माय हसबंड फकिंग अदर गर्ल स्टोरी में मेरे पति 2 सप्ताह के लिए टूर पर गए. साथ में उनकी जवान सेक्सी कुलीग भी थी जो उनका बिस्तर गर्म रखने वाली थी.
यह कहानी सुनें.
यह नई कहानी मेरी पत्नी द्वारा लिखी गयी है, मैंने सिर्फ उनका सहयोग ही किया है.
प्यारे पाठको, यह आईडी मेरे पतिदेव की है. यहाँ अक्सर कहानियाँ भी वे ही लिखते हैं.मैंने इस कहानी में जो भी लिखा है, यह सब पिछले साल तब घटित हुआ था जब मेरे पतिदेव अपने ऑफिस के टूर पर 2 सप्ताह के लिए दुबई गए थे.
मैं यह स्पष्ट कर देना चाहती हूँ कि यह कहानी शतप्रतिशत सत्य नहीं है, पर यह पूर्ण झूठ भी नहीं है।
उन चौदह दिनों की घटनाओं को जोड़कर मैंने ये कहानी लिखने की कोशिश की है.अधिकतर घटनाएँ सत्य हैं पर कहानी बनाने के लिए थोड़ा सा मसाला भी डाला गया है।
चलिये, माय हसबंड फकिंग अदर गर्ल स्टोरी शुरू करते हैं।
यूं तो मेरे पति पहली बार टूर नहीं गए, परंतु इस बार इतना फर्क था कि पिछले साल मेरा बेटा भी अपनी बारहवीं करके बी टेक करने के लिए हॉस्टल में चला गया था.तो अब घर पर सिर्फ मैं थी, अकेली थी।
पतिदेव अपने दुबई टूर की तैयारी में लगे थे, उनको ऑफिस की तरफ से 14 दिन का टूर दिया गया था।जिसमें उनके साथ ऑफिस के अन्य कुछ लोग, जिनमें उनकी सहयोगी शालिनी भी थी, जा रहे थे।
शालिनी के अपने पति के साथ जाने का मतलब मैं भी समझती थी.और मुझे इसमें कोई आपत्ति भी नहीं थी।
क्योंकि मैं भी यह जानती थी कि मेरे पति का कामुक प्रवृत्ति के हैं तो उनको कोई मादा साथ जरूर चाहिए।मैं तो सोच रही थी कि अच्छा है शालिनी उनके साथ गयी है वरना बेकार ही इधर उधर मुंह मारते रहते।
हम दोनों इस मामले में एक दूसरे से पूरी तरह से खुले हुए थे तो किसी तरह से शर्म और झिझक की बात ही नहीं थी।उनकी पैकिंग करते समय मैंने बैग में डॉटेड कंडोम के दो पैकेट रख दिए थे और उनको बता भी दिया था- जब भी शालिनी के साथ हो तो ध्यान रखना कि कॉन्डोम बैग में हैं। कहीं ऐसा ना हो कि वहां से आने के बाद कोई गुड न्यूज़ सुना दो. हा हा हा हा!बोल कर मैं हंसने लगी।
हम दोनों का दिन एक दूसरे को ऐसे ही छेड़ते हुए बीतता था।बस उनकी यही कमी मुझे खलने वाली थी.क्योंकि उनके बिना चौदह दिन काटना मेरे लिए बहुत मुश्किल काम था.शादी के बाद पहली बार ऐसा मौका था जब मैं और मेरे पति चौदह दिन के लिए अलग हो रहे थे।पर क्या कर सकते थे?ऑफिस का काम भी जरूरी था और इधर घर भी संभालना था।
उम्र के इस पड़ाव पर आकर हमें चौदह दिन एक दूसरे से अलग रहना ही था।
अगले दिन सुबह मेरे पति राजीव की दुबई की फ्लाइट थी.हम दोनों ही तैयार होकर सुबह 4:00 बजे ही घर से निकल गए थे, 7:00 बजे हम लोग एयरपोर्ट पहुंच गए थे.उनके ऑफिस के बाकी साथी भी आने लगे।
मेरी नजर बस शालिनी को तलाश रही थी।तभी अचानक सामने टैक्सी से शालिनी निकलती दिखाई दी।“अरे यह तो अकेली आई है इसका पति नहीं आया इसको छोड़ने?” मैं बोली।“हां… वो भी अपने ऑफिस की ट्रेनिंग के लिए देहरादून गया है।” राजीव ने जवाब दिया- वरना तो उसे यहाँ तुम्हारी सेवा के लिए छोड़ जाता!राजीव ने मुझे छेड़ते हुए कहा.
