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Group Sex Story पठन समय: 14 मिनट पढ़ा गया: 683 बार

मेरा गुप्त जीवन- 146

यश देव

03 Apr 2026 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन- 146
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तकरीबन 10 मिन्ट की तीव्र धक्काशाही में रति का तीव्र स्खलन हो गया और वो बेड में औंधे मुंह ही लेट गई।मैं वहाँ से उठा और बैठक में आकर बैठ गया।

तब तक रति भी अपने कपड़े ठीक ठाक कर के बैठक में आ गई और बोली- सोमू, तुम तो बहुत ही पॉपुलर हो गए हो सारे लखनऊ में! अब हमारा क्या होगा?मैं भी मुस्कराते हुए बोला- तुम्हारा क्या होना है?रति उदास होते हुए बोली- वही तो… अब तुम्हारा प्यार तो कई लड़कियों में बंट जाएगा, फिर हमारा नंबर तो लगना मुश्किल हो जाएगा ना?

मैं बोला- नहीं री रति, तू तो मेरी फेवरिट कुंवारी कन्या है, तेरे बिना कैसे कटेगी यह दोपहरिया? क्या तुम को अपने भैया से डर नहीं लगता? क्या सोचेंगे वो तुम्हारे यहाँ बार बार आने के बारे में?रति बड़ी बेरुखी से बोली- क्या सोचना है हमारे बारे में? हम कॉलेज में एक साथ पढ़ते हैं और फिर हम दोनों भी हम उम्र हैं तो मैं नहीं समझती वो कुछ भी सोचेंगे हमारे बारे में।

मैं बोला- ठीक है, अब तुम जाओ अपने घर, मैं थोड़ा लेट लेता हूँ।यह कह कर मैं उसको बाहर जाने के दरवाज़े तक छोड़ने के लिए चल पड़ा और जाते हुए उसके चूतड़ों पर हाथ भी फेरता हुआ गया।जाने से पहले रति मुझको कल अपने साथ कॉलेज ले जाने के लिए ज़ोर दे कर याद करा गई।

अगले दिन कॉलेज में हम दोनों पहुंचे तो कई लड़के और लड़कियों ने हम को घेर लिया, तरह तरह के सवाल पूछे जाने लगे ‘कैसे करी शूटिंग? कौन कौन सी हीरोइन के साथ डांस करा? कैसे करा? खूब ऐश लूटी होगी?’

मैं सिर्फ चुप रहा और केवल मुस्कराता रहा और फिर रति का हाथ पकड़ कर हम अपनी अपनी क्लासों में आ गए।वहाँ भी सबने मुझको घेर लिया और मेरे साथ हाथ मिलाने की भरसक कोशिश करने लगे।लड़कियों ने तो काफी करीब आ कर हाथ मिलाया और इस अफ़रा-तफरी में उनके मम्मे और चूतड़ों के साथ हाथ लगाई का कार्यक्रम चलता रहा।उनके भी हाथ यदा कदा मेरे लौड़े का भी नाप लेते रहे।

और यह कार्यक्रम चलता रहता यदि हमारे प्रोफेसर साहिबा क्लास में ना आ जाती।उन्होंने भी मुझको संबोधन करके मुझको बधाई दी।

लंच इंटरवल में कैंटीन वो कल वाली पांचों लड़कियों ने घेर लिया, बड़ी बेशर्मी से मेरे साथ चिपक कर बातें करने लगी जिसके कारण कैंटीन में सबकी नज़रें हम पर ही थी।

मैंने चुपके से उनको समझाया कि सार्वजानिक जगह पर तो कुछ लिहाज़ करें और उन्होंने भी शाम को मेरे घर मिलने का वायदा ले कर ही पीछा छोड़ा।डांस रिहर्सल भी काफी हॉट रहा, सब लड़कियाँ यह चाहती थी कि चिपको डांस उनके साथ भी किया जाए।

जब तक अंजलि मैडम नहीं आई, तब तक लड़के और लड़कियाँ आपस में मेरे चिपको डांस की नक़ल करते रहे।मैडम के आ जाने के बाद सबने अपने निर्धारित डांस स्टेप्स शुरू कर दिए।

