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भाभी की चुदाई पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 693 बार

मेरा गुप्त जीवन- 169

यश देव

13 May 2026 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन- 169
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जब मैं अपने वाले कमरे में पहुँचा तो वहाँ लड़कियों और औरतों का जमघट लगा था।मैंने इधर उधर देखा कि कोई तो इनमें से पहचान वाला मिल जाए जिससे यह पता चल सके क्या यह वही कमरा है, और यदि है तो मेरा बिस्तर कहाँ है और मेरा लिए क्या इंतज़ाम किया है।

तभी मुझ को दिव्या भाभी मिल गई, वो मुझको देखते ही बोली- सॉरी सोमू लल्ला, अचानक इतने सारे मेहमान आ गए हैं तो मैंने तुम्हारा और अपना सामान उसी कमरे में पहुँचा प्रिया है जहाँ अभी तक हम सब थे।और यह कह कर भाभी मुझ को लेकर उसी कमरे में आई जहाँ अभी थोड़ देर पहले गर्मागर्म सामूहिक चोदन और चाटन हुआ था।

मेरे अलावा वहाँ ऊषा और उसकी कुछ और सहेलियाँ और कुछ नई औरतें भी थी ज़्यादा जवान भाभियाँ थी और इक्का-दुक्का अधेड़ औरतें भी थी।सबके लिए फर्श पर गद्दे बिछा दिए गए थे और वो सब वहाँ बिस्तरों पर आराम कर रही थी।

मैं इधर उधर देख रहा था कि कहाँ सोना है मुझको और तब मैंने दिव्या भाभी को रोक कर पूछा- भाभी कहाँ सोना है मुझको?भाभी मेरा हाथ पकड़ कर आखिरी वाले गद्दे की तरफ ले गई और मेरा हाथ हल्के से दबा कर कहा- यह है तुम्हारा बिस्तर सोमू राजा और यह है मेरा बिस्तर… और वो रहा ऊषा रानी का बिस्तर… हम सब साथ साथ ही हैं फ़िक्र ना करो।

मैं बोला- मैं अकेला लड़का इस औरतों के जमघट में? क्या यह ठीक है भाभी?दिव्या भाभी बोली- मैं अभी सबसे पूछ लेती हूँ। क्यों बहनो, हमारा यह लल्ला यहाँ सो जाए तो किसी को कोई ऐतराज़ तो नहीं?सब जवान और कुछ एक अधेड़ औरतों ने मुझको पैनी आँख से देखा और कहा- अरे यह तो छोरा ही है, इसको सो जाने दो यहाँ, हम को भला क्या ऐतराज़ हो सकता है।

यह सुन कर दिव्या भाभी ने मुझको आँख मारी और ज़ोर से कहा- सोमू लल्ला, तुम यहीं सो जाओ इस आखिरी बिस्तर पर! पानी वानी सब रख प्रिया है सो फ़िक्र नॉट ओके!और मैं उस आखिरी वाले बिस्तर पर पसर गया और कुछ मिनटों में ही मुझको नींद आने लगी और मैं बड़ी गहरी नींद सो गया।

करीब आधे घंटे के बाद दिव्या भाभी ने मुझ को जगा प्रिया और मेरे कान के पास अपना मुंह रख कर बहुत धीरे से बोली- सोमू मेरा एक काम करोगे?मैं थोड़ा अकचका गया लेकिन फिर भी संयत होकर बोला- हाँ भाभी, क्या काम है? बोलो तो सही।दिव्या भाभी ने मुझको इशारे से बुलाया और मुझको लेकर कमरे के बाहर आ गई और वहाँ दो और भाभियों से मिलवाया।एक का नाम सुनंदा था और दूसरी का वृंदा, दोनों ही देखने में काफी हसीं लग रही थी और उम्र की भी कोई ज़्यादा बड़ी नहीं थी, शायद मुश्किल से 23-24 की रही होंगी।

