होम पर वापस जाएं
रंडी की चुदाई / जिगोलो पठन समय: 22 मिनट पढ़ा गया: 834 बार

चचेरे भाई की बीवी को ग्रुप सेक्स में शामिल किया -11

राहुल मधु

22 Feb 2026 को प्रकाशित

चचेरे भाई की बीवी को ग्रुप सेक्स में शामिल किया -11
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

मीनू बोली- मैंने इतना चुदवाया है आज कि मुझे थोड़ी थकान हो रही है, मुझे थोड़ी देर आराम करना है।और बोलते बोलते मीनू बिस्तर पर गिर गई, जल्दी ही वो सो गई।

हम सभी को 4 बजे का इंतज़ार था पर अभी एक घंटा था हब्शी के आने में, मैंने मीनू को चादर उढ़ा दी और हम तीनों बाहर के कमरे में आ गये जिससे मीनू की नींद में कोई विघ्न न आये।

बाहर के कमरे में आकर में सोफे पर बैठ गया और गीता मेरे बगल में नीलेश कालीन पर था और उसका सर मेरी जांघों से टिका हुआ था।नीलेश बोला- यार, ये ज़िन्दगी के सबसे हसीं पल हैं कितना अच्छा होता कि अपन लोग साथ में ही रहते। मैं भी दिल्ली में ही नौकरी ढूंढ लेता हूँ।मैंने कहा- हाँ, मेरी कंपनी में अप्लाई कर दे, वहाँ कुछ जुगाड़ भी लगा दूंगा मैं!

नीलेश बोला- अपन इसी मकान में साथ साथ रहेंगे, जब मर्जी आये गीता को चोदूँगा और जब मन करेगा भाभी को।

गीता भी बोली- हाँ, बहुत मज़ा आएगा, इससे पहले हम लोग सिर्फ रात को 20 मिनट के लिए बिस्तर पर जाने के बाद सेक्स करते और सो जाते थे, पता ही नहीं था कि इस सेक्स की दुनिया में इससे ज्यादा आनन्द भी लिया जा सकता है। पहले मन में अगर ऐसे ख्याल आ भी जाते थे तो यही सोचती रहती थी कि शायद नीलू को अच्छा नहीं लगेगा पर अब खुल के अपनी ज़िन्दगी जी सकती हूँ। किसी का भी लंड किसी भी जगह बिना किसी डर के ले सकती हूँ। पहले ये सब पाप लगता था।

नीलेश बोला- हाँ, मैं भी अब तुम्हारी मदद से किसी भी चूत को अपना बना सकता हूँ, तुम मेरे लिए किसी भी लड़की को मेरे बिस्तर तक लाने में मदद कर सकती हो।

बातें करते करते चार भी बज गए तब तक एक मीनू भी एक नींद निकाल के बाहर के कमरे में आ गई और आते ही मेरी गोदी में बैठ गई और मुझे किस करने लगी।गीता बोली- भाभी, आप सच में बहुत बहादुर हो, सबके सामने चुदते समय यह डर नहीं लग रहा था कि कोई और भी आपको चोद सकता है?

मीनू बोली- जब तक विकास मेरे साथ है, मेरी मर्जी के खिलाफ मुझे छूना तो दूर मेरी तरफ कोई आँख भी नहीं उठा सकता।और अगर इनके होते हुए भी मेरी मर्जी के खिलाफ मुझे हाथ लगा जाता तो धत्त है ऐसे मर्द पे! जब इन्होंने कहा, तभी लोग मुझे देखकर मुठ मार पाये। मुझे भी अच्छा लग रहा था कि मेरे बदन को देखकर जवान और बूढ़े सभी मुठ मार रहे थे।