और हम दोनों ही खिलखिला कर हंसने लगे।
तभी सामने से शालिनी चहचहाती हुई हमारे पास आई और बोली- क्या बात है शशि मैडम? लगता है सर ने कोई चुटकुला सुना दिया!
अभी बातचीत चल ही रही थी कि ऑफिस के लोगों ने एयरपोर्ट के अंदर चलने को कहा.“मैंने उन लोगों को बाय बोला और अपनी कार लेकर वापस घर के लिए निकल गई।
3 घंटे की ड्राइव करके मैं अपने घर तो पहुंच गई पर मुझे तो यह 3 घंटे का अकेलापन ही खलने लगा।समझ नहीं आ रहा था कि अगले चौदह दिन मैं राजीव के बिना कैसे रहूंगी।खैर रहना तो था ही।
मैं भी घर आकर अपने दैनिक कार्यों में लग गई और दिन में जमकर नींद ली।
शाम को तैयार होकर पास के मॉल में गई और अच्छी खासी शॉपिंग करके वापस आई।दरअसल मैं सिर्फ राजीव के दुबई पहुंचने के फोन का इंतजार कर रही थी।
रात को 10:00 बजे शाम का कॉल आया मैंने झट से कॉल रिसीव किया.राजीव ने बताया- हम लोग दुबई पहुंच गए हैं, होटल में चेक इन कर लिया है फोन करने में देरी हो गयी।
वे मुझसे पूछने लगे “तुम बताओ तुम्हारा दिन कैसा रहा।”मैंने खिसियाते हुए कहा, “चिढ़ाओ मत मुझे! आपको पता है कि आपके बिना मेरा दिन कैसा रहा होगा। आप तो अपने लिए वहां एक कबूतरी साथ ले गए हो. पर यहां चौदह दिन आपके बिना काटना मेरे लिए कितना मुश्किल है, सोचकर ही दिमाग खराब हो रहा है।”
“हा हा…” हंसते हुए राजीव ने कहा, “अरे, तो बस इतनी सी बात है? कोई बात नहीं आपके लिए भी इंतजाम किए देते हैं ताकि चौदह दिन वहां कोई आपकी सेवा में लगा रहे।”मैंने कहा, “नहीं, मुझे कोई सेवा नहीं चाहिए आप अपनी कबूतरी के साथ मजे करो। पर रोज जो भी करोगे मुझे बताते रहना. मैं तो वही सुनकर खुश हो जाया करूंगी।”राजीव बोले, “ओके… पक्का. आपको हर चीज नियमित रूप से बताऊंगा मैडम!
