Xxx डिज़ायर स्टोरी में एक अमीर लड़के की कामुक नजर अपने ख़ास दोस्त की विधवा माँ पर पड़ी. वह उसे चोदने की तरकीब सोचने लगा. उसने अपने पैसे के दम पर दोस्त की माँ को पटाना चाहा.
नमस्ते दोस्तो, मैं धीरज आपके सामने अपने दोस्त प्रतीक का बताया हुआ एक रोमांचक किस्सा पेश कर रहा हूँ.इसमें उसने अपने बचपन के दोस्त की माँ को पटाकर किस तरह से चोदा, उसे लिखा गया है.
अब Xxx डिज़ायर स्टोरी का मजा लेते हैं.
अमन और प्रतीक दोनों बचपन के बहुत अच्छे दोस्त थे.दोनों एक ही स्कूल में पढ़ने से लेकर कॉलेज तक साथ रहे.जिस कॉलेज में अमन और प्रतीक पढ़ते थे, वहां उनके और भी कई दोस्त थे.
रोज कॉलेज जाना और दोस्तों के साथ वक्त बिताना अब इन दोनों का रूटीन बन गया था.
अमन एक साधारण घर का लड़का था.उसके घर में सिर्फ वह अपनी माँ नीलिमा के साथ रहता था.उसके पिता का देहांत हो चुका था, जो सरकारी नौकरी में थे.
अमन के भविष्य के लिए उसकी माँ ने वह सरकारी नौकरी बचाकर रखी थी जो अनुकंपा नियुक्ति के चलते अमन को मिल सकती थी.चूंकि नीलिमा उतनी ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी और वह अकेली थी तो नौकरी के साथ साथ अमन की देखभाल करने में भी असक्षम थी.
इसी लिए नीलिमा ने घर पर ही एक लेडीज गारमेंट की दुकान खोल ली थी.कुछ ही समय में वह दुकान ठीक-ठाक चलने लगी थी.
दूसरी तरफ प्रतीक अच्छे घर से था.उसके पिता की ज्वेलरी की दुकान थी.उसके घर में उसकी माँ और एक छोटी बहन रसिका भी थी.
प्रतीक और अमन साथ में ही कॉलेज आते-जाते थे.अमन की थोड़ी खराब आर्थिक हालत को समझते हुए प्रतीक हमेशा अपनी गाड़ी से उसे लेने-छोड़ने आता था.
सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था.
हमेशा की तरह एक दिन प्रतीक अमन को लेने उसके घर पहुंचा.दो बार आवाज देने पर भी जब अमन बाहर नहीं आया.तो प्रतीक घर के अन्दर चला गया. दरवाजा खुला देखकर, वह सीधा अन्दर घुसा.जब उसे कोई नहीं दिखा तो वह अमन को आवाज देने लगा.
कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर वह सीधा उसके कमरे में चला गया और देखा कि अमन सोया हुआ था.
अब प्रतीक अमन की माँ नीलिमा को आवाज देने लगा.किसी का जवाब न मिलने पर वह बाहर जाने के लिए निकला, तभी उसे बाथरूम की तरफ से पानी की आवाज आई.
प्रतीक सीधा बाथरूम की तरफ गया और बोला- आंटी, आप अन्दर हो क्या?अन्दर से नीलिमा ने जवाब दिया- हां प्रतीक, मैं ही हूँ क्या हुआ? कुछ काम है क्या?
प्रतीक ने कहा- आंटी, अमन को आवाज दे रहा था, पर वह तो सोया हुआ है!नीलिमा ने कहा- हां, उसकी तबीयत कुछ ठीक नहीं है, इसीलिए वह सोया हुआ है.‘ओके आंटी मैं शाम को आता हूँ!’ बोलकर प्रतीक कॉलेज के लिए निकल पड़ा.