मैंने कहा- चल छोड़ डायलाग बाज़ी, और सब लोग कपड़े पहन लो, हब्शी आता ही होगा गीता की चूत मारने के लिए।गीता बोली- भैया, अब वो तो मुझे चोदने ही आने वाला है तो कपड़े क्यूँ पहनने?मैंने कहा- थोड़ी नजाकत से चुदवाओगी तो और आनन्द आएगा, भले ही वो तुम्हारे लिए रंडी ही है पर मजा तो तब है जब एक रंडी भी खुल के एन्जॉय करे और तुम्हें अपने चरम पर ले जाए, तुम्हें खुश करे।गीता बोली- हाँ भैया, यह बात तो सही है।

सभी लोग कपड़े पहनने लगे, मैंने मीनू से पूछा- डार्लिंग, तुम्हें भी चाहिए क्या उस हब्शी का लंड?मीनू बोली- मैं देखने के बाद ही फैसला करुँगी… वैसे पिछले कुछ दिनों में इतना सेक्स कर लिया है कि अभी तो फिलहाल ऐसा कोई मन नहीं है।

सभी लोग घर के नार्मल कपड़ों में आ गये, मैंने और नीलेश ने बनियान और बरमूडा पहन लिया, गीता ने टॉप और जीन्स, मीनू ने सूट।तभी घंटी बजी, नीलेश ने दरवाज़ा खोला, सामने के भयानक काला और डरावना आदमी खड़ा था।उसने विनम्रता से पूछा- Can I talk to विकास?मैंने अंदर से ही आवाज़ लगाकर बोला- हाँ मैं हूँ विकास, तुम्हें हिंदी नहीं आती क्या?

दरवाज़े के बाहर से ही उसने बोला- आता है पर थोड़ा थोड़ा।मैंने कहा- ठीक है, अंदर आ जाओ।उसको सोफे पर बैठने के लिए इशारा किया। सोफे पर बैठकर बेचारा इधर उधर बगलें झांकता सा दिख रहा था।

मैंने कहा- पैसे पहले लोगे या बाद में?वो बोला- कैसा भी चलेगा।मैं थोड़ी दबंग आवाज़ में बोला- गीता!

जब तक गीता बाहर आये, मैंने पूछा- तुम्हारा नाम क्या है?वो कालू बोला- मेरा नाम देंयल जॉन है। लोग मुझे डी जे बुलाते है।गीता बाहर आई, बोली- हाँ भैया?मैंने कहा- देख लो, ये है वो!डी जे थोड़ा हक्का बक्का था पर चुप था।

गीता थोड़ा शर्माते हुए नज़रें झुका के बोली- हाँ अच्छा है।मैं थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोला- अरे शादी के लिए थोड़े ही दिखा रहे है जो ऐसे शर्मा कर बोल रही है। उसके करीब जाओ उसके बदन को छू कर आजमा लो सब सामान चेक कर लो।

गीता ने नजरें उठाई और जाकर उसकी गोदी में बैठ गई, उसकी टी-शर्ट को ऊपर से गले के अंदर झाँक कर देखा, फिर बोली- नाइस, तुम्हारी छाती पर बाल नहीं है।

डी जे ने अपने हाथ हवा में ऐसे उठा रखे थे जैसे चेकिंग के लिए हाथ उठा लिए जाते है, वो गीता को कहीं भी छू नहीं रहा था।गीता ने डी जे के जीन्स पर हाथ फेरते हुए मेरी तरफ देखकर बोली- हाँ, भैया चलेगा ये!गीता उसकी गोदी से उठी, तब तक मीनू भी आ गई बाहर के कमरे में, मैंने कहा- मीनू देख ये आया है गीता को चोदने!

मीनू आँखें बड़ी करके बोली- अरे बाप रे… यह तो इंसान ही नहीं लग रहा।मैंने थोड़ा धीरे से कहा- उसे हिंदी आती है।डी जे बोला- सर कोई बात नहीं!मैंने कहा- तो फिर क्या है, हो जा शुरू… जाओ गीता इसे अंदर ले जाओ।

गीता ने उसका हाथ पकड़ा और उसे सोफे से उठाने के लिए बड़ी अदा से अंदर ले जाने लगी। नीलेश बिल्कुल चुपचाप यह सारा नज़ारा देख रहा था।मैं नीलेश की ख़ामोशी तोड़ने के लिए बोला- नीलेश भाई, तुझे अगर तेरी बीवी गीता के लिए वो कालू पसंद नहीं आया हो तो बता, अपन कोई और बुला लेंगे।नीलेश थोड़ा गहरी मुस्कान के साथ बोला- नहीं यार, ऐसी कोई बात नहीं है।मैंने कहा- फिर इतना शांत क्यूँ खड़ा है, तेरी फंतासी पूरी होने जा रही है, तुझे कोई ख़ुशी नहीं हो रही?