रिहर्सल खत्म कर के मैं और रति बाइक पर और हमारे पीछे कार पर वो पांचों लड़कियाँ भी हमारी कोठी पहुँच गई। कम्मो ने सब का स्वागत किया।रति तो अपने घर चली गई और हम सब बैठक में बैठ गए।

कम्मो जलपान ले आई और उसके बाद मैंने सब लड़कियों का परिचय पूछा तो श्रुति ने सबके नाम बताये और कहा- सब यहीं के आस पास कोठियों में ही रहती हैं और पैदल हमारे घर आ जा सकती हैं।मैं श्रुति की तरफ देखते हुए बोला- तो कहिये श्रुति मैडम, आप क्या करना चाहती हैं?श्रुति बोली- थोड़ी देर चिपको डांस हो जाए हम सब के साथ, तो मज़ा आ जाए?

मैं बोला- एक साथ तो आप सबके साथ नहीं नाच सकता ना… सो आप भी दो दो के ग्रुप में डांस करिये जैसे कि मैं और श्रुति करेंगे। ठीक है?अब मैं और श्रुति बैठक में एक दूसरे के गले में बाहें डाल कर चिपको डांस करने लगे।श्रुति के छोटे लेकिन सॉलिड मम्मे मेरी छाती से चिपके हुए थे और मेरे दोनों हाथ भी उसके चूतड़ों पर टिके हुए थे और मेरा अकड़ा हुआ लंड श्रुति की चूत पर सलवार कमीज के बाहर से रगड़ा मार रहा था।

बाकी चारों लड़कियाँ भी आपस में एक साथ चिपक के डांस कर रही थी और एक दो आपस में किसिंग भी कर रही थी।श्रुति अब काफी कामुक हो चुकी थी और उसका हाथ 2-3 बार लौड़े को छू चुका था, मैंने भी उसकी चूत को कपड़ों के बाहर से सहलाया और वो मेरी आँखों में झाँक कर यह देखने की कोशिश कर रही थी कि मैं उसको चोदने के लिए तैयार हुआ कि नहीं।

डांस के अगले दौर में श्रुति ने शर्म को ताक पर रख कर मेरे लबों पर एक गर्म चुम्मी जड़ दी जिसको उसकी सहेलियों ने भी देखा और जवाब में मैंने उसको अपनी बाहों में भींच लिया और उसके चुम्बन का जवाब हॉट फड़कती हुई किस से प्रिया।

अब हम वास्तव में चिपक कर डांस कर रहे थे जिसमें मेरा लंड तो तकरीबन उसकी चूत में घुसा हुआ था कपड़ों के ऊपर से!फिर श्रुति मेरे कान में फुसफुसाई- आपकी इच्छा कुछ बनी क्या?मैं मुस्कराया- वो तो सब आपकी इच्छा पर निर्भर करता है।श्रुति भी मुस्करा दी- मेरी तो इच्छा हो रही है, बाकी मैं अपने फ्रेंड्स से भी पूछ लेती हूँ।

वो मुझ को छोड़ कर अपनी सहेलियों के पास गई और उन्होंने भी थोड़ा शर्माते हुए हामी भर दी।मैंने कम्मो को आवाज़ दी और वो जल्दी ही बैठक में आ गई और मैंने उसको लड़कियों की इच्छा बताई तो वो बोली- छोटे मालिक, आप पाँचों के साथ कैसे कर पाओगे? मेरे ख्याल से यही अच्छा होहा कि आप इन में से दो के साथ आज चुदाई कर लें और बाकी के साथ फिर किसी और दिन का टाइम दे दें।

श्रुति ने बाकी लड़कियों से पूछा तो वो कहने लगी क़ि करेंगी तो एक साथ नहीं तो नहीं करेंगी।कम्मो मेरी तरफ देखने लगी और साथ ही उसने हल्के से हाँ में सर हिला प्रिया।

फिर कम्मो उन सबको लेकर बैडरूम में आ गई और फिर उनसे चुपके से कुछ पूछा और फिर बोली- सब ठीक है छोटे मालिक, आप एक एक करके इन सबको चोदो और हम मिल कर इन कुंवारी लड़कियों को चुदाई के लिए तैयार कर देंगी।

कम्मो उनको बोल गई- आप अपने कपड़े उतारो और छोटे मालिक के भी कपड़े भी उतारो, मैं अभी आती हूँ।श्रुति ने सबसे पहले अपने कपड़ों को उतारने के लिए हाथ बढ़ाया ही था, कि मैं उसके पास पहुँच गया और एक कामुक जफ्फी उसको मारी और उसके लबों पर एक ज़ोरदार चुम्मी कर दी।

