राजीव खन्ना
सत्यापित कहानीकार (Verified)@rajava-khanana
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
राजीव खन्ना की रचनाएं
वो चौदह दिन- 3
टू डिक्स फॉर वन पुसी स्टोरी में मेरे पति मुझे वीडियो कॉल पर अपनी रंगरेलियां दिखा रहे थे. उनकी कुलीग उनके बिस्तर पर थी और साथ में एक यूरोपियन आदमी भी था.
वो चौदह दिन- 1
माय हसबंड फकिंग अदर गर्ल स्टोरी में मेरे पति 2 सप्ताह के लिए टूर पर गए. साथ में उनकी जवान सेक्सी कुलीग भी थी जो उनका बिस्तर गर्म रखने वाली थी.
ससुराल में बीवी और उसकी भानजी संग- 2
यह लाइव फैमिली सेक्स कहानी मेरी बीवी की जुदाई की है. हम दोनों सेक्स कर रहे थे तो दरवाजे से मेरी साली बेटी हमारी कामलीला देख रही थी. तो मैंने क्या किया?
वो तोहफा प्यारा सा -3
श्वेता में सबसे बड़ा परिवर्तन यह आया कि अपने शरीर के कुछ अंगों पर उसने कभी ध्यान नहीं दिया, क्योंकि वो हमेशा अधोवस्त्रों से ढके रहते थे, पर अब वो अपने शरीर के एक एक अंग का ख्याल रखती, हर अंग को संवारती, निखारती।
वो तोहफा प्यारा सा -2
अगली सुबह से ही मैंने रोहन की उस फेसबुक आईडी पर निगाह रखना शुरू कर दिया।
वो तोहफा प्यारा सा -1
मित्रो, अन्य कहानियों की तरह मेरी पिछली कहानी को भी पसन्द करने के लिये मैं अपने प्रिय पाठकों को हृदय से आभारी हूँ।हालांकि व्यस्तता बहुत अधिक रही, फिर भी कुछ न कुछ समय निकालकर मैंने सभी मेल का जवाब भी दिया।आगे भी यही प्रयास रहेगा कि आपके लिये रोचक...
मुझे जीना सिखा दिया-1
यूँ तो कहानी लिखना कोई नई बात नहीं है पर यह कहानी मेरे लिये सबसे खास है क्योंकि अब से पहले जब भी मैंने कहानी लिखी वो मेरी कहानी, मेरी सोच, मेरे विचार थे। पर इस कहानी को लिखने की प्रेरणा मुझे मेरी पत्नी ने दी, विषय भी शशि का, विचार भी शशि का ओर स...
तेरा साथ है कितना प्यारा-7
‘व्व्वो मैं क््क्कु…छ…नहींईईइ…’ बस इतना ही फूटा मुकुल के मुंह से…मैं हंसने लगी।
तेरा साथ है कितना प्यारा-4
अपनी योनि को अच्छी तरह धोने के बाद मैं वापस अपने कमरे में आई तो देखा आशीष अपना नाईट सूट पहनकर टीवी देखने लगे।
तेरा साथ है कितना प्यारा-3
आशीष ने मुझे पीछे घुमाकर मेरी ब्रा का हुक कब खोला मुझे तो पता भी नहीं चला। मेरे शरीर के ऊपरी हिस्से से ब्रा के रूप में अंतिम वस्त्र भी हट गया, मेरे दोनों अमृतकलश आशीष के हाथों में थे, आशीष उनको अपने हाथों में भरने का प्रयास करने लगे।
तेरा साथ है कितना प्यारा-2
पिताजी बोले- बेटा, फैक्ट्री में ज्यादा काम की वजह से तुम दोनों हनीमून के लिये नहीं गये। यह बात मेरी समझ में आती है पर कम से कम एक दिन को बहु को कहीं बाहर घुमा लाओ।
तेरा साथ है कितना प्यारा-1
आज से मेरे बेटे का नाम करण पड़ गया। कई दिनों से नामकरण संस्कार की तैयारियों में पूरा परिवार व्यस्त था। किसी के पास सांस लेने भर की फुर्सत नहीं थी। परन्तु अब सभी कुछ आराम करना चाहते थे।