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जिस्मानी रिश्तों की चाह -58

जूजाजी

30 Dec 2020 को प्रकाशित

जिस्मानी रिश्तों की चाह -58
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सम्पादक जूजा

मैं आपी की बात सुन कर उनकी चूत के दाने को अपने लबों में दबा कर चूसने लगा।मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे आपी की चूत के दाने से मीठे रस का चश्मा उबल रहा है.. जो मेरे मुँह में शहद घोलता जा रहा है।

आपी की चूत के दाने को चूसने की वजह से मेरी नाक.. चूत के बालों में उलझ सी गई और मुझे ऐसा महसूस होने लगा जैसे मेरी नाक अपनी आपी की चूत की खुश्बू को एक-एक बाल से चुन लेना चाहता हो।

मैं अपने इन्हीं अहसासात के साथ आपी की चूत को चाट और चूस रहा था कि एक आवाज़ बॉम्ब की तरह मेरी शामत से टकराई- रूहीयययययई…

अम्मी की आवाज़ सुनते ही मैं तड़फ कर पीछे हटा और अभी उठने भी नहीं पाया था कि किचन के दरवाज़े पर अम्मी खड़ी नज़र आईं।उन्होंने मुझे ज़मीन पर बैठे देखा तो हैरत से पूछा- यह क्या कर रहे हो सगीर?

मैंने अम्मी को देखे बिना ही रेफ्रिजरेटर के नीचे हाथ डाला और कुछ ढूँढने के अंदाज़ में हाथ फिराता हुआ बोला- कुछ नहीं.. अम्मी वो पानी पी रहा था.. तो हाथ में पकड़ा पेन नीचे गिर गया है.. वो ही देख रहा हूँ।

कह कर मैंने तिरछी नज़र से आपी को देखा तो वो उसी हालत में क़मीज़ दाँतों में दबाए.. पाजामा घुटनों तक उतारा हुआ और टाँगें थोड़ी सी खोले हुए.. बुत बनी खड़ी थीं।

अम्मी ने माथे पर हाथ मार कर कहा- या रब्बा.. ये लड़के भी ना.. इतनी क्या मुसीबत पड़ी है पेन की.. बाद में निकाल लेना था.. अभी अपने सारे कपड़े गंदे कर लिए हैं।

मैं दिल ही दिल में दुआ कर रहा था कि अम्मी अन्दर ना आ जाएँ। फिर मैंने हाथ रेफ्रिजरेटर के नीचे से निकाला और अपना बैग उठा कर खड़ा हो रहा था.. तो अम्मी बोलीं- रूही को तो नहीं देखा तुमने? पता नहीं कहाँ चली गई है?

‘नहीं अम्मी..! मैंने तो नहीं देखा.. जाना कहाँ हैं.. ऊपर स्टडी रूम में होंगी।’अम्मी ने सीढ़ियों की तरफ मुँह कर के तेज आवाज़ लगाई- रुहीययई..

फिर अपने कमरे की तरफ घूम कर बोलीं- सगीर जा बेटा ऊपर हो तो उसे मेरे पास भेज देना।बोल कर अम्मी धीमे क़दमों से मुड़ते हुए अपने कमरे की तरफ चल दीं।

एक क़दम पीछे होकर मैंने आपी को देखा.. उनका चेहरा खौफ से पीला पड़ा हुआ था। वो इतनी खौफजदा हो गई थीं कि उन्हें यह ख्याल भी नहीं रहा कि अपने दाँतों से फ्रॉक का दामन ही निकाल देतीं ताकि चूत ऐसी नंगी खुली न पड़ी रहती।

मैंने उनके साथ कोई शरारत करने का सोचा लेकिन फिर उनकी हालत के पेशेनज़र अपने ख़याल को खुद ही रद कर दिया और आगे बढ़ कर आपी का पजामा ऊपर करने के बाद उनके दाँतों से फ्रॉक का दामन भी खींच लिया।लेकिन उनकी हालत में कोई फ़र्क़ नहीं आया था।

आपी को कंधों से पकड़ कर आगे करके मैंने अपने सीने से लगाया और उन्हें बाँहों में भर लिया, फिर एक हाथ से उनकी क़मर और दूसरे हाथ से उनके गाल को सहलाते हुए कहा- आपी.. आपी.. अम्मी चली गई हैं.. कुछ भी नहीं हुआ.. सब ठीक है.. मेरी जान से प्यारी मेरी बहना कुछ भी नहीं हुआ..

