होम पर वापस जाएं
Hindi Chudai Kahani • पठन समय: 15 मिनट • पढ़ा गया: 550 बार

Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din – Ep 16

iloveall ?️

21 Sep 2020 को प्रकाशित

Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din – Ep 16
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

सुनीता ज्योतिजी का यह रूप पहली बार देख रही थी। वह जानती थी की ज्योति जी साफ़ साफ़ बोलती हैं। पर वह इतना खुल्लमखुल्ला चोदना, चुदाई, लण्ड, चूत बगैरह इस तरह बेबाक बोलेंगी उसकी तो कल्पना भी सुनीता ने नहीं की थी।

ज्योतिजी बिना रुके बोले जा रही थीं। “दूसरी मुलाक़ात में मैंने जस्सूजी को साफ़ साफ़ कह दिया की मैं उनसे चुदवाना चाहती थी। जस्सूजी मुझे आँखें फाड़ कर देखते रहे! उन्हें तब तक मेरे जैसी मुंहफाड़ स्त्री नहीं मिली थी। वह क्या कहते? मुझ पर तो वह पहले से ही फ़िदा थे!

बस हम दोनों ने उसी दिन उसी क्लब में कमरा ले कर पहली बार घमासान चुदाई की। और मैंने उनसे शादी से काफी पहले दूसरी मुलाक़ात में ही चुदवाया। जब मेरी उन्होंने जम कर चुदाई की तब मैंने वहाँ ही तय कर लिया था की मैं उनसे बार बार चुदवाना चाहती थी। मैं जस्सूजी से शादी करना चाहती थी। मैं उनके बच्चों की माँ बनना चाहती थी।

शुरू में जस्सूजी मुझसे शादी करने के लिए इस लिए तैयार नहीं थे की मेरे साथ शादी करने से उनकी आझादी छीन जा रही थी। शादी के पहले उनपर कई लडकियां और औरतें ना सिर्फ फ़िदा थीं पर उनके साथ सोने के लिए मतलब चुदने के लिए भी आती थीं। पर मैंने भी तय किया था की मैं शादी करुँगी तो जस्सूजी से ही। नहीं तो शादी ही नहीं करुँगी। बहन तुम शायद यह भी ना मनो की जस्सूजी ने ही मेरा सील तोड़ा था।

हालांकि मैं कॉलेज मैं भी बड़ी बेबाक और उद्दंड लड़की मानी जाती थी और सारे लड़के मुझे मिलने या यूँ कहिये की चोदने के लिए पागल थे। मैं सबके साथ घूमती थी, कुछ लड़कों के साथ चुम्माचाटी भी करती थी। पर मेरी चूत में मैंने पहेली बार जस्सूजी का ही लण्ड डलवाया। मेरा सब कुछ मैंने पहली बार तुम्हारे जस्सूजी को ही दिया।

कोई और औरत उन्हें फाँस ले उससे पहले ही मैंने उनसे शादी करने का वचन ले लिया। तब मैंने उनसे वादा किया था की मेरे साथ शादी करने से उनकी आजादी नहीं छीन जायेगी। मैं उनको किसी भी औरत से मिलने या चोदने से नहीं रोकूंगी। इतना ही नहीं, मैंने उनसे वादा किया था की अगर उन्हें कोई औरत पसंद आए तो उसे मेरे पति के बिस्तर तक पहुंचाने में मैं उनकी सहायता करुँगी।”

सुनीता यह सुनकर अजूबे से ज्योति जी को देखती ही रही। ज्योति सुनीता का सर अपनी छाती पर रखती हुई बोली, ” सुनीता, मेरे पति तुम्हारी कामना करते हैं। उन्होंने मुझे कहा तो नहीं पर मैं जानती हूँ की वह तुम्हारे साथ सोना चाहते हैं। साफ़ साफ़ कहूं तो वह तुम्हें प्यार करना और चोदना चाहते हैं। तो फिर मुझे उनकी मदद करनी पड़ेगी…

उसके लिए मुझे तुम्हार सहमति चाहिए। तुम्हारा कमसिन बदन देख कर मैं ही जब विचलित हो जाती हूँ तो मेरे पति की तो बात ही क्या? वह तो एक हट्टेकट्टे जवान मर्द है? जहाँ तक तुम्हारे पति सुनील का सवाल है, वह तुम मुझ पर छोड़ दो।”

ज्योति जी की बेबाक बातें सुनकर सुनीता की तो बोलती ही बंद हो गयी थी। सुनीता बेचारी चौड़ी, फूली हुई आँखों से ज्योति जी बातें सुन रही थी।