मैंने पूछा, “अच्छा चलो बताओ, फ्लाइट में कुछ हुआ?”राजीव ने जवाब दिया, “अरे नहीं यार, फ्लाइट में तो सभी लोग साथ में थे. पर हम दोनों ने आज रात का प्लान किया है. अभी होटल में चेक इन किया है। डिनर करके दो घंटे बाद सभी अपने-अपने कमरे में चले जाएंगे मैंने शालिनी को भी अपने कमरे में बुला लिया है। वो एक बार स्टाफ के सामने तो अपने कमरे में ही जाएगी। उसके बाद मौका देखकर मेरे कमरे में आ जाएगी।”
मैंने कहा, “चलो ठीक है आप लोग एंजॉय करो और खूब सारा काम भी करो। पर जो भी करोगे मुझे बताते जरूर रहना।राजीव ने ‘बाय’ बोलकर फोन काट दिया।
मैं भी सोने की तैयारी करने लगी।
पर मुझे तो हमेशा से राजीव से चिपक कर सोने की आदत थी।आज इतने बड़े बिस्तर पर अकेले नींद ही नहीं आ रही थी.रात के 12:00 गए और मैं परेशान सी करवटें बदलती रही।
उसके बाद मैंने मोबाइल में पोर्न देखना शुरू कर दिया ताकि थोड़ी सी थकान महसूस हो और मुझे नींद आ जाए.पर अकेले तो पोर्न देखने में भी मजा नहीं आता।
रात के करीब 12:30 बजे अचानक मेरे व्हाट्सएप पर कुछ मैसेज आए, मैंने व्हाट्सएप खोलकर देखा तो मेरे पति राजीव और शालिनी गुत्थमगुत्था हो चुके थे।उन दोनों की अनेक अंतरंग फोटो मेरे व्हाट्सएप पर एक के बाद एक आ रही थी।
क्योंकि शालिनी वैसे तो राजीव की असिस्टेंट थी पर अनेकों बार हमारे साथ थ्रीसम का मजा ले चुकी थी।इसीलिए हम सब एक दूसरे से काफी खुले हुए थे।
राजीव और शालिनी की कामक्रीड़ारत फोटो देखकर मेरे पूरे बदन में चीटियां दौड़ने लगी मैं अपने बिस्तर में अकेली थी, पर कामाग्नि में जल रही थी।उस समय मेरी स्थिति ऐसी हो रही थी कि अगर कोई कुत्ता भी आकर मेरे ऊपर चढ़ जाए तो शायद मैं खुद को उसके हवाले कर दूं.पर मेरी कामाग्नि शांत करने हेतु कोई भी पुरुष मेरे पास उपलब्ध नहीं था।
राजीव और शालिनी की प्रेमालाप करती नग्न फोटो लगातार व्हाट्सएप पर आ रही थी।मैंने अपने जलते बदन की ज्वाला शांत करने की कोशिश मेँ अपने सारे कपड़े उतार फेंके।मैं पूरी नग्न अपने ही बदन से खेलने लगी।
मैंने अपना व्हाट्सएप लैपटॉप पर चालू किया ताकि उन दोनों की फोटो लगातार देख सकूं और अपने कामुक बदन की धधकती ज्वाला को शांत भी करती रहूँ।मेरे चूचुक कड़े हो गए।मैं खुद ही अपने दोनों चूचुक दबा दबा कर आनंदविभोर हो रही थी।
अनायास ही मेरा एक हाथ मेरी योनि पर चला गया जिसमें चीटियां सी दौड़ती महसूस हो रही थी.मैंने राजीव को वीडियो कॉल करने के लिए कहा।एक ही पल में सामने मुझे वीडियो कॉल किया, उस तरफ राजीव और शालिनी एक बहुत ही सुंदर कमरे में एक दूसरे के बदन का आनंद ले रहे थे।राजीव मुझे वीडियो कॉल पर दिख रहे थे और शालिनी उनके कड़े हो चुके कामांग को अपने गुलाबी होठों से चाट रही थी।
जैसे ही राजीव ने कैमरा शालिनी की तरफ किया, शालिनी ने हाथ से मुझे हाय का इशारा किया और बोली, “देख लो मैडम, तुम्हारे हिस्से की मेहनत भी मुझे ही करनी पड़ रही है।”और मैंने हंसते हुए उसे गाली देकर कहा, “कमीनी, तेरे हिस्से की गर्मी मेरे बदन में ही चढ़ रही है। मुझसे रुका नहीं जा रहा, मैं क्या करूं?”
