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गुरु घण्टाल पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,039 बार

विज्ञान से चूत चुदाई ज्ञान तक-40

पिंकी सेन

07 Feb 2025 को प्रकाशित

विज्ञान से चूत चुदाई ज्ञान तक-40
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जब अनुजा घर से निकली थी.. तब राहुल अलमारी के ऊपर से कोई सामान निकाल रहा था.. तभी उसकी आँख में कंकर चला गया और उसकी आँख में जलन होने लगी।उसने जल्दी से आई-ड्रॉप आँखों में डाला और बिस्तर पर लेट गया।

तभी दिया दरवाजे पर पहुँच गई और दरवाजा खटकाने लगी।

राहुल- दरवाजा खुला है आ जाओ अन्दर.. दिया चुपके से अन्दर आ गई।

राहुल ने टी-शर्ट नहीं पहन रखी थी और नीचे भी बस बिना अंडरवियर के लोवर ही था।

राहुल- आ गई तुम.. आजा अब सवाल मत पूछना कि ऐसे क्यों पड़ा हूँ आँख में कचरा चला गया.. अभी ड्रॉप डाला है.. 5 मिनट रूको आ जाओ मेरे पास बैठ जाओ…

दिया कुछ नहीं बोली.. बस धीरे से बिस्तर पे राहुल के पास बैठ गई.. उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या बोले और दीपाली कहाँ है.. वो सोच ही रही थी कि अचानक उसके बदन में 440 वोल्ट का झटका लगा।

राहुल लेटा हुआ था और वो उसके पास बैठी थी।अचानक राहुल ने दिया को अपने पास खींच लिया और उसका मुँह लौड़े पर टिका प्रिया।

राहुल- अरे चुपचाप क्यों बैठी है.. देख मैंने आज तेरे लिए लौड़ा कैसा चमकाया हुआ है.. चूसेगी नहीं आज।

दिया के तो होश उड़ गए वो तो दीपाली का प्रोग्राम चौपट करने आई थी.. यहाँ तो मामला ही दूसरा हो गया।

वो कुछ बोलती इसके पहले राहुल ने एक और धमाका कर प्रिया.. उसने लोवर नीचे सरका प्रिया।अब लौड़ा आधा खड़ा दिया के होंठों के एकदम करीब था।

राहुल- अरे जानेमन क्या बात है.. नाराज़ हो क्या.. ले अब चूस ले.. देख कैसा चिकना हो रहा है.. इसे तेरे लिए ही चमकाया है.. आज तेरी चूत और गाण्ड की खैर नहीं…

दिया अब बुरी तरह डर गई थी और अपने ही जाल में फँस भी गई थी, उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे और क्या ना करे।

राहुल ने उसके मम्मों को दबाने शुरू कर दिए और लौड़ा को उसके होंठों से स्पर्श कर प्रिया।

राहुल- अरे क्या हुआ.. कुछ तो बोल.. आज मौन व्रत रख कर आई है क्या.. और तेरे मम्मे इतने कड़क क्यों लग रहे हैं.. कुछ अलग ही लग रहे हैं.. आ ले अब तो लौड़ा होंठ के पास आ गया.. चूस ना यार…

राहुल के चूचे दबाने से अब दिया का मन मचल गया और उसने धीरे से लौड़े की टोपी मुँह में ले ली और चूसने लगी।

राहुल- आह्ह.. मज़ा आ गया.. अरे मुँह में पूरा ले ना आह्ह..

राहुल का लौड़ा झटके से एकदम अपने असली रूप में आ गया था।

दिया ने डरते-डरते पूरा लौड़ा मुँह में ले लिया और मज़े से चूसने लगी।

राहुल- आह मेरी जान ओफ्फ मज़ा आ गया आह्ह.. आज तो तू कुछ अलग ही अंदाज में चूस रही है आह्ह.. उफ़फ्फ़…

दिया अब वासना की आग में जलने लगी थी उसकी चूत रिसने लगी थी। वो और जोश में लौड़ा चूसने लगी।

राहुल की आँख अब ठीक थी.. उसने आँखें खोल ली थीं और दिया को दीपाली समझ कर उसकी गाण्ड दबा रहा था।

दरअसल दिया की पीठ उसकी तरफ थी और वो लौड़ा चूस रही थी। उसका जिस्म भी दीपाली जैसा ही था.. बस चमड़ी की रंगत का फ़र्क था.. जिसके कारण राहुल को अब तक कुछ पता नहीं लगा।वो बस लौड़े की चुसाई का आनन्द ले रहा था और दिया भी मज़े ले रही थी।

