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गे सेक्स स्टोरी पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 1,075 बार

जिस्मानी रिश्तों की चाह -6

जूजाजी

22 Jun 2020 को प्रकाशित

जिस्मानी रिश्तों की चाह -6
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सम्पादक जूजा

अब तक आपने पढ़ा..उसने एक ही झटके में अपने पूरे लण्ड को मेरी गाण्ड में उतार प्रिया..मैंने चिल्ला कर कहा- भैन्चोद.. किस बात की जल्दी है तुझे.. आराम से नहीं डाल सकता था!अब आगे..

वो डरी सहमी हुई सी आवाज़ में बोला- भाई सॉरी.. मुझे नहीं पता चला.. मैं इतना एग्ज़ाइटेड था कि कुछ समझ में ही नहीं आया..

मैंने अपनी गाण्ड में से उसके लण्ड को बाहर निकालना चाहा.. लेकिन ज़रा सी भी हरकत तक़लीफ़ में नक़ाबल-ए-बर्दाश्त इज़ाफ़ा कर रही थी.. तो मैंने फरहान से कहा- अभी इसी तरह रहना.. बिल्कुल भी मत हिलना..

वो कुछ देर रुका रहा.. फिर शायद उसे मेरी टेक्निक याद आ गई.. जो मैंने कल रात उस पर आज़माई थी.. वो अपना हाथ मेरे सामने की तरफ लाया और मेरे लण्ड को थाम कर अपने हाथ को आगे-पीछे करने लगा..बस 2-3 मिनट बाद ही मुझे हल्का-हल्का सुरूर आने लगा और मैंने फरहान से कहा- अब लण्ड अन्दर-बाहर करना शुरू करो.. लेकिन आहिस्ता-आहिस्ता..

उसने आहिस्ता-आहिस्ता अपने लण्ड को मेरी गाण्ड में अन्दर-बाहर करना शुरू कर प्रिया। जब उसका लण्ड मेरी गाण्ड की अंदरूनी दीवारों से रगड़ ख़ाता.. तो जलन तो होती थी.. लेकिन जलन के साथ ही मीठा-मीठा सा मज़ा भी आ रहा था।

कुछ देर बाद मैंने अपनी गाण्ड को उसके लण्ड के साथ ही हरकत देना शुरू कर दी।

जब उसका लण्ड मेरी गाण्ड की दीवारों से रगड़ खा के बाहर निकल रहा होता.. तो मैं भी आगे की तरफ हो जाता। जब उसका लण्ड मेरी गाण्ड की दीवार को चीरता हुआ अन्दर दाखिल होता.. तो मैं भी अपनी गाण्ड को पीछे की तरफ दबा देता।

यह एक अनोखा मज़ा था.. जो मैंने कभी नहीं सोचा था.. बल्कि मेरे ख़याल से इस मज़े को कोई सोच ही नहीं सकता.. जब तक कि उसकी गाण्ड की अंदरूनी दीवार से कोई चीज़ रगड़ ना खाए.. कोई नहीं जान सकता उस मज़े का अहसास।

मेरी हरकत के साथ-साथ ही फरहान ने भी अपनी स्पीड तेज कर दी थी और अब उसका लण्ड एक झटके की सूरत मेरे अन्दर दाखिल होता था और जड़ तक उतर जाता था। मेरे कूल्हों और उसकी जाँघों के टकराने से ‘थप्प्प-थप्प्प’ की आवाज़ पैदा होती थी.. जो मीनूर मोसिक़ी महसूस हो रही थी।इसी साथ-साथ वो मेरे लण्ड पर अपने हाथ की हरकत को भी भी तेज करता जा रहा था।

कुछ ही देर बाद हम दोनों के लण्ड ने पानी छोड़ प्रिया और हम वहाँ ही सीधे हो कर लेट गए।सांस बहाल होने के बाद मैंने फरहान से कहा- अब खुश हो तुम.. अब तो तुमने मुझे चोद लिया।वो हँस कर कहने लगा- जी भाईजान.. सगा भाई और वो भी बड़ा भाई हो.. तो उसको चोदने में मज़ा तो आएगा ही ना..

