होम पर वापस जाएं
कोई मिल गया पठन समय: 5 मिनट पढ़ा गया: 1,268 बार

मेरी चालू बीवी-123

इमरान

28 May 2026 को प्रकाशित

मेरी चालू बीवी-123
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

सम्पादक- इमरान

प्रिय पाठकगण, एक अरसे बाद अपनी कहानी पुनः शुरु कर रहा हूँ।अनुपस्थित रहने के लिये क्षमा प्रार्थी हूँ।पिछले भाग में आपने पढ़ा था कि एक विवाह उत्सव में शामिल होने के हम लोग दूसरे शहर गए थे। वहाँ आधी रात का नज़ारा चल रहा था, मेरी बीवी सलोनी वहाँ एक कथित मामाजी से चुद चुकी थी और उन मामा जी की पुत्रवधू रानी मुझसे चुकी थी।

बार रे बाप… क्या नजारा था!

रानी अपने पति की गोद में सर रखे लेटी थी और तीन लौड़े उसको अपने पानी से भिगो रहे थे।

रानी का पूरा जिस्म वीर्य से सराबोर था, लगता था तीनों ने उस को जमकर चोदा था।

केवल रानी के पति के बदन पे ही एक आध कपड़ा दिखाई दे रहा था।

रानी और वे तीनों मुस्टण्डे तो पूरे नंगे ही थे।

अब तो वो सलमान भी पूर्ण मर्द नज़र आ रहा था।

उसका लण्ड देखकर लग रहा था कि जैसे उसने भी रानी को जमकर चोदा है।

तभी सलोनी भी मेरे पास आकर बैठ गई। मैंने ध्यान प्रिया कि वो बिल्कुल मामाजी के चेहरे के पास आकर बैठी थी, उसके चूतड़ मामाजी के नाक से रगड़ रहे थे।

पर लगत रहा था कि जैसे मामा जी गहन निद्रा में थे।

अब तो सलोनी मेरे समक्ष भी काफी खुल रही थी।

मैं- अरे यह कौन है यार, और कैसे यह सब कर रही है?मैं रानी को देख कर ही बोला।

सलोनी- मुझे नहीं पता… पर लगता नहीं कि जबरन कुछ हो रहा है, देखे, यह मजे ले कर ही सब ही करवा रही है।

मैं- हम्म, तुम ठीक कह रही हो… चलो छोड़ो इन लोगों को!

मैं सलोनी को साथ लेकर अपने बिस्तर पर चला आया।

उस विवाह में ऐसा काफ़ी कुछ हुआ जिस से काफ़ी परिवर्तन आ गया हमारे जीवन में…

रानी की जोरदार चूत चुदाई देखने के पश्चात हम दोनों लेट गए।

मेरी आँखों में नींद नहीं थी, सलोनी पेटीकोट ब्लाउज में थी।

सवेरे पाँच बजे के करीब मुझे लगा कि वो उठ रही है परन्तु वो खिसक कर मामाजी के कंबल में घुस गई।

उसे भली प्रकार से पता था कि मैं सोया हुआ नहीं था, फिर भी उसने ऐसी हरकत की।

मैंने देखा कि मामा जी ने तो फिर भी एक मर्तबा मेरी तरफ़ देखा कि मैं सो रहा हूँ या जाग रहा हूँ…

यह भी पढ़ें (Recommended)

भईया भाभी का साथ-3

पर सलोनी ने एक बार भी यह देखने की कोशिश नहीं की, उसका भय- शर्म ख़त्म हो चुकी था, अब तो वो सरेआम चुदवा सकती थी।

सलोनी ने मेरे देखते देखते मामा जी का लौड़ा चूसा, फिर खड़ी होकर अपना पेटिकोट उतार कर नीचे से नग्न हो गई।

उसके बाद निडर होके वो मामा जी के कम्बल में सरक गई और कुछ ही पलों में उसकी सिसकारियाँ गूँजने लगी।

मेरी सलोनी मेरे ही सामने एक अधेड़ मर्द से चुदवा रही थी और मैं कुछ नहीं कर रहा था।

वो अपनी फ़ुद्दी चुदवा कर चुपचाप फिर से मेरे बिस्तर में आ गई।

इससे पहले सलोनी ने ऐसा नहीं किया था पर उस रात तो उसने मेरे सामने ही मामाजी से एक बार फिर चूत चुदवा ली।

मैंने उसे अपने बदन से चिपका लिया जिससे उसको यह एहसास हो जाये कि मैं जाग रहा हूँ।

वो भी कस कर मुझसे चिपक गई और उसने कोई अलग प्रतिक्रिया नहीं की।

जैसे ही मेरा हाथ उसकी कमर पर गया, मुझे पता चला कि उसने अपना ब्लाउज और ब्रा भी उतार दिये थे।