तब तक डी जे और गीता ने कमरा बंद कर लिया था, मैंने आवाज़ लगाई- गीता!जल्दी ही गीता बाहर आई और बोली- हाँ भैया?मैंने कहा- मुझे तो ऐसा लग रहा है जैसे तुम्हारी फंतासी पूरी होने जा रही है।गीता बोली- नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं है।तो मैंने कहा- तो नीलेश की फंतासी के हिसाब से तो तुम्हें नीलेश के सामने उस कालू से शारीरिक सम्बन्ध बनाने हैं।

गीता बोली- मुझे तो आप लोगों से कोई दिक्कत नहीं है पर वो आदमी कैसे ये सब करेगा इसलिए अंदर गई तो उसने दरवाज़ा बंद कर लिया।मैंने कहा- उसकी चिंता मत करो, वो तो साला रंडी है, जो कहेंगे वो करना पड़ेगा।मैंने आवाज़ लगाई- डी जे!वो बाहर के कमरे में आ गया।

मैंने उससे कहा- तुम्हें जो भी कुछ करना है, यहीं करना है।मैं थोड़ा रूककर बोला- चलो, अपनी टी-शर्ट उतारो।काले सांड ने अपनी टी-शर्ट उतारी, उसका शरीर देखने लायक था। उसके पूरा बदन गठीला, एक एक मांशपेशी और नस नस दिखाई पड़ रही थी।

नीलेश बोला- अब क्या हर चीज़ बोलनी पड़ेगी, गीता को खुश करो, तुम जैसे भी कर सकते हो।डी जे कुछ नहीं बोला और गीता को गोद में उठा लिया जैसे कोई दो साल की बच्ची को उठाता है और उसे सोफे पर बैठा प्रिया।फिर कालू खड़ा हुआ और जैसे स्ट्रिप टीज़र करते है वैसे अपने जीन्स का बटन खोलने लगा। मैंने जल्दी ही माहौल समझा और पिटबुल के गाने लगा कर आवाज़ बढ़ा दी।

डी जे ने मुझे आँखों से ही थैंक्स बोला।मैंने बोला- मीनू तुम भी गीता के बगल में जाकर बैठ जाओ।नीलेश बोला- हाँ भाभी, जैसे लड़कियों की पार्टी में स्ट्रिप टीज़र डांस होता है वैसा ही लगेगा जाओ न!मीनू भी गीता के बगल में जाकर बैठ गई।

अब धीरे धीरे गाने की धुन पर डी जे अपने जीन्स की ज़िप खोलते हुए अपनी गांड मटकाता हुआ लड़कियों के लिए स्ट्रिप टीज़ करने लगा।दोनों लड़कियों को उसने इतना उकसा प्रिया कि मीनू ने उसके जीन्स के ऊपर से ही हथियार की धार देखने की कोशिश करने लगी और गीता भी कालू की गांड पे चपेट लगा देती।

जैसे ही जीन्स कालू के शरीर से अलग हुई, कालू ने एक स्टेप में अपनी चड्डी को थोड़ा उठा के अंदर का हथियार दिखाया और फिर बंद कर प्रिया जैसे उन्हें दिखा के चिढ़ा रहा हो।मैं और नीलेश सिगरेट के धुएं के साथ खड़े खड़े ये तमाशा देख रहे थे।

डी जे ने गीता के दोनों बूब्स अपने दोनों बड़े बड़े हाथों से पकड़े और हल्की हल्की मसाज देने लगा।इधर नीलेश ने अपने कपड़े उतारना शुरू कर प्रिया।