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फिर मैं उसके कपड़े उतारने में संलग्न हो गया और एक एक कर के जैसे ही उसके कपड़े उतरे, वो काफी हसीं लड़की के रूप में निकलती आ रही थी। उसके मम्मे बड़े गोल और सॉलिड थे लेकिन साइज में मध्यम से थे और उसके चूतड़ भी गोल और काफी सख्त थे और उसकी चूत भी काले बालों की काली घटा में छिपी हुई थी।

मैंने बाकी दूसरी लड़कियों की तरफ देखा तो वो भी प्रायः नग्न हो चुकी थीं और लाइन में खड़ी हो गई थी।चारों काफी खूबसूरत थीं और उनके शरीर भी बहुत उत्तेजक और मादक थे। नंबर तीन लड़की का शरीर उन सबसे बहुत अधिक सुन्दर था क्यूंकि उसके मम्मे बहुत ही मोटे और सॉलिड थे और उसके चूतड़ भी गोल और उभरे हुए थे।

श्रुति ने बताया कि उसका नाम नाज़ो था और वो एक नवाबी खानदान से सम्बन्ध रखती थी और काफी रईस थी।वो ही अपनी कार में सब लड़कियों को बिठा कर हमारी कोठी ले कर आई थी।नाज़ो हमारी बातें सुन कर हमारे पास आ गई थी और आते ही उसने मेरे लौड़े पर पैंट के बाहर से हाथ रख प्रिया।

नाज़ो ही मेरे कपड़े उतारने लगी और जल्दी ही उसने मुझ को अल्फ़ नंगा कर प्रिया और झुक कर मेरे लौड़े को अपने मुंह में ले लिया और उधर बाकी की सब लड़कियों ने मुझ को घेर लिया और मेरे अंगों से अपने सुन्दर शरीरों के अंग रगड़ने लगी।

मेरा लंड अब इतना सख्त खड़ा था कि वो पूरी तरह से खड़ा होकर मेरे पेट से चिपका हुआ था।इससे पहले कि श्रुति मुझ पर कब्ज़ा करती, नाज़ो ने आगे बढ़ कर मुझ पर अपना हक जमा प्रिया और अपने गोल मोटे और सॉलिड मम्मों को मेरी चौड़ी छाती से रगड़ने लगी और मेरे मुंह को खींच कर उसने अपने लबों को मेरे होटों के साथ चिपका प्रिया और उन को खूब मज़े से चूसने लगी।

बाकी की चार लड़कियाँ भी मेरे साथ चिपकने की कोशिश करने लगी लेकिन नाज़ो उन सबसे तेज़ थी, उसने मुझको झट से पलंग पर लिटा प्रिया, खुद मेरे पर ऊपर चढ़ बैठी और जल्दी से मेरे अकड़े हुए लंड को बालों भरी चूत के मुंह पर रख कर एक ज़ोरदार धक्का मारा और मेरा 7-8 इंच का लौड़ा उसकी फूली हुई और निहायत ही गीली चूत में एकदम से पूरा समा गया।

अब तक कम्मो भी वापस आ गई थी, वो भी एकदम निर्वस्त्र होकर लड़कियों को लेकर पलंग पर विराजमान हो गई और सबको एक दूसरी के साथ चूमा-चाटी में व्यस्त कर प्रिया।

अब मैं भी नाज़ो को पूरी तल्लीनता से चोदने लगा और हर धक्के का मैं नीचे से जवाब देने लगा।मेरा लंड उसकी चूत के अंत तक जा रहा था, उसको भी महसूस हो रहा था और मैं भी उसके गोल मोटे मुम्मों को मुंह में लेकर चूसने की कोशिश करने लगा, उसके गोल मोड़े चूचुकों को मुंह में लेकर बहुत ही तेज़ी से चूसने लगा और एक ऊँगली से उसकी चूत पर स्थित उसकी भग में भी ऊँगली से घर्षण करने लगा।

