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जिस्मानी रिश्तों की चाह-67

जूजाजी

04 Feb 2021 को प्रकाशित

जिस्मानी रिश्तों की चाह-67
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फरहान और मैं कमरे में आपी के इन्तजार में ब्लू-फिल्म देख रहे थे।

आपी आई, रूम लॉक किया और आते ही मेरे साथ चूमा चाटी करनी शुरू कर दी।

मैंने आपी को रोका नहीं क्योंकि आपी ने फिर रोना शुरू कर देना था इसलिए मैंने आपी को किस करते हुए ही अपनी बांहों में भरा.. और उठा कर बिस्तर पर ले गया।

बिस्तर पर बैठा कर मैंने आपी के कपड़े उतारे और अपने कपड़े उतार के फरहान को इशारा किया कि कपड़े उतार के आ जाओ।मैंने आपी को लेटा दिया और खुद आपी के ऊपर लेट गया।

अब मैं आपी को किस करने लगा।किस करते-करते मैं आपी के मम्मों पर आ गया और आपी के मम्मों को चूसने लगा, उनके निप्पलों पर दांतों से काटने लगा।तो आपी ने मेरी कमर में नाख़ून मारे और कहा- दर्द देते हो मुझे.. ये लो..

उन्होंने मेरी कमर में नाख़ून मार दिए..तो मैंने अपने मुँह उठा कर आपी को देखा और नीचे को होता हुआ आपी की चूत पर आ गया।

फरहान खड़े हुए लण्ड को हाथ में लिए ये सब देख रहा था।तभी आपी ने उसे इशारा किया कि फरहान आओ।वो आ कर आपी के मुँह पर बैठ गया तो आपी उसका लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगीं।

फरहान ने एक दफ़ा बड़े मज़े से ‘आहहह.. आअहह..’ किया और आँखें बंद करके आपी के लण्ड चूसने का मज़ा लेने लगा।

मैंने नीचे पहुँच कर आपी की चूत पर मुँह रखा और ज़ुबान अन्दर डाल दी।तभी आपी ने आह भरी ‘आआहहह.. सगीर और अन्दर करो.. आआहह..’

अब आपी अपनी चूत को चुसवाते हुए फरहान के लण्ड को मुँह में लेकर चूसने लगीं, साथ-साथ उनके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं.. जो आपी के मुँह में लण्ड होने के कारण दब जाती थीं।

मैंने कुछ मिनट आपी की चूत को चूसा और फरहान को कहा- ओए.. अब उस चीज़ का मज़ा लो.. जो सबसे ज्यादा हसीन है.. अपनी इस बहन की..

फरहान समझ गया और उठ कर आपी की टांगों के दरमियान आया और अपना लण्ड हाथ में पकड़ लिया।

उसने मेरी तरफ देखा।मैंने उससे कहा- डालो।

तो उसने आपी के ऊपर झुक कर लण्ड को एक हाथ से आपी की चूत में पुश किया.. तो लण्ड की टोपी आपी की चूत में चली गई।

तभी आपी की मादक सिसकारी निकली ‘आहाहह..’ और आपी ने मुझे अपने ऊपर आने को कहा।

उन्होंने किसिंग स्टार्ट कर दी.. तो मैं भी आपी को किस करने लगा।

तभी फरहान ने ज़ोर का धक्का मारा तो आपी की चीख निकल गई।‘आआअहह.. कमीने इंसान.. धीरे कर..’ वो मुझसे कहने लगीं- मैं इसी लिए इसके करीब नहीं आती हूँ.. ये बस मज़ा लेता है.. देता नहीं है.. इसको ज़रा भी नहीं लगता कि मेरी बहन को दर्द होगा.. बस जोर लगाने में लगा हुआ है।

मैंने आपी से कहा- चलो कोई बात नहीं.. अब वो आराम से करेगा।मैंने उससे कहा- अब धीरे से अन्दर-बाहर करो।

उसने कमर को हिला-हिला कर लण्ड को आगे-पीछे करना स्टार्ट कर दिया.. तो आपी ने मादक सिसकारियाँ लेना चालू कर दीं।कोई 5 मिनट के धक्कों के बाद ही फरहान आपी की चूत में झड़ गया.. तो आपी ने उससे कहा- निकालना मत.. मैं झड़ने वाली हूँ।

पर फरहान पानी छोड़ चुका था.. उसने आपी की चूत से लण्ड निकाल लिया और साइड में लेट गया।

मैंने आपी से कहा- आपी कितनी स्पीड से चोदूँ?तो आपी ने कहा- सगीर थोड़ा सा तेज़ करो.. मैं बस झड़ने वाली हूँ।

मैंने कमर की स्पीड तेज़ की और मेरे 5 या 6 धक्कों के बाद ही आपी ने मुझे धक्का दे कर रोका और तेज़ी से कहा- आआहह.. सगीर मैं गई..