सुनीता ने देखा की ज्योति जी का तौलिया खिसक गया था और उनके उन्नत स्तन सुनीता के सामने खुले हुए थे और उन स्तनों के शिखर पर गुलाबी फूली हुई निप्पलेँ इतनी मन को हरने वाली थीं की ना चाहते हुए भी सुनीता की कोहनी एक स्तन पर लग ही गयी।

सुनीता की आँखें उनके वक्ष स्थल पर ऐसी टिकी हुई थीं की हटने का नाम ही नहीं ले रहीं थीं। यह देख ज्योति बोली, “बहन देख क्यों रही हो? इन्हें अपने हाथोँ में महसूस करो। महसूस करना चाहती हो? सोचो मत। आओ बेबी, दोनों हाथों से पकड़ो और उन्हें महसूस करो। मैं पहली बार इतनी खूबसूरत स्त्री से मेरी चूँचियाँ मसलवाने का मौका पा रही हूँ। शादी के बाद आज तक इन पर मात्र जस्सूजी का ही अधिकार रहा है।”

ज्योति ने कहा, “शादी के बाद से आज तक इन पर तुम्हारे जस्सूजी का सम्पूर्ण अधिकार रहा था। पर हाँ तुम्हारे पति सुनील ने भी इन्हें महसूस किया है और मसला भी है। बहन तुमने कसम ली है की तुम सुनीलजी से कुछ नहीं कहोगी, और बुरा भी नहीं मानोगी। उसमें जितने वह दोषी हैं, उससे ज्यादा मैं गुनेहगार हूँ।”

ज्योतिजी ने सुनीता का हाथ अपने हाथों में लिया और पकड़ कर अपनी छाती पर रखा। ज्योति जी का तौलिया वैसे ही खुल गया और ज्योतिजी सुनीता के सामने ही सम्पूर्ण नग्न अवस्था में सुनीता की बाँहों में थीं।

सुनीता के लिए यह अपने जीवन की एक अद्भुत और अकल्पनीय घटना थी। कई बार सुनीता के मन में कोई ना कोई मर्द के बारे में, उसके लण्ड के बारे में या उसको नंगा देखने के बारे में विचार हुए होंगें।

सुनीता ने पहले नग्न औरतों की तस्वीरों को भी देखा था। पर यह पहली बार था की सुनीता साक्षात किसी औरत को ऐसे निर्वस्त्र देख रही थी और वह भी स्वयँ एक रति के सामान बला की कामुक और खूबसूरत ज्योति जी जैसी स्त्री उसकी नजर के सामने नंगी प्रस्तुत थी।

सुनीता ने ज्योति जी के उन्नत स्तनों पर अपना हाथ फिराते हुए कहा, “ना बहन, मैं कुछ नहीं कहूँगी। बल्कि मुझे उस बात का काफी कुछ अंदेशा था भी।”

सुनीता फिर कुछ खिसियानी सी हो गयी और उसकी आँखों में आंसू भर आये। उसने थोड़ा सम्हल कर कहा, “दीदी मैं आज आप से भी एक गुनाह कुबुल करती हूँ की आपके पति जस्सूजी को मैंने भी मेरे बूब्स छूने दिया था। यह उस दिन सिनेमा हॉल में हुआ था। दीदी मैं अपने आपको रोक नहीं पायी थी और ना ही जस्सूजी। मैंने उनको कई जगह से छुआ भी था। आप भी अपने पति जस्सूजी से इस बारेमें कुछ मत कहियेगा।”

यह सुन कर ज्योति जी ने अपने होँठ सुनीता के होँठ पर रख दिए और सुनीता के होठोँ का रस चूसती हुई बोली, “पगली! तू क्या सोचती है? यह सब मुझे पता नहीं? अरे मैंने ही तो सब के मन की बात जानने के लिए यह खेल रचा था। अब तक जो हम सब के मन में था उस दिन सब बाहर आ गया।”

सुनीता ने झिझकते हुए पूछा, “पर दीदी क्या यह सब सही है?”