मैं इसी तरह आपी की क़मर और गाल को सहलाते हुए उन्हें तसल्लियाँ देता रहा और कुछ देर बाद आपी पर छाया खौफ टूटा और वो सहमी हुई सी आवाज़ में बोलीं- सगीर, अगर अम्मी देख लेतीं तो?

‘आपी इतना मत सोचो यार.. देख लेतीं तो ना.. देखा तो नहीं है? जो इतनी परेशान हो रही हो.. बस अपना मूड ठीक करो.. याद करो कैसे कह रही थीं सगीर दाने को चूसो ना.. बोलो तो दोबारा चूसूँ ‘दाने’ को?’

मेरी बात सुन कर आपी ने मेरी क़मर पर मुक्का मारा और मुस्कुरा दीं, फिर मेरे सीने पर गाल रगड़ कर अपने चेहरे को मज़ीद दबाते हुए संजीदगी से बोलीं- सगीर कितना सुकून मिलता है तुम्हारे सीने से लग कर.. मैं कभी तुमसे अलग नहीं होना चाहती सगीर.. हम हमेशा साथ रहेंगे।

मैंने आपी को फिर से संजीदा होते देखा तो उनसे अलग होकर शरारत से कहा- अच्छा मलिका ए जज़्बात साहिबा.. सीरीयस होने की नहीं हो रही.. आपको भी अम्मी ने बुलाया है। मैं भी ऊपर जाता हूँ.. कुछ देर सोऊँगा।

फिर आपी के सीने के उभार को दबा कर शरारत से कहा- रात में जागना भी तो है ना.. अपनी बहना जी के साथ।आपी मेरी बात पर हल्का सा मुस्कुरा दीं।

मैं घूमा और जाने लगा तो आपी ने आवाज़ दी- सगीर!मैंने रुक कर पूछा- हूउऊउन्न्न?

आपी आगे बढ़ीं और आहिस्तगी से मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे और चूम कर कहा- बस अब जाओ.. रात में आऊँगी।मैंने आपी को मुहब्बत भरी नज़र से देखा और किचन से निकल गया।

मैं कमरे में आया.. तो फरहान कंप्यूटर के सामने बैठा था और ट्राउज़र से अपना लण्ड बाहर निकाले.. पॉर्न मूवी देखते हुए आहिस्ता आहिस्ता अपने लण्ड को सहला रहा था।

दरवाज़े की आहट पर उसने घूम कर एक नज़र मुझे देखा तो मैंने कहा- बस एग्जाम खत्म हुए हैं.. तो फिर शुरू हो गया ना इन्हीं चूत चकारियों में?‘भाई इतने दिन हो गए हैं.. मैं इन सब चीज़ों से दूर ही था.. आपी भी नहीं आती हैं.. अब कम से कम मूवी तो देखने दें ना..’

यह कह कर फरहान ने फिर से अपना रुख़ स्क्रीन की तरफ कर लिया।‘ओके देख लो मूवी.. लेकिन कंट्रोल करके रखना.. आपी अभी आएँगी।’

मेरी बात सुन कर वो खुशी से उछल पड़ा और मुझे देख कर बोला- सच भाईईइ.. अभी आएँगी आपी?मैंने मुस्कुरा कर उसकी तरफ देखा और ‘हाँ’ में गर्दन हिला दी और फरहान वैसे ही बैठे मूवी भूल कर गुमसुम सा हो गया.. या शायद यूँ कहना चाहिए कि आपी के ख्यालों में गुम हो गया।

मैंने कैमरा कवर से निकाला और रिकॉर्डिंग मोड को सिलेक्ट करते हुए कैमरा ड्रेसिंग टेबल पर रख कर उसका ज़ूम बिस्तर पर सैट कर दिया।अब सिर्फ़ रिकॉर्डिंग का बटन दबाने की देर थी कि हमारी मूवी बनना स्टार्ट हो जाती।

कैमरा सैट करके मैंने अल्मारी से अपना स्लीपिंग ट्राउज़र निकाला और चेंज करने लगा।

मैं अपने ट्राउज़र को पहन कर घूमा ही था कि कमरे का दरवाज़ा खुला और आपी अन्दर दाखिल हुईं।