मैंने यह सुन कर उसे मारने के लिए हाथ उठाया तो वो हँसता हुआ बाथरूम में भाग गया।उसके निकलने से पहले ही मैंने फिर अपने आपको नींद की परी के सुपुर्द कर प्रिया।

उस दिन के बाद यह हमारा रुटीन बन गया, हम रोज़ रात सोने से पहले एक-दूसरे के लण्ड चूसते व चुदाई करते।फैमिली में सब हैरान थे कि हम दोनों में बहुत अंडरस्टैंडिंग हो गई है।

आज कल ना ही हम लड़ते हैं.. ना ही एक-दूसरे की कोई शिकायत अम्मी-अब्बू से लगाते हैं.. हमारी अम्मी अक्सर मेरी बहनों को नसीहत करते हुए कहने लगीं- शरम करो.. बजाए लड़ने झगड़ने के.. आपस में अपने भाईयों की तरह सुकून और अमन से रहो.. और हम अपनी अम्मी की इन बातों को सुन कर मुस्कुरा प्रिया करते थे।

अगले हफ़्ते.. फरहान अपने स्कूल एनुअल ड्रामा क्लब फंक्शन में था। वो सिर्फ़ लड़कों का स्कूल है.. और फरहान को ड्रामे में लड़की का रोल करना था.. तो उसने अपने चेहरे को लड़कियों की ड्रेसिंग के साथ मेकअप किया और साथ ही एक बड़े बालों की विग भी लगाई..उसके सब क्लास फैलो उस पर जुमले कस रहे थे और सीटियाँ बजा रहे थे.. क्योंकि वो वाक़यी एक बहुत सेक्सी सी लड़की लग रहा था। उसने नॉर्मल से हट कर ऐसा स्टफ यूज किया था।

उसके नक़ली मम्मे ऐसे लग रहे थे.. जैसे किसी ट्रिपल एक्स मूवी की हिरोइन यानि किसी पॉर्न स्टार के मम्मे हों।

बाहर हॉल में ड्रामा खत्म होने के बाद मैंने फरहान से कहा- अपना ये गर्ल वाला स्टफ अपने साथ घर ले आना।उसने कहा- भाई, यह बहुत मुश्क़िल है..मैंने उससे ज़िद करके कहा- यार कम से कम विग तो छुपा ले.. बाक़ी चीजें तो हमें घर से ही मिल जाएंगी।

फिर जब वो घर आया.. तो वो बहुत खुश था कि विग छुपा लाने में कामयाब हो गया था।

कुछ दिन बाद ही हमें ऐसा मौका मिला कि घर में सिर्फ़ हम दोनों ही थे। मैंने फरहान से कहा- आज ज़रा लड़की बनो यार..‘ओके..’

हम दोनों अपनी बहनों के कमरे में गए और उनके ड्रेस देखना स्टार्ट कर दिए। तमाम कॅबिनेट लॉक थे.. लेकिन कुछ देर की मेहनत से हमें एक क़मीज़ सलवार का सूट टेबल के पीछे पड़ा मिल गया.. जो शायद बेध्यानी में वहाँ पड़ा रह गया था.. जो यक़ीनन फरहान पर फिट आता।ओलिव कलर की कॉटन की क़मीज़ पर रेड फूल प्रिंट थे.. और सलवार भी कॉटन प्लेन ब्लैक कलर की थी।

फिर फरहान वॉशिंग मशीन में पड़े गंदे कपड़ों के ढेर से एक स्किन कलर की ब्रा भी निकाल लाया.. जो हमें नहीं पता किसकी थी। उस पर 38डी का टैग लगा था.. लेकिन सूट हमें पता था कि आपी का है।

ये चीजें लेकर हम कमरे में वापस आए।मैंने अपने कपड़े उतारे और बिस्तर पर लेट कर अपने लण्ड पर हाथ चलाने लगा।

जब फरहान कपड़े उतारने लगा.. तो मैंने कहा- यहाँ नहीं यार.. बाहर से तैयार हो कर आ..वो बाहर चला गया।

आज मैं बहुत उत्तेजित होकर अपने लण्ड को हिला रहा था और लड़के को चोदने से बोर हो चुका था।अब मेरा मन चुदाई के लिए एक लड़की की तलब कर रहा था और फरहान लड़की के रूप में मेरी कुछ ना कुछ संतुष्टि का सबब तो बन ही सकता था।

काफ़ी देर बाद जब फरहान कमरे में आया तो मैं उससे देख कर दंग रह गया।उसने ड्रेस चेंज करने के साथ-साथ हल्का सा मेकअप भी कर लिया था, वो बिल्कुल लड़की लग रहा था और एक खूबसूरत लड़की दिख रहा था।

उसे देखते ही मेरे जेहन में कुछ गड़बड़ सी हुई.. वो चेहरा मुझे कुछ जाना पहचाना सा लगा.. लेकिन ना मुझे याद आया और ना मैंने ज्यादा सोचा कि वो किस लड़की के चेहरे की तरह लग रहा है।