दिव्या भाभी हम तीनों को लेकर साथ वाले एक कमरे में आ गई और वहाँ की लाइट जला दी।कमरा अच्छा खासा ऑफिस और बैडरूम था जिसमें बड़े सुंदर सोफे बिछे थे और उन पर मुलायम गद्प्रियाँ रखी हुई थी।

दिव्या भाभी बोली- यह दोनों भाभियाँ परसों शादी के बाद गोरखपुर लौट रही हैं लेकिन पहले ये दो तीन दिन के लिए लखनऊ रुकना चाहती हैं क्यूंकि इनको कुछ शॉपिंग करनी है। मैं तो यहाँ कुछ दिन रुक रही हूँ तो मैंने सोचा क्यों ना ये दोनों तुम्हारे साथ परसों लखनऊ के लिए निकल जाएँ और कुछ दिन यह दोनों तुम्हारी कोठी में ठहर भी लेंगी अगर तुमको ऐतराज़ ना हो तो?

मैं मुस्कराते हुए बोला- भला मुझ को क्या ऐतराज़ हो सकता है, ये दोनों परसों मेरे साथ चल सकती हैं लेकिन इनकी टिकट्स भी तो रिज़र्व करनी पड़ेगी?उन दोनों में से जो काफी सुंदर भाभी थी, वो बोल पड़ी, – हमारी दो सीटें आप वाली ट्रेन में हुई हैं, तो उसमें कोई प्रॉब्लम नहीं है सिर्फ आप की हाँ सुनने के लिए यहाँ आई हैं आपको तकलीफ देने!

मैंने हँसते हुए कहा- फिर तो कोई प्रॉब्लम ही नहीं, मैं इनको अपने साथ ही रेलवे स्टेशन ले जाऊँगा और फिर लखनऊ में अपनी कोठी में ले जा कर अच्छी तरह से ठहरा दूंगा। दिव्या भाभी, आप फ़िक्र ना करें, मैं सब सम्भाल लूंगा।

दिव्या भाभी थोड़ी झिझक रही थी तो मैंने पूछ ही लिया- क्यों भाभी, कोई और प्रॉब्लम भी है क्या?दिव्या भाभी बोली- नहीं रे, और कोई प्रॉब्लम नहीं है रे… बस इनका थोड़ा सा काम कर दो बस!

भाभी बड़े रहस्यमयी ढंग से मुस्करा कर बोलती रही- वो क्या है ना सोमू भैया, कभी कभी ऐसी स्थिति आ जाती है कि मुंह से बात निकालते हुए बहुत ही शर्म आती है, तुम ना इनका भी ज़रा वो वाला काम कर दो!

मैंने गौर से इन तीनों महिलाओं को देखा और मन ही मन इस स्थिति के लिए दिव्या भाभी को धन्यवाद प्रिया और परोक्ष रूप से कहा – मैं समझ गया भाभी आप अधिक परेशान न हों, जब आप कह रही हैं तो मैं कैसे ना कह सकता हूँ, आ जाइये आप तीनों ही आ जाइए।

तीनों ही अपनी नाइट गाउन में थी तो जल्दी ही उतार कर पूर्ण नग्न हो गई।दिव्या भाभी ने आगे बढ़ कर मेरे भी कुर्ते पजामे को उतार प्रिया और जब मेरा अंडरवियर उतरा तो दोनों नई भाभियों को मस्ती छा गई। उन्होंने शायद कभी भी इतना मोटा और लम्बा खड़ा लण्ड नहीं देखा होगा।

दोनों दौड़ कर मेरे लौड़े पर झपट पड़ी और दोनों ही उसको अपने हाथ में लेने की कोशिश करने लगी।तब दिव्या भाभी ने मुझ को आँख मारी और फिर मैंने उन दोनों औरतों को ध्यान से देखा।दोनों ही काफी गठे हुए शरीर वाली खाते पीते घर की लग रही थी, नंदा भाभी ज़्यादा खूबसूरत थी नयन नक्श एवं शरीर के गठन के हिसाब से और वृंदा भाभी उनके मुकाबले की ही थी सिवाए एक दो पॉइंट्स को छोड़ कर!

