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भाई बहन पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,124 बार

एक भाई की वासना -41

जूजाजी

11 Oct 2018 को प्रकाशित

एक भाई की वासना -41
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सम्पादक – जूजा जीहजरात आपने अभी तक पढ़ा..

जाहिरा शर्मा कर बोली- अब ज्यादा भी खुशफ़हमी में ना रहें आप.. मैंने तो वैसे ही बस रुटीन में साफ़ कर लिए थे। अब मुझे क्या पता था कि आप आकर इसे देखोगे?फैजान हंसा और अपनी होंठ जाहिरा की चूत पर रख दिए और उसकी कुँवारी मुलायम चूत को चूम लिया।फिर फैजान ने अपनी कुँवारी बहन की कुँवारी चूत की लबों को खोला और अपनी ज़ुबान से उसे अन्दर से चाटने लगा।धीरे-धीरे जैसे-जैसे उसकी ज़ुबान अपनी बहन की चूत को चाट रही थी.. तो उसके साथ-साथ ही जाहिरा की हालत खराब होती जा रही थी।अब आगे लुत्फ़ लें..

वो अपने भाई के सिर पर अपना हाथ रख कर उसे अपने चूत पर दबा रही थी और आँखें बंद करके अपनी गाण्ड को ऊपर उठाते हुए अपनी चूत को उसके मुँह पर रगड़ने की कोशिश कर रही थी।

कुछ देर तक अपनी बहन की कोरी चूत को चाटने के बाद फैजान खड़ा हुआ और अपनी बहन के सामने अपनी शॉर्ट्स को उतार कर बिल्कुल नंगा हो गया।

फिर लेटी हुई जाहिरा के ही ऊपर आ गया और अपनी मोटे खड़े हुए लंड को अपनी बहन की दोनों चूचियों की दरम्यान में रगड़ने लगा।

जाहिरा मुस्कुरा कर अपने भाई के लंड को देख रही थी।

फैजान ने अपनी बहन की दोनों छोटी-छोटी चूचियों के दरम्यान अपने लंड को दबाया और फिर आगे-पीछे को करते हुए अपना लंड उसकी चूचियों के दरम्यान रगड़ने लगा। आगे को जाता तो उसका लंड जाहिरा की ठोड़ी को टकराता था और उसकी गोटियाँ नीचे अपनी बहन के पेट पर रगड़ खा रही थीं।

थोड़ी देर के बाद फैजान बोला- जाहिरा इसे मुँह में लेकर थोड़ा सा चूसो ना..जाहिरा ने अपने भाई के लंड को अपने हाथ में पकड़ा और बोली- नहीं भाई.. यह तो बहुत गंदा होता है.. मैं कैसे इसे मुँह में ले सकती हूँ।फैजान- अरे यार कुछ भी गंदा नहीं होता.. इसे मुँह में लेकर तुम्हारी भाभी भी तो चूसती हैं ना..जाहिरा इठलाते हुए बोली- वो तो आपकी बीवी हैं.. मैं आपकी क्या लगती हूँ.. बहन ना..

फैजान अपने लंड की टोपी को अपनी बहन के गुलाबी होंठों पर आहिस्ता-आहिस्ता फिराता हुआ बोला- तुम आज से मेरी बहन भी हो और मेरी बीवी भी हो..जाहिरा- भाई.. अगर मुझे अपनी बीवी बनाना है.. तो फिर कर लो मुझसे भी शादी..फैजान- झुक कर अपनी बहन के होंठों को चूमते हुए बोला- मेरी जान यह तो दिल की बात होती है.. जिसे भी दिल से तसलीम कर लो.. वो बीवी ही होती है।

फैजान ने थोड़ा सा जोर लगाया तो जाहिरा ने अपने होंठों को थोड़ा सा खोला और उसके लण्ड को अन्दर दाखिल होने का रास्ता देने लगी।

फैजान ने भी आहिस्ता से अपनी लंड को उसके होंठों के दरम्यान पुश किया और साथ ही जाहिरा ने आहिस्ता आहिस्ता उसके लौड़े के टोपे के ऊपर अपनी ज़ुबान फेरनी शुरू कर दी।

जाहिरा ने अपने दोनों होंठों के दरम्यान अपने भाई के लंड के टॉप को पकड़ा और आहिस्ता से दोनों होंठों को बंद करके उसे चुम्बन कर लिया।फैजान ने अपना लंड उसके होंठों से निकाला और धीरे-धीरे उसके होंठों के ऊपर टकराने लगा।

