदाई में लग गया और मेरे धक्कों की स्पीड इतनी तीव्र हो गई कि मैडम तड़फड़ाती हुई दूसरी बार भी स्खलित हो गई और अब कम्मो ने इशारा किया और मैं अपने लंड की पोजीशन ठीक करके उसके गर्भाशय के मुंह को ढूंढ रहा था।और जब मुझ को आभास हुआ कि गर्भाशय का मुख कहाँ है, मैंने अपना लंड का रुख उस तरफ किया और वीर्य की जोरदार पिचकारी वहाँ छोड़ दी।

गर्म वीर्य वहाँ पड़ते ही मैडम ने अपनी दोनों टांगें उठा ली और कम्मो ने झट से उनकी कमर के नीचे दो तकिये रख दिए।मैं भी मैडम की जांघों में थोड़ी देर अपने सख्त लंड को डाल कर बैठा रहा जब तक मेरा वीर्य पूरी तरह से स्खलित नहीं हो गया।और फिर कम्मो के इशारे पर ही मैं वहाँ से उठा और अपने गीले लंड को निकाल कर मैडम के सामने ही खड़ा रहा।

मैडम ने एक हाथ बढ़ा कर मेरे गीले लंड को पकड़ कर अपने मुंह में डाल लिया और उसको हल्के हल्के चूसने लगी।इधर कम्मो अभी भी मैडम की टांगों को ऊंचा करके रखा हुआ था ताकि वीर्य अधिक से अधिक मात्रा में मैडम की चूत में ही रहे!मैडम को मेरे लंड को चूसने में अति आनन्द आ रहा था, वो लगी रही चुसाई में!अब कम्मो ने मैडम की टांगों को नीचे कर प्रिया था और उनकी चूत पर एक छोटा तौलिया रख प्रिया ताकि वीर्य ज़्यादा बाहर ना निकले।

मैडम बोली- सोमू यार, तुम तो गज़ब के चोदू हो!कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

अभिषेक सिम्पल

3 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

नितिन कुमार

3 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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