दोनों के स्वर्ग द्वार काफी घने बालों की घटाओं से घिरे हुए थे जो मेरी पहली पसंद होती है औरत की ख़ूबसूरती के मामले में! उनके स्तन और नितम्ब बहुत अधिक बड़े और गोल लग रहे थे!मैंने दोनों को एक साथ आलिंगन में बाँध लिया और बारी बारी से उन दोनों को लबों पर चूमा और फिर उनके मम्मों को चूमा एक एक कर के और उनके गोल गुदाज चूतड़ों पर हाथ फेरे।

जब मैं ऐसा कर रहा था उन दोनों भाभियों के साथ दिव्या भाभी मेरे लण्ड को चूसने में लगी हुई थी।

फिर मैंने उन दोनों को सोफे पर बिठा प्रिया, उनकी टांगें चौड़ी कर दी और पहले नंदा की जांघों में बैठ कर उसकी चूत को धीरे से चूसने लगा और एक उंगली वृंदा की चूत में चक्कर लगा रही थी और उसकी भग को मसल रही थी।

दोनों की आँखें बंद हो रही थी, दोनों के चूतड़ ऊपर को उठे हुए थे और मैं कुछ देर उन दोनों की चूतों का रसपान बारी बारी से करता रहा और उन दोनों को दो बार स्खलन करवाने के बाद में वहाँ से उठा और बोला- क्यों भाभियो, कैसे चुदवाना चाहती हैं आप दोनों? कौन सा आसन या फिर पोज़ आप को पसंद है? आप बता दीजिये, आपका यह ग़ुलाम हाज़िर है आपकी सेवा के लिए!

दोनों एक दूसरे की तरफ देखने लगी और तभी दिव्या भाभी हँसते हुए बोली- अरे लल्ला यह पूछ रहा है कि कैसे चुदना है आप दोनों को? यानि आप नीचे लेटेगी और सोमू ऊपर से या फिर घोड़ी बन कर या फिर खड़े हुए या फिर आप दोनों सोमू के ऊपर से? बोलो ना फिर कैसे चुदाने की मर्ज़ी है आप दोनों की?

दोनों ही बहुत कंफ्यूज हो गई थी, वो कुछ समझ नहीं पा रही थी कि क्या जवाब दें।तब दिव्या भाभी बोली- इनको घोड़ी बना कर चोदो, वो पोज़ इनको शायद बहुत भाएगा।

पहले वृन्दा घोड़ी बनी और मैंने उसको धीरे से शुरू करके बड़ी तेज़ी से चोदा और उसके स्खलन हो जाने के बाद मैंने सुनंदा को भी इसी पोज़ में धीरे और फिर जल्दी वाले तरीके से मस्त चोदा।

यहाँ का काम खत्म कर के हम तीनों बारी बारी से बड़े कमरे में आ गए और मैं चुपचाप अपने बेड की तरफ जा रहा था कि यह देख कर हैरान हो गया कि कई औरतें जो सिर्फ ब्लाउज पेटीकोट ही पहन कर सोई हुई थी उन सबके पेटीकोट उनकी जांघों के ऊपर हो रहे थे और नाईट लाइट के मद्धम प्रकाश में उनकी बालों भरी चूत साफ़ दिख रही थी वहाँ!

दिव्या भाभी ने मेरी नज़रों को भांप लिया था और वो भी मज़े ले ले कर, जिनकी चूत के दर्शन नहीं हो रहे थे, उनके पेटीकोट को उठा उठा कर मुझको दर्शनों का मौका दे रही थी।

उस रात कम से कम 10 औरतों की चूतों के दर्शन दिव्या भाभी ने करवा दिए।फिर मैं अपने बेड पर आकर ऐसा लेटा जैसे कि मैं मीलों का सफर तय करके आया हूँ।

सच ही कहा किसी ने कि चूत चोदन बड़ी मेहनत का काम है और इस क्रिया को प्रतिदिन करने वाला व्यक्ति कभी बूढ़ा नहीं होता।

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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मेरा गुप्त जीवन

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