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मेरी चालू बीवी-109

इमरान

13 Apr 2026 को प्रकाशित

मेरी चालू बीवी-109
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सम्पादक – इमरानचादर में सिमटा सलोनी का चिकना जिस्म भी बहुत सेक्सी लग रहा था।

मैं बस इतना सोच रहा था कि सलोनी एक जिस्म पर एक भी कपड़ा नहीं है और वो इसी कमरे में केवल एक चादर ओढ़े लेटी है जिसमें मेरे अलावा दो और आदमी भी हैं।एक अरविन्द अंकल… चलो उनकी तो कोई बात नहीं… वो तो काफी कुछ देख और कर चुके हैं, मगर एक अनजान वेटर? यह पता नहीं क्या क्या सोच रहा होगा?

वेटर भी 25-28 साल का लम्बा और काला सा आदमी था पर बहुत ही साफ सुथरा और पढ़ा लिखा भी जान पड़ता था।

अरविन्द अंकल भी ना जाने क्या सोच रहे थे? उन्होंने भी वेटर को घूरते हुए देख लिया, उन्होंने सलोनी की भलाई करनी चाही, सोचा जगा दूंगा तो वेटर उसको नहीं घूर पायेगा, पर ऐसा हो जायेगा यह उन्होंने भी नहीं सोचा होगा।

उन्होंने सलोनी को आवाज लगा दी- अरे सलोनी बेटा… तुम भी चाय ले लो… ठंडी हो जाएगी।

और तभी सलोनी ने एक ओर करवट ले ली…

‘ओह माय गॉड… यह क्या हो गया…?’

सलोनी का पूरा नंगा बदन जो अभी तक कम से कम अभी तक एक पतली चादर से ढका था, उसके चूतड़ों का आकार उस सिल्की चादर से पता तो चल रहा था मगर फिर भी उस पर एक परदा था।

सलोनी के करवट लेते ही चादर काफी हद तक उसके बदन से हट गई।

अरविन्द अंकल, मेरी और उस वेटर तीनों की नजर केवल सलोनी पर ही थी तो हम सबने ही भरपूर उस दृश्य को देखा।

अपनी बायीं करवट से सीधा होते हुए सबसे पहले चादर उसके कंधे से नीचे आई, फिर उसके दाईं ओर को सरक गई।

सलोनी का मस्त और रस से सराबोर जिस्म लगभग पूरा ही नंगा हो गया था।

चादर केवल उसकी दायीं चूची पर रुक गई थी जिसका ऊपरी भाग नंगा था, बायीं चूची पूरी बाहर आकर रात भर अपने मसले जाने की कहानी बयां कर रही थी।

उसकी गोरी गोलाई पर लाल लाल उँगलियों के निशान नजर आ रहे थे, गुलाबी निप्पल भी सिमटा सा एक ओर को ढलका हुआ था।

सलोनी की बायीं टांग भी चादर से पूरी तरह बाहर आ गई थी। शुक्र इतना था कि सलोनी की रात दो लण्ड से चुदी हुई चूत अभी चादर से ढकी हुई थी।

मगर साइड से साफ़ पता चल रहा था कि उसने कुछ भी नहीं पहना है, वो पूरी नंगी है।

हम तीनों इस मनुहारी दृश्य को देख ही रहे थे, मेरे दिमाग में बिल्कुल यह नहीं आया कि जाकर उसको आगाह कर दूँ या चादर सही कर दूँ।

तभी एक और धमाका हुआ…सलोनी ने अभी तक अपनी आँखें नहीं खोली थी, वो शायद बहुत थकी थी और खुद को अपने ही बेडरूम में समझ रही थी।उसने लेटे लेटे ही एक जोरदार अंगराई ली और जो ढका था वो भी नुमाया हो गया।चादर दूसरी चूची को भी नंगी करते हुए पेट पर आ गई और चूत के ऊपर से भी सरक कर दूसरी टांग पर रह गई।

वो तो भला हो अरविन्द अंकल का जो तुरंत उठकर सलोनी के पास पहुँच गए और चादर को उसके ऊपर को करते हुए- अर्र रईईए क्या करती हो बेटा… कपड़े कहाँ है तेरे?