फिर जैसे ही कॉलेज खत्म हुआ तो प्रतीक सीधा अमन के घर पर वापस आया और दरवाजा खुला देखकर सीधा अमन के कमरे में आ गया.
उसे जागता देख बोला- क्या हुआ तुझे?अमन बोला- कल से बुखार में हूँ अभी भी कुछ कम नहीं हुआ है.
प्रतीक बोला- रात तक देख ले, ठीक लगे तो अच्छा, वरना डॉक्टर के पास चले जाएंगे!अमन ने भी हां बोल दिया.
कुछ देर रुक कर प्रतीक अपने घर जाने के लिए निकला और वह आंटी को आवाज देते हुए दुकान में पीछे के दरवाजे से अन्दर आ गया.
वह बोला- आंटी मैंने अमन से बात कर ली है, अब घर जा रहा हूँ.नीलिमा ने भी ‘ठीक है.’ बोल दिया और अपने काम में मशरूफ़ हो गई.
उधर से बाहर निकलते हुए प्रतीक की नजर नीलिमा के सुखाए हुए कपड़ों पर पड़ी.उसने देखा कि नीलिमा की ब्रा और पैंटी रस्सी पर सूख रही थी.
प्रतीक ने इधर-उधर देखा और दोनों ब्रा और पैंटी को निकाल लिया तथा अपने कॉलेज बैग में छुपा लिया और घर ले आया.
घर आते ही प्रतीक अपने कमरे में गया.उसने उस आधी गीली ब्रा और पैंटी को उसने सूखने के लिए अपने बाथरूम में टांग दिया और खाना खाने चला गया.खाना खाकर प्रतीक कमरे में आया और अपने बाथरूम में से उस ब्रा और पैंटी को लाकर बिस्तर पर लेट गया और सूँघने लगा.
वह अपने दोस्त की मम्मी की ब्रा पैंटी को सूंघते ही अपनी एक अलग ही दुनिया में आ गया.
अब तक जिस नीलिमा को वह अपनी माँ की तरह समझता था, अब उसके लिए नीलिमा हवस भरी दमकती चीज बनने लगी.Xxx डिज़ायर के चलते उस रात उसने नीलिमा को याद करते हुए दो बार उसकी ब्रा और पैंटी में मुठ मारी और अपना पूरा माल उनमें ही निकाला.
अगले दिन जब प्रतीक अमन के घर गया तो उसने पहले नीलिमा को ढूँढना शुरू किया और बोला- आंटी, अमन कैसा है?
नीलिमा बोली- अरे प्रतीक तुम कब आए?‘बस मैं अभी ही आया!’
आंटी नीलिमा किचन में खाना बना रही थी.प्रतीक उसे देख अपने लंड से हाथ घुमा रहा था.उसकी नीलिमा के प्रति वासना बहुत बढ़ गई थी.अब वह उसे चोदने के बारे में सोचने लगा.
कुछ देर प्रतीक को वैसे ही देखकर नीलिमा बोली- क्या हुआ बेटा?प्रतीक बोला- कुछ नहीं आंटी बस आपसे बात करने का मन हुआ, तो आ गया.
वे दोनों पढ़ाई की बातें करने लगे.
प्रतीक ने कहा- हमारी पढ़ाई तो ठीक-ठाक चल रही है.उस पर नीलिमा ने कहा- अमन तो ज्यादा पढ़ता नहीं है, हमेशा मोबाइल में लगा रहता है. तुम उसे समझाते क्यों नहीं?प्रतीक बोला- जी आंटी, समझाऊंगा मैं उसे … अब चलता हूँ!
‘अरे अब आए ही हो तो खाना खाकर ही जाना. तब तक मैं दुकान में देख लेती हूँ.’प्रतीक ने हां बोला और वह अमन के रूम में जाने लगा.
फिर अमन और प्रतीक अपनी बातें करने लगे.अब अमन की तबीयत थोड़ी ठीक थी इसलिए उसने जल्दी खाना खा लिया था.
