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मेरी चालू बीवी-107

इमरान

06 Apr 2026 को प्रकाशित

मेरी चालू बीवी-107
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सम्पादक – इमरान

फिर ऐसे ही मस्ती करते हुए हम शादी वाली जगह पहुँच गए।

यहाँ तो चारों ओर मस्ती ही मस्ती नजर आ रही थी, बहुत ही शानदार होटल था, सभी कमरे ए सी थे और 3-4 लोगों के लिये एक कमरा सेट था।

हम चारों ने अपना सामान एक कमरे में सेट कर लिया था, अरविन्द अंकल और हम..!!

वहाँ पहुँचते हुए रात तो हो ही गई थी और थकान भी हो रही थी, खाना हम सबने वहीं मंगवाया और जल्दी ही खा लिया।

फ़िर सभी ने कपड़े बदले और सो गए।

एक बेड पर हम दोनों और दूसरे पर अरविन्द अंकल, भाभी जी सो गए।

सलोनी और भाभी दोनों ने ही सेक्सी नाइटी ही पहनी थी, मगर सही ही लग रही थी।

नलिनी भाभी के तो अंडरगार्मेंट्स दिख रहे थे पर सलोनी ने यकीनन अंदर कुछ नहीं पहना था पर गहरी रंग की नाइटी होने से कुछ ज्यादा पता नहीं चल रहा था।

हम शरीफ जोड़े की तरह दोनों सो गए, शायद सभी बहुत थक गए थे।

लम्बी ड्राइव ने मुझे कुछ ज्यादा ही थका प्रिया था इसलिए नींद भी सही से नहीं आ रही थी।

मैंने उठकर देखा, हल्की रोशनी में दिखा कि सभी सो रहे थे।

सलोनी के ऊपर तो चादर थी पर नलिनी भाभी की पैर नंगे दिख रहे थे, शायद उनकी नाइटी ऊपर तक चढ़ गई थी।

मुझे पेशाब की हाजत महसूस हुई इसलिए बाथरूम में आ गया, फ्रेश होने के बाद देखा कि बाथरूम में पीछे की ओर एक दरवाजा था, मैंने सोचा कि देखूँ क्या है इसके पीछे !

वो पीछे की एक पतली गैलरी थी, सारे पाइप और ए सी वहाँ ही लगे थे।

वापस आने की सोच ही रहा था कि आगे एक कमरे से रोशनी बाहर आती नजर आई।

बस मन में शैतानी आ गई कि देखूँ कौन है उसमें…वैसे भी इस फ्लोर के तो सभी कमरे हमारे लिए ही बुक थे।

चुपके से वहाँ जाकर देखा तो एक खिड़की खुली हुई थी।अरे यह तो मेहता अंकल का कमरा था। अंकल तो रिया के साथ थे, दोनों पूरे नंगे थे, शायद रिया की कमर पर कच्छी थी, वो घुटनों के बल झुकी हुई अंकल के लण्ड से खेल रही थी।

कभी हाथ से पकड़कर हिलाती तो कभी अपने होंठों से रगड़ती !

मैं कुछ और पास को आया जिससे उनकी आवाज सुन सकूँ…तभी मुझे ऋतु भी दिख गई, वो दूसरे बिस्तर पर सो रही थी।

मैंने अपने दिल में सोचा काश इसको भी नंगी देख पाता।

उधर वो दोनों मस्ती में लीन थे!

रिया- ओह डैड… मान जाओ ना ..लाओ हाथ से ही कर देती हूँ। मुझे क्या पता था कि इतनी जल्दी हो जायेगा, मुझे तो आपसे भी ज्यादा बुरा लग रहा है।

अरे इसका क्या हो गया यार? क्यों मना कर रही है चुदवाने से?

मेहता अंकल- अरे तू भी ना… खुद तो डेट से हो गई और ऋतु को चोदने को मना कर रही है? करने दे ना, बहुत जल्दी हो जायेगा!