राजीव बोला, “मैं मोबाइल साइड में रख देता हूं तुम हम दोनों को देखते हुए अपनी चूत में उंगली डालो, डिस्चार्ज होने के बाद तो अच्छी नींद आएगी।”“इसीलिए तो मैंने तुम्हें कॉल किया है।” मैंने जवाब दिया।
राजीव ने मोबाइल कमरे में इस तरह लगा दिया कि उनके बिस्तर की एक-एक गतिविधि मुझे दिखाई दे रही थी।मोबाइल लगते ही राजीव ने बिस्तर के एक कोने में शालिनी को बैठाया और उसकी दोनों टांगें खोलकर उसकी योनि को जोर-जोर से किसी कुत्ते की तरह चाटने लगे।
शालिनी की ‘आह…आह… ऊई..माँ’ की मादक ध्वनि मुझे कामोत्तेजित कर रही थी।वैसे तो राजीव शालिनी का योनि चाटन ही कर रहे थे, पर मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उनकी वह जीभ मेरी योनि पर ही चल रही है।वाह … क्या कातिलाना अहसास था।
मुझे मेरे योनि मुख पर हल्का-हल्का गीलापन महसूस होने लगा।मैं अपने हाथ से ही अपनी गीली हो चुकी योनि को हौले हौले सहलाकर अपने दूसरे हाथ से मेरे कड़े हो चुके चूचुक पकड़ कर अपने ही मुंह में ले जाने की कोशिश करने लगी।
पतिव्रता बीवी की चुदाई पुराने आशिक से- 7
परंतु मेरी नजर सामने रख लैपटॉप पर थी.मेरे सामने एक जीवंत प्रणय दृश्य चल रहा था।
शालिनी की योनि चाटते चाटते राजीव धीरे-धीरे खड़े हुए, उसकी दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथों से दबा लिया और उसके होठों में अपने होंठ फंसाकर वे दोनों एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे।
इधर मैं बेचैनी हाल मैं अपने एक हाथ से अपनी एक चूची से खेल कर ही आनंदविभोर थी।मेरा दूसरा हाथ मेरी गीली गली में सरपट दौड़ने की कोशिश कर रहा था।“काश मेरे पास दो हाथ और होते तो कितना मजा आता।” मैं ये ही सोच रही थी।
तभी अचानक शालिनी ने राजीव को झटका दिया और बिस्तर पर गिरा लिया जैसे ही राजीव बिस्तर पर लेटे, शालिनी ने अपनी एक टांग राजीव के ऊपर से ले जाकर अपनी योनि राजीव के मुंह पर रख दी.राजीव भी नीचे से शालिनी के योनिरस का आनंद लेने लगे।
शालिनी भी आगे झुककर राजीव के खड़े प्रेमदंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।इधर मुझे ये सब देखने मे जितना मज़ा आ रहा था, मेरी बेचैनी भी उतनी ज्यादा बढ़ती जा रही थी।समझ नहीं आ रहा था, कि क्या करूं?
मुझे याद आया कि मेरे पास बनाने के लिए लंबे वाले बैंगन रखे थे.
मैं उठकर अपने किचन में गई, मैंने एक बैंगन छाँट कर उठाया और थोड़ा सा तेल लेकर उसे बैंगन पर चुपड़ लिया।अब मैं वापस अपने बिस्तर पर आ गई.