डी जे ने गीता को खड़ा किया और उसके जीन्स का बटन अपने मुंह से खोल प्रिया, ताकतवर दांतों से ज़िप भी नीचे करता जा रहा था और गीता की गांड भी सहला रहा था।

मीनू अपने पैर के अंगूठे के नाख़ून से कालू के सीने के निप्पल को छेड़ने लगी। डी जे भी दिखा रहा था कि हाँ उसे अच्छा लग रहा है।तभी मेरे बरमूडा नीचे सरका, मैंने पीछे देखा तो नीलेश ने सरकाया था। मैं भी कपड़े उतार के नीलेश की तरह नंगा हो चूका था।

डी जे ने अब तक गीता को पूरी तरह नंगी कर प्रिया था। मीनू ने अब तक अपना बदन ढक कर रखा था पर हाँ वो अपने पैर के अंगूठे के नाख़ून से डी जे के छाती ही नहीं अब उसके औजार पर भी वार कर रही थी।

डी जे ने गीता को सोफे पर बैठाया और अब धीरे धीरे अपनी बॉक्सर को उतारना शुरू किया।कभी दांई तरफ से बॉक्सर नीचे करता कभी बांई तरफ से और फिर रोक देता।कालू के बदन पर अब तक एक भी बाल नहीं दिखा था।

इंतज़ार की घड़ियाँ समाप्त हुई और डी जे ने अपना लम्बा और काला लौड़ा दोनों औरतों के सामने कर प्रिया।नीलेश बोला- गीता चूस इसका लंड!डी जे का लंड अभी पूरी तरह खड़ा ही नहीं था तब भी वो कम से कम 9 इंच तो होगा ही।

मीनू बोली- ये आदमी का है या गधे का? नीलेश भैया, आदमी ही क्यूँ बोला, बोल देते गधे से चुदवाना है गीता को।नीलेश बोला- भाभी मैंने सपने में कई बार इसको ऐसे ही काले लंड से चुदते हुए और मस्ती करते हुए इसी को चोदा है। जब हम चुदाई करते थे तो हम अपने मन में कोई कहानी से अपने आपको उकसा कर अपना लंड खड़ा करता था। यह ऐसी अचूक कहानी है जिसमें मेरा लंड हमेशा ही खड़ा हो जाता था और मैं गीता को कभी कभी 40-45 मिनट तक चोदता रहता था।

तब तक गीता ने कालू के लौड़े को चूसना शुरू कर प्रिया था। इधर मीनू भी धीरे धीरे मूड में आरही थी, उसने भी एक एक करके अपने बदन से कपड़े अलग करना शुरू कर दिए थे।मीनू ने डी जे के बॉल्स सहलाना शुरू किये इधर नीलेश भी मेरी जांघें और लंड को छूना शुरू कर चुका था।

डी जे जमीन में लेट गया और गीता को अपने मुंह पर बैठा लिया, मीनू सोफे पर बैठे बैठे अपने पैर के पंजों से डी जे के लंड की मुठ मारने लगी। गीता भी अपनी चूत पर कालू की जीभ का पूरा मज़ा ले रही थी, अपने हाथों से अपने बूब्स दबा कर नीलेश और मुझे दिखा रही थी, बता रही थी कि वो इस फंतासी को पूरी तरह जी रही है।

नीलेश बोला- यार, यहाँ कब तक खड़े खड़े तमाशा देखेंगे, चलो अंदर चलते हैं, बिस्तर पर सभी लोग मस्ती करेंगे।गीता बोली- नीलू, थोड़ी देर रुको न, अभी इसकी जीभ सही जगह पर छू रही है, थोड़ा मज़ा ले लेने दो, फिर चलूंगी।नीलेश बोला- रंडी कैसी कालिये की जीभ के मजे ले रही है, ले मजे और मजे ले बेन की लोड़ी।