आपी ने आज काली शनील का क़मीज़ सलवार पहन रखा था और सिर पर वाइट स्कार्फ बाँधा हुआ था।

कमरे में दाखिल होकर आपी ने दरवाज़ा बंद किया और घूमी ही थीं कि फरहान अपनी कुर्सी से उछाल कर भागते हुए गया और आपी के जिस्म से लिपट कर बोला- आपी.. मेरी प्यारी आपी.. आज मेरा बहुत दिल चाह रहा था कि आप हमारे पास आएँ.. और आप आ गईं।

और यह कह कर क़मीज़ के ऊपर से ही आपी के दोनों उभारों के दरमियान में अपना चेहरा दबाने लगा।

मैंने एक नज़र उन दोनों को देखा और कैमरे से उनको ज़ूम में लेकर रिकॉर्डिंग ऑन करके वहाँ साथ पड़ी कुर्सी पर ही बैठ गया।आपी ने अपने एक हाथ से फरहान की क़मर सहलाते हुए दूसरा हाथ फरहान के सिर की पुश्त पर रखा और अपने सीने में दबाते हुए कहा- उम्म्म्म.. फ़िक्र नहीं करो मेरे छोटू.. आज दिल भर के एंजाय कर लेना.. मैं यहाँ ही हूँ तुम्हारे पास..

फिर फरहान को अपने आपसे अलग करते हुए कहा- चलो उतारो अपने कपड़े।‘आपी आप ही उतार दें न.. भाई को तो पहनाती भी आप अपने हाथों से हैं.. लेकिन मुझे..’इतना बोल कर ही वो चुप हुआ और उसकी शक्ल ऐसी हो गई कि जैसे अभी रो देगा।

फरहान का बुझा सा चेहरा देख कर आपी ने उसकी ठोड़ी को अपनी हथेली में लिया और गाल को चूम कर कहा- ऐसी कोई बात नहीं मेरी जान.. तुम दोनों ही मेरे भाई हो और भाई होने के नाते जितना फिर मुझे सगीर से है.. उतने ही लाड़ले तुम भी हो।

यह कह कर आपी ने अपने दोनों हाथों से फरहान की शर्ट को पेट से पकड़ कर उठाते हुए कहा- चलो हाथ ऊपर उठाओ।

फरहान की शर्ट उतार कर आपी पंजों के बल नीचे बैठीं और फरहान के ट्राउज़र को साइड्स से पकड़ते हुए नीचे करने लगीं। फरहान का ट्राउज़र थोड़ा नीचे हुआ तो उसका खड़ा लण्ड एक झटका लेकर उछलते हुए बाहर निकला।

आपी ने फरहान के लण्ड को देखा और अपने हाथ में पकड़ कर सहलाते हुए बोलीं- वॉववओ.. मेरा छोटू तो आज बहुत ही कड़क हो रहा है।फरहान का लण्ड आपी के हाथ में आया तो वो तड़फ उठा और एक सिसकी लेकर बोला- आहह.. आपी मुँह में लो ना प्लीज़।

लण्ड छोड़ कर आपी ने ट्राउज़र को पकड़ा और नीचे करके फरहान के पाँव से निकाल दिया और फिर से फरहान का लण्ड हाथ में पकड़ कर खड़े होते हो बोलीं- अन्दर तो चलो ना.. यहाँ दरवाज़े पर ही सब कुछ करूँ क्या?और ऐसे ही फरहान के लण्ड को पकड़ कर उससे खींचते हुए बिस्तर की तरफ चलने लगीं।

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आपी हँसते हुए आगे-आगे चल रही थीं उनकी नज़र फरहान के लण्ड पर थी और फरहान एक तरह से घिसटता हुआ आपी के पीछे-पीछे चला जा रहा था।ऐसे ही आपी बिस्तर के पास आईं और फरहान के लण्ड को छोड़ कर दो क़दम पीछे हो कर अपनी क़मीज़ उतारने लगीं।

मेरे और उनके दरमियान तकरीबन 7-8 फीट का फासला था, मेरी तरफ आपी की क़मर थी और फरहान उनके सामने उनसे दो क़दम आगे खड़ा था।