उसका चिकना जिस्म अभी भी चुदाई की गर्मी से गर्म था और वो पूर्ण नग्न थी।

जैसे ही मेरा हाथ उसके चूतड़ों पर आया… हे भगवान्… यह क्या… वहाँ तो सब चिपचिप था।

लग रहा था कि मामाजी ने उसको पीछे से ही चोदा… और फिर अपना सारा वीर्य उसके कूल्हों पर निकाल प्रिया था।

मैं उस चिपचिपे पानी को अपने हाथ से उसकी पीठ पर पोंछता हुआ और नीचे पहुँचा तो उसकी गोल जांघों पर भी वैसे ही माल चिपका हुआ था।

सलोनी को पूरा एहसास हो रहा होगा कि मैं उसकी चुदवाई की निशानी देख रहा हूँ फिर भी उस पर किसी तरह से कोई प्रभाव नहीं दिखा..

इसका मतलब स्पष्ट था कि उसे पता था कि मुझे उस की चुदाई का मुझे सब कुछ पता था।

वैसे भी मैं भी तो यही चाहता था.. अतः अब कुछ भी सोचना-कहना बेकार था।

एक अलग ही तरह का मौन था हमारे बीच जो हमारे प्रेम को न जाने कहाँ लेकर जाने वाला था।

मैंने अपने हाथ से ही उसके बदन की सारी चिपचिपाहट को साफ कर प्रिया।

फिर कुछ देर बाद हम उठ गए, पहले सलोनी ही उठी, वो बिल्कुल नंगी ऐसे ही उठकर खड़ी हो गई, उसने एक कमर तोड़ अंगड़ाई ली तो उसके मदमस्त बदन का एक एक कटाव खिल कर उजागर हो उठा।

मैंने मामा जी की तरफ़ देख, साफ दिख रहा था कि वे जाग रहे हैं और उनकी निगाहें सलोनी पर ही टिकी थीं।वैसे भी अब सात से ऊपर हो चुके थे।