जाहिरा ने अपनी ज़ुबान बाहर निकाली और आहिस्ता आहिस्ता उसके लण्ड के अगले हिस्से पर फेरते हुए बोली- भाई अगर भाभी ने देख लिया ना.. तो बहुत बुरा होगा।

फैजान पीछे होकर जाहिरा के ऊपर लेट गया और अपने नंगे लंड को अपनी बहन की नंगी चूत पर रगड़ते हुए बोला- कुछ नहीं होगा मेरी जान.. आज तो मैं तुम्हारी यह कुँवारी चूत लेकर ही रहूँगा।

जाहिरा ने अपना हाथ नीचे ले जाकर अपने भाई का लंड अपने कंट्रोल में लिया और आहिस्ता आहिस्ता अपनी चूत के दाने पर रगड़ते हुए बोली- नहीं भाई.. प्लीज़ ऐसा नहीं करो न.. हम कुछ भी नहीं कर सकते.. आप इसे पीछे करो न.. इससे तो आप मुझे और भी पागल कर रहे हैं।

जाहिरा ने यह बोला और दूसरे हाथ से अपने भाई के सिर के बालों को पकड़ कर अपनी तरफ खींच कर उसके होंठों को चूसने और उसे चूमने लगी।

धीरे-धीरे दोनों की मस्तियों में इज़ाफ़ा होता जा रहा था। जाहिरा ने अपनी दोनों टाँगें ऊपर कीं और उनको अपने भाई की कमर के गिर्द उसके चूतड़ों पर रख कर उसके जिस्म को जकड़ लिया.. जैसे कि उसका भाई उसे इतना गरम करने के बाद कहीं छोड़ कर भागने लगा हो।

फैजान भी अपनी बहन की चूचियों को दबाते हुए उसके होंठों को चूस रहा था और पीछे से हिलते हुए अपनी लंड को अपनी बहन की चूत पर रगड़ रहा था।

इधर मेरी हालत भी बहुत ही पतली हो रही थी.. मेरा हाथ मेरी चूत पर था और मेरी चूत बिल्कुल पानी-पानी हो रही थी।

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फैजान उठा और अपनी बहन की दोनों टाँगों के दरम्यान में बैठते हुए अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ा और उसकी टोपी को जाहिरा की कुँवारी प्यासी चूत पर फिर से रगड़ने लगा।

अगले ही किसी भी लम्हे में फैजान अपना लंड अपनी कुँवारी बहन की चूत में दाखिल करने वाला था।

मेरा ख्वाब पूरा होने वाला था कि ज़िंदगी में पहली बार किसी हक़ीक़ी भाई को अपनी बहन को चोदते हुए देखूँ.. लेकिन पता नहीं क्यों मैं अभी उन दोनों बहन-भाई को ऐसा करने नहीं देना चाहती थी।मैं अभी इन दोनों की चूत और लंड की प्यास को बरक़रार रखना चाहती थी ताकि यह दोनों एक-दूसरे के लिए अभी थोड़ा और भी तड़फें..

यही सोच कर मैं अपने कमरे की तरफ गई और फैजान को आवाज़ दी।दूसरी आवाज़ के साथ ही ज़ाहिर है कि फैजान भागता हुआ आया। उसने अपने कपड़े पहन लिए हुए थे।

वो बोला- हाँ क्या बात है.. तुम ठीक तो हो?मैंने उसे पानी लाने को कहा और वो रसोई में गया.. तो मैं उसके चेहरे की बेबसी और झुँझलाहट देख कर मेरी हँसी छूट गई।कुछ देर के बाद मैं भी अन्दर उन दोनों के साथ ही जाकर लेट गई।शाम को मेरी आँख खुली तो जाहिरा कमरे से जा चुकी हुई थी और सिर्फ़ मैं और फैजान ही बिस्तर पर थे।

हम कुछ देर तक बातें करते रहे और फिर जाहिरा चाय लेकर आ गई लेकिन अपनी चाय यहाँ कहते हुए बाहर ले गई कि उसे कुछ काम करना था।

मैंने और फैजान ने चाय पी और फिर मैं रेस्ट करने का बहाना करके लेट गई और फैजान कमरे से बाहर चला गया।मैंने फ़ौरन उठ कर देखा तो जाहिरा सोफे पर बैठी हुई थी और फैजान उसके पीछे से झुक कर उसकी चूचियों को दबा रहा था।जाहिरा खुद को उससे छुड़ाते हुए बोली- भाई आपको तो हर वक़्त यही काम सूझता रहता है.. आप न.. भाभी को भी हर वक़्त तंग किए रखते हो.. और अब तो आपको सताने के लिए मैं भी मिल गई हूँ।

फैजान जाहिरा के सामने की तरफ आया और अपने शॉर्ट में हाथ डाल कर अपना लंड बाहर निकाल कर बोला- एक किस तो कर दो प्लीज़..जाहिरा मेरे कमरे की तरफ देखते हुए बोली- भाई.. आपको शर्म नहीं आती क्या.. अगर अभी भाभी बाहर आ जाएं तो.. और यह क्या है कि हर वक़्त इसी हालत में ही खड़ा रहता है?