आपी ने दाएं हाथ से क़मीज़ का सामने वाला दामन पकड़ा और बाएँ हाथ से क़मीज़ का पिछला हिस्सा पकड़ कर हाथों को मोड़ते हुए क़मीज़ उतारने लगीं।क़मीज़ ऊपर उठी तो मुझे उनकी ब्लैक शनील की सलवार में क़ैद खूबसूरत कूल्हे नज़र आए और अगले ही लम्हें आपी की क़मीज़ थोड़ा और ऊपर उठी और उनकी इंतिहाई चिकनी, साफ शफ़फ़ गुलाबी जिल्द नज़र आई.. जो क़मीज़ के ब्लैक होने की वजह से बहुत ही ज्यादा खिल रही थी।

आपी ने अपनी क़मर को थोड़ा सा खम दे कर क़मीज़ को मज़ीद ऊपर उठाया और अपने सिर से बाहर निकालते हो सोफे पर फेंक दिया।

जैसे ही आपी की क़मीज़ उनके सिर से निकली.. तो उनके बालों की मोटी सी चोटी किसी साँप की तरह बल खाते हुए नीचे आई और इधर-उधर झूलने के बाद उनके कूल्हों के दरमियान रुक गई।

आपी ने गहरे गुलाबी रंग की ब्रा पहन रखी थी.. जिसकी पट्टी टाइट होने की वजह से उनकी क़मर में धँसी हुई सी नज़र आ रही थी।ब्रा का रंग उनकी हल्की गुलाबी जिल्द से ऐसे मैच हो रहा था कि जैसे ये रंग बना ही आपी के जिस्म के लिए हो।

अपने दोनों कंधों से आपी ने बारी-बारी ब्रा के स्ट्रॅप्स को खींचा और अपने बाज़ू से निकाल कर बगल में ले आईं और ब्रा को घुमा कर कप्स को पीछे लाते हुए थोड़ा नीचे अपने पेट पर किया और सामने से ब्रा क्लिप खोल कर ब्रा को भी सोफे की तरफ उछाल दिया।

अपने दोनों अंगूठे आपी ने अपनी सलवार में फँसाए और थोड़ा सा झुकते हुए सलवार नीचे की और बारी-बारी दोनों टाँगें सलवार में से निकाल कर अपने हाथ कमर पर रखे और सीधी खड़ी हो कर फरहान को देखने लगीं।

आपी की कमर पतली होने की वजह से इस वक़्त उनका जिस्म बिल्कुल कोकाकोला की बोतल से मुशबाह था।सुराहीदार लंबी गर्दन.. सीना भी गोलाई लिए थोड़ा साइड्स पर निकला हुआ.. पतली खंडार क़मर.. और फिर खूबसूरत कूल्हे भी थोड़ा साइड्स पर निकले हुए..हर लिहाज़ से मुतनसीब और मुकम्मल जिस्म.. आह्ह..

फरहान की शक्ल किसी ऐसे बिल्ली के बच्चे जैसी हो रही थी कि जिसको उसकी माँ ने दूध पिलाने से मना कर दिया हो.. उसके मुँह से कोई आवाज़ भी नहीं निकल रही थी।

आपी ने चंद लम्हें ऐसे ही उसके चेहरे पर नज़र जमाए रखे और फिर फरहान की हालत पर तरस खाते हुए हँस पड़ीं और नीचे बैठने लगीं।अपने घुटनों और पंजों को ज़मीन पर टिकाते हुए आपी कुछ इस तरह बैठीं कि उनके कूल्हे पाँव की एड़ियों से दब कर मज़ीद चौड़े हो गए।

उन्होंने फरहान के लण्ड को अपने हाथ में पकड़ा और उसकी पूरी लंबाई को अपनी ज़ुबान से चाटने लगीं।फरहान के मुँह से बेसाख्ता ही एक ‘आहह..’ खारिज हुई और वो बोला- अहह.. आपीयईई.. आपी पूरा मुँह में लें ना..

आपी ने मुस्कुरा कर उसकी बेताबी को देखा और कहा- सबर तो करो ना.. अभी तो शुरू किया है।यह कह कर आपी ने फरहान के लण्ड की नोक पर अपनी ज़ुबान की नोक से मसाज सा किया और फिर लण्ड की टोपी को अपने मुँह में ले लिया।

‘आह्ह.. आअप्पीईईई ईईई पूरा मुँह में लो ना.. उस दिन भी आपने दिल से नहीं चूसा था..’