राहुल- ओफ्फ आह्ह.. चूस.. मेरी जान आह्ह.. आज तेरी चूत और गाण्ड का भुर्ता बना दूँगा आह्ह.. अब बस भी कर.. लौड़ा को चूस कर ही ठंडा करेगी क्या आह्ह..? चल अब चूत का मज़ा लेने दे आजा मेरी जान…

राहुल ने दिया के सर को पकड़ कर लौड़े से हटाया और उसके चेहरे पर नज़र पड़ते ही उसके होश उड़ गए।

दिया भी एकदम से घबरा गई.. जैसे लंबी बेहोशी के बाद होश में आई हो।

अब राहुल से नज़रें मिला पाना उसके लिए मुश्किल हो रहा था, उसने नजरें झुका लीं।

ओह.. सॉरी मित्रों.. आपको थोड़ा रुकना होगा कुछ जरूरी बात बतानी है.. आपको बता दूँ.. दीपाली जब अनुजा के पीछे गई थी।तभी दिया यहाँ आई थी।

सारी घटनाएं एक साथ हो रही हैं तो आपको बता दूँ कि दीपाली वहाँ बिज़ी थी।दिया यहाँ अब अपनी हीरोइन कहाँ तक पहुँची देख आते हैं, कहीं ऐसा ना हो वो आ जाए और दोनों को इस हाल में देख ले।

दीपाली वापस रिक्शा में आ रही थी तभी रास्ते में मैडी और सोनू बाइक पर जा रहे थे.. दोनों ने उसे देख लिया दीपाली की भी नज़र उन पर पड़ गई।

दीपाली- अरे ये कहाँ से आ गए.. अब सर के घर जाना ठीक नहीं.. क्या पता ये पीछे आ जाएं।

दीपाली ने रिक्शा अपने घर की ओर ले लिया और घर के पहले मोड़ पर उतर गई।मैडी भी उसका पीछा करता हुआ आ गया।

दीपाली ने उनको नज़रअंदाज किया और घर की तरफ चल दी।

मैडी- दीपाली एक मिनट रूको तो प्लीज़…

दीपाली- अरे तुम यहाँ क्या कर रहे हो.. बोलो क्या बात है?

मैडी- दीपाली कहाँ जाकर आई हो तुम?

दीपाली- एक्सक्यूज मी.. तुम होते कौन हो मुझसे सवाल पूछने वाले?

मैडी- सॉरी यार.. तुम तो बुरा मान गईं.. मेरा वो मतलब नहीं था.. कल आ रही हो ना?

दीपाली- हाँ यार पक्का आऊँगी.. बोला ना अब जाओ. मुझे ऐसे रास्ते में खड़ा होना पसन्द नहीं है।

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मैडी- ओके थैंक्स.. बाय.. चल बे क्या खड़ा है चल…

दोनों वहाँ से जाने लगे.. दीपाली वहीं खड़ी उनको जाते हुए देख रही थी.. वो बात करते हुए जा रहे थे।

सोनू- यार साली, दिन पे दिन क़यामत होती जा रही है.. कल का क्या सोचा है.. अब तो बता दे.. कहीं ऐसा ना हो.. कल ये आए भी और हम कुछ भी ना कर सकें।

मैडी- अबे चूतिया साला.. जब भी बोलेगा उल्टी बात ही बोलेगा… इसके लिए मैंने इतना खर्चा किया.. ऐसे थोड़े ही साली को जाने दूँगा.. चल संजय के पास चलते हैं, तीनों मिलकर बात करेंगे.. उसके सामने ही कल का प्लान बताऊँगा.. तब तुझे समझ आएगा।

सोनू- अरे अभी नहीं.. बाद में जाएँगे पहले एक जरूरी कम निपटा आते हैं.. उसके बाद पूरा दिन में फ्री हूँ यार…

मैडी- कौन सा जरूरी काम बे?

सोनू- यार पापा के दोस्त के घर ये पेपर देने हैं बस उसके बाद फ्री ही फ्री.. चल अभी तो बाइक भी है.. बाद में आते हैं ना संजय के पास…

मैडी ने ना-नुकुर की और फिर मान गया दोनों वहाँ से चले गए।

दीपाली- चले गए हरामी.. अब जाती हूँ मेरे राजा जी के पास बेचारे राह देख रहे होंगे दीदी भी नहीं हैं घर पर.. वो तो वहाँ अपनी सहेली के साथ बिज़ी हैं।

दीपाली राहुल के घर की तरफ बढ़ने लगती है।

अरे दोस्तो, अब क्या होगा दिया भी वहीं है.. चलो आपको वापस वहाँ ले चलती हूँ.. मज़ा आएगा।

राहुल- प्प..प्प..दिया तुम.. यहाँ क्या कर रही हो?