यह जानकर प्रतीक मन ही मन खुश हो रहा था कि उसे नीलिमा के साथ खाना खाने और कुछ वक्त गुजारने को मिलेगा.
उसने अमन को आराम करने को बोलकर वह दूसरे रूम में आकर टीवी देखने लगा.
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अगले एक घंटे में नीलिमा दुकान से वापस आई.
उसके आते ही प्रतीक बोला- आंटी, मैं निकलता हूँ.नीलिमा ने उससे पूछा- तूने खाना खाया कि नहीं?
प्रतीक बोला- आंटी मुझे तब भूख नहीं थी, इसीलिए मैंने नहीं खाया.इस पर नीलिमा बोली- कोई बात नहीं चल हम दोनों साथ में खाते हैं.
फिर नीलिमा और प्रतीक खाना खाने बैठे.खाते-खाते दोनों बात करने लगे.प्रतीक बड़ी चाव से खाना खाते हुए नीलिमा को ताड़ रहा था.
नीलिमा का कसा हुआ बदन देख कर प्रतीक की वासना भड़कने लगी थी और उसका लंड खड़ा होने लगा था.उस वक्त नीलिमा ने गहरे गले वाला कुर्ता पहना हुआ था तो झुकने की वजह से उसके गोरे गोरे दूध प्रतीक की वासना को बढ़ाने का काम कर रहे थे.
इधर मैं आपको अमन की माँ नीलिमा की बॉडी फिगर और खूबसूरती के बारे में बता देता हूँ.नीलिमा के चूचे 34 इंच के थे, गांड 36 की और 30 की कमर कुछ ऐसी थी कि प्रतीक तो छोड़ो, यदि आप भी उसे नंगी देख लोगे … तो आपका लंड खड़ा होने में एक पल भी नहीं लगेगा.
अपने सामने अपने दोस्त की सेक्सी मम्मी को देख-देखकर प्रतीक का लंड खड़ा होने लगा.
अगले ही पल नीलिमा ने पूछा- तुझे कुछ चाहिए? क्योंकि मेरा तो होने को है!
जैसे ही ये बोला, ध्यान से देख रहा प्रतीक सीधा खड़ा हो गया और अपने लंड को एडजस्ट करने लगा.
ये सब नीलिमा ने देख लिया था लेकिन उसने कुछ नहीं बोला.वह बस उसकी पैंट की तरफ एक सरसरी नजर डालकर हाथ धोने चली गई और जल्द ही वापस भी आने लगी.
नीलिमा प्रतीक से बात करने लगी.बातों-बातों में उसने बताया कि अगले हफ्ते में अमन की बुआ की लड़की की शादी है और उसे मेरी तरफ से अच्छी गिफ्ट चाहिए.साथ ही बताया कि आजकल दुकान भी ज्यादा अच्छा नहीं चल रही तो पैसे की बड़ी समस्या हो रही है!
ये प्रतीक के लिए अच्छा मौका बनता दिखा नीलिमा के और पास जाने का.
उसने पूछा- क्या गिफ्ट देने का सोच रही हो आप?नीलिमा बोली- मैंने उसे प्रॉमिस किया था कि सोने की चैन गिफ्ट करूँगी, लेकिन मेरे पास पैसे की कमी है. इस साल अमन के कॉलेज की फीस भरने में ही सारे पैसे चले गए.
प्रतीक ने बातों-बातों में बोल दिया- आंटी मैं पापा से बात करूंगा!नीलिमा ने पहले तो कहा- नहीं नहीं उनसे बात मत करना.
प्रतीक ने कहा- अरे आंटी, सोने की चैन की जरूरत अभी है तो आप ले लीजिए, बाद में पैसे चुका देना न! पापा तो अपनी दुकान में उधार बेचते ही हैं. आप तो वैसे भी मेरी खास हो न!नीलिमा चुप हो गई.