ज्योति ने कहा, “देखो मेरी बहन। शादी के कुछ सालों बाद सब पति पत्नी एक दूसरे से थोड़े बोर हो जाते हैं। हमारी चुदाई में कोई नवीनता नहीं रहती। कोई अनअपेक्षित रोमांच नहीं रहता। पति और पत्नी दोनों का मन करता है की कुछ अलग हो, कुछ एक्साइटमेंट हो। इस लिए दोनों ही अपने मन में तो किसी और मर्द या औरत की कामना करते हैं पर डर के मारे या फिर सही पार्टनर ना मिलने के कारण कुछ कर नहीं पाते।

कई मर्द या औरत चोरी छुपी अपने पति पति अथवा पत्नी की पीठ के पीछे किसी और मर्द या स्त्री से रिश्ते करते हैं या चोदते हैं। यह सब स्वाभाविक है। पर इस में एक मर्यादा रखनी चाहिए की अपना पति अथवा पत्नी अपनी है और दूसरी का पति अथवा पत्नी उस की ही है। उसे हथियाने की कोशिश कत्तई भी नहीं करनी चाहिए।

बस चाह पूरी की फिर भले ही आप उसे प्यार करो पर उस पर अपना हक़ नहीं जमा सकते। यह मर्यादा अगर रख पाएं तो यह सही है। और इसमें एक और बात भी है। ऐसे में पति और पत्नी की सहमति जरुरी है, चाहे वह समझानेसे या फिर उकसाने से आये। और पति को पत्नी की सहमति तभी ही मिल सकती है जब पत्नी को अपने पति में पूरा विश्वास हो।”

ज्योतिजी ने सुनीता को होठोँ पर काफी उत्कट और उन्माद भरा चुम्बन किया। दोनों महिलाये एक दूसरे के मुंह में जीभ डालकर एक दूसरे के मुंह की लार चूस रहीं थीं।

यह भी पढ़ें (Recommended)

Ranjan Ki Vapasi, Chudai Ka Tufaan – Episode 2

सुनीता तब तक ज्योति के साथ काफी तनावमुक्त महसूस कर रही थी। सुनीता ने देखा की ज्योतिजी के बदन से तौलिया सरक गया था और ज्योतिजी को उसकी कोई चिंता नहीं थी। वैसे तो सुनीता को भी उस बात से कोई शिकायत नहीं थी क्यूंकि वह भी तो ज्योतिजी के करारे और उन्मादक बदन की कायल थी।

ज्योति ने सुनीता की ललचायी नजर अपने बदन पर फिसलते देखि तो वह मुस्कुरायी और सुनीता की ठुड्डी अपनी हथेली में पकड़ कर बोली, “अरे बहन देखती क्या है। महसूस कर।”

ज्योति ने सुनीता के सर पर हाथ दबाया जिससे सुनीता को बरबस ही आना सर नीचा करना पड़ा और उसक मुंह ज्योति जी उन्मत्त स्तनों तक आ पहुंचा। सुनीता के होँठ ज्योति जी की फूली हुई गुलाबी निप्पलोँ को छूने लगे। सुनीता के होँठ अपने आप ही खुल गए और देखते ही देखते ज्योति जी की निप्पलेँ सुनीता के मुंह में गायब हो गयीं।

सुनीता ने जैसे ही ज्योतिजी की करारी निप्पलोँ को अपने होठोँ के बिच में महसूस किया तो उसके रोंगटे खड़े होगये। सुनीता ने कभी यह सोचा भी नहीं था की कभी उसे कोई स्त्री के बदन को छूने के कारण इतनी उत्तेजना पैदा होगी।

इससे सुनीता के बदन में जैसे बिजली का करंट दौड़ गया। उसके बदन में सिहरन हो उठी। अचानक उसे ऐसा लग जैसे उस का सर घूम रहा हो। उसने महसूस किया की उसकी चूत में से स्त्री रस चू ने लगा। उसकी पैंटी उसे गीली महसूस हुई।

सुनीता ने ज्योति जी को धीरे से कहा, “दीदी, आप यह क्या कर रही हो? देखो मेरी हालत खराब हो रही है। मेरी पैंटी गीली हो रही है।

ज्योति ने कहा, “मेरी बहन सुनीता, आज मुझे भी तुम पर बहुत प्यार आ रहा है। तुम मेरी गोद में आ जाओगी?” जब सुनीता ने कोई जवाब नहीं दिया तो ज्योति ने सुनीता को ऊपर उठाकर धीरे से अपनी गोद में बिठा दिया। सुनीता भी चुपचाप उठकर ज्योति जी की गोद में बैठ गयी। सुनीता को भी अपनी दीदी पर उस दिन न जाने कैसा प्यार उमड़ रहा था।

ज्योति जी ने सुनीता के ब्लाउज में अपना हाथ डाला और बोली, “तुम्हारे बूब्स इतने मुलायम और फिर भी इतने सख्त हैं की उनपर हाथ फिरते मेरा ही मन नहीं भरता।”

ज्योति जी की हरकत देख कर सुनीता थोड़ी घबड़ा गयी। उसे डर लगा की कहीं ज्योति जी समलैंगिक कामुक स्त्री तो नहीं है?”

