नीलेश ने गीता को कपड़ों के ऊपर से ही चूचियाँ और चूतड़ दबा दबा कर और होंठों और गले पर चूम चूम कर बहुत गर्म कर प्रिया था। गीता नीलेश के कान में बोली- कमरा बंद कर लें?नीलेश बोला- हाँ, कर तो सकते हैं, पर यह उनका बैडरूम है और बाथरूम भी सिर्फ इसी कमरे के साथ लगा हुआ है। बीच में किसी को कोई ज़रूरत आई तो बड़ा बुरा लगेगा।
गीता ने नीलेश को धक्का देकर अपने आप से अलग किया और बोली- हाँ, तुम सही बोल रहे हो, आज बीच में कोई नहीं आना चाहिए। महीने भर से प्यासी हूँ, आज तो तुम्हें खा जाऊँगी मैं!नीलेश तौलिया लपेट कर बाहर आ गया।
गीता अपने कपड़ों को व्यवस्थित करके बाहर आये, उससे पहले नीलेश बाहर आकर सीधा मीनू जो की नीचे कालीन पर बैठी हुई थी, के करीब पहुँचा और अपने लंड को बाहर निकाल के मीनू के गाल पे मार प्रिया।मीनू ने नीलेश की तरफ देखकर मुस्कुरा कर लंड को हाथ में लेकर सहला प्रिया।
जल्दी से नीलेश मेरे बगल में आकर बैठ गया कि कहीं गीता देख न ले।मैंने मीनू को अंदर आने का इशारा किया, मीनू उठी में भी उठ कर जाने लगी बैडरूम की तरफ तो गीता कमरे से बाहर आ रही थी। गीता के कपड़े थोड़े से गीले विशेष तौर पर बोबे और कंधे दिख रहे थे।
मैंने मीनू का हाथ पकड़ा हुआ था जिसे देखकर गीता थोड़ा सर झुक कर मुस्कुरा कर जल्दी से दौड़ती हुई ड्राइंग रूम की तरफ चली गई। मैंने मीनू को कमरे में अंदर बुला कर बोला- यार, तुम अपने ब्रा पैंटी उतार के बाहर आओ।मीनू बोली- वो तो आप इशारे से बताते तो भी मैं उतार के आ जाती पर अब केवल भैया नहीं है, उसकी बीवी भी है।मैं बोला- इसलिए तो बोल रहा हूँ। तुम नंगी ही अच्छी लगती हो जानेमन!
मीनू को बिस्तर पे बैठाया और उसके दूसरे गाल पे अपने लंड से थप्पड़ जैसे मारने लगा।
उसने मेरे लंड को हाथ से पुचकारा और लंड की तरफ देखकर बोली- आज तुझे नई चूत मिल सकती है, अच्छे से चुदाई मचाना मेरे शेर! और फिर मेरे लंड को चूमने और पुचकारने लगी।फिर मेरी तरफ देखकर बोली- आप बाहर जाकर बैठो, मैं अभी आती हूँ नंगी होकर।मीनू मेरी नस नस जानती है, उसे पता है कब कौन से शब्द का उपयोग मुझे उत्तेजित कर सकता है।
मैं बाहर आकर सोफे पर नीलेश के करीब बैठ गया, हम दोनों ही तौलिये में थे। गीता कालीन पर दोनों पांव पीछे मोड़ कर बैठी थी, उसने जीन्स और टॉप पहना हुआ था।गीता के बड़े बड़े बूब्स उसके पिछवाड़े से थोड़े बड़े थे, उसकी कमर ज्यादा से ज्यादा 30 रही होगी। उसका गोरा रंग बता रहा था कि उसका बदन संगमरमर सा चमकदार होगा।
मीनू काले रंग की बड़े गले की मैक्सी पहन कर बाहर आ गई, ये मैक्सी बहुत मोटी थी, इसमें से कुछ भी अंदर तक नहीं दिखता था। मैं आदेश देते हुए बोला- मीनू पैग बनाओ।मीनू आगे बढ़ी और झुक कर हमारे पैग बनाने लगी।
मीनू के झुकने से उसके बोबे थोड़े ज्यादा दिखने लगे, मैंने कहा- मीनू एक काम करो, तुम वो एयरहोस्टेस वाली ड्रेस पहन कर आओ और मुझे आकर्षित करने की कोशिश करो।यह बात सुन कर तो गीता के कान खड़े हो गए। मीनू धीमे क़दमों से बैडरूम की तरफ जा रही थी, गीता भी मीनू के पीछे चली गई।
गीता ने जाकर मीनू से बोला- भाभी, लगता है भैया को ज्यादा चढ़ गई है, आप उन्हें अंदर बुला लो, मैं नीलू को बाहर ही रखूंगी।मीनू बोली- थैंक्स यार, गीता पर वो इस समय कुछ नहीं सुनने वाले!गीता बोली- तो आप नीलू के सामने भैया को कैसे आकर्षित करोगी? आपको अजीब नहीं लगेगा?