फैजान- बस जब से इसने अपनी प्यारी सी बहना की कुँवारी चूत का दीदार किया है ना.. तो यह बैठता ही नहीं है.. हर वक़्त तुम्हारी चूत को याद कर करके खड़ा हुआ ही रहता है। जब तक अब यह तेरी चूत की अन्दर नहीं चला जाएगा.. इसको सुकून नहीं आने वाला।

जाहिरा फैजान के लंड को अपने हाथ में लेकर आहिस्ता आहिस्ता सहलाते हुए बोली- भाई प्लीज़, कोई जगह तो देख लिया करो ना..फैजान अब नीचे जाहिरा के पास ही बैठ गया। अब उन दोनों की पीठ मेरी तरफ थी.. तो मैं नहीं देख सकती थी कि वो दोनों क्या कर रहे हैं। इस हालत में वो दोनों सेफ थे.. लेकिन मैं भी उनको डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी।

फैजान- बस अब तो ठीक है ना.. यहाँ से तेरी भाभी भी हम दोनों को नहीं देख पाएगी.. चल अब जल्दी से नीचे आजा और इसे चूसा लगा दे।जाहिरा हँसी और बोली- भाई आप बाज़ आने वाले नहीं हो.. और ना ही मानने वाले हो..यह कह कर जाहिरा ने एक नज़र मेरे कमरे के दरवाजे की तरफ डाली और फिर झुक कर शायद अपने भाई का लंड चूसने लगी।

जाहिरा- भाई एक ही बार काट कर खा ना लूँ इसको.. जो यह हर वक़्त मुझे तंग करता रहता है।फैजान अपनी बहन के रेशमी बालों में हाथ फेरते हुए बोला- काट कर खा लोगी तो फिर तुम्हारी चूत की प्यास कौन बुझाएगा मेरी जान?

मैं अपने कमरे के बाथरूम में आई और दूसरे दरवाजे में से बाहर झाँका.. तो अब यह जगह उनको देखने के लिए ठीक थी.. और इधर से दोनों की हरकतें साफ़ नज़र आ रही थीं।

फैजान ने अपना हाथ नीचे झुकी हुई अपनी बहन की शर्ट की के नीचे डाला हुआ था और उसकी नंगी कमर को सहला रहा था और कभी उसकी चुस्त लैगी में फंसे हुए उसके चूतड़ों को सहलाने लगता था।दूसरी तरफ जाहिरा भी अपने भाई के लंड को मुँह में लेकर चूस रही थी और कभी उसे चाट लेती थी।फैजान- यार ठीक से चूस ना मेरा लंड..

जाहिरा- भाई मैं कौन सा लंड चूसती रहती हूँ.. जो मुझे आता है कि कैसे चूसते हैं.. पहली बार तो चूस रही हूँ। मुझसे तो ऐसे ही चूसा जाएगा.. चुसवाना है तो बोलो.. नहीं तो मैं चली।फैजान- अच्छा अच्छा.. ठीक है.. जैसे भी चूस ले.. ठीक है, कोई बात नहीं.. आहिस्ता आहिस्ता तुझे मेरा लंड ठीक से चूसना भी आ जाएगा। तेरे शौहर तक पहुँचने से पहले तुझे बिल्कुल एक्सपर्ट बना दूँगा.. देखना तू..।जाहिरा- मेरे शौहर के लिए कुछ बाकी छोड़ोगे.. तभी तो जाऊँगी ना उसके पास वर्ना फिर जाने का क्या फ़ायदा?

दोनों हँसने लगे..

फैजान- चल अब जल्दी से मेरा पानी निकाल दे ना..

आप सब इस कहानी के बारे में अपने ख्यालात इस कहानी के सम्पादक की ईमेल तक भेज सकते हैं।अभी वाकिया बदस्तूर है।support@mohakkisse.com

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एक भाई की वासना

कुल भाग: 49
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भाग 4
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भाग 5
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भाग 6
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भाग 7
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भाग 9
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भाग 11
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भाग 30
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