मैंने फिर कहा- देखा गीता इस खेल का एक और फायदा… एक ही रूम में चारों एक ही बिस्तर पर सो सकते हैं।हमने बाहर के कमरे की लाइट बंद नहीं की और अंदर आकर लेट गए। इससे बाहर के कमरे से पर्याप्त रोशनी हमारे कमरे में आ रही थी जिससे हमें सब दिख रहा था और आँखों में चुभने वाली रोशनी भी नहीं थी।
नीलेश बड़ी खुली आवाज़ में गीता से बोला- आ जा तेरी चुदाई करूँ!गीता भी अब तक बेबाक हो चुकी थी, बोली- इतना खुल कर तो हम जब होटल में होते हैं, तब भी नहीं बोलते हैं न जानू?बोलते बोलते सीधी लेट गई और अपनी टाँगें फैला कर हवा में उठा ली।
मीनू मेरे सीने पर लेटी हुई थी और मेरे सीने के बालों से खेल रही थी और अपनी टांगों से मेरे लंड को दबा रखा था।हम दोनों एकटक उनकी चुदाई देख रहे थे।
नीलेश गीता की टांगों के बीच अपने लंड को सेट कर रहा था, बोला- यार विकास, मेरी बीवी गीता की चूत तो पहले से ही गीली पड़ी है। मैंने कहा- तो फिर क्या देरी है? लगा और पेल दे अपना लंड!गीता बोली- भैया आप भी अपनी बीवी को चोदिये न… हम भी देखेंगे आपकी चुदाई।मीनू बोली- हम अभी थोड़ी देर एक दूसरे के बदन से खेलेंगे, फिर चुदाई शुरू करेंगे।
गीता की चूत में अब तक लंड अंदर जा चुका था इसलिए उसकी आँखें बंद हो गई और वो चुदाई का आनन्द लेने लगी, आह उह आाह ओह्ह की आवाज़ें आने लगी।फिर गीता नीलेश से बोली- आपका लंड लिए हुए महीना बीत गया… कितना मज़ा आ रहा है, और ख़ास तौर पे जब कोई हमें चुदाई करते हुए देख रहा है और हमें कोई शर्म नहीं है तो मज़ा दस गुना बढ़ गया है।
मीनू बोली- भैया, गीता तो अच्छे से चोदो। इसके बोबे भी दबाओ, देखो कितनी गर्म हो रही है आपकी गीता। कब से आपके लंड का इंतज़ार कर रही थी।मीनू की बातों से दोनों और उत्तेजित हो गए और तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगे।
मीनू भी बहुत गर्म थी, वो बोली- दूसरी औरत को चुदाई देखकर आपको भी चोदने का मन कर रहा होगा न? आ जाओ, डाल दो अपना लंड मेरी चूत में।नीलेश बोला- भाभी, आपकी चूत चाट कर इतना अच्छा लगा, यार विकास भाभी की चूत इतनी अच्छी है, उसमें लंड डालने का मन हो रहा है। गीता, अगर तुम्हे बुरा न लगे तो क्या मैं भाभी की चूत मार लूँ।
गीता ने मेरी तरफ देखाम मैंने आँखों में इशारा किया कि हाँ बोल दो। मैंने थोड़ा दिखावे के लिए मीनू से पूछा- मीनू, तुम नीलेश से चुदना चाहोगी?मीनू बोली- मुझे तो लंड और प्यार चाहिए, कोई भी दे दे।गीता ने नीलेश से बोला- अगर भाभी को कोई दिक्कत नहीं तो मुझे क्या दिक्कत हो सकती है।
नीलेश ने अपना लंड गीता की चूत से बाहर निकाल प्रिया और मीनू को बोला- आप यहाँ लेट जाओ भाभी, आपकी चूत में मेरा लंड जाने को तरस रहा है।गीता को थोड़ा बुरा लगा था शायद… बोली- मेरी प्यास तो बुझा देते, मैं भी तो मरी जा रही हूँ आपके लौड़े से चुदने को!
