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भाई बहन पठन समय: 8 मिनट पढ़ा गया: 390 बार

एक भाई की वासना -14

जूजाजी

03 Jun 2018 को प्रकाशित

एक भाई की वासना -14
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सम्पादक – जूजा जीहजरात आपने अभी तक पढ़ा..उस रात को मेरी आधी रात को आँख खुली तो मुझे टॉयलेट जाने की ज़रूरत पड़ी। मैं अपनी जगह से उठी और उन दोनों बहन-भाई के बीच में से निकली और उठ कर वॉशरूम में चली गई।

जब मैं वापिस आई तो अचानक ही मेरे ज़हन में एक ख्याल आया। मैंने जाहिरा को देखा.. तो वो गहरी नींद में थी। मैंने आहिस्ता से उसे करवट दी तो वो घूम कर बिस्तर पर मेरी वाली जगह पर अपने भाई फैजान के क़रीब आ गई।

मैं मुस्कराई और जाहिरा को अपनी जगह पर करके खुद उसकी वाली जगह पर लेट गई।अब मुझे सोना नहीं था बल्कि आगे जो होने वाला था.. उसका इंतज़ार करना था।

अब आगे लुत्फ़ लें..

थोड़ी देर के बाद वो ही हुआ जिसका अन्दाजा था.. फैजान ने करवट बदली और जाहिरा की तरफ मुँह कर लिया। लेकिन उसे नहीं पता था कि वहाँ पर मैं नहीं.. बल्कि उसकी अपनी बहन जाहिरा लेटी हुई है। इसलिए उसने अपनी नींद में ही आदत के मुताबिक़ ही अपना बाज़ू जाहिरा के ऊपर डाला और उसे बाँहों में भरते हुए अपने क़रीब खींच लिया.. जैसे कि वहाँ पर जाहिरा नहीं बल्कि मैं हूँ।

मैं धीरे से मुस्कराई और जाहिरा को थोड़ा और आगे को पुश कर दिया।अब जाहिरा की चूचियाँ फैजान के सीने के साथ चिपक गई थीं लेकिन अभी तक दोनों बहन-भाई नींद में ही थे अगरचे दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए थे।

मैंने अपना हाथ जाहिरा के ऊपर से आगे बढ़ाया और फैजान के पजामे के ऊपर से ही उसका लंड पकड़ कर आहिस्ता आहिस्ता सहलाने लगी।मैं फैजान के लंड को खड़ा करना चाहती थी और नींद में ही फैजान का लंड आहिस्ता आहिस्ता खड़ा होने लगा।

जैसे ही फैजान का लंड खड़ा हुआ.. तो उसने अपनी एक टाँग भी जाहिरा की जाँघों के ऊपर डाली और अपना लंड उसकी जाँघों के दरम्यान घुसाते हुए उससे चिपक गया।

मैं मुस्कराई और अपना हाथ पीछे खींच लिया। मेरा काम काफ़ी हद तक हो चुका था।फैजान का इस तरह से जाहिरा को अपने साथ चिपकाने और दबाने की वजह से जाहिरा की आँख खुल गई।

जैसे ही वो थोड़ा सा कसमसाई तो मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और थोड़ी सी आँख खोल कर उसे देखने लगी।

जाहिरा ने जल्दी से करवट ली और सीधी होकर मेरी तरफ देखने लगी कि यह कैसे हुआ है कि वो मेरी जगह पर है। लेकिन मैं सोती हुई बन गई।

वो हैरत से मेरी तरफ देख रही थी.. फिर उसने आहिस्ता से अपने भाई का हाथ अपने जिस्म पर से उठाया और पीछे कर दिया। अब वो बिल्कुल सीधी लेटी हुई थी और थोड़ी सी कन्फ्यूज़ लग रही थी। फैजान के खर्राटों की आवाज़ अभी भी आ रही थी।

दोबारा थोड़ी देर में वो ही हुआ जिसकी फैजान को आदत पड़ी हुई थी। उसने दोबारा अपना हाथ फैलाया और जाहिरा के सीने पर रख कर इस बार उसकी छोटी सी चूची को अपनी हाथ में ले लिया। जाहिरा ने घबरा कर पहले फैजान की तरफ देखा और फिर मेरी तरफ.. लेकिन जब उसे तसल्ली हो गई कि हम दोनों ही सो रहे हैं और किसी को भी होश नहीं है।

जाहिरा की चूची के ऊपर उसके भाई का हाथ था.. जिसने मुठ्ठी में अपनी बहन की चूची को लिया हुआ था। जाहिरा ने आहिस्ता से अपना हाथ अपने भाई के हाथ पर रखा और उसे पीछे को हटाने लगी। एक लम्हे के लिए यूँ अपनी चूचियों पर किसी का टच उसे भी अच्छा ही लगा था.. लेकिन फिर उसने अपने भाई का हाथ हटा दिया।

लेकिन अभी एक मुसीबत और भी तो थी ना.. फैजान का अकड़ा हुआ लंड उसकी जाँघों से लड़ रहा था। जाहिरा थोड़ी सी मेरी तरफ सरकी और मेरी तरफ करवट लेकर लेट गई.. मुझे थोड़ी मायूसी हुई।

