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भाई बहन पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 905 बार

एक भाई की वासना -45

जूजाजी

30 Oct 2018 को प्रकाशित

एक भाई की वासना -45
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सम्पादक – जूजा जीहजरात आपने अभी तक पढ़ा..मैं- पता है.. अब मैंने सोचा है कि फैजान को खुद फँसाएंगे.. पहले तो वो तुमको फंसा रहा था और तंग करता था.. अब तुम खुद मेरे साथ मिल कर उसे सताओगी और तंग करोगी.. फिर देखना कितना मज़ा आएगा।मैंने सारा प्रोग्राम जाहिरा को समझाया और फिर हम दोनों रसोई में खाना बनाने के लिए आ गए।

जैसे ही दोपहर में फैजान घर वापिस आया तो सबसे पहले मैंने उसे वेलकम किया। मैं गेट पर हस्बे मामूल.. उसने मुझे किस किया.. और फिर मुझे पानी लाने का बोल कर अपने कमरे में चला गया।मैं रसोई में आ गई और जाहिरा को मुस्कुरा कर पानी ले जाने को कहा।जाहिरा ने मुझे एक आँख मारी और फिर ठंडी पानी का गिलास भर कर हमारे बेडरूम की तरफ बढ़ गई।

अब आगे लुत्फ़ लें..

मैं भी उसके साथ-साथ ही थी.. मैं बेडरूम के दरवाजे के एक तरफ रुक गई और जाहिरा अन्दर कमरे में चली गई।

अन्दर कमरे में फैजान अभी-अभी वॉशरूम से मुँह-हाथ धो कर आया था।

फैजान ने जाहिरा को पानी लाते हुए देखा तो वो बहुत खुश हुआ। जाहिरा भी जवाब में मुस्कुराई और एक अदा के साथ पानी का गिलास लेकर अपने भाई की तरफ बढ़ी।

फैजान ने पानी का गिलास लेकर उसमें से एक घूँट लिया और फिर गिलास टेबल पर रख कर जाहिरा का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया।

जाहिरा ने भी कोई मज़ाहमत नहीं की और अपने भाई के सीने से लग गई। फैजान ने अपने होंठों को जाहिरा के होंठों पर रखा और उनको चूमने लगा। फैजान थोड़ी सी चूमा-चाटी करने के बाद जाहिरा को छोड़ने का इरादा रखता था.. क्योंकि उसे पता था कि मैं रसोई से किसी भी वक़्त बेडरूम में आ सकती हूँ।

फैजान ने अपनी बहन को किस करने के बाद छोड़ प्रिया और बोला- चलो अब जाओ.. तुम्हारी भाभी बेडरूम की तरफ आती ही होंगी।

जाहिरा- वाह जी वाह.. भाई, अगर इतना ही अपनी बीवी से डरते थे.. तो क्यों मुझ पर डोरे डाले और क्यों मुझे अपने झूठे प्यार में फँसाया था?यह कहते हुए जाहिरा अपने भाई के साथ लिपट गई।

फैजान तो जैसे बौखला सा गया, वो उसे खुद से अलग करते हुए बोला- नहीं नहीं जाहिरा.. ऐसी बात नहीं है.. मेरा प्यार झूठा नहीं है, ना मैं तुमसे प्यार से इन्कार कर रहा हूँ.. यह तो मैं इसलिए कह रहा हूँ कि तुम्हारी भाभी को हमारे ताल्लुक़ात का पता ना चल सके वरना वो हंगामा खड़ा कर देगी।

जाहिरा फैजान की शर्ट के बटन खोलती हुई बोली- भाई भाभी से डर गए हो.. तो दुनिया को कैसे बताओगे कि तुम अपनी बहन से कितना प्यार करते हो? कहीं मैंने तुम जैसे बुज़दिल मर्द से प्यार करके कोई गलती तो नहीं कर ली?

यह कहते हुए जाहिरा ने फैजान की शर्ट उतार दी और उसके नंगे सीने पर हाथ फेरने लगी।फैजान ने जाहिरा को पीछे की तरफ धकेला और घबरा कर बोला- अभी नहीं.. जैसे ही मौक़ा मिलेगा.. मैं खुद तुम्हारे पास आऊँगा मेरी जान।

लेकिन जाहिरा तो किसी और ही मूड में थी.. उसने थोड़ा सा पीछे होकर अपनी टी-शर्ट को नीचे से पकड़ा और ऊपर उठा कर अपनी शर्ट को अपने जिस्म से उतार कर बिस्तर पर फेंक प्रिया।अब जाहिरा का ऊपरी बदन सिर्फ़ और सिर्फ़ उसकी ब्लैक रंग की ब्रा में था और नीचे उसने टाइट्स पहनी हुई थी।

जाहिरा को इस हालत में देख कर फैजान की तो जैसे फट कर हाथ में आ गई हो.. उसके चेहरे का रंग उड़ गया और माथे पर पसीना बहने लगा।वो फ़ौरन ही दरवाजे की तरफ भागा, मैं जल्दी से रसोई में चली गई।

फैजान ने बाहर झाँक कर देखा और फिर अन्दर आकर दरवाज़े को लॉक कर लिया और तेज़ी के साथ जाहिरा की तरफ बढ़ा।जाहिरा ने अपनी दोनों बाज़ू फैलाए और बोली- आ जा मेरे राजा.. मुझे अपनी बाँहों में ले लो न..