इस तरह प्रतीक ने नीलिमा को भरोसे में ले लिया और घर के लिए निकल गया.
घर जाकर प्रतीक ने अपने पिता से सोने की चैन के लिए बात की और वह बात मनवा ली.उसके पिता ने भी कहा कि कल अमन की माँ को दुकान पर आने को बोल दे.
प्रतीक काफी खुश दिख रहा था.उसने आज रात फिर से उस ब्रा-पैंटी को अपने लंड में लगाकर नीलिमा को याद करते हुए मुठ मारी और सो गया.
अगले दिन वह अमन के घर आया और अमन को आवाज देने लगा.अमन ने कहा- हां, बस दस मिनट रुक, अभी आया!
फिर प्रतीक नीलिमा के पास गया.नीलिमा किचन में बर्तन धो रही थी.उसकी कमीज से उसके 34 के चूचों की गहराई साफ दिख रही थी.
प्रतीक ने एक बार देखा और आवाज दी- आंटी, पापा ने आपको दुकान पर बुलाया है सोने की चैन के लिए!नीलिमा काफी खुश दिखी और बोली- हां शाम को तेरे साथ ही चलूंगी.
इतने में अमन आया और पूछा- कहां जाने की बात हो रही है?नीलिमा बोली- प्रतीक के पापा की शॉप पर जाना है, तेरी बुआ की लड़की के लिए सोने की चैन लाने. इसीलिए कह रही थी कि शाम में कॉलेज से आने के बाद तुम्हारे साथ ही चलूंगी.
फिर अमन और प्रतीक कॉलेज चले गए.
कॉलेज के बीच अंतराल में प्रतीक को क्या सूझी, पता नहीं, वह कहीं चला गया था.उसके दिमाग में नीलिमा को चोदने का भूत सवार था इसलिए वह अपनी योजना बनाने में लग गया.
उसके मन में आया कि अगर मैं सोने की चैन ऐसे ही दिला दूंगा तो मेरा चोदने का सपना सपना ही रह जाएगा.इसलिए उसने एक योजना बनाई.उस योजना के अनुसार वह नीलिमा के सामने अपनी वासना को प्रकट कर देना चाहता था.
उसने नीलिमा के लिए एक ब्रा और पैंटी का सैट ले लिया जो खासा महंगा था.
अब वह कॉलेज खत्म करके अमन के साथ उसके घर आया.कुछ देर रुकने के बाद उसने नीलिमा को देखा.
वाह क्या लग रही थी.नीलिमा लाल सलवार-कमीज में माल लग रही थी. सलवार-कमीज एकदम चुस्त था तो उसके बदन को एकदम चिपक सा गया था.कमीज में से नीलिमा के उठे हुए चूचे प्रतीक को मदहोश करने लगे थे और उसका लंड सख्त हो गया था.
यह नीलिमा ने देख लिया था.वह समझ गई थी कि प्रतीक उसकी चूचियों को वासना से देख रहा है.शायद नीलिमा के मन में भी उसकी दबी हुई वासना ने सर उठा लिया था.
प्रतीक जवान था तो नीलिमा के मन में कहीं न कहीं सेक्स जोर मारने लगा था.कई वर्ष से उसकी चुत ने लंड का स्वाद नहीं चखा था.
उधर अपने फूले हुए लौड़े को छुपाने की कोशिश में प्रतीक नाकाम रहा.तभी नीलिमा की आवाज सुनकर वह गाड़ी की तरफ चल दिया.
नीलिमा के बाइक पर बैठते ही प्रतीक ने कहा- आंटी, आप मुझे कंधे से पकड़ लेना, रास्ते में गड्ढे हैं न!उसी पल नीलिमा को समझ में आ गया था कि उसे क्या करना है.
दोस्तो, इस सेक्स कहानी के अगले भाग में आपको दोस्त की मम्मी की चुदाई की कहानी का मजा पढ़ने को मिलेगा.
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