रिया- नहीं, बिलकुल नहीं… मुझे पता है कि कितनी देर लगती है आपको! वैसे भी बड़ी मुश्किल से उसकी फ़ुद्दी को कुछ टाइट किया है!आपने तो उसके दोनों छेदों का कबाड़ा ही कर प्रिया था। कितनी फैल गई थी उसकी चूत… वो तो मैंने कैसे-कैसे करके उसको टाइट किया है। और चूतड़ का छेद तो अभी भी सही नहीं हुआ है।

मेहता अंकल- अरे यार कुछ नहीं होता, वो बहुत समझदार है, सब संभाल लेगी। चल गांड में ही हल्का सा डाल कर फ्री हो जाता हूँ वरना परेशान हो जाऊँगा।

रिया- ओह आप समझते क्यों नहीं? उसको तो अभी आप भूल ही जाओ। जब शादी के बाद वो पहली बार आये तभी उसको चोद पाओगे! अभी के लिए सलोनी भाभी को बुला लो।

मेहता अंकल- अरे यार अंकुर उसके साथ है… ऐसे में कैसे होगा? मुझे क्या पता था कि वो इतनी छुट्टी निकल लेगा? मैंने तो सोचा था कि सलोनी अकेली आएगी, खूब मस्ती करूँगा। अह्हाआ… आहआ अब तो सब गड़बड़ हो गई..

तभी रिया उठकर अपना गाउन पहनते हुए बोली- रुको मैं देखती हूँ, शायद कुछ हो जाये।

और वो कमरे से बाहर को चली गई, मैं भी जल्दी से बाथरूम में आ गया, हल्का सा दरवाजा खोलकर देखा, रिया हमारे कमरे में आ गई थी और वो सलोनी को उठा रही थी।

अरविन्द अंकल भी वहीं खड़े थे, शायद उन्होंने ही दरवाजा खोला होगा।

रिया- सलोनी भाभी, प्लीज बहुत जरूरी काम है… आप आओ ना!

सलोनी ने जैसे ही चादर हटाई तो उसका गाउन कमर से भी ऊपर था जो उसने बिस्तर से नीचे आकर ही सही किया।

सलोनी- रुक तो, कुछ चेंज तो कर लूँ…

रिया- अरे नहीं भाभी, वहाँ हम दोनों ही हैं, ऐसे ही आ जाओ…

और वो सलोनी को वैसे ही गाउन में ही अपने साथ ले गई।

मैं फिर से पीछे से उसी कमरे में पहुँच गया। रिया तो सलोनी को कमरे में छोड़कर वापस चली गई।

बहुत समझदार थी वो, शायद सलोनी को खुलकर मजा लेने के लिए ही उसने ऐसा किया था।

सलोनी- क्या हुआ अंकल? कहाँ है ऋतु?

मेहता अंकल ने सलोनी को चुप रहने का इशारा किया और उसको सोती हुई ऋतु को दिखाया।

फिर उन्होंने कसकर सलोनी का हाथ पकड़ा और उसको अपने बिस्तर की ओर ले गए।

सलोनी बहुत डरी हुई सी बार बार ऋतु की ओर देख रही थी, वो केवल अपना सर हिलाकर मना कर रही थी।

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मेहता अंकल- अरे यार, बहुत परेशान हूँ, बहुत मुश्किल से तुमको बहाने से बुलाया है, बस जरा देर की बात है, अंकुर तो अभी सो ही रहा होगा?सलोनी- उफ़्फ़्फ़ क्या करते हो अंकल… वो उठ गए हैं, बाथरूम गए हैं।

मेहता अंकल ने सलोनी की हाफ नाइटी को नीचे से पकड़ का उसके सर से निकाल प्रिया, सलोनी के हाथ अपने आप ही ऊपर को हो गए थे।

अब केवल एक छोटी सी धानी रंग की ब्रा में वो वहाँ खड़ी थी। कच्छी तो वो वैसे भी नहीं पहनती थी।

सलोनी- ओह क्या कर रहे हो अंकल? ऋतु भी यही है और ये भी आ सकते हैं!

मेहता अंकल ने उसकी एक नहीं सुनी, उन्होंने अपनी हथेली से सलोनी की चूत को सहलाया और पीछे से ही अपना लण्ड वहाँ फिट कर प्रिया।

सलोनी ने अपना एक पैर बिस्तर के ऊपर रख प्रिया, शायद वो समझ गई थी कि अंकल मानेंगे तो है नहीं… तो जल्दी से ही उनको निबटा प्रिया जाये।

मेहता अंकल- अरे कोई नहीं आएगा, तू बस जरा देर रुक जा… बहुत देर से परेशान हूँ।

‘आअह्ह्हा…आआ…आआआ…’

और उन्होंने अपना लण्ड सलोनी की चूत में प्रवेश करा प्रिया।

‘अह्ह्ह अह्ह्हाआआ अह्ह्हाआआ आह्ह्हा…’