फैजान ने उसकी शर्ट बिस्तर से उठा कर उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा- जाहिरा आख़िर आज क्या हो गया हुआ है तुमको?जाहिरा- भाई मुझे क्या होना है.. वो ही हुआ है ना.. जो आपने मुझे किया है.. मेरे कुँवारे जिस्म में अपने प्यार की आग लगा दी है.. जो अब हर वक़्त सुलगती रहती है.. अब आप ही बताओ कि मैं अपनी यह प्यास कैसे बुझाऊँ?

फैजान उसकी टी-शर्ट को उसकी गले में डालते हुए बोला- मैं ही बुझाऊँगा तेरी प्यास.. लेकिन थोड़ा टाइम तो आने दे ना मेरी जान.. लेकिन जाहिरा थी कि मेरे प्लान के मुताबिक़ फैजान के साथ चिपकती जा रही थी और अपनी चूचियों को उसके सीने के साथ रगड़ रही थी।

इतने में मैंने बाहर दरवाजे पर नॉक किया.. तो उस वक़्त जाहिरा ने अपना हाथ फैजान के लंड पर रख प्रिया हुआ था।फैजान के तो जैसे होश ही उड़ गए, उसने जल्दी से उसे प्यार किया और उसे बाथरूम की तरफ धकेला।

मैंने आवाज़ दी- फैजान क्या कर रहे हो.. दरवाज़ा खोलो ना.. और यह जाहिरा कहाँ चली गई है..?

जाहिरा अब भी बाथरूम में जाने का नाम नहीं ले रही थी और फैजान से चिपकी जा रही थी। फैजान ने जल्दी से उसे खुद पर से हटाया और उसे बाथरूम की तरफ धकेलने लगा।

उसे बाथरूम में लगभग फेंकते हुए वो वापिस दरवाजे की तरफ भागा और फिर दरवाजा खोल प्रिया। मैं अन्दर गई तो फैजान के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था.. वो काफ़ी घबराया हुआ लग रहा था।

मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा और बोली- क्या बात है फैजान.. तुम ठीक तो हो ना?फैजान घबरा कर बोला- हाँ हाँ.. ठीक हूँ मैं.. कुछ नहीं हुआ मुझे..

मैं फैजान की क़रीब आई और आहिस्ता से उसके साथ चिपक गई और बोली- क्या बात है जानू.. नाराज़ हो क्या मुझसे..मेरी बात सुन कर वो थोड़ा रिलेक्स हुआ और बोला- नहीं नहीं.. नाराज़ तो नहीं हूँ जान.. बस ऐसे ही थोड़ा थका हुआ हूँ।

मैंने उसके गालों पर एक किस की और अपना हाथ उसकी पैन्ट की ऊपर से उसके लण्ड की तरफ ले जाते हुए बोली- आओ फिर मैं तुमको भी थोड़ा रिलेक्स कर दूँ।

मैंने देखा कि उसका लंड अभी भी अकड़ा हुआ है.. मैं उसके लण्ड को उसकी पैन्ट के ऊपर से ही अपनी मुठ्ठी में लेते हुए बोली- जानू तुम्हारा तो लंड भी फुल टेन्शन में है.. मुझे अभी इसकी टेन्शन तो रिलीव करना ही पड़ेगी..यह कहते हुए मैं नीचे फर्श पर बैठ गई और उसकी पैन्ट की बेल्ट खोलने लगी।

फैजान ने थोड़ी सी मज़ाहमत की लेकिन फिर खुद से ही अपनी पैन्ट नीचे उतार दी।

मैंने नीचे बैठ कर उसके लण्ड को अपनी मुँह में लिया और चूसने लगी। धीरे-धीरे उसके ऊपर के हिस्से को अपनी ज़ुबान से चाटती और फिर उसे मुँह में लेकर चूसने लगाती।मेरी कमर दरवाजे की तरफ थी और दरवाज़ा खुला हुआ ही था और मुझे पता था कि अभी थोड़ी देर में जाहिरा भी अन्दर देखने लगेगी।