अब जाहिरा का रुख़ मेरी तरफ था। उसने अपना बाज़ू मेरे पेट पर रखा और मुझे अपने आगोश में लेकर के लेट गई। लेकिन अगले ही लम्हे वो उछल ही पड़ी। मैं भी हैरान हुई और फिर थोड़ा सा देखा.. तो फैजान अपनी नींद में अपनी टाँग जाहिरा के चूतड़ों के ऊपर ला चुका हुआ था और ज़ाहिर है कि उसका लंड पीछे से आकर कर जाहिरा की गाण्ड में घुस गया हुआ था। जैसे कि वो मेरी गाण्ड में पीछे से घुसा देता था।

अभी भी उसे यही पता था कि वो अपनी बीवी के साथ ही है.. क्योंकि अगर उसे पता चल जाता कि यह मैं नहीं.. उसकी बहन है.. तो वो ज़रूर पीछे हो चुका होता।

मैंने देखा कि मेरे पेट के ऊपर रखा हुआ जाहिरा का हाथ पीछे को गया.. तो मेरी चूत ही जैसे पानी छोड़ गई।

ज़ाहिर है कि जाहिरा ने पीछे हाथ ले जाकर अपने भाई का लंड पीछे को करने की कोशिश की थी.. लेकिन उसका हाथ काफ़ी देर तक वापिस नहीं आया था।शायद वो अपने भाई के लंड को फील कर रही थी।

फिर उसने अपना हाथ वापिस आगे किया और मेरे पेट पर रख कर मुझे हिलाते हुए आवाज़ देने लगी- भाभी.. भाभी.. उठो मैं जाहिरा..मैंने जैसे नींद में आँखें खोलीं और बोली- हाँ.. क्या मसला है.. इतनी रात को क्यों जाग रही हो?वो बोली- भाभी.. यह मैं आपकी जगह पर कैसे आ गई हूँ?

मैंने अब आँखें खोलीं और बोली- अरे यार मैं बाथरूम में गई थी.. वापिस आई तो तुम घूमती हुई मेरी जगह पर पहुँची हुई थीं.. तो मैं यहीं पर तुम्हारी जगह पर लेट गई।वो बोली- अच्छा भाभी.. चलो आप वापिस आओ अपनी जगह पर..

मैंने नींद में होने की एक्टिंग ही करते हुए दूसरी तरफ करवट ली और बोली- सो जा यार.. क्यों मेरी भी नींद खराब कर रही हो।

जाहिरा बेबस होकर वहीं लेटी रह गई। लेकिन अब वह मेरे साथ और भी चिपक गई ताकि उसके भाई से उसका फासला हो जाए।

फिर मैंने जाहिरा को सीधी होते हुए महसूस किया। लेकिन अगले ही लम्हे मुझे अपनी कमर के पास फैजान का हाथ महसूस हुआ। मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ गई.. क्योंकि एक बार फिर से उसका हाथ अपनी बहन की चूचियों पर आ चुका हुआ था।

थोड़ी ही देर में मुझे जाहिरा की आवाज़ सुनाई दी- भाईजान… उठो जरा.. यह मैं हूँ.. भाभी नहीं हैं..फिर मुझे फैजान की बौखलाई सी आवाज़ सुनाई दी- अरे तू यहाँ कैसे आ गई.. और तेरी भाभी कहाँ है?जाहिरा आहिस्ता से बोली- भैया वो उधर चली गई हुई हैं।फिर फैजान की आवाज़ आई- सॉरी जाहिरा.. मैं समझा था कि ताबिदा है।

इसके साथ ही फैजान ने दूसरी तरफ करवट ली और दोबारा से सोने लगा। लेकिन मैं जानती थी कि दोनों बहन-भाई को काफ़ी देर तक नींद आने वाली नहीं थी।मुझे यह भी पता था कि अब कुछ और नहीं होगा.. इसलिए मैंने भी अपनी आँखें मूँदीं और सो गई।

आप सब इस कहानी के बारे में अपने ख्यालात इस कहानी के सम्पादक की ईमेल तक भेज सकते हैं।अभी वाकिया बदस्तूर है।support@mohakkisse.com

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कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

एक भाई की वासना

कुल भाग: 49
भाग 1
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भाग 2
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भाग 3
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भाग 4
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भाग 5
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भाग 6
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भाग 7
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भाग 8
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भाग 9
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भाग 10
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भाग 11
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भाग 12
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भाग 13
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भाग 14
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भाग 15
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भाग 17
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भाग 18
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भाग 19
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भाग 20
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भाग 21
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भाग 22
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भाग 23
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भाग 24
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भाग 25
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भाग 26
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भाग 27
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भाग 28
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भाग 29
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भाग 30
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भाग 31
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भाग 32
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भाग 33
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भाग 34
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भाग 35
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भाग 36
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भाग 37
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भाग 38
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भाग 39
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भाग 40
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भाग 41
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भाग 42
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भाग 43
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भाग 44
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भाग 45
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भाग 46
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भाग 47
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भाग 48
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भाग 49
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भाग 50
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