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भाभी की चुदाई पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 878 बार

मेरा गुप्त जीवन -65

यश देव

16 Nov 2025 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन -65
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जब उठा तो भाभी जा चुकी थी सिर्फ मैं ही लेटा हुआ था एकदम नंगा। मैं उठ कर नहाने चला गया और फ्रेश होकर बैठक में आकर बैठ गया जहाँ कम्मो मेरे लिए चाय ले आई थी।चाय पीते हुए हम दोनों भैया के बारे में सोचते रहे कि कैसे मनाया जाए उनको!

मैंने कम्मो से पूछा- अगर भैया कहें कि मैं कम्मो की भी चूत लूंगा तो क्या तुम तैयार हो जाओगी?कम्मो बोली- आपका क्या विचार है? मुझ को क्या करना चाहिए?मैं बोला- नहीं नहीं, तुम अपनी मर्ज़ी बताओ?कम्मो बोली- मेरी मर्ज़ी तो जो आपकी मर्ज़ी होगी, वही मेरी भी होगी।

मैं मुस्करा प्रिया- तुम बड़ी चालाक लोमड़ी हो! देखो कम्मो, आज तक तुमने मेरे लिए कई औरतों का इंतज़ाम किया और कभी कोई ऐतराज़ नहीं उठाया तो अगर तुमको भी कोई मर्द पसंद कर लेता है तो मुझको ख़ुशी ही होगी। क्यों मैंने ठीक कहा न?कम्मो ज़ोर से हंस दी और बोली- छोटे मालिक, आपकी उम्र तो ज़्यादा नहीं है लेकिन आप बात बड़ी ही सुलझी हुई करते हो!

यह बात करके हम दोनों भी बैठक में आ गए जहाँ भाभी पहले से बैठी थी।मैंने बात छेड़ते हुए कहा- भाभी कल रात जब आप मेरे कमरे में आई तो क्या आपको किसी किस्म की झिझक हुई थी? यानि अगर मैं जाग जाता हूँ तो कहीं शोर न मचाऊँ? ऐसा आपने सोचा था क्या?भाभी बोली- हाँ सोमू, मैं पहले बहुत डर गई थी यह सोच कर कि न जाने सोमु क्या कहे? कहीं शोर न मचा दे या फिर मुझको बुरा भला न कहने लगे? लेकिन तुम्हारा खड़ा लंड देखा तो मन पक्का कर लिया कि आज इस छोकरे को तो चोद ही दूंगी, बाद की बाद में देखी जायेगी।मैं बोला- अच्छा भाभी, आप में इतनी हिम्मत है क्या?

भाभी बोली- वो क्या है सोमू, तुम्हारे पयज़ामे का टेंट इतना ऊंचा खड़ा था कि मेरा पहले मन हुआ कि देखूँ कि क्या छुपा रखा है पायज़ामे में? जब अंदर घुस कर मैंने अपना मुंह नीचे करके पायजामा सरकाया तो तुम्हारा लंड ज़ोर से मेरे मुंह पर आकर लगा। पहले तो मैं हैरान हुई कि यह क्या लगा मुझको, लेकिन जब मैंने तुम्हारे लंड को लहराते देखा तो मुझको गुस्सा आ गया कि इस छोटे छोकरे की इतनी हिम्मत कि मुझको अपने लंड से थप्पड़ मारे!

मैं और कम्मो हंसी के मारे लोटपोट हो गए मैं बोला- फिर क्या हुआ?भाभी बोली- फिर क्या था, मैंने अपनी नाइटी ऊपर उठाईं और तुम्हारे लंड पर धीरे से बैठ गई, मेरी चूत तो गीली हो रही थी, उसके मुंह पर रखते ही वो इसको पूरा का पूरा अपने अंदर निगल गई।

मैं और कम्मो बड़े ध्यान से सारी बात सुन रहे थे, भाभी की बातें सुनने के बाद मेरे दिमाग में एक ख्याल आया कि क्यों न भाभी वाली कहानी फिर से दोहराएँ भैया के साथ?

मैंने कम्मो और भाभी को भी यह बात बताई, मैंने कहा- जब भैया आ जाएँ, उस रात आप तो भैया के साथ सोयेंगी। इधर मैं और कम्मो अपने कमरे में सो जाएंगे। भैया के सोने के ठीक एक घंटे बाद तुम उनको जगा देना कि कुछ अजीब आवाज़ें आ रही हैं, उठो चल कर देख तो लो। भैया को लेकर जैसे ही तुम बाहर निकलोगी तो हमारे कमरे से ‘अह्ह्ह उह्ह्ह’ की आवाज़ें आ रही होंगी। तुम भैया को लेकर हमारे कमरे में आ जाना जहाँ कम्मो को मैं चोद रहा हूँगा और वो ज़ोर ज़ोर से आह उह्ह कर रही होगी।

कम्मो बोली- यह ठीक है, ऐसा करने से भाभी के ऊपर भी बात नहीं आएगी और हम चुदाई का पहला पाठ भी भैया को पढ़ा देंगे, क्यों भाभी?मैं बोला- लेकिन भाभी, भैया अंदर आने से ज़रूर कतराएँगे कि किसी के चुदाई में दखल मत दें लेकिन आपको उनका हाथ पकड़ कर अंदर लाना होगा और एक और चुपचाप खड़ा कर देना होगा।

भाभी बोली- यह मैं कर लूंगी। और हो सका तो उनके बैठे हुए लंड को हाथ से खड़ा करने की कोशिश ज़रूर करूंगी।