हम तीनों मैं, मीनू और नीलेश बैडरूम में चले गए।8-10 मिनट के बाद गीता हमारे कमरे में आई, तब तक हम तीनों एक दूसरे के बदन से खेल रहे थे।गीता आकर बोली- मुझे इस कालू पर मूतना है, उस दिन आप सब मेरे ऊपर मूते थे। आज मैं इस पर मूतना चाहती हूँ।

बाथरूम में कालू को लिटा कर वैसे ही उसके मुंह पर गीता बैठ गई और डी जे के मुंह पर मूतने लगी। डी जे भी एक्सपर्ट था, वो भी गीता को पूरा आनन्द देने के लिए आराम से अपने ऊपर मुतवाता रहा। गीता का मूत पीता, कभी उसके मूत को मुंह में भरकर गीता के पेट तक उसी का कुल्ला कर देता।

गीता ने पूरा मूतने के बाद भी लगभग 5 मिनट और कालू के मुंह पर बैठकर अपने कूल्हे मटका मटका के अपनी चूत को चटवाया। फिर दोनों साथ में शावर लेने लगे, बाथरूम का दरवाज़ा एक मिनट के लिए भी बंद नहीं किया गया।

गीता नहा कर बदन पौंछ कर बिस्तर के बिल्कुल बीच में लेट गई, अपनी टांगें हवा में उछाल कर डी जे को अपनी चूत में अपना लंड डालने को निमंत्रण दे प्रिया।डी जे प्रोफेशनल तो था ही, तुरंत अपना लौड़ा हाथ में लेकर आगे बढ़ा और गीता के चूत के द्वार पर रख प्रिया। उसने पहले अपने लंड के टोपे से गीता की चूत इतनी रगड़ी कि गीता लंड लेने के लिए लगभग पागल और भूखी शेरनी जैसी हो गई।गीता खुद ही उछलने लगी जिससे उसका लंड थोड़ा अंदर चला जाए, वो डी जे को पकड़ कर हिलाने की कोशिश कर रही थी पर वो सांड कहा हिलने वाला था।

जब डी जे पूरी तरह संतुष्ट हो गया कि अब गीता को ज्यादा दर्द नहीं होगा उसने थोड़ा सा लंड गीता की चूत में ठेल प्रिया।मेरे और नीलेश के लंड के मुकाबले इस लंड का मोटापा काफी था। गीता ने तकिए का कोन पूरी ताकत से अपनी मुट्ठी में भर लिया और अपने मुंह को दबा लिया जिससे उसकी चीख न निकल जाए।

नीलेश तुरंत उठकर गया और अपनी बीवी गीता का सर गोदी में रखकर बोला- गीता जान, अपने आप को रोको मत… चीखो, चिल्लाओ कोई बात नहीं।गीता बोली- इसने तो मेरी चूत फाड़ डाली, मैं मर जाऊँगी जान!नीलेश बोला- तू मेरा लंड चूस, ये तेरी चूत मारेगा तुझे दर्द नहीं होने देगा।

मीनू ने ऐसी बातें सुनी तो सरसों का तेल उठा लाई, बिना किसी से कुछ बोले डी जे के पास गई उसके लंड को पकड़ा और बाहर निकाल प्रिया और उसके लंड पर ढेर सारा तेल मल प्रिया, थोड़ा सा तेल लेकर गीता की चूत पर भी लगा प्रिया और थोड़ा ऊँगली गीता की चूत के अंदर डाल के तेल अंदर तक लगा प्रिया।

गीता बोली- थैंक यू भाभी! अब शायद इसका लौड़ा लेना आसान हो जायेगा।मीनू मुस्कुरा कर बोली- एन्जॉय करो डियर, थैंक्स की क्या बात है।

गीता पलट गई और घोड़ी बन गई, कालू भी घुटने के बल बैठ गया, गीता का मुंह अब नीलेश के लंड पर था।कालू ने धीरे धीरे अपना लंड गीता की चूत में पेलना शुरू कर प्रिया। नीलेश इस तरह सीधा लेटा था जैसे वो गीता का तकिया हो, गीता के एक हाथ की तरफ नीलेश के पैर थे और दूसरे हाथ की तरफ उसका मुंह।