राजीव और शालिनी मुझे ही ढूंढ रहे थे।मेरे वापस आते ही शालिनी ने पूछा, “कहां चली गई थी।”
मैंने हंसते हुए अपने हाथ में पकड़ा बैंगन दिखाकर कहा, “अपने लिए जुगाड़ करने गई थी।”राजीव ने भी हंसते हुए कहा, “आज इसी से चुदेगी मेरी धन्नो।”“दूसरा कोई ऑप्शन भी नहीं है।” मैंने जवाब दिया।
तभी बात करते-करते शालिनी ने कहा, “उधर से आप अंदर डालो, इधर से मैं अंदर डालती हूं।”और बिस्तर पर लेटे राजीव के खड़े लोड़े के ऊपर अपनी गुलाबी रसीली योनि रख दी।
इधर मैं भी लैपटॉप की तरफ अपनी टांगें फैलाकर अपना योनिद्वार का खोल चुकी थी और बैंगन अपनी योनिद्वार पर रखकर चलाने लगी।
शालिनी धीरे-धीरे राजीव के लिंग पर दबाव बना रही थी और राजीव का कड़क हो चुका लिंग जो अब भयंकर लौड़ा बन चुका था, धीरे-धीरे शालिनी के अंदर समा रहा था।मैं उस समय कामान्ध हो कर सिर्फ अपने बैंगन पर ध्यान दे रही थी।
मैं भी बैंगन का सिर पकड़ कर उसे धीरे-धीरे अपने अंदर सरकाने लगी।तब तक शालिनी पूरा सामने शालिनी की योनि पूरा प्रेमदंड अपने अंदर समा कर राजीव की गोटियों से टकरा चुकी थी।
राजीव ने नीचे लेटे-लेटे ही नीचे से एक जोर का झटका अपने लिंग पर दिया और खूँटे की तरह पूरा लौड़ा शालिनी की चूत में गाड़ दिया।
“ह्म्म्म … आह्ह … ओह …मर गईई ईईईई.” की आवाज के साथ शालिनी चीख उठी।मैं भी अपने हाथ में पकड़ा बैंगन एक झटके में अंदर सरका चुकी थी।‘उई फट गई ईईईई…’ इधर मेरी भी आवाज निकली।
दरअसल मैं शायद जो बैंगन उठाकर लाई थी वो मेरे योनीछिद्र के अनुपात में थोड़ा सा मोटा था।मैंने एक झटके में अंदर डाल तो लिया पर एक पल को तो मेरी जान ही निकल गई।
वो तो मैंने उस पर पहले से तेल लगा लिया था इसलिए वो आराम से अंदर चला गया।नहीं तो आज शायद मेरी तो फट ही जाती।
उधर शालिनी राजीव के घोड़े पर बैठकर सरपट दौड़ रही थी।राजीव अपने दोनों हाथों से शालिनी के 34 साइज की बहुत खूबसूरत चूचियां मींझ रहे थे।
इधर मैं भी अपने एक हाथ से अपनी शालिनी से भी बड़ी बड़ी चूचियों से खेलते हुए दूसरे हाथ से बैंगन को अपने अंदर सरपट दौड़ा रही थी।
दोस्तो, ऐसे दृश्य की शायद आपने कल्पना नहीं की होगी।परंतु जब पति-पत्नी एक दूसरे के दोस्त हो जाते हैं और एक दूसरे के साथ इतना खुल जाते हैं कि वह इस तरह के दृश्यों का आनंद ले सकें तो यह कामोत्तेजना की चरम सीमा होती है।मैं भी अपनी कामोत्तेजना के शीर्ष पर थी।
उधर शालिनी ने अपनी पोजीशन बदल ली, शायद वो थक गई थी।वो राजीव के ऊपर से उतर कर नीचे बिस्तर पर लेट गई और उसने अपनी दोनों टांगें फैलाकर राजीव को आमंत्रित किया।
राजीव ने भी एक सेकंड न गँवाते हुए बराबर में रखा मखमली तकिया उठाया और शालिनी के नितंबों के नीचे लगा दिया।शालिनी राजीव के इंतजार में थी.तभी राजीव ने अपना लौड़ा शालिनी के योनिद्वार पर रखा और एक ही झटके में पूरा अंदर उतार दिया।
“उई… मां…धीरे…” शालिनी कुसमुसाई और नीचे से नितंब उछाल कर राजीव का साथ देने लगी।राजीव ने भी बहुत तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए।