मेरे ऐसा करने के कुछ क्षण बाद ही नाज़ो की चूत में खुलना बंद होने की प्रकिया शुरू हो गई और कुछ ही धक्कों के बाद ही नाज़ो का शरीर कंपकंपी करता हुआ स्खलित हो गया और वो अपने मोटे मम्मों के साथ मेरे ऊपर पूरी तरह से पसर गई।

कम्मो ने उठ कर नाज़ो को मेरे ऊपर से हटाया और श्रुति को लाकर मेरे साथ लिटा प्रिया।

मैंने हल्के से उससे पूछा- कैसे चुदोगी मैडम? घोड़ी या फिर खड़े होकर या फिर नीचे लेट कर या गोद में बैठ कर या फिर कमरे का चक्कर लगाते हुए?श्रुति बोली- यह कमरे में चक्कर वाला फ़क कैसा होता है? यह तो मैंने कभी नहीं सुना और ना ही देखा है, आज यही आज़मा लेते हैं, क्यों सोमू जी?मैं बोला- ठीक है श्रुति जी जैसा आप कहो!

फिर श्रुति के साथ भी हॉट चुम्बन और गहरी जफ्फी लगाने के बाद जब उसको उंगली से टेस्ट किया गया तो वो भी पूरी तरह से तैयार थी और काफी पनियाई हुई थी।अब मैंने खड़े होकर श्रुति को उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर उठा लिया और निशाना साध कर अपने लौड़े को उसकी गीली चूत के मुंह पर रख कर एक धक्का मारा तो सम्पूर्ण गृह प्रवेश!

श्रुति की बाहें मेरे गले में थी और वो अपने चूतड़ उठा उठा कर स्वयं ही धक्के मार रही थी, मैं तो केवल उसको उठा कर कमरे में घूम रहा था जैसे मैं हज़रत गंज में घूम रहा हूँ।

कोई 4-5 चक्कर ही काटें होंगे तो श्रुति ने अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने की स्पीड बड़ी तेज़ कर दी और अपनी बाहों के घेरे को मेरे गले में बहुत ही टाइट कर प्रिया और फिर वो हुंकार भरते हुए मेरी छाती से चिपक गई और ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी।

जब वो कुछ रुकी तो मैंने उसको बेड पर लिटा प्रिया और साथ मैं भी लेट गया।कम्मो ने अब कुछ देर का इंटरवल घोषित किया और बाकी तीनो लड़कियाँ मेरे साथ आकर लेट गई।

मेरे साथ वाली लड़की का नाम पूछा तो उसने अपना नाम रोशनी बताया और मेरे दूसरी तरफ लेटी लड़की ने अपना नाम शमा बताया और तीसरी ने अपना नाम मीनू बताया।तब कम्मो ने हम सब को कोकाकोला की बोतलें खोल कर दे दी और स्वयं भी कोक पीने लगी।

रोशनी ने घोड़ी बन कर चुदवाने की इच्छा जताई, मैं उसको चोदने के लिए तैयार हो गया और उसे गर्म करने की ज़रूरत नहीं थी क्यूंकि उसको कम्मो और उसकी सहेलियों ने उसको पूरी तरह से तैयार कर रखा था बस सिर्फ चूत में लंड डालने की ही कसर थी।

अगले आध घंटे में बाकी तीनों लड़कियों का भी कल्याण कर प्रिया, उन सबकी चुदाई उनकी इच्छा के मुताबिक कर दी और फिर मिलने का वायदा करके हमने उनको रवाना कर प्रिया।सबने जाते हुए कहा- सोमू राजा, तुम सिर्फ एक अच्छे डांसर ही नहीं हो बल्कि एक मदमस्त चोदू राजा भी हो!मैंने जवाब में कहा- थैंक यू वेरी मच!

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

मेरा गुप्त जीवन

कुल भाग: 189
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भाग 2
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भाग 4
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भाग 5
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भाग 6
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भाग 8
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भाग 9
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भाग 10
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भाग 20
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भाग 24
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भाग 26
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भाग 28
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भाग 30
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भाग 32
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भाग 33
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भाग 39
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भाग 40
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भाग 42
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भाग 43
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भाग 44
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भाग 45
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भाग 46
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भाग 50
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भाग 86
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भाग 94
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भाग 95
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भाग 98
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भाग 99
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भाग 100
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भाग 101
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भाग 102
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भाग 105
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

रॉक राजपूत

1 month ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

सुन्दर सिंह

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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