मैं उठा और झट से भाभी को एक ज़ोरदार किस कर दी होटों पर और फिर कम्मो को भी होटों पर किस की और कस कर एक जफ़्फ़ी भी डाली।हमारा यह प्लान तो बन गया और अब भैया के आने की इंतज़ार करने लगे।

उस रात को मैंने और कम्मो ने भाभी को हर तरह से चोदा, कभी घोड़ी, कभी गोद में उठा कर और कभी गोद में बिठा कर कभी आगे से और कभी पीछे से यानि कोई भी पोजीशन नहीं बची जिससे हम दोनों ने भाभी को न चोदा हो।सुबह होने तक भाभी निढाल हो चुकी थी और कहने लगी- मेरी तो पूरी तृप्ति हो गई, सारे जीवन में ऐसी चुदाई नहीं हुई।

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फिर कम्मो ने भाभी को धर दबोचा कभी वो नीचे और कभी भाभी नीचे, यहाँ तक भाभी ने हाथ जोड़े- बस बाबा, अब और नहीं।फिर हम तीनों एक दूसरे को जफ़्फ़ी डाल कर सो गए।रात को जब भी मेरी नींद खुलती तो मैं दोनों की चूत में ऊँगली डाल कर देखता था कि कौन सी ज़्यादा गीली है।जो भी ज़्यादा गीली होती उस चूत पर चढ़ जाता था और जब तक वो छूट नहीं जाती थी तब तक उसको चोदता रहता था।उसके बाद मैं लंड को कम्मो की चूत में पीछे से डाल कर सो जाता था।

सुबह मेरी नींद तब खुली जब शायद कम्मो मेरे लिए चाय लेकर आई थी, तब तक भाभी जा चुकी थी अपने कमरे में!

मैं बाहर निकला और चुपके से भाभी के कमरे की तरफ चला गया। भाभी शायद बाथरूम में नहा रही थी। मैंने बाथरूम का हैंडल घुमाया तो खुला हुआ था, मैं दरवाज़ा खोल कर चुपके से अंदर आ गया, देखा कि भाभी मुंह पर साबुन लगा रही थी और उसको पता नहीं चला कि मैं अंदर आ गया हूँ।

अभी साबुन लगाते हुए वो उसके हाथ से फिसल गया और थोड़ी दूर चला गया और भाभी बंद आँखों से ही हाथ इधर उधर करके उस को ढूंढने लगी।मुझको शरारत सूझी और मैंने साबुन को पकड़ा और भाभी के हाथों में दे प्रिया।पहले तो भाभी कुछ नहीं समझी लेकिन फिर जब समझ आई तो झट से बोल पड़ी- कौन अंदर आया है?

भाभी पानी डालने के लिए लोटा ढून्ढ रही थी वो मैंने हटा प्रिया और उसकी जगह अपना खड़ा लंड निकाल कर भाभी के हाथ में दे प्रिया।भाभी तो पहले परेशान हो गई कि यह क्या चीज़ हाथ में आ गई, लेकिन वो जल्दी ही संभल गई और पहचान गई कि यह सोमु का लंड है।उसने झट उसको अपने मुंह में डाल प्रिया और उसको चूसने लगी हालांकि उसकी आँखें बंद ही थी।

अब मैंने उसके मुंह पर पानी का लोटा डाला तो सारा साबुन साफ़ हो गया और भाभी ने आँखें खोली और मुझको देखा तो एकदम से खुश हो गई, उसने मेरे को अपनी नंगी छातियों से चिपका लिया और मेरा पायजामा भी खींच कर उतार प्रिया और कुरता भी उतार प्रिया।अब हम दोनों नंगे हो गए और एक दूसरे को नहलाने लगे।

थोड़ी देर ऐसी चुदाई के बाद ही मैंने भाभी को सीधा खड़ा किया और उसकी एक टांग को अपने ऊपर लेकर लंड को चूत में डाल प्रिया।

काफी देर ऐसे चोदने के बाद भाभी काफ़ी तीव्र रूप से झड़ गई और मुझको अपने से लिपटा कर ज़ोर ज़ोर से काम्पने लगी और हाय हाय करने लगी।मैंने भाभी को कस कर अपने से लिपटाये रखा, जब वो थोड़ी शांत हुई तो मेरे मुंह को चुम्बनों से भर प्रिया।भाभी बोली- सोमू यार, तुम तो मुझको बिगाड़ कर ही रख दोगे, अब तुम्हारे बिना मैं कैसे जी पाऊँगी, उफ़्फ़, क्या चुदाई है तुम्हारी।

फिर हम एक दूसरे का जिस्म सुखाते हुए बाहर निकले और सामने ही कम्मो को मुस्कराते हुए पाया।हम दोनों को नंगा देख कर वो भी बड़ी खुश हुई और झट से मुझको बड़े तौलिये में ढक कर मेरे कमरे में ले आई।कम्मो ने आते ही कहना शुरू कर प्रिया- छोटे मालिक, आपने इतना बड़ा रिस्क लिया। कहीं भैया आ जाते तो? और आपने कॉलेज नहीं जाना था आज?

मैं भी मस्ती में था, कम्मो को एक मीठा सा चुम्बन प्रिया और कहा- कम्मो मेरी जान, आज इतवार है, कहीं भी नहीं जाना है। सिवाए तुम लोगों की चुदाई के और क्या काम है मेरे पास?कम्मो अब हंसने लगी और मुझको आलिंगन में ले लिया और खूब मुंह चूमने लगी।कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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मेरा गुप्त जीवन

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