और जैसे सलोनी को होश आ गया हो!

उसने तुरंत उठकर खुद को ठीक किया है मगर वो पतली चादर उसके इस मस्ताने सुबह सुबह झलकते हुए जिस्म को कहाँ तक छुपाती।

उसका अंग अंग चादर से झांक रहा था, सलोनी बहुत ही मस्त दिख रही थी।

अरविन्द अंकल और मेरा तो फिर भी सही था मगर वेटर भी इस दृश्य का पूरा मजा ले रहा था, चाय बनाने के बाद भी वो कमरे से नहीं जा रहा था बल्कि कुछ न कुछ करने का बहाना किये वहीं खड़ा लगातार सलोनी के हुस्न को निहार रहा था।

कुछ ही देर में सलोनी की नींद पूरी तरह खुल गई और वो समझ गई कि वो कहाँ है और कमरे में सभी को उसने एक बार देखा, अंकल को गुड मॉर्निंग बोला, फिर अपनी नाइटी उठाकर वहीं सबके सामने पहनने लगी।

उसने नाइटी का निचला भाग गले में डाला और उसको नीचे करते हुए ही चादर को नीचे कर प्रिया हमेशा की तरह, सलोनी कपड़े पहनते हुए कभी सावधानी नहीं रखती।

इस समय भी चादर तो पहले नीचे हो गई और उसने नाइटी बाद में चूची के ऊपर की, एक बार फिर उसके ये यौवन कपोप सभी को नजर आ गए।

फिर खुद ही चादर को पूरी तरह हटा उसने बिस्तर से उतरने के लिए पैर नीचे लटका दिए।

अभी भी उसकी नाइटी कमर तक ही आई थी और वो नीचे अपनी चप्पल को देखती हुई खड़ी हो गई।

इस समय उसकी पीठ हमारी ओर थी, चप्पल को देखती हुए ही उसने अपनी नाइटी पीछे से अपने चूतड़ों से नीचे की।

इस दौरान जो अभी तक उस वेटर ने नहीं देखा था, वो भी उसने देख लिया।

सलोनी के चूतड़ों का हर कटाव जब मुझे दिख गया तो उसने तो आसानी से सब साफ-साफ़ देखा होगा क्योंकि वो तो मेरे आगे खड़ा था।

सलोनी की चप्पल कुछ बिस्तर के नीचे को हो गई थी और फिर सलोनी ने बिना किसी से कुछ कहे नीचे झुककर चप्पल निकाली तो एक बार फिर उसके चूतड़ का ओर भी खुला रूप सबके सामने था।

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सुबह सुबह सलोनी ने सभी का दिन बहुत ही सुन्दर बना प्रिया था।

वेटर ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि आज के दिन की शुरुआत उसकी ऐसे मजेदार ढंग से होने वाली है।

फिर तो उस वेटर ने हमारी बहुत सेवा की।

बस ऐसे ही हम लोग वहाँ खूब मजा कर रहे थे।

उसी शादी में अगले दिन किसी और जगह कोई बड़ा कार्यक्रम था, मुझे बहुत थकान हो गई थी, वहीं दूल्हे के मामा से मेरी अच्छी दोस्ती सी हो गई, हम दोनों वहीं एक दूसरी जगह एक कमरे में बैठे बात कर रहे थे।

मामाजी कर्नल थे इसलिए अपनी बहादुरी के किस्से ही सुना रहे थे, मैंने उनको सलोनी से भी मिलवा प्रिया था।

