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Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din – Ep 8

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12 Aug 2020 को प्रकाशित

Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din – Ep 8
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सुनीता की पढ़ाई जोरो शोरों से चल रही थी। कर्नल साहब भी रात रात भर खुद पढ़ाई करते और दूसरे दिन आकर सुनील की पत्नी सुनीता को पढ़ाते। वक्त कहाँ जा रहा था पता ही नहीं चला। देखते ही देखते परीक्षा का समय आ गया।

परीक्षा तीन दिन के बाद होने वाली थी की अचानक खबर आयी की परीक्षा का पेपर लिक हो गया और परीक्षा कुछ दिनों के लिए पीछे धकेल दी गयी।

इतनी महेनत करने के बाद जब ऐसा हुआ तो सुनील की पत्नी सुनीता एकदम निराश हो गयी। वह थक चुकी थी। उसे थोड़ा तनाव मुक्त समय चाहिए था। उधर कर्नल साहब भी बड़े दुखी थे। उन्हें लगा की जैसे सारी मेहनत पर पानी फिर गया।

सुनील की पत्नी सुनीता ने एक दिन तंग आकर सुनील से कहा, “अब यह सस्पेंस जान लेवा हो रहा है। लगता है कुछ देर ही सही, हमें इस झंझट से हटकर हमारा दिमाग कहीं ऐसी प्रक्रिया में लगाना चाहिए जिससे हमारा ध्यान परीक्षा और परिणाम से हट जाए। कई बार तो मेरा मन करता है की मैं शराब पीकर ही थोड़ी देर टुन्न हो जाऊं और वर्तमान भूल जाऊं।”

सुनील की पत्नी सुनीता शराब नहीं पीती थी। जब उसने यह कह दिया तो सुनील समझ गए की वह कितनी थक गयी है और उसे कुछ मनोरंजन या कुछ क्रीड़ा की आवश्यकता है जिससे उसका मन कुछ देर के लिए ही सही पर यह तनाव और दबाव से हट जाए।

सुनील ने सोचा क्यों ना वह अपनी पत्नी सुनीता को कहीं बाहर घुमाने के लिए ले जाए? पर वह असंभव था। सुनील को भी बहुत काम था और सुनीता की परीक्षा का दिन कभी भी आ सकता था। तो फिर वह कैसे सुनीता का मन बहलाये? फिर सुनील ने मन में आया की सुनीता को कोई चुदाई की ब्लू फिल्म दिखानी चाहिए। पर सुनील जानता था की सुनीता को ब्लू फिल्म में कोई दिलचश्पी नहीं थी।

वह कहती थी, “अरे इसमें क्या है? यह तो स्त्रियाँ पैसे कमाने के लिए करती हैं। और फिर ऐसा तो हम हर रोज करते ही हैं।”

तो वह क्या करे? तब फिर अचानक उसे कर्नल साहब की याद आयी।

सुनील ने कर्नल साहब को फ़ोन कर सुनीता के मन की उलझन बतायी। कर्नल साहब ने हंसकर कहा, “सुनीता की बात एकदम सही है। मैं खुद भी थक चुका हूँ। मैं खुद भी सोचता हूँ की कहीं कुछ ऐसा करूँ की उस में ही उलझ जाऊं और यह गणित, परीक्षा और तनाव से दूर हो जाऊं। सुनील मेरी बात मानो तो मेरे पास एक ऐसा इलाज है की हम सब थोड़ी देर के लिए यह सब भूल जाएंगे।”

सुनील ने पूछा, “क्या बात है?’

कर्नल साहब ने कहा, “एक फॉरेन फिल्म फेस्टिवल चल रहा है। उसमें एक अनसेंसर्ड फिल्म “पति पत्नी और पडोसी” काफी चर्चे में है। पिक्चर एकदम इमोशनल है पर उसमें काफी धमाकेदार सेक्स के सीन हैं। मैं चाहता हूँ की तुम दोनों और हम दोनों एक साथ यह पिक्चर देखें। पर पता नहीं सुनीता तैयार होगी क्या?”

सुनील ने कहा, “मैं सुनीता से बात करता हूँ। आप ज्योति से बात करो।”

कर्नल साहब ने कहा, “मुझे ज्योति से बात करने की जरुरत नहीं है, क्यूंकि यह पिक्चर की बात ज्योति ने ही मुझे कही थी। उसकी एक सहेली यह पिक्चर देख कर आयी थी और उसे ही ज्योति ने कहा था। ज्योति को इस पिक्चर के बारेमें सब पता है।”

सुनील ने कहा, “ठीक है मैं सुनीता से बात करता हूँ। पता नहीं पर अगर मैं कहूंगा की आपने कहा है तो शायद वह मान जाए।”

जब सुनील ने अपनी पत्नी सुनीता से इस के बारेमें कुछ ऐसे बताया। सुनील ने कहा, “डार्लिंग तुम कहती थी ना की तुम कुछ देर के लिए ही सही, कुछ एकदम धमाकेदार और उत्तेजना भरा कुछ अनुभव करना चाहती हो?”