शालिनी अपने नाखून से मेरे पति की पीठ सहला रही थी.राजीव के मुंह में शालिनी का एक गुलाबी चूचुक, शायद राजीव अपनी जीभ से उसे चाट रहे थे और नीचे से धकाधक धक्के लगाकर शालिनी की रसीली योनि की कुटाई कर रहे थे।
इधर मैं भी अपनी पोजीशन बदलना चाह रही थी.मैंने अपनी चूत से बैंगन निकाला और उसको अपने बिस्तर पर खड़ा करके उसके ऊपर बैठ गई.अब बैंगन नीचे से सीधा मेरी योनि के अंदर था.दरअसल इस पोजीशन में आने से चोट सीधे गहराई में लगती है।
मैं बहुत तेजी से बैंगन के ऊपर उछलने लगी।ऊई…आह…उफ्फ…अब मेरी सिसकारियाँ निकल रही थी।मुझे लगा कि मैं मंजिल तक पहुंचने वाली हूं।
उधर राजीव के जोरदार धक्कों के परिणामस्वरूप शालिनी चिल्ला चिल्ला कर आनंद ले रही थी।
मैं भी शालिनी से कम नहीं रहना चाहती थी।मैंने भी नीचे रखे बैंगन के ऊपर जोर-जोर से उछालना शुरू कर दिया और शालिनी से तेज आवाज में चिल्लाने लगी।
उन दोनों की नजर मुझ पर पड़ी.शालिनी बोली, “इससे अच्छा तो आप भी साथ ही आ जाती।”
पर मेरा उस समय शालिनी को जवाब देने में कोई इंटरेस्ट नहीं था।मैं तो बस जीवन के उसे क्षण का आनंद लेना चाहती थी।
तभी मैंने देखा की राजीव ने दो-तीन झटके बहुत जोर से मारे और शालिनी पर ढह गए.मैं समझ गई कि राजीव अपनी मंजिल पर पहुंच गए।
इधर मेरा योनिरस भी बहते हुए बैंगन के चारों तरफ फैल चुका था।मैंने शालिनी की तरफ देखा तो शालिनी बोली, “अरे मेरा तो बहुत देर पहले हो गया था पर राजीव सर इतना मजा दे रहे थे कि मैंने उन्हें रोकना ठीक नहीं समझा।
राजीव शालिनी के ऊपर से उतरकर तुरंत वाशरूम में चले गए।
अब कैमरे के सामने मैं और शालिनी अकेली थी.मैंने शालिनी से पूछा, “मजा आया?”वो बोली, “अरे जानेमन, अगर आप साथ होती तो और ज्यादा मजा आता। मैंने तो यहां पूरा मजा लिया. पर वहां आप अकेली बैंगन के साथ लगी थी। ये देखकर मुझे अच्छा नहीं लगा। मैं राजीव सर से बोलती हूं आपके लिए भी वहाँ कोई इंतजाम करवा दें।”
मैं शालिनी की बात सुनकर मुस्कुराई।तभी राजीव अंदर से वापस आ गए.शालिनी उठकर वाशरूम भाग गई।
मैंने राजीव की तरफ देखा और राजीव ने मेरी तरफ।हम दोनों ही मुस्कुराए और राजीव एकदम बोले, “सॉरी बाबू, मैं तेरी परेशानी समझ सकता हूं। पर कल तेरे लिए कोई इंतजाम करता हूं, देखता हूं, कौन मिलता है। नहीं तो तू खुद किसी को बुला ले, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है।“मैंने मुस्कुराते हुए “गुड नाईट” बोला कैमरा बंद किया, अपने बिस्तर की चादर बदली और नंगी ही सो गई।
रात को मुझे नींद बहुत अच्छी आई।मुझे राजीव की कमी एक बार भी महसूस नहीं हुई।
सुबह मेरी आंख अपने समय पर खुली।यह कहानी कई भागों में चलेगी.माय हसबंड फकिंग अदर गर्ल स्टोरी पर आपकी राय मेल और कमेंट्स में वांछित हैsupport@mohakkisse.com
माय हसबंड फकिंग अदर गर्ल स्टोरी का अगला भाग:वो चौदह दिन- 2