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भाई बहन पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 410 बार

एक भाई की वासना -3

जूजाजी

09 Apr 2018 को प्रकाशित

एक भाई की वासना -3
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सम्पादक – जूजा जीहजरात आपने अभी तक पढ़ा..मैंने उसके घुटनों पर भी आहिस्ता-आहिस्ता मूव लगानी शुरू कर दी और मसाज करती हुई.. मैंने तिरछी नज़र से अपने शौहर की तरफ देखा.. तो पता चला कि अब भी वो चोर नज़रों से अपनी बहन की नंगी टाँग की ओर देख रहे थे।मैं दिल ही दिल में मुस्करा दी।

कितनी अजीब बात थी कि एक भाई भी अपनी सग़ी छोटी बहन की नंगी टाँग को ऐसी प्यासी नज़रों से देख रहा था.. जैसे कि वो उसकी बहन ना हो.. बल्कि कोई गैर लड़की हो!मुझे इस गंदे खेल में अजीब सा मज़ा आ रहा था और मैं इसलिए इस मसाज को एक्सटेंड करती जा रही थी.. ताकि फैजान ज्यादा से ज्यादा अपनी बहन के जिस्म से अपनी आँखों को सेंक सके।अब आगे लुत्फ़ लें..

अब मेरे दिमाग में एक और शैतानी ख्याल आया जिससे मैं फैजान को और भी क़रीब से उसकी बहन की नंगी मुलायम टाँगें दिखा सकती थी। मैंने अपने पास ही सोफे पर रखी हुई मूव नीचे फर्श पर गिरा दी। थोड़ी देर के बाद मैंने फैजान को आवाज़ दी- सुनो.. जरा मुझे मूव नीचे से उठा कर दें..मैंने यह बात बिना फैजान की तरफ देखते हुए कही.. और वो ऐसे चौंका जैसे किसी ख्वाब से जगा हो..

फिर वो हमारी तरफ बढ़ा। इतनी देर में मैंने जाहिरा की दूसरी टाँग भी नंगी कर दी थी और उसको भी मैं मजे से सहला रही थी। जाहिरा को जैसे अब दर्द से कुछ सुकून मिल रहा था.. जिसकी वजह से वो आँखें मूंदे लेटी हुई थी।

फैजान मेरे क़रीब आया और नीचे फर्श पर से मूव उठा कर मेरी तरफ बढ़ाई लेकिन मैंने अपनी स्कीम की मुताबिक़ बिना उसकी तरफ देखते हुए कहा- थोड़ी सी यहाँ पर लगा दो..

मैंने जाहिरा की दूसरी टांग की तरफ इशारा करते हुए उससे कहा.. दिल ही दिल में मैं मुस्करा रही थी और देखना चाहती थी कि अपनी बहन की नंगी टाँग के इतने क़रीब होते वक्त फैजान का क्या रिएक्शन होता है।दूसरी तरफ मासूम जाहिरा आँखें बंद करके चुपचाप लेटी हुई थी… उसे नहीं अंदाज़ा था कि उसकी भाभी क्या गेम खेल रही है और उसका अपना सगा बड़ा भाई किस नज़र से उसके नंगे जिस्म को देख रहा है..

आहिस्ता से फैजान ने हाथ बढ़ाया और जाहिरा की एक नंगी टाँग के ऊपर से हाथ गुज़ार कर दूसरी तरफ वाली टाँग पर मूव लगाने लगा। मेरी नज़र उसके हाथ पर ही थी.. जिसमें मुझे हल्की-हल्की कंपकंपाहट महसूस हो रही थी।

दूसरी टाँग की तरफ हाथ ले जाते हुए उसका हाथ जाहिरा की पहली टाँग को टच करने लगा। मैंने आहिस्ता से उसकी चेहरे की तरफ देखा.. तो उसका चेहरा लाल हो रहा था और नजरें तो जैसे अपनी बहन की मखमली गोरी-गोरी नंगी टाँगों से चिपकी ही पड़ी थीं।

मूव लगा कर फैजान ने हाथ पीछे हटाया और मूव को टेबल पर रख कर वापिस दूसरे सोफे पर जा कर बैठ गया और टीवी देखने की एक्टिंग करने लगा। जबकी उसकी नज़र अब भी चोरी-छिपे जाहिरा की नंगी टाँगों को ही देख रही थीं।

थोड़ी देर चुप रहने की बाद फैजान बोला- आख़िर तुमको हुआ क्या था.. जो नीचे ऐसी गिर पड़ीं?जाहिरा बोली- भैया वो मेरा पैर पायेंचे में फँस गया.. तो गिर गई..