कमरे में दोनों की सिसकारियाँ गूंज रही थी।

अंकल ने अपना एक हाथ सलोनी की ब्रा में डाल उसकी चूची को भी बाहर निकाल लिया था।

मेरा यहाँ बुरा हाल था, अब मेरा लण्ड भी चूत चाहने लगा था।

सलोनी की यह जल्दी जल्दी की चुदाई देखने में ज्यादा मजा नहीं आ रहा था।

मैं यह सोचने लगा कि रिया कहाँ है, कहीं वो मुझे ही तो नहीं खोज रही? चलो उसी से कुछ मस्ती कर ली जाये।

मेहता अंकल भले ही उसको ना चोद पाये हों पर मैंने तो मेंसिस में भी गाण्ड मारी है।

सोचा, चलो आज रिया की गांड ही मारी जाये।

मैं जल्दी से अपने बाथरूम में आकर अपने कमरे में आया…अरे रिया तो यहाँ भी नहीं थी!

अरविन्द अंकल- ओह ..बड़ी देर लगा दी बेटा… लगता है मेरी तरह तुमको भी देर लगती है?

मुझे पता था अरविन्द अंकल को टॉयलेट में बहुत देर लगती है।

मैं- हाँ कुछ कांस्टीपेशन हो गया है।

अरविन्द अंकल जल्दी से बाथरूम में घुस गए और बोले- सलोनी अभी आ रही है, वो रिया के साथ किसी काम से गई है।

मुझे हंसी आ गई, मुझे तो पता था कि वो किस काम से गई है।

मैंने दरवाजा खोलकर गैलरी में झाँका, रिया कहीं नजर नहीं आई।

अब अपने लण्ड का इलाज केवल नलिनी भाभी ही दिखी, अरविन्द अंकल को तो अंदर देर लगने वाली ही थी।

मैंने भाभी के ऊपर पड़ी चादर हटा दी…

वाह… क्या नजारा था!भाभी अपनी बाईं करवट से लेटी थी, उनकी नाइटी पेट से भी ऊपर थी, एक पैर मुड़ा हुआ आगे की ओर रखा था, कमर में आसमानी रंग की कच्छी थी पर वो चूतड़ एक ओर को सरक गई थी।

उनके विशाल चूतड़ और बीच की गुलाबी लाइन… सुरमई द्वार.. सब कुछ साफ साफ़ दिख रहा था।

मेरे पास भी ज्यादा समय तो था नहीं, सलोनी या रिया और अरविन्द अंकल कोई भी आ सकता था।

मैंने जल्दी से ही जरा सा अपना ही थूक हाथ में लिया, उसको उँगलियों की सहायता से भाभी की बीच से झांकती चूत पर लगाया, फिर अपना शॉर्ट्स उतार कर अपने लण्ड के टॉप पर लगाया।

मुझे ऑफिस से ही ऐसे थूक लगाकर चोदने में बहुत मजा आता है।

फिर मैंने अपना खड़े खड़े ही अपना लण्ड भाभी की चूत में खिसका प्रिया।

‘अह्ह्हा…आआआ…’

इस पोजीशन में चूत काफी टाइट लग रही थी।

मैंने पहले हल्के हल्के धक्के लगाये और जैसे ही चूत ने पानी छोड़ना शुरू किया, मेरे धक्कों की स्पीड बढ़ने लगी।

नलिनी भाभी वैसे ही लेटी थी, जरा भी नहीं हिल रही थी पर उनके मुख से निकलने वाली सिसकारियाँ बता रही थीं कि वो जाग चुकी हैं और पूरा मजा ले रही हैं।

क्या मजेदार चुदाई मैं आज कर रहा था, नलिनी भाभी का पति वहीं उसी कमरे के बाथरूम में था और यहाँ मैं उनकी सोती हुई बीवी को चोद रहा था।

यह सोचकर ही मेरा लण्ड और भी ज्यादा टाइट हो रहा था।

करीब 15 मिनट तक मैंने उनको जमकर चोदा.. फिर अपना गीला लण्ड उनकी चूत से बाहर निकाल कर उनके चूतड़ को हाथ से फैलाकर उनकी गांड में डाल प्रिया।

और तभी मेरे लण्ड ने ढेर सारा पानी उनके गांड के छेद में भर प्रिया।

यही वो क्षण था जब कमरे का दरवाजा खुला…और…??

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मेरी चालू बीवी

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

साहिल स्वाति

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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