आपी ने उसके लण्ड को मुँह से निकाल कर एक गहरी नज़र उसके चेहरे पर डाली और फिर बिना कुछ बोले दोबारा लण्ड को मुँह में लेकर अन्दर-बाहर करने लगीं और 5-6 बार अन्दर-बाहर करने के बाद ही लण्ड पूरा जड़ तक आपी के मुँह में जाने लगा।

फरहान का जिस्म काँपने लगा था.. वो सिसकती आवाज़ में बोला- आपी मुझसे खड़ा नहीं हुआ जा रहा..आपी ने लण्ड मुँह से निकाला और कहा- ओके नीचे लेट जाओ।

फरहान एक क़दम पीछे हटा और ज़मीन पर लेट कर अपनी दोनों टाँगों को थोड़ा खोलते हुए आपी के इर्द-गिर्द फैला लिया।

इस तरह लेटने से आपी फ़रहान की टाँगों के दरमियान आ गई थीं। इसी तरह घुटनों और पाँव की ऊँगलियों को ज़मीन पर टिकाए हो आपी आगे की तरफ झुकाईं.. जिससे उनकी गाण्ड ऊपर को उठ गई.. और वे फरहान के लण्ड को चूसने लगीं।

मैं आपी के पीछे था.. जब आपी इस तरह से झुकीं तो उनके कूल्हे थोड़े से खुल गए और आपी की गाण्ड का खूबसूरत.. डार्क ब्राउन.. झुर्रियों भरा सुराख.. और उनकी छोटी सी गुलाबी चूत की लकीर मुझे साफ नज़र आने लगी।

मैंने मेज से कैमरा उठाया और पहले आपी की गाण्ड के सुराख को ज़ूम करता हुआ रिकॉर्ड किया और फिर कैमरा थोड़ा नीचे ले जाते हो चूत के लबों को ज़ूम किया।आपी की चूत के लब आपस में ऐसे चिपके हुए थे कि अन्दर का हिस्सा बिल्कुल ही नज़र नहीं आ रहा था और बस दो उभरे हुए से लबों के दरमियान एक बारीक सी लकीर बन गई थी।

मैंने कैमरा टेबल पर सैट करके रखा और आपी के दोनों ग्लोरी होल्स पर नज़र जमाए हुए अपने एक हाथ से लण्ड को सहलाते दूसरे हाथ से अपना ट्राउज़र उतारने लगा।

ट्राउज़र उतार कर मैं कुछ देर वहीं खड़ा आपी के प्यारे से कूल्हों और उनके दरमियान के हसीन नज़ारे को देखते हुए अपने लण्ड को सहलाता रहा और फिर ट्रांस की कैफियत में आपी की तरफ क़दम बढ़ा दिए।

मैं आगे बढ़ा और आपी के पीछे उन्हीं के अंदाज़ में बैठ कर चूत के पास अपना मुँह लाया और आपी की चूत से उठती मदहोश कर देने वाली महक को एक लंबी सांस के ज़रिए अपने अन्दर उतारा, फिर अपनी ज़ुबान निकाली और चूत पर रख दी।

मेरी ज़ुबान को अपनी चूत पर महसूस करके आपी के जिस्म को एक झटका लगा और उन्होंने फरहान के लण्ड को मुँह से निकाले बिना ही एक सिसकी भरी और उनके चूसने के अंदाज़ में शिद्दत आ गई।

मैं कुछ देर ऐसे ही आपी की चूत की मुकम्मल लंबाई को चाटता और उनकी चूत के दाने को चूसता रहा। तो आपी ने फरहान का लण्ड मुँह से निकाला और मज़े से डूबी आवाज़ में कहा- आह सगीर.. पीछे वाला सुराख भी चाटो नाआ..