दिया- व..व..वो सर मैं स..सवाल पूछने आई थी.. मगर आपने..

राहुल- ओह्ह.. मैंने समझा दीपाली आई.. न..न..नहीं मेरी बीवी आई है.. ऐसा समझा सॉरी.. ग़लती से दीपाली मुँह से निकल गया।

राहुल ने तब तक लोवर ऊपर कर लिया था उसका लौड़ा अभी भी तना हुआ था।

दिया- आप मुझे दीपाली ही समझ रहे थे.. मैं सब जानती हूँ।

राहुल- क..क्या तुमको कैसे पता?

दिया- वो सब बाद में बताऊँगी.. दीपाली कहाँ है.. मैं उसके लिए ही आई थी।

राहुल- अभी तक तो नहीं आई.. आने ही वाली होगी.. तुम जल्दी से निकलो.. अगर वो आ गई तो गड़बड़ हो जाएगी.. तुमको फिर कभी मज़ा दूँगा।

दिया- सॉरी आप गलत समझ रहे हो.. दीपाली ने कई बार मुझसे आपके बारे में कहा.. मैंने हमेशा मना ही किया और आज भी मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। बस सब इत्तफ़ाक़ से हो गया.. ओके मैं जाती हूँ प्लीज़ आप भी उसको कुछ मत बताना।

राहुल- अच्छा इत्तफ़ाक़ से हो गया.. लौड़ा तो बड़े मज़े से चूस रही थी.. अब जाने दो तुम्हारी मर्ज़ी.. अच्छा अब जाओ.. मैं क्यों उसको बताऊँगा?

दिया जब दरवाजे के पास गई.. बस खोलने ही वाली थी कि राहुल भाग कर उसके पास आ गया।

राहुल- रूको पहले मुझे देखने दो बाहर कोई है तो नहीं ना?

दिया साइड में हो गई.. राहुल ने थोड़ा सा दरवाजा खोला ही था कि सामने से दीपाली आती हुई नज़र आई राहुल ने जल्दी से दरवाजा बन्द कर लिया।

राहुल- लो आ गई दीपाली.. अब तुमको यहाँ देखेगी तो हम दोनों से ना जाने कितने सवाल पूछेगी.. तुम ऐसा करो वो सामने वाले कमरे में छुप जाओ जब मैं उसको लेकर इस कमरे में चला जाऊँ.. तब तुम निकल जाना।

दिया- मगर सर… छुपने की क्या जरूरत है..??

वो आगे कुछ बोलती राहुल उसका हाथ पकड़ कर दूसरे कमरे में ले गया और दरवाजा बन्द कर प्रिया।

तभी दीपाली ने घन्टी बजा दी।

दिया- मेरी पूरी बात भी नहीं सुनी.. दीपाली को बोल देती सवाल पूछने आई थी.. सर भी ना पागल है.. वैसे लौड़ा बड़ा मस्त है उनका.. तभी दीपाली उनके प्यार में पागल हो गई है।

राहुल- आ रहा हूँ रूको…

राहुल ने दरवाजा खोला और दीपाली को देख कर उसको मुस्कान दी।

राहुल- अब आ रही हो.. तुम्हारा कब से इन्तजार कर रहा हूँ।

दीपाली- हाँ जानती हूँ.. अकेले बोर हो रहे होगे.. अब अन्दर भी चलो.. क्या सारी बात यही करोगे?

राहुल पीछे हट गया.. दीपाली अन्दर आ गई।

राहुल- तुमको कैसे पता मैं अकेला हूँ?

दीपाली- व्व..वो बस ऐसे ही अंदाज से बोल प्रिया मैंने.. तो क्या सच में दीदी घर पर नहीं है?

बस दोस्तो, आज के लिए इतना काफ़ी है। अब आप जल्दी से मेल करके बताओ कि मज़ा आ रहा है या नहीं!तो पढ़ते रहिए और आनन्द लेते रहिए..मुझे आप अपने विचार मेल करें।support@mohakkisse.com

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विज्ञान से चूत चुदाई ज्ञान तक

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

हैन्डसम लवर बॉय

1 month ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

प्रदीप कुमार धीमान

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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