बहुत मदमस्त रात बीती थी यह…कहानी जारी रहेगी।

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

मेरी चालू बीवी

कुल भाग: 129
भाग 1
भाग 1: पढ़ें
भाग 2
भाग 2: पढ़ें
भाग 3
भाग 3: पढ़ें
भाग 4
भाग 4: पढ़ें
भाग 5
भाग 5: पढ़ें
भाग 6
भाग 6: पढ़ें
भाग 7
भाग 7: पढ़ें
भाग 8
भाग 8: पढ़ें
भाग 9
भाग 9: पढ़ें
भाग 10
भाग 10: पढ़ें
भाग 11
भाग 11: पढ़ें
भाग 12
भाग 12: पढ़ें
भाग 13
भाग 13: पढ़ें
भाग 14
भाग 14: पढ़ें
भाग 15
भाग 15: पढ़ें
भाग 16
भाग 16: पढ़ें
भाग 17
भाग 17: पढ़ें
भाग 18
भाग 18: पढ़ें
भाग 19
भाग 19: पढ़ें
भाग 20
भाग 20: पढ़ें
भाग 21
भाग 21: पढ़ें
भाग 22
भाग 22: पढ़ें
भाग 23
भाग 23: पढ़ें
भाग 24
भाग 24: पढ़ें
भाग 25
भाग 25: पढ़ें
भाग 26
भाग 26: पढ़ें
भाग 27
भाग 27: पढ़ें
भाग 28
भाग 28: पढ़ें
भाग 29
भाग 29: पढ़ें
भाग 30
भाग 30: पढ़ें
भाग 31
भाग 31: पढ़ें
भाग 32
भाग 32: पढ़ें
भाग 33
भाग 33: पढ़ें
भाग 34
भाग 34: पढ़ें
भाग 35
भाग 35: पढ़ें
भाग 36
भाग 36: पढ़ें
भाग 37
भाग 37: पढ़ें
भाग 38
भाग 38: पढ़ें
भाग 39
भाग 39: पढ़ें
भाग 40
भाग 40: पढ़ें
भाग 41
भाग 41: पढ़ें
भाग 42
भाग 42: पढ़ें
भाग 43
भाग 43: पढ़ें
भाग 44
भाग 44: पढ़ें
भाग 45
भाग 45: पढ़ें
भाग 46
भाग 46: पढ़ें
भाग 47
भाग 47: पढ़ें
भाग 48
भाग 48: पढ़ें
भाग 49
भाग 49: पढ़ें
भाग 50
भाग 50: पढ़ें
भाग 51
भाग 51: पढ़ें
भाग 52
भाग 52: पढ़ें
भाग 53
भाग 53: पढ़ें
भाग 54
भाग 54: पढ़ें
भाग 55
भाग 55: पढ़ें
भाग 56
भाग 56: पढ़ें
भाग 57
भाग 57: पढ़ें
भाग 58
भाग 58: पढ़ें
भाग 59
भाग 59: पढ़ें
भाग 60
भाग 60: पढ़ें
भाग 61
भाग 61: पढ़ें
भाग 62
भाग 62: पढ़ें
भाग 63
भाग 63: पढ़ें
भाग 64
भाग 64: पढ़ें
भाग 65
भाग 65: पढ़ें
भाग 66
भाग 66: पढ़ें
भाग 67
भाग 67: पढ़ें
भाग 68
भाग 68: पढ़ें
भाग 69
भाग 69: पढ़ें
भाग 70
भाग 70: पढ़ें
भाग 71
भाग 71: पढ़ें
भाग 72
भाग 72: पढ़ें
भाग 73
भाग 73: पढ़ें
भाग 74
भाग 74: पढ़ें
भाग 75
भाग 75: पढ़ें
भाग 76
भाग 76: पढ़ें
भाग 77
भाग 77: पढ़ें
भाग 78
भाग 78: पढ़ें
भाग 79
भाग 79: पढ़ें
भाग 80
भाग 80: पढ़ें
भाग 81
भाग 81: पढ़ें
भाग 82
भाग 82: पढ़ें
भाग 83
भाग 83: पढ़ें
भाग 84
भाग 84: पढ़ें
भाग 85
भाग 85: पढ़ें
भाग 86
भाग 86: पढ़ें
भाग 87
भाग 87: पढ़ें
भाग 88
भाग 88: पढ़ें
भाग 89
भाग 89: पढ़ें
भाग 90
भाग 90: पढ़ें
भाग 91
भाग 91: पढ़ें
भाग 92
भाग 92: पढ़ें
भाग 93
भाग 93: पढ़ें
भाग 94
भाग 94: पढ़ें
भाग 95
भाग 95: पढ़ें
भाग 96
भाग 96: पढ़ें
भाग 97
भाग 97: पढ़ें
भाग 98
भाग 98: पढ़ें
भाग 99
भाग 99: पढ़ें
भाग 100
भाग 100: पढ़ें
भाग 101
भाग 101: पढ़ें
भाग 102
भाग 102: पढ़ें
भाग 103
भाग 103: पढ़ें
भाग 104
भाग 104: पढ़ें
भाग 105
भाग 105: पढ़ें
भाग 106
भाग 106: पढ़ें
भाग 107
भाग 107: पढ़ें
भाग 108
भाग 108: पढ़ें
भाग 109
भाग 109: पढ़ें
भाग 110
भाग 110: पढ़ें
भाग 111
भाग 111: पढ़ें
भाग 112
भाग 112: पढ़ें
भाग 113
भाग 113: पढ़ें
भाग 114
भाग 114: पढ़ें
भाग 115
भाग 115: पढ़ें
भाग 116
भाग 116: पढ़ें
भाग 117
भाग 117: पढ़ें
भाग 118
भाग 118: पढ़ें
भाग 119
भाग 119: पढ़ें
भाग 120
भाग 120: पढ़ें
भाग 121
भाग 121: पढ़ें
भाग 122
भाग 122: पढ़ें
भाग 123
भाग 123: पढ़ें
भाग 124
भाग 124: पढ़ें
भाग 125
भाग 125: पढ़ें
भाग 126
भाग 126: पढ़ें
भाग 127
भाग 127: पढ़ें
भाग 128
भाग 128: पढ़ें
भाग 129
भाग 129: पढ़ें
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

भईया भाभी का साथ-3
कोई मिल गया

भईया भाभी का साथ-3

जब मैं उनके कमरे में झांकने लगी तो भाभी सिर्फ पेंटी में थी, उन्होंने ब्रा उतार दी थी और बेटी को दूध पिला रही थी।

8 मिनट 748
पापा का दोस्त
कोई मिल गया

पापा का दोस्त

प्रेषिका : लवीना सिंह

13 मिनट 489
बहुत देर कर दी सनम आते आते -1
कोई मिल गया

बहुत देर कर दी सनम आते आते -1

वैसे तो बात बहुत पुरानी हो चुकी है पर कुछ किस्से ऐसे होते है जो अक्सर अपनी याद खुद दिलवाते रहते हैं।आपने अक्सर देखा और सुना होगा कि शादी विवाह में कुछ लोग ऐसे मिलते हैं जिनसे नजर नहीं हटती, चाहे वो अपनी/अपना रिश्तेदार ही क्यूँ ना हो।ऐसा सभी के साथ...

11 मिनट 1,143

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

गौरव

1 month ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

शुभम, गोरखपुर

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।