आपी की ख्वाहिश के मुताबिक़ मैंने उनकी गाण्ड के सुराख पर ज़ुबान रखी और उसी वक़्त उनकी चूत में अपनी एक उंगली भी डाल दी।आपी 2 सेकेंड को रुकीं और कुछ कहे बगैर फिर से अपना काम करने लगीं।

मैंने आपी की गाण्ड के सुराख को चाटा और उससे सही तरह अपनी थूक से गीला करने के बाद मैंने अपने दूसरे हाथ का अंगूठा आपी की गाण्ड के सुराख में उतार दिया और अपने दोनों हाथों को हरकत दे कर अन्दर-बाहर करने लगा।

मेरा लण्ड शाम से ही बेक़रार हो रहा था और अब मेरी बर्दाश्त जवाब दे चुकी थी। मैंने अपना अंगूठा आपी के पिछले सुराख में ही रहने दिया और चूत से ऊँगली निकाल कर अपना लण्ड पकड़ा और अपने लण्ड की नोक आपी की चूत से लगा दी।

आपी ने इससे महसूस कर लिया और फ़ौरन अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठाते हुए चूत को नीचे की तरफ दबा दिया और गर्दन घुमा कर कहा- सगीर क्या कर रहे हो तुम.. अन्दर डालने की कोशिश का सोचना भी नहीं।

मैंने तकरीबन गिड़गिड़ाते हुए कहा- प्लीज़ बहना.. आपको इस पोजीशन में देख कर दिमाग बिल्कुल गरम हो गया है.. अब बर्दाश्त नहीं होता ना.. और आपी इतना कुछ तो हम कर ही चुके हैं.. अब अगर अन्दर भी डाल दूँ तो क्या फ़र्क़ पड़ता है।

‘बहुत फ़र्क़ पड़ता है इससे सगीर.. अगर तुम से कंट्रोल नहीं हो रहा.. तो मैं चली जाती हूँ कमरे से..’

आपी के मुँह से जाने की बात सुन कर फरहान उछल पड़ा.. वो अपने लण्ड पर आपी के मुँह की गर्मी को किसी क़ीमत पर खोना नहीं चाहता था।

वो फ़ौरन बोला- नहीं आपी प्लीज़ आप जाना नहीं.. भाई प्लीज़ आप कंट्रोल करो ना.. अपने आप पर..

मैंने बारी-बारी आपी और फरहान के चेहरे पर नज़र डाली और शिकस्तखुदा लहजे में कहा- ओके ओके बाबा.. अन्दर नहीं डालूंगा.. लेकिन सिर्फ़ ऊपर-ऊपर रगड़ तो लूँ ना..आपी के चेहरे पर अभी भी फ़िक्र मंदी के आसार नज़र आ रहे थे- क्या मतलब.. अन्दर रगड़ोगे?

मैंने आपी के कूल्हों को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर उठाते हुए कहा- अरे बाबा नहीं डाल रहा ना अन्दर.. अन्दर रगड़ने से मुराद है कि आपकी चूत के लबों को थोड़ा खोल कर अन्दर नरम गुलाबी हिस्से पर अपना लण्ड रगडूँगा।

आपी अभी भी मुतमइन नज़र नहीं आ रही थीं।खवातीन और हजरात, यह कहानी एक पाकिस्तानी लड़के सगीर की जुबानी है.. इसमें बहुत ही रूमानियत से भरे हुए वाकियात हैं.. आपसे गुजारिश है कि अपने ख्याल कहानी के आखिर में जरूर लिखें।

वाकिया मुसलसल जारी है।support@mohakkisse.com

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श्रृंखला

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जिस्मानी रिश्तों की चाह

कुल भाग: 72
भाग 1
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भाग 2
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भाग 3
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भाग 4
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भाग 5
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भाग 6
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भाग 7
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भाग 8
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भाग 9
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भाग 10
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भाग 11
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भाग 12
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भाग 13
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भाग 14
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भाग 15
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भाग 16
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भाग 17
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भाग 18
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भाग 19
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भाग 20
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भाग 21
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भाग 22
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भाग 23
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भाग 24
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भाग 25
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भाग 26
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भाग 27
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भाग 28
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भाग 29
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भाग 30
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भाग 31
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भाग 32
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भाग 33
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भाग 34
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भाग 35
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भाग 36
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भाग 37
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भाग 38
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भाग 39
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भाग 40
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भाग 41
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भाग 42
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भाग 43
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भाग 44
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भाग 45
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भाग 46
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भाग 47
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भाग 48
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भाग 49
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भाग 50
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भाग 51
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भाग 60
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भाग 61
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भाग 62
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भाग 63
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भाग 66
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भाग 67
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भाग 68
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भाग 70
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