मीनू उठ ही रही थी दूसरी तरफ जाकर अपनी टाँगें फैलाने को, पर फिर बोली- भैया, पहले बीवी फिर भाभी, चलिए डालिए उसकी चूत में अपना लंड!नीलेश बोला- भाभी, इसको मेरा भाई विकास चोद लेगा न! क्यू यार विकास भाई, मेरी बीवी की मस्त चुदाई कर देगा न?फिर गीता की तरफ देखकर बोला- तू विकास के लौड़े से चुद ले, मैं तो तुझे हमेशा ही चोदूँगा।
बस यही तो हम चाहते थे।मीनू गीता की जगह जाकर लेट गई और अपनी टाँगें उठा ली।इधर गीता मेरे ऊपर लेट गई और मेरे गले और जगह जगह चूमने लगी।उधर नीलेश को मीनू की चूत का पानी बहुत अच्छा लगता था इसलिए सीधा उसकी चूत चाटने के लिए उसकी चूत पर मुंह रख प्रिया। गीता उनको भी देख रही थी, बोली- भैया मैं आपका लंड चूसती हूँ, आप मेरी चूत चाट लो।मैंने कहा- नहीं, तुम्हें अभी तुम्हारी चूत में लंड की ज्यादा ज़रूरत है।
मैंने गीता को नीचे लिटाया और उसकी चूत जो की अभी नीलेश के लंड डालने की वजह से काफी गीली और खुली हुई थी, पर अपना लंड सेट किया और एक ही बार में पूरा अंदर डाल प्रिया।
गीता को मीठा मीठा दर्द हुआ और वो कराह उठी, बोली- भैया आप तो सेक्सपर्ट हो… क्या शॉट मारा है।मैंने गीता के बूब्स दबा दबा कर लाल कर दिए और धीरे धीरे धक्के लगाता रहा।
याराना का तीसरा दौर-6
इधर मीनू बोली- भैया, बस बहुत हुआ अब लंड दे दो, प्लीज फ़क मी!अब दोनों लड़कियाँ हमारे नीचे थी, हम उनकी चूतों में ताबड़तोड़ चुदाई कर रहे थे।इसी बीच मैंने नीलेश को हाय फाइव प्रिया। इसका मतलब था कि हमारा मकसद कामयाब हुआ।फिर गीता के ऊपर पूरा लेट के उसके कान के पास जाकर बोला- तुम्हें चुदना था मेरे लंड से, देखो मैंने तुम्हारी इच्छा पूरी कर दी।उसने मुझे चूमना शुरू कर प्रिया और पागलों की तरह उछल उछल कर मेरे धक्कों का साथ देने लगी।
मेरे कुछ भी बोलने से पहले गीता बोली- भाभी, आप बिल्कुल सही कह रही हो, अपने पति के अलावा किसी और का लंड अपने पति के सामने बिना डर के लेने का मज़ा ही कुछ और है। भाभी मैं सातवें आसमान पे हूँ, भैया मेरी अच्छी चुदाई कर रहे हैं।बोलते बोलते गीता लगभग चीखने लगी, बोली- मैं आ रही हूँ भैया, मुझे अपनी बाँहों में भर लो।
मैंने गीता को अपनी बाँहों में जकड़ लिया और बोला- आ जाओ, निकाल दो अपना पूरा पानी। खूब एन्जॉय करो, जितना चीखना चाहो चीखो, चिल्लाओ, खूब चुदो।
गीता बोली- हाँ भैया, आपका लौड़ा अगर नहीं ले पाती तो ज़िन्दगी से कुछ शिकायत होती। अब ज़िन्दगी से कोई शिकायत नहीं है… आह उह आह ओह्ह आह उह आह ओह्ह !गीता ने पूरी ताकत से मुझे अपने वक्ष में घुसा लिया था, वो इतनी बुरी तरह झड़ रही थी कि उसका पूरा बदन बुरी तरह कांप रहा था।
मैं उसका सर और बाल सहला रहा था और दूसरे हाथ से उसकी जांघें सहला रहा था जिससे वो पूरी तरह झड़ जाए।हम कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे, मैं ज़रा भी नहीं हिला, 4-5 मिनट बाद गीता बोली- भैया, आपका लगता है अभी पानी छूटा नहीं है।
मैंने कहा- हाँ, अभी तो नहीं छूटा पर कोई चिंता नहीं, मेरी बीवी भी तो है वो कर देगी।गीता बोली- नहीं भैया, मैं अभी पानी निकालने में आपकी मदद करती हूँ।मैंने कहा- हाँ कर देना पर अभी थोड़ी देर तुम्हारी चूत में ऐसे ही पड़ा रहने दो मेरे लंड को!गीता बोली- ओके भैया।
इधर मीनू और नीलेश भी घमासान चुदाई में भिड़े हुए थे। नीलेश की चुदाई में से पच पच की आवाज़ें आ रही थी। नीलेश बोला- भाभी, मैं आ रहा हूँ।मीनू बोली- हाँ भैया, आप जहाँ मर्जी आये आ जाओ।नीलेश बोला- भाभी मैं आपकी चूत में ही आना चाहता हूँ।मीनू बोली- भर दो आप मेरी चूत को भर दो अपनी मलाई से।
वो नीलेश के चूतड़ भी सहला रही थी जिससे नीलेश अपनी पूरी ताकत से मीनू की चूत में फव्वारा चला दे।गीता भी एकटक अपने पति और भाभी की चुदाई देख रही थी।
नीलेश की स्पीड कम हो गई उसी से अंदाज़ा लग गया था कि उसने अपना पूरा पानी मीनू की चूत में डाल प्रिया है।नीलेश थक के चूर होकर मीनू के नंगे बदन पर यूँ ही गिर गया।
कुछ देर बाद नीलेश ने अपना सर उठाया और मीनू मम्मों को सहला और दबाते हुए उठा, उसका लंड अभी भी मीनू की चूत में ही पड़ा था, दोनों एक दूसरे को जगह जगह किस और सहला रहे थे, जैसे दो बिछड़े हुए प्रेमी काफी महीनों बाद मिले हों।मैंने भी अब गीता की चूत में धीरे धीरे हल्के हल्के धक्के लगाने शुरू कर दिए। गीता की नज़र मेरे ऊपर ही थी, बोली- विकास भैया, आप कितने अच्छे हो, चुदाई के वक़्त आप और भी अच्छे लगने लगते हो।
मैंने कहा- गीता, तुमने कभी गांड मरवाई है?गीता बोली- नहीं भैया, आज तक नहीं लिया अपनी गांड में कोई भी लंड। नीलू भी एक दो बार कोशिश कर चुका है पर मैं उसे कभी गांड नहीं मारने देती, मुझे कुल मिला के गांड मरवाना अच्छा नहीं लगता।
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