वो सेक्सी लड़की के तरह कैटवॉक करता हुआ अन्दर आ रहा था। मैं अपने आपको रोक ना सका और मैंने जाकर उससे अपनी बाँहों में भींच लिया।मैं किसी पागल आदमी के तरह उसके होंठों को चूमने और चूसने लगा।

करीब 5 मिनट किसिंग करने के बाद मैंने उसके नक़ली मम्मों को दबाना शुरू किया। लेकिन सच ये है.. कि मुझे उन्हें दबाने में बिल्कुल भी मज़ा नहीं आया।

अब हम दोनों आईने के सामने आ गए फरहान मेरी टाँगों के दरमियान बैठा और उसने मेरा लण्ड चूसना शुरू कर प्रिया।

मैं नहीं जानता क्यों.. लेकिन रियली आईने में खुद को और फरहान को देख कर मुझे बहुत लज़्ज़त महसूस हुई, देख कर ऐसा लग रहा था जैसे कोई लड़की मेरा लण्ड चूस रही है।

मैंने फरहान का चेहरा दोनों हाथों में थामा और उसके मुँह में तेजी से लण्ड अन्दर-बाहर करने लगा। फरहान रुका और लण्ड को मुँह से निकाल कर बोला- भाई पानी निकालते वक़्त ध्यान रखना रूही आपी की क़मीज़ पर कोई दाग धब्बा ना लग जाए।

मैंने उसकी बात को अनसुनी करते हुए दोबारा उसके चेहरे को लण्ड के सामने किया और उसके मुँह में फिर से अपना लण्ड डाल प्रिया। कुछ देर बाद ही मेरे लण्ड ने अपना सारा पानी फरहान के मुँह में उड़ेल प्रिया।

कुछ देर आराम करने के बाद मैंने फरहान को पुकारा- चल फरहान.. अब मेरे ऊपर आ जा.. और अपना चेहरा मेरी तरफ करके मेरे लण्ड के ऊपर बैठो और अपनी टाँगें मेरी कमर के इर्द-गिर्द कर लो..

फरहान ने एक लम्हा कुछ सोचा और फिर वो ही किया.. जो मैंने कहा था।फिर फरहान मेरे ऊपर आया.. मैंने लण्ड को अपने हाथ में पकड़ रखा था और सीधा कर रखा था।

फरहान ने एक हाथ से सलवार के होल को अपनी गाण्ड के सुराख से मैच किया और मेरे लण्ड की नोक पर अपने सुराख को टिका प्रिया और गाण्ड को मेरे लण्ड पर दबाने लगा।

मेरे लण्ड पर बैठते-बैठते उसने क़मीज़ के गले को सामने से खींच कर ज़रा नीचे कर प्रिया.. जिस से ब्रा का ऊपरी हिसा नज़र आने लगा।

मैंने ‘ये देखो तो…’ दिल ही दिल में अपने छोटे भाई की ज़हानत की दाद दी।

मेरा लण्ड जड़ तक फरहान की गाण्ड में दाखिल हो चुका था।मैंने उससे कहा- अपनी विग के बाल भी अपने चेहरे पर गिरा लो..

उसने ऐसे ही किया और मेरे सीने पर अपने हाथ टिका कर अपनी गाण्ड को ऊपर-नीचे करते हुए मेरे लण्ड को अपनी गाण्ड में अन्दर-बाहर करने लगा।

मैं भी इन्तेहाई मज़े के कारण नीचे से झटके लगाने लगा और मैंने अपना चेहरा मोड़ कर आईने में देखा.. तो अपना सीन आईने में इतना ज़बरदस्त और वंडरफुल लगा कि मैं फ़ौरन ही अपना कंट्रोल खो बैठा और मेरे लण्ड ने फरहान की गाण्ड में ही फुहार बरसाना शुरू कर दी।वो भी थक चुका था.. लेकिन डिसचार्ज होने के बावजूद भी मेरे लण्ड की सख्ती अभी काफ़ी हद तक कायम थी।

पाठकों से गुजारिश है कि अपने ख़्यालात कहानी के अंत में अवश्य लिखें।

यह वाकया जारी है।support@mohakkisse.com

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जिस्मानी रिश्तों की चाह

कुल भाग: 72
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भाग 4
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भाग 5
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भाग 6
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भाग 7
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भाग 9
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भाग 10
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भाग 11
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भाग 12
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भाग 13
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भाग 15
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भाग 16
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भाग 17
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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

राहुल सिंह 7

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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