आपी की चूत से एक धार की तरह पानी निकला और बेड पर गिरने लगा। मैंने देखा तो उठ कर आपी की चूत के सामने आ गया और अपना मुँह खोल लिया।

तभी आपी ने एक और धार छोड़ी जो सीधे मेरे मुँह में गई और मैं आपी के नमकीन पानी को पीता चला गया।

कुछ पल बाद मैं आपी के ऊपर लेट गया.. तो आपी ने कहा- सगीर तुमने क्यों पिया.. वो इतना सारा था.. थोड़े की तो चलो खैर होती है ना..मैंने कहा- आपी ये आपके अन्दर से निकला था ना.. तो मैं आपके साथ कैसे दगा करूँ.. जब मैं आपको प्यार करता हूँ.. तो मैं आपकी हर चीज़ खा-पी जाऊँगा।

इसी के साथ ही मैं आपी को किस करने लगा और एक हाथ से लण्ड आपी की चूत में फिर से पेल दिया और आपी के ऊपर ही लेट कर धक्के लगाने लगा।

मैंने आपी को भरपूर चोदा और हम दोनों एक साथ ही झड़े, फिर एक-दूसरे को किस करने लगे।

कोई बीस मिनट बाद मैंने फरहान को देखा जो कि अब लण्ड खड़ा कर चुका था।मैंने उससे कहा- अब डालो आपी की चूत में.. और ठीक से चोदना.. उनको दर्द ना हो..

उसने कहा- ठीक है अब आराम से करूँगा।अब और वो आपी की चूत में लण्ड डाल कर आपी को बड़े आराम से चोदने लगा।आपी ने कहा- हाँ फरहान ऐसे ही..वो आपी को चोदने लगा.. तो मैंने अपना लण्ड आपी के मुँह में डाल दिया और आपी से कहा- चूसो..

आपी लण्ड चूसने लगीं और साथ ही मजे में कराहने लगीं ‘आआहह.. आआहह.. उफ्फ़..’

आपी ये सब इतने जोश में कर रही थीं कि कुछ ही मिनट बाद ही आपी की चूत ने फिर से पानी छोड़ दिया और फरहान ने भी आपी की चूत में ही अपनी छोड़ दिया।

वो आपी की टांगों में ही गिर गया.. तो आपी ने कहा- सगीर अब बस करें.. टाइम काफ़ी हो गया है।

तो मैंने कहा- आपी यार एक दफ़ा बस वो काम कर लें जहाँ शीशे के आगे जा कर कभी हम लण्ड चूत में डाले बिना ही करते थे और ऐसे लगता था कि लण्ड अन्दर है। पर आज अन्दर डाल कर करेंगे.. फिर उसके बाद आप चली जाना।आपी ने कहा- ठीक है चलो।

मैंने शीशे के आगे जा कर आपी को घोड़ी बना कर आपी की चूत में लण्ड डाला और आपी को धक्के लगाने लगा और शीशे में देखने लगा। बिल्कुल फिल्म की तरह लगता था.. पूरा लण्ड अन्दर-बाहर हो रहा था।

मैंने आपी से कहा- आपी देखो तो सही, क्या मस्त सीन लग रहा है।आपी ने अपना मुँह शीशे की तरफ करके देखा तो कहने लगीं- आह्ह.. हाँ सगीर बिल्कुल फिल्म लग रही है.. तुम एक मिनट धक्के लगाना रोको..

मैं रुक गया.. तो आपी ने खुद अपनी गांड को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।कोई 5 मिनट ऐसे करने के बाद मैंने आपी से कहा- चलो आपी अब आप चली जाओ..आपी ने कहा- अब गरम करके ऐसे ही भेजोगे क्या?आपी से मैंने कहा- लो अभी ठंडा कर देता हूँ।

मैंने आपी की कमर को पकड़ा और धक्के लगाने लगा। आपी की सिसकारियाँ निकलीं- आहह.. आआहह.. सगीर थोड़ा सा ज़ोर से लगाना.. आआहह.. मैं झड़ने वाली हूँ आआहह..तब मैंने कहा- आपी बस समझो मैं भी गया।

मैंने अपने पूरे ज़ोर से आपी को तीन-चार धक्के मारे और आपी की चूत में झड़ने लगा। मेरे मुँह से तेज आवाज़ निकली ‘आआअहह..’ और मेरा पानी आपी की चूत में गिरने लगा।

पानी के गिरते ही आपी ने भी मादक आवाज खारिज की- आह्ह.. सगीर मैं भी गई..