मीनू बोली- वो वैसे भी ये सब मेरे या अपने लिए नहीं, तुम्हारे लिए कर रहे हैं जिससे तुम अपने पति के साथ आराम से चिपक कर या जैसे चाहो वैसे बैठ सको।गीता बोली- भैया कितने अच्छे हैं न, मेरा कितना ध्यान रखने की कोशिश कर रहे हैं। भाभी मुझे भी कुछ ऐसे कपड़े दो न कि नीलू आपको न देखकर मुझे देखे।
मीनू हंस के बोली- अच्छा तो ये बात है? मेरे पास 2 जोड़ी कपड़े हैं क्योंकि तुम्हारे भैया को भूमिका निभाने (Role Playing) वाले खेल पसंद हैं। एक तो एयर होस्टेस वाले कपड़े हैं और दूसरी नर्स की ड्रेस है। तुम चाहो तो नर्स बन जाओ।
गीता के लिए तो जैसे ये सब कुछ सपने जैसा था, वो बोली- हाँ भाभी, मैंने कुछ गन्दी मूवी में देखा है ऐसा भूमिका वाले खेल को खेलते हुए, आप लोग तो सच में बहुत दिलचस्प जोड़े हो। मुझे दिखाइए न वो नर्स वाले कपड़े में भी आज नीलू को सातवें आसमान की सैर कराती हूँ।मीनू बोली- ये हुई न बात, अब तुम खुल के बात कर रही हो।
मेरी मदमस्त रंगीली बीवी-21
मीनू ने गीता को नर्स वाली वेशभूषा दिखाई तो गीता बोली- भाभी, यह तो बहुत छोटी है।मीनू बोली- हाँ, तभी तो आदमी को आकर्षित कर पाएंगे हम।
गीता अपनी टॉप और जीन्स उतारने लगी तो मीनू बोली- तुम कहो तो मैं बाहर जाऊँ?गीता बोली- भाभी, दोस्त भी बोल रही हो और ऐसी बात भी कर रही हो?मीनू बोली- नहीं, मुझे लगा कि तुम बोलने में संकोच करोगी इसलिए मैंने ही पूछ लिया, गीता तुम बहुत खूबसूरत इंसान हो। तुमने मुझे दोस्त सिर्फ समझा ही नहीं, मान भी लिया है, तुम्हारे व्यवहार से में बहुत खुश हो गई।
गीता बोली- आप भी ड्रेस पहन लो!थोड़ा हंसते हुए बोली- या मैं बाहर जाऊँ?मीनू भी हंसने लगी और अपनी मैक्सी उतार दी।
गीता मीनू को देखकर हैरान हो गई, बोली- भाभी, आपने अंदर कुछ पहना ही नहीं था।मीनू बोली- हाँ तुम्हारे भैया को मैं ऐसे ही पसंद हूँ। इसलिए ऐसे ही जाती हूँ उनके सामने… ख़ास तौर पर जब वो ड्रिंक कर रहे हों।गीता बोली- भाभी, आपका बदन तो बहुत खूबसूरत है।
मीनू बातें सुनते सुनते ड्रेस पहनने लगी।गीता बोली- भाभी आप इसके अंदर भी कुछ नहीं पहनने वाली क्या?मीनू बोली- यार जब उकसाना है तो पहनने का क्या फायदा!फिर दोनों हंसने लगी।
मीनू की ड्रेस किंगफ़िशर एयरलाइन्ज़ जैसे लाल और सफ़ेद रंग की थी। उसमे एक छोटा सा टॉप था और एक बहुत छोटी सी माइक्रो स्कर्ट… और पूरी टांगों के लिए सफ़ेद मौजे जो जांघ के थोड़े ऊपर तक आते हैं और लाल रंग की जूतियाँ।
मीनू बोली- हाँ, सही कह रही हो… पर यहाँ है ही कौन तुम्हें देखने वाला?मीनू बोली- मेरी स्कर्ट का भी यही हाल है, देखो!गीता बोली- भाभी, इसमें तो ऐसा लग रहा है जैसे उनके सामने हम लोग बिना कपड़ों के ही हैं।मीनू बोली- यही तो रिझाने की कला है, थोड़ा दिखाओ थोड़ा छुपाओ, थोड़ा दिखा के छुपाओ थोड़ा छुपा के दिखाओ।
गीता को इस बात पर बहुत तेज़ हंसी आ गई, बोली- आपकी यह बात ज़िन्दगी में कभी नहीं भूल पाऊँगी।मीनू ने पहले गीता को कमरे में जाने के लिए कहा, बोली- मुझे तो मेरे पति इन कपड़ों में पचासों बार देख चुके हैं। तुम्हारे पति ने तुम्हें ऐसे कभी नहीं देखा होगा इसलिए पहले तुम जाकर अपना जलवा बिखेरो, मैं तुम्हार पीछे पीछे आती हूँ।
गीता थोड़ी शर्माती हुई थोड़ी घबराई हुई बैडरूम से बाहर निकली।
इधर में और नीलेश धीरे धीरे अपने लौड़ों को मसाज दे रहे थे।हाँ आप सही समझे एक दूसरे के लौड़ों को… खुद हिलाने में वो मज़ा कहाँ!नज़रों से पूरी तरह सतर्क और आँखें और कान बैडरूम के दरवाज़े पर जिससे दोनों में से कोई भी औरत आती दिखे तो लंड को तौलिये में छुपा सके।
जैसे ही आहट आई कि कोई इस तरफ आ रहा है, हमने अपने लंड तौलिया के अंदर कर लिए पर तम्बू बनने से रोक पाना मुश्किल था इसलिए सोफे पर पड़े छोटे तकिए अपनी गोदी में रख लिए।
गीता को नर्स की वेश भूषा में देखकर लंड तो हुंकार मारने लगा। वो बिल्कुल रंडियों की तरह किचन के दरवाज़े से टिक कर खड़ी हो गई थी।
कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com