सुनीता ने अपने पति की और देख कर अपना सर हाँ में हिलाया तो सुनील ने कहा, “डार्लिंग एक फिल्म फेस्टिवल चल रहा है उसमें गजब की अवॉर्ड प्राप्त फिल्मों को दिखाया जा रहा है। कर्नल साहब ने हमारे चारों के लिए एक बहुत अच्छी फिल्म के चार टिकट बुक कराएं हैं। फिल्म थोड़ी ज्यादा सेक्सी और धमाके दार है। तीन घंटे के लिए हम सब का दिमाग कुछ उत्तेजित हो जायेगा जिससे हम यह सब भूल जाएंगे। तुम क्या कहती हो?”

सुनीता ने कहा, ” अच्छा? कर्नल साहब ने हम चारों के लिए टिकट बुक कराये हैं? सेक्सी पिक्चर है? चलो ठीक है सेक्सी पिक्चर है तो कोई बात नहीं। देखिये मुझे जाने में कोई एतराज नहीं है, पर मैं अंग्रेजी भाषा नहीं अच्छी तरह नहीं समझती। मैं कुछ समझूंगी नहीं। मैं भी बोर होउंगी और आपको भी पूछ पूछ कर बोर करुँगी। आप मुझे ना ही ले जाओ तो अच्छा है। दुसरा जस्सूजी के साथ ऐसी पिक्चर देखना क्या सही है? वह और ज्योति जी साथ जाएं तो ठीक है। पर हम चारों का एक साथ जाना….? ”

सुनील ने अपनी पत्नी की बात को बिच में ही काटते हुए कहा, “पर कर्नल साहब की खास इच्छा है की तुम जरुर चलो। जहां तक भाषा का सवाल है तो कर्नल साहब और ज्योति तुम्हे सब बताते जाएंगे। मझा आएगा। चलो ना! मना करके सब का दिल मत दुखाओ यार।”

कुछ मिन्नतें करने पर सुनीता तैयार हो गयी। सुनील ने कर्नल साहब को समाचार सूना दिया।

सुनीता पहेली बार कोई विदेशी फिल्मोत्सव में जा रही थी।

जब उसने सुनील से पूछा की कौन सा ड्रेस सही रहेगा तो सुनील ने मजे के लहजे में कहा, ” डार्लिंग हम विदेशी फिल्म देखने जा रहे हैं, जहां काफी विदेशी लोग भी आएंगे। तो क्यों नहीं तुम वो वाली छोटी स्कर्ट और स्लीवलेस टॉप पहनो, जो मैंने तुम्हें हमारी शादी की साल गिराह पर दिए थे और जो तुमने कभी नहीं पहने? आज मस्ती का ही माहौल बनाना है तो फिर ड्रेस भी मस्ती वाला ही क्यों ना पहना जाए? क्यों ना आज पानी में आग लगा दी जाए?”

सुनील की पत्नी ने अपने पति की और देखा और हँस पड़ी, और बोली, “ठीक है, पतिदेव का हुक्म सर आँखों पर। पर मुझे जस्सूजी के सामने वह ड्रेस पहन कर जाने में शर्म आएगी। वह बहुत ही छोटा ड्रेस है। फिर आप कह रहे हो की पिक्चर भी बड़ी सेक्सी है। तो कहीं आग ज्यादा ही ना लग जाए और हम भी कहीं उस आग में झुलस ना जाएं? जस्सूजी मुझे ऐसे देखेंगे तो क्या सोचेंगे? यह सोचा है तुमने?” मज़ाक के लहजे में सुनीता ने भी अपने पति से कह दिया।

सुनील ने आँख मटक कर कहा, “उन पर तो बिजली ही गिर जायेगी। पर बिजली भी तो गिरना जरुरी है। भाई आपके गुरूजी ने आपके लिए दिन रात एक कर दिए हैं। आज तक उन्होंने तुम्हारा विद्यार्थिनी वाला रूप ही देखा है। आज तुम अपना कामिनी और मोहिनी रूप दिखाओ उनको।…

देखो यह एक गहराई की बात है। यह हम भले ही एक दूसरे को ना बतायें पर हम सब जानते हैं की वह तुम्हारे दीवाने हैं, तुम पर फ़िदा हैं। तुम्हारा इस रूप देख कर उन पर क्या बीतेगी वह तो वह जानें, पर मैं आज इतना कह सकता हूँ की आज वह हॉल में मेरी बीबी के जैसी खूबसूरत बीबी किसीकी नहीं होगी।”

एक पत्नी जब अपने पति के मुंह से ऐसी प्रशस्ति वचन या प्रसंशा सुनती है तो पत्नी के लिए उससे बड़ा कोई भी उपहार नहीं हो सकता। वह समझती है की उसका जीवन धन्य हो गया।

पढ़ते रहिये.. क्योकि यह कहानी अभी जारी रहेगी..

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Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din

कुल भाग: 73
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