मुझे तो जैसे मौका ही मिल गया.. मैंने फ़ौरन ही कहा- गिरना ही पड़ेगा ना तुमको.. जो इतने पुरानी फैशन की खुले-खुले पायंचों वाली सलवारें पहनती हो। मैंने कितनी बार कहा है कि माहौल और फैशन के मुताबिक़ ड्रेसिंग किया करो।मैंने उसे प्यार से डाँटते हुए कहा।

फैजान भी बोला- हाँ.. ठीक ही तो कह रही है तुम्हारी भाभी.. वैसे यह तुम्हारा ही काम है ना.. कि तुम इसे समझाओ कि शहर में कैसे रहना होता है..मैं- मेरे पर क्यों गुस्सा होते हो.. पूछ लो इससे.. कितनी बार कहा है इसे.. कि मेरी तरह की ड्रेसिंग किया करो.. लेकिन यह नहीं मानती है.. यह तुमसे डरती है.. कि पता नहीं भैया बुरा न मान जाएं।

फैजान- लो.. इसमें मेरे बुरा मानने वाली कौन सी बात है.. आख़िर वक़्त कि मुताबिक़.. एक हद में रह कर.. तो चलना ही होता है ना..मैं- यही तो मैं इसको समझाती हूँ कि देखो मैं भी तो लेटेस्ट कपड़े पहनती हूँ ना.. तो क्या कभी तुम्हारी भाई ने मुझे रोका है.. या कभी बाहर कुछ ऐसा-वैसा हुआ है.. जो तुम डरती हो?

जाहिरा शरमाते हुए बोली- अच्छा भाभी अब बस भी करो न.. क्यों भैया के सामने मेरी वाट लगाने में लगी हुई हैं।जाहिरा की इस बात पर मैं और फैजान दोनों हँसने लगे। मैं महसूस कर चुकी थी कि फैजान को अपनी सग़ी बहन की नंगी टाँगों को देख कर बहुत अच्छा लगा था।

मैं सोच रही थी कि अगर जाहिरा भी मेरे जैसे ही कपड़े पहने.. तो फैजान की तो फट ही जाएगी और फिर मैं देखूँगी कि अपनी बहन पर नज़र डालने से कैसे वो खुद को रोकता है। मेरे दिल में सिर्फ़ और सिर्फ़ शरारत थी कि मैं एक भाई को उसकी बहन की जरिए से टीज़ करूँ और देखूँ कि आख़िर एक भाई कितना ज़ब्त कर सकता है.. या अपनी बहन कि जिस्म को किस हद तक देख सकता है।

कुछ दिन की लिए जाहिरा को अपनी कॉलेज से छुट्टी करनी पड़ी और इन दिनों वो घर पर ही रहती थी।

मैं उसकी रोज़ाना मूव लगा कर मालिश करती थी.. लेकिन हमेशा ही मेरी यही कोशिश होती थी कि मैं उसकी टाँगों की मालिश उसके भाई के सामने ही करूँ.. ताकि उसे अपनी बहन के जिस्म से आँखें सेंकने का मौका मिल सके। उधर फैजान का भी यही हाल था कि जब भी मैं जाहिरा को क्रीम लगाती.. तो वो आस-पास ही भटकता रहता था।

इसी दौरान मैंने जाहिरा को एक जीन्स लाकर दी और उसने बहुत ही शरमाते हुए एक लोंग शर्ट के साथ पहनी।मैंने भी उसको टी-शर्ट पहनने पर जोर नहीं प्रिया कि चलो शुरू तो कराया.. तो एक दिन इसको सेक्सी कपड़े भी पहना दूँगी।

जब फैजान जॉब से वापिस आया तो जाहिरा उस जीन्स में बाहर ही नहीं आ रही थी। बड़ी मुश्किल से वो बाहर आई तो उसका चेहरा शर्म से सुर्ख हो रहा था और वो नजरें ऊपर नहीं कर पा रही थी।

हालांकि उसकी शर्ट ने उसकी पूरी जीन्स को छुपाया हुआ था और उसकी जीन्स सिर्फ़ घुटनों से नीचे से ही नज़र आ रही थी।वो बाहर आई तो वो अपनी कमीज़ को अपने जिस्म के साथ चिपका रही थी और नीचे को खींच रही थी.. जैसे कि अपनी जीन्स को छुपाना चाहती हो।

फैजान ने उसे देखा तो पहली तो हैरान हुआ और फिर जोर-जोर से हँसने लगा.. जिसे देख कर मैं भी हँसने लगी।उधर जाहिरा का और भी बुरा हाल हो गया.. शर्म से उसका चेहरा रोने वाला हो रहा था।

आप सब इस कहानी के बारे में अपने ख्यालात इस कहानी के सम्पादक की ईमेल तक भेज सकते हैं।अभी वाकिया बदस्तूर है।support@mohakkisse.com

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कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

एक भाई की वासना

कुल भाग: 49
भाग 1
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भाग 2
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भाग 3
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भाग 4
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भाग 5
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भाग 6
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भाग 7
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भाग 8
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भाग 9
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भाग 10
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भाग 11
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भाग 12
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भाग 13
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भाग 14
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भाग 15
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भाग 17
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भाग 18
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भाग 19
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भाग 20
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भाग 21
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भाग 22
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भाग 23
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भाग 24
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भाग 25
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भाग 26
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भाग 27
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भाग 28
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भाग 29
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भाग 30
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भाग 31
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भाग 32
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भाग 33
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भाग 34
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भाग 35
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भाग 36
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भाग 37
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भाग 38
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भाग 39
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भाग 40
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भाग 41
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भाग 42
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भाग 43
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भाग 44
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भाग 45
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भाग 46
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भाग 47
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भाग 48
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भाग 49
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भाग 50
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