ज्योति जी सुनीता के मन की बात समझ गयीं और बोली, “सुनीता यह मत समझना की मैं समलैंगिक स्त्री हूँ। मुझे तुम्हारे जस्सूजी से चुदवाने में अद्भुत आनंद आता है। पर हाय री सुनीता! मैं वारी वारी जाऊं! तेरा बदन ही ऐसा कामणखोर है की मेरा भी मन मचल जाता है। क्या तुझे कुछ नहीं होता?”

सुनीता बेचारी चुपचाप ज्योति जी के कमसिन बदन को देखने लगी। ज्योति जी के उन्नत स्तन सुनीता के मुंह के पास ही थे। ज्योति जी के बदन की कामुक सुगंध सुनीता के तन में भी आग लगाने का काम कर रही थी।

ज्योति जी सुनीता के कान में अपना मुंह दबा कर बोली, “सुनीता, मेरे पति का लण्ड बहोत बड़ा है और (ज्योति जी अपनी उँगलियाँ बड़ी चौड़ी फैला कर बोली) इतना मोटा है। जो कोई उनसे एक बार चुदवाले वह उनसे चुदवाये बगैर रह नहीं सकता। अरे मैंने शादी भी तो मेरे पति का लण्ड देख कर ही तो की थी? एक बात कहूं बहन बुरा तो नहीं मानोगी?”

सुनीता ने सर हिला कर ना कहा तो ज्योति ने कहा, “मेरी बहन सुनीता! मेरे पति से तू भी एक बार अगर चुदवा लेगी ना, तो फिर तू उनसे बार बार चुदवाना चाहेगी।”

सुनीता आश्चर्य से ज्योति की और देखने लगी। ज्योति ने सुनीता का एक हाथ अपनी चूत पर रख दिया। सुनीता ने महसूस किया की ज्योतिजी की चूत से भी उनका स्त्री रस रिस रहा था।

अब सुनीता की मर्यादा और झिझक का बाँध टूटने लगा था। वह अपने आप पर नियत्रण नहीं रख पा रही थी। सुनीता ने ज्योतिजी के पास पड़े तौलिये को हटाकर उनकी चूँचियों को चूसते हुए कहा, “दीदी सच बोलिये, रात को जस्सूजी और आपने मिलकर खूब सेक्स किया था ना?”

ज्योति जी ने सुनीता के भरे हुए स्तनों को सहलाते और निप्पलोँ को अपनी उँगलियों में दबाते हुए कहा, “अरे पगली बहन, सेक्स सेक्स मत बोल। पूछ की क्या तुम्हारे जस्सूजी ने मुझे जम कर चोदा था या नहीं? हाँ अरे बहन उन्होंने तो मेरी जान निकाल ली उतना चोदा…

मैं क्या बताऊँ? इसी लिए तो आज सुबह से मैं थकी हुई हूँ। वह जब चोदते हैं तो माँ कसम, इतने सालों के बाद भी मजा आ जाता है। चुदाई में जस्सूजी का जवाब नहीं। पर तू बता, सुनील जी तुम्हें कैसे चोदते हैं?”

सुनीता ज्योतिजी की बात सुन कर थोड़ा असमंजस में पड़ गयी। पर तब तक वह काफी रिलैक्स्ड महसूस कर रही थी।

सुनीता ने कहा, “दीदी मुझे अब भी थोड़ी सी झिझक है पर मैंने आप से वादा किया है तो मैं खुलमखुल्ला बताउंगी की सेक्स, सॉरी मतलब, चुदाई करने में सुनीलजी भी बड़े माहिर हैं। मुझे पता नहीं की उनका वह मतलब लण्ड जस्सूजी के जितना बड़ा है या नहीं, पर फिर भी काफी बड़ा है। बखूबी की बात यह है की जब वह चोदते हैं तो मैं जब तक झड़ ना जाऊं तब तक चोदते ही रहते हैं।”

ज्योति जी ने तो अपना काम लगभग कर ही दिया है, अब देखना ये है जब सुनता और जस्सूजी का अमन सामना होगा तो क्या होगा? पढ़ते रहिये..