सलोनी ने उस दिन सिल्वर कलर की साड़ी और फैंसी ब्लाउज़ पहना था।

साड़ी उसके चूतड़ों पर बहुत कसी हुई थी, सलोनी उसमें बहुत ही सेक्सी दिख रही थी।

मामाजी और मैं बात करते हुए ही वहीं सो गए, कमरे में जमीन पर ही गद्दे लगे थे, एक ओर दीवार की तरफ मैं था और दूसरी ओर वो लेटे थे।

कुछ देर बाद सलोनी भी वहीँ आ गई, वो भी शायद ज्यादा थक गई थी।

वो मेरे दायीं ओर ही लेट गई, मैं दीवार से चिपका था तो उधर जगह नहीं थी।

अब सलोनी के बायीं ओर मैं लेटा था और दायीं ओर मामा जी थे।

मुझे कोई दस मिनट ही तेज झपकी लगी थी पर सलोनी के कमरे में आने के बाद मेरा ध्यान सेक्स की ओर चला गया।

कुछ देर बाद सलोनी फिर से कुनमुनाती हुई उठी, फिर मेरे से चिपक गई।

मैंने भी मामा जी की ओर देखा, वो गहरी नींद में ही दिखे।

मैंने सलोनी को अपनी चादर के अंदर ले लिया तो सलोनी ने खुद अपने रसीले होंठ मेरे होंठों से चिपका दिए, मैं भी उनके रस को चूसने लगा।

सलोनी ने अपनी एक टांग मेरे ऊपर रख दी।

मुझे नहीं पता कि सलोनी का मूड क्या था? केवल हल्का फुल्का प्यार का या फिर पूरी चुदाई के मूड में थी?

पर इतना पक्का था कि अगर मैं हाँ करता तो वो किसी भी बात के लिए मना नहीं करती।

कुछ देर सलोनी के होंठो का रस पीते हुए ही मैंने देखा कि मामाजी अब सोने का नाटक कर रहे हैं और चादर की ओट से वो हमको ही देख रहे थे।

सलोनी के होंठ चूसने का मजा कई गुना बढ़ गया, मैंने कुछ और मजा लेने की सोची, मुझे मामाजी की बातें याद आ गई, वो मुझसे कुछ ज्यादा ही खुल गए थे।

उनकी बीवी का देहांत हुए तीन साल हो गए थे, वो वहाँ औरतों को देखकर मेरे से उनके बारे में तरह तरह की सेक्सी बात कर रहे थे।

उन्होंने यह भी कहा था कि उनको चुदाई किये तीन साल से भी ज्यादा समय हो गया क्योंकि कोठे पर जाना उनको पसंद नहीं और कॉल गर्ल भी बीमारी के डर से वो नहीं बुलाते।

उन्होंने कहा था कि यार अंकुर, यहाँ तो नंगी लड़की देखे अरसा गुजर गया।

उनकी ये बातें मेरे दिमाग में थी, मैंने सोचा क्यों ना मामाजी को आज कुछ दर्शन करा दिए जाएँ।

बस यह ख्याल आते ही शैतानी मेरे दिमाग पर हावी हो गई।

मैंने सलोनी के होंठ चूसते हुए ही साड़ी के ऊपर से उसके मखमली चूतड़ों को सहलाना शुरू कर प्रिया।

पर सलोनी की साड़ी बहुत भारी थी और चुभ रही थी, मैंने फुसफुसाते हुए ही उससे कहा- यार, यह इतनी भारी साड़ी कैसे पहने हो? तुमको चुभ नहीं रही?

वो मेरा इशारा एक दम से ही समझ गई, सलोनी मुस्कुराते हुए उठी, उसने एक बार मामाजी की ओर देखा, पता नहीं उसको उनकी आँखें दिखी या नहीं पर वो संतुष्ट हो गई, वो अपने कपड़े उतारने के लिए वहीं एक ओर हो गई।

अब पता नहीं मामाजी को क्या क्या दर्शन होने वाले थे??

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मेरी चालू बीवी

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

रीतेश सिंह

4 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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