नीलेश ने मुझे अपनी तरफ बुलाया और मेरा लंड चूसने लगा।मैंने भी मीनू को सीधा लिटा प्रिया और उसकी चूत चाटने लगा और मीनू का मुंह गीता और कालू के लंड के पास पहुंच चूका था तो वो भी कालू के बॉल्स और सहला और चाट रही थी।पूरा गोला बना लिया था हम लोगों ने जिसमें सभी एक दूसरे को पूरा आनन्द दे रहे थे।

गीता की चूत में अब जोरदार धक्का लगा जिससे डी जे का पूरा लंड अब गीता की चूत में घुस गया था, गीता चीख उठी, बोली- ये माँ का लौड़ा चूत से डाल के मुंह से निकालेगा।गीता के मुंह से गाली सुनकर बहुत अच्छा लगा, सभी लोग हंस दिए।

नीलेश बोला- तू बस ये बता… मज़ा आ रहा है या नहीं?गीता कुछ नहीं बोल सकी, बस आह उन्हह ओह्ह्ह आंहह ओह्ह्ह्ह करती ही रह गई।

मैंने मीनू से कहा- बोल, अगर तुझे भी चाहिए ऐसा लंड तो ले ले।मीनू बोली- मुझे चुदने का शौक है पर इतने बड़े लंड से अपनी चूत नहीं फड़वानी… मेरे लिए तो आप दोनों के ही लंड बहुत हैं कोई और पसंद आएगा तो मैं ज़रूर बताऊँगी।

मैं बोला- डी जे, मेरी बीवी को भी खुश कर यार, उसे भी ओरल का मज़ा दे दे।डी जे बोला- यस सर!

डी जे ने गीता को लिटा प्रिया, पीछे से चोदता रहा और गीता और डी जे के बीच जो जगह बनी उसमें मीनू को लिटा लिया और उसकी चूत को चाटने लगा।गीता और मीनू की पीठ एक दूसरे से टकरा रही थी। नीलेश मीनू के बूब्स मसलने और चूसने लगा वही में गीता की तरफ जाकर गीता के बूब्स के साथ खेलने लगा।

गीता और मीनू पूरी पसीने में तरबतर थी।गीता बोली- भैया, यह राक्षस अपना पानी छोड़ेगा या नहीं?मैंने कहा- तू उसकी क्यूँ चिंता करती है, वो तो रंडी है न, जब तक तेरा मन है लिए रह लौड़ा अपनी चूत में… जब तेरा हो जाये तो निकलवा देना। घर जाकर हिलाता रहेगा या कोई दूसरी ग्राहक पे निबट लेगा।

गीता हँसते हुए बोली- भैया, मैं तो 2 बार अपना पानी छोड़ चुकी हूँ। बस एक और बार निकाल लूँ, उसके बाद इस लंड को जाने दूंगी। भैया आपका लंड चूसती हूँ आप अपना पानी मेरे मुंह में निकाल देना। मुझे थोड़ा पानी पीना है।

गीता अब और ज्यादा मज़ा ले रही थी, वो अब कालू के लंड पर उछल रही थी, मेरे लंड को वो गले तक लेकर चूस रही थी। इससे पहले कि मैं अपना पानी उसके मुंह में छोड़ता, गीता पानी छोड़ने लगी।

गीता इतना मज़ा ले रही थी कि वो बोली- फाड़ दे मेरी चूत, निकाल दे मेरा पानी, मादरचोद मुझे खा जा। चोद साले मुझे चोद, मसल डाल मुझे।मैं उसके बूब्स मसल रहा था और डी जे पूरी ताकत से गीता को पेल रहा था।