support@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din

कुल भाग: 73
भाग 1
भाग 1: पढ़ें
भाग 2
भाग 2: पढ़ें
भाग 3
भाग 3: पढ़ें
भाग 4
भाग 4: पढ़ें
भाग 5
भाग 5: पढ़ें
भाग 6
भाग 6: पढ़ें
भाग 7
भाग 7: पढ़ें
भाग 8
भाग 8: पढ़ें
भाग 9
भाग 9: पढ़ें
भाग 10
भाग 10: पढ़ें
भाग 11
भाग 11: पढ़ें
भाग 12
भाग 12: पढ़ें
भाग 13
भाग 13: पढ़ें
भाग 14
भाग 14: पढ़ें
भाग 15
भाग 15: पढ़ें
भाग 16
भाग 16: पढ़ें
भाग 17
भाग 17: पढ़ें
भाग 18
भाग 18: पढ़ें
भाग 19
भाग 19: पढ़ें
भाग 20
भाग 20: पढ़ें
भाग 21
भाग 21: पढ़ें
भाग 22
भाग 22: पढ़ें
भाग 23
भाग 23: पढ़ें
भाग 24
भाग 24: पढ़ें
भाग 25
भाग 25: पढ़ें
भाग 26
भाग 26: पढ़ें
भाग 27
भाग 27: पढ़ें
भाग 28
भाग 28: पढ़ें
भाग 29
भाग 29: पढ़ें
भाग 30
भाग 30: पढ़ें
भाग 31
भाग 31: पढ़ें
भाग 32
भाग 32: पढ़ें
भाग 33
भाग 33: पढ़ें
भाग 34
भाग 34: पढ़ें
भाग 35
भाग 35: पढ़ें
भाग 36
भाग 36: पढ़ें
भाग 37
भाग 37: पढ़ें
भाग 38
भाग 38: पढ़ें
भाग 39
भाग 39: पढ़ें
भाग 40
भाग 40: पढ़ें
भाग 41
भाग 41: पढ़ें
भाग 42
भाग 42: पढ़ें
भाग 43
भाग 43: पढ़ें
भाग 44
भाग 44: पढ़ें
भाग 45
भाग 45: पढ़ें
भाग 46
भाग 46: पढ़ें
भाग 47
भाग 47: पढ़ें
भाग 48
भाग 48: पढ़ें
भाग 49
भाग 49: पढ़ें
भाग 50
भाग 50: पढ़ें
भाग 51
भाग 51: पढ़ें
भाग 52
भाग 52: पढ़ें
भाग 53
भाग 53: पढ़ें
भाग 54
भाग 54: पढ़ें
भाग 55
भाग 55: पढ़ें
भाग 56
भाग 56: पढ़ें
भाग 57
भाग 57: पढ़ें
भाग 58
भाग 58: पढ़ें
भाग 59
भाग 59: पढ़ें
भाग 60
भाग 60: पढ़ें
भाग 61
भाग 61: पढ़ें
भाग 62
भाग 62: पढ़ें
भाग 63
भाग 63: पढ़ें
भाग 64
भाग 64: पढ़ें
भाग 65
भाग 65: पढ़ें
भाग 66
भाग 66: पढ़ें
भाग 67
भाग 67: पढ़ें
भाग 68
भाग 68: पढ़ें
भाग 69
भाग 69: पढ़ें
भाग 70
भाग 70: पढ़ें
भाग 71
भाग 71: पढ़ें
भाग 72
भाग 72: पढ़ें
भाग 73
भाग 73: पढ़ें
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

Ranjan Ki Vapasi, Chudai Ka Tufaan – Episode 2
Hindi Chudai Kahani

Ranjan Ki Vapasi, Chudai Ka Tufaan – Episode 2

आपके लिए पेश है मेरी इन्सेस्ट सेक्स स्टोरीज इन हिन्दी का अगला एपिसोड.. रंजन पूरा काम करने से पहले ही बाहर झड़ गया था. मैं ठगी सी रह गयी मेरे प्लान का क्या होगा.

15 मिनट 638
Khul Gaya Darwaja – Part 3
Hindi Chudai Kahani

Khul Gaya Darwaja – Part 3

देव मंजू को उठाकर मेरे कमरे में ले आया। मंजू अपनी छटपटाहट से देव का काम मुश्किल बना रही थी। मंजू जैसे तैसे देव के चुंगल से छटकना चाहती थी। पर अब देव ज़रा भी असावधान रहने वाला नहीं था। देव ने मंजू को पलंग पर लिटाया। मैं कमरे से बाहर निकल आया और पीछे...

21 मिनट 928
सहेली के भैया ने मेरी सील तोड़ी-4(Saheli Ke Bhaiya Ne Meri Seal Todi-4)
Hindi Chudai Kahani

सहेली के भैया ने मेरी सील तोड़ी-4(Saheli Ke Bhaiya Ne Meri Seal Todi-4)

पिछला भाग पढ़े:-सहेली के भैया ने मेरी सील तोड़ी-3

7 मिनट 307

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।