मैंने अपना चेहरा ऊपर किया और फैजान की तरफ देखने लगी.. मुझे उसके चेहरे के हाव-भाव से साफ़ पता चल रहा था कि जाहिरा दरवाजे पर आ चुकी है।मेरी नज़र फैजान के पीछे पड़ी हुई ड्रेसिंग टेबल पर पड़ी.. तो उसके शीशे में मुझे जाहिरा का अक्स नज़र आया।

जैसे ही फैजान की नज़र अपनी बहन की नंगी खूबसूरत चूचियों पर पड़ी तो उसने अपने दोनों हाथ मेरे सिर के दोनों तरफ रखे और मेरे सिर को पकड़ कर धक्के लगाते हुए मेरे मुँह को चोदना शुरू कर प्रिया।मैं भी उसकी गोटियों को सहलाते हुए उसके लण्ड को चूस रही थी और आज मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था।

फैजान धक्के मारते हुए बोला- और चूस.. मेरी जान और चूस.. जल्दी कर.. जल्दी से निकाल दे मेरा पानी..मैंने उसके लण्ड को अपने मुँह से बाहर निकाला और फिर उसे अपने मुठ्ठी में आगे-पीछे करते हुए बोली- लेकिन जाहिरा घर पर ही है.. वो किसी भी वक़्त इस तरफ को आ सकती है.. तो हमें देख ना ले..फैजान अपनी बहन की तरफ देखता हुआ बोला- कुछ नहीं होगा.. वो नहीं आएगी.. तुम बस जल्दी से मेरे लण्ड का पानी चूसो..

उधर जाहिरा अब अपनी टाइट्स के अन्दर हाथ डाल कर अपनी चूत को सहला रही थी और आँखें बंद किए हुए खुद को ओर्गैज्म पर ले जाने की कोशिश कर रही थी।

यह सब वो अपने भाई के सामने कर रही थी.. ताकि उसके भाई की प्यास और भी बढ़ सके और हो भी ऐसा ही रहा था।

जैसे-जैसे जाहिरा की मस्ती बढ़ रही थी.. वैसे-वैसे ही फैजान में भी जोश आता जा रहा था। वो पहले से भी जोर-जोर से धक्के मार रहा था और अपना लंड मेरे मुँह के अन्दर पेल रहा था।

जैसे ही फैजान झड़ने वाला हुआ.. तो मैंने उसका लंड अपनी मुँह से निकाला और उठ गई कि नहीं.. अब मुझे रसोई में जाना है.. कुछ बाद में करूँगी।जाहिरा भी फुर्ती से दरवाजे से हट गई और फैजान मुझे रोकता ही रह गया लेकिन मैं वहाँ से चली आई।

कुछ ही देर में फैजान भी चेंज करके बाहर आ गया। उसने अपना एक बरमूडा पहन लिया हुआ था। जाहिरा ने जैसे ही अपने भाई को देखा तो उसे अपने नज़रों से ही चिढ़ाने लगी। मैं रसोई में ही रही तो वो मुझे बता कर बाहर निकली और आँख मार कर बोली- भाभी, मैं भाई से मिल कर अभी आती हूँ।

हम दोनों हँसने लगे।

जाहिरा बाहर गई तो फैजान टीवी लाउंज में बैठ कर ही टीवी देख रहा था.. जाहिरा सीधे जाकर उसकी गोद में बैठ गई।फैजान एकदम से घबरा गया और रसोई की तरफ देखते हुए.. उसे अपनी गोद से हटाने की कोशिश करने लगा।लेकिन जाहिरा कहाँ मानने वाली थी।

जाहिरा- क्या बात है भाई.. एक ही दिन में आपका दिल मुझसे भर गया है.. अब तो आप मुझसे दूर भाग रहे हो.. और थोड़ी देर पहली कैसे भाभी के साथ मजे कर रहे थे.. क्या अब मैं आपको अच्छी नहीं लगती हूँ?

आप सब इस कहानी के बारे में अपने ख्यालात इस कहानी के सम्पादक की ईमेल तक भेज सकते हैं।अभी वाकिया बदस्तूर है।support@mohakkisse.com

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एक भाई की वासना

कुल भाग: 49
भाग 1
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भाग 2
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भाग 3
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भाग 4
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भाग 5
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भाग 6
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भाग 7
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भाग 8
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भाग 9
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भाग 10
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भाग 11
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भाग 12
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भाग 13
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भाग 14
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भाग 15
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भाग 17
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भाग 18
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भाग 19
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भाग 20
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भाग 21
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भाग 22
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भाग 23
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भाग 24
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भाग 25
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भाग 26
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भाग 27
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भाग 28
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भाग 29
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भाग 30
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भाग 31
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भाग 32
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भाग 33
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भाग 34
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भाग 35
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भाग 36
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भाग 37
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भाग 38
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भाग 39
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भाग 40
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भाग 41
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भाग 42
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भाग 44
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भाग 50
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