लीलाधर
सत्यापित कहानीकार (Verified)@llthhara
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
लीलाधर की रचनाएं
खेत खलिहान-1
बारहवीं की परीक्षा हो चुकी थी और उन्नीस साल की संजना अब कॉलेज जाने के लिए उत्सुक थी। गाँव के स्कूल से निकल कर शहर में कॉलेज जाएगी। उसने कॉलेज के खुले माहौल के बारे में सुन रखा था। रिजल्ट निकलने में दो महीने की देर थी और संजना अपनी सहेलियों के साथ ...
स्वीटी-1
मैं एकदम चौंक पड़ी। अभी कुछ बोलती ही कि एक हाथ आकर मेरे मुँह पर बैठ गया। कान में कोई फुसफुसाया- जानेमन, मैं हूँ, रमेश। कितनी देर से तुम्हारा इंतजार कर रहा था।
पुष्पा का पुष्प-4
कुछ क्षणों पहले हाथ भी नहीं लगाने दे रही थी। अभी मस्ती में सराबोर है। मैं और उत्साहित होकर थूथन घुसा घुसाकर उसके गड्ढे को कुरेदता हूँ। उसके मुँह से कुछ अटपटी ऍं ऑं की सी आवाजें आ रही है। साथी अगर स्वरयुक्त हो तो क्या बात है ! उसकी कमर की हरकत बढ़ती...
पुष्पा का पुष्प-3
बाहर कल की तरह सन्नाटा था, रात अधिक हो रही थी, नींद आज भी नहीं आ रही थी। यद्यपि आज किसी का इंतजार नहीं था। खिड़की से आती हवा में हल्की ठण्ड का एहसास हुआ लेकिन गुलाबों की आती खुशबू अच्छी लग रही थी। घड़ी में देखा- ग्यारह बज रहे थे…
पुष्पा का पुष्प-2
उसकी पनीली आँखों में, जिनमें एक अजब-सा मर्म को छूता भाव उमड़ रहा था। शर्म से लाल गालों पर झूलती लट, बालों के बीच सफेद मांग ! खाली।
पुष्पा का पुष्प-1
सुबह की स्वच्छ ताजी हवा में गुलाब के ताजा फूलों की खुशबू फैल रही थी। शहर के कोलाहल से दूर प्रदूषणमुक्त शांत वातावरण में फूलों की सुगंधभरी ताजी हवा में घूमते हुए मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। हर तरफ गुलाब फैले थे भाँति भाँति के- लाल, गुलाबी, काले, ...