गीता के झड़ने के बाद डी जे बोला- मैं भी आ रहा हूँ।डी जे ने अपना लंड बाहर निकाला और जोरों से हिलाने लगा।मीनू भी गीता के बिल्कुल बगल में मुंह लगा कर बैठ गई।मैंने पहली बार अपनी बीवी को लंड से निकलने वाले पानी के लिए इतना उतावला देखा था।डी जे की मलाई निकलने लगी, उसने इतना मलाई निकाली कि दोनों औरतें पूरी तरह उसकी मलाई में भीग गई।नीलेश ने डी जे को पैसे दिए और थैंक्स बोल कर तौलिया लगा कर गेट तक छोड़ कर आया।तब तक गीता और मीनू एक दूसरे को स्मूच करके एक साथ नहाने चली गई।

शाम के 7 बज चुके थे, सभी लोग थके हुए थे, भूख भी लग रही थी, मीनू और गीता ने खाना बनाया, खाना खाकर सभी लोग एक साथ सो गए।सभी इतने थके हुए थे कि आज की रात किसी ने किसी को भी नहीं चोदा लेकिन अगले दिन हमारे पास समय नहीं था चुदाई का इसलिए मैं गीता की बाँहों में और नीलेश मीनू की बाँहों में ही सोते रहे !और अब यह तो स्पष्ट ही था कि हमने कपड़े नहीं पहने हुए थे।

अगली सुबह 10 बजे हमारी ट्रेन थी भोपाल जाने की… सभी लोग सुबह 7 बजे उठ कर नहा धोकर तैयार हो गए और हम 9:40 पर स्टेशन पहुंच गए थे।

अभी ट्रेन लग ही रही थी, नीलेश ने पूछा- भाई, अपना सीट नंबर और बोगी कौन सा है?मैंने कहा- यार कहीं जगह नहीं थी, मैंने फर्स्ट क्लास में बुकिंग कर ली है। बस प्रॉब्लम यह है कि 2 सीट एक कम्पार्टमेंट और बाकी 2 अलग अलग कम्पार्टमेंट में मिली है। अब अंदर ही कुछ जुगाड़ करना पड़ेगा।

ट्रेन आई मैंने TT से बात की तो उसने हमारी चारों सीट एक ही कम्पार्टमेंट में करवा दी।मुझे बुकिंग करते वक़्त से लेकर अभी तक कोई अंदाज़ा नहीं था कि यह सफर इतना सुहाना भी हो सकता है।आगे के सफर के लिए इंतज़ार करें, जल्दी ही महिला पाठिकाओं की पैंटी गीली और पुरुष पाठको के पैंट में तम्बू बनाएंगे।आगे की कहानी एक नए नाम से!support@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

एक लंड और पूरे परिवार की चुदाई-2
रंडी की चुदाई / जिगोलो

एक लंड और पूरे परिवार की चुदाई-2

कहानी का पिछला भाग:एक लंड और पूरे परिवार की चुदाई-1अब तक आपने पढ़ा कि चूत चुदाई के चक्कर में मुझे एक दल्ला मिला, वो अपनी बीवी चुदवाने मुझे अपने घर ले गया. वहां देखा तो उसकी माँ और बहन भी गश्ती (रंडी) थी. मैंने उसकी बहन को चोदना चाहा तो माँ ने पहले ...

17 मिनट 1,053
मुंबई की मस्त माल कॉल गर्ल की जबर्दस्त चूदाई
रंडी की चुदाई / जिगोलो

मुंबई की मस्त माल कॉल गर्ल की जबर्दस्त चूदाई

हॉट कॉल गर्ल फक स्टोरी में ऑफिस की थकान मिटाने के लिए मैंने एक कॉलगर्ल होटल के कमरे में बुलाई. उसे देखते ही मेरा लंड सलामी देने लगा. मस्त लड़की थी वो.

16 मिनट 777
मैं कॉलगर्ल कैसे बन गई-7
रंडी की चुदाई / जिगोलो

मैं कॉलगर्ल कैसे बन गई-7

अब तक आपने पढ़ा था कि अशोक ने मुझे बड़ी रकम का ऑफर प्रिया था जिसे मैंने स्वीकार कर लिया था.

14 मिनट 569

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।