आपी की चूत ने पानी छोड़ दिया और हम ज़मीन पर गिर गए।मैं इसी तरह 5 मिनट आपी के ऊपर पड़ा रहा।

फिर आपी ने मुझसे कहा- उठो अब.. मैं जाऊँ।उन्होंने उठ कर अपने कपड़े पहने.. मुझे भी पहनाए और नीचे चली गईं।

मैंने भी कमरे को बंद किया और बिस्तर पर देखा तो फरहान वहीं पड़ा हुआ सो चुका था। मैं भी बिस्तर पर गिरते ही सो गया।

सुबह आँख खुली तो कॉलेज जाने का टाइम हो रहा था।मैं फ्रेश होकर नीचे गया तो फरहान और आपी नाश्ता कर रहे थे। मैंने भी उनके साथ बैठ के नाश्ता किया और अपने कॉलेज के लिए निकल गया।

जल्दी में होने की वजह से आपी से कोई बात नहीं हो सकी.. आपी भी यूनिवर्सिटी चली गईं।

वापसी पर मुझे दुकान पर भी जाना था इसलिए दिल को तसल्ली दे कर आराम से बैठा दिया कि जो भी होगा.. अब रात को ही होगा।सारा दिन कॉलेज की पढ़ाई और दुकान के काम में निकाला और रात को 8 बजे घर पहुँचा तो सब अपने-अपने कामों में मगन थे।मैं कमरे में गया और नहा कर नीचे आ कर टीवी देखने लगा।

कुछ देर बाद ही अब्बू भी आ गए और सीधा अपने कमरे में चले गए।फरहान और हनी भी मेरे पास आकर टीवी देखने लग गए।

मैं आपी का वेट कर रहा था.. पर वो अभी भी किचन के काम में ही लगी हुईं थीं। इसी के साथ मैं यह सोच रहा था कि ऐसा कौन सा बहाना बनाऊँ कि आपी को रात को ऊपर रहने की इजाज़त मिल जाए।

मैं अभी सोच ही रहा था कि पापा अपने कमरे से निकले और सीधा मेरे पास आकर बैठ गए।मैंने सलाम किया और कुछ देर दुकान की बातें करता रहा..

फिर मैंने फरहान की पढ़ाई की बात छेड़ी कि इसे एक्स्ट्रा टाइम की ज़रूरत है।

पहले तो अब्बू चुप रहे फिर वही बोले जो मैं चाहता था।अब्बू ने फरहान से पूछा कि क्या ऐसी बात है.. तो उसने एक नज़र गुस्से से मुझे देखा और फिर ‘हाँ’ में सर हिला दिया।उसके बाद पापा ने सेम वैसे ही किया.. जो मैंने सोचा था।

अब्बू ने आपी को आवाज़ दी और बाहर बुला कर कहा- अब से तुम रात को फरहान को पढ़ाया करोगी.. जितनी देर इसका काम कवर नहीं हो जाता और ये रात को तुम्हारे पास ही सोएगा।

अब्बू के मुँह से यह सुनते ही मैंने सोचा कि यह तो काम खराब हो गया है.. पर मैंने अब्बू से कहा- ऐसे तो ये हनी को तंग करेगा.. मैं भी तो रात को पढ़ता हूँ.. आप आपी को इजाज़त दे दो कि ऊपर जा कर पढ़ा दिया करेंगी और वहीं सो जाया करेंगी.. इससे मेरी भी पढ़ाई में हेल्प हो जाया करेगी।

तो अब्बू बोले- हाँ ये भी ठीक है.. आज से तुम ऊपर एक कमरे में सोया करना और इसका काम ध्यान से कवर करवाओ।

यह सुनते ही मैं खुशी से दिल ही दिल में उछल पड़ा और आपी को आँख मारी.. तो आपी ने मुझे गुस्से से आँखें निकाल कर देखा और किचन में चली गईं।

अब मुझे दूसरा काम जो करना था कि हनी को भी अपने साथ मिलाना था।

मैं इस तरकीब में लग गया कि हनी को किस तरह गर्म करूँ.. एक बार वो गर्म हो जाए.. तो उसको शीशे में उतारना आसान हो सकता है।

अभी मैं यही सोच रहा था कि हनी ने मुझसे पूछा- भाईजान मुझे आपके कंप्यूटर पर शाम को दस मिनट का काम करना है.. क्या मैं कर सकती हूँ?मैंने जवाब दिया- हाँ कर लेना, मुझे कोई दिक्कत नहीं है।

उसके इस सवाल ने मेरे दिमाग की बत्ती जला दी। मैं अपने कमरे में गया और कम्प्यूटर पर एक ट्रिपल एक्स मूवी लगा आया और एक बुक ले कर नीचे आ गया।

मुझे हनी की चूत बेसब्र किए थी।

कमेंट्स जरूर भेजिएगा।

वाकिया जारी है।support@mohakkisse.com

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जिस्मानी रिश्तों की चाह

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भाग 7
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भाग 9
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भाग 10
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भाग 11
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भाग 12
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भाग 13
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