लीलाधर
सत्यापित कहानीकार (Verified)@llthhara
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
लीलाधर की रचनाएं
विदुषी की विनिमय-लीला-1
पाठकों से दो शब्द : यह कहानी अच्छी रुचि के और भाषाई संस्कार से संपन्न पाठकों के लिए है, उनके लिए नहीं जिन्हें गंदे शब्दों और फूहड़ वर्णन में मजा आता है। इसे लिखने में एक-एक शब्द पर मेहनत की गई है। यौन क्रिया के सारे गाढ़े रंग इसमें मिलेंगे, बस कहानी...
शालू की गुदाई-4
मुझे दरार के नीचे गुदा की गुलाबी कली की लुका छिपी बार-बार आकर्षित कर रही थी। योनि से निकलते रसों से भीगकर वह भी चमक रही थी। मुझे सुबह वहाँ पर हेयर रिमूवर लगाते वक्त का ख्याल याद आया, ”आज इसका भी बेड़ा पार होगा क्या?” मैं जानता था अंग्रेज लोग पृष्ठ...
शालू की गुदाई-3
उसने कहा- लगातार चुभन से कभी कभी सिहरन होती है इसलिए उसे उसके हाथों को कुर्सी के हत्थों से बांधना होगा।
शालू की गुदाई-2
21 मई का बेसब्री से प्रतीक्षित दिन ! हमारी शादी की सालगिरह ! शालू को उसका तोहफा देने का दिन !
शालू की गुदाई-1
दोस्तो, आपने मेरी पिछली कहानीकेले का भोजको तहेदिल से पसंद किया।शुक्रिया।
जेम्स की अर्चना -6
अर्चना को अपने आसपास खाली-सा लग रहा था। वह भी कुछ पकड़कर अपने को संभालना चाह रही थी। उसने घूमकर जेम्स को पकड़ने की कोशिश की।अनुभवी जेम्स ने इस कोशिश का मतलब समझा, यह बड़ी दुर्लभ चीज थी, खासकर अर्चना जैसी कुलीन औरत के लिए… और वह भी पहली मुलाकात में...
जेम्स की अर्चना -5
अब मन में वह दुविधा भी नहीं बची थी, कि यह क्यों हो रहा है, और वह उसे होने दे कि नहीं, बस जो हो रहा है, सो हो रहा है। वह उसे होने दे रही है। इसे होने देने के सिवा और कोई रास्ता नहीं। इसी के लिए तो आई है। और फिर शरीर स्वयं ही आगे बढ़कर रतिक्रिया का ...
जेम्स की अर्चना -4
अर्चना अलग पड़ी थी। योनि बाढ़ से भरे खेत की तरह बह रही थी और मन बिन बारिश के खेत की तरह सूखा। वह यों ही सोचती पड़ी रही। सब कुछ यंत्रचालित सा एक झोंके में हो गया था।न चाहते हुए भी उसकी आँख गीली हो गई। औरत की नियति : पुरुष उसको भूखे भेड़िए की तरह ही...
जेम्स की अर्चना -3
लगभग एक साल लगे अर्चना को इस घटना पर थोड़ा थोड़ा बात करने लायक नॉर्मल होने में। उसके बाद टुकड़ों में सुन-सुनकर मैंने घटनाओं की कड़ियाँ जोड़ीं। जेम्स और अर्चना ने मिलकर उस दिन उस कमरे में जो किया था वह कुछ इस तरह था :
जेम्स की अर्चना -2
मेरा मन उल्टे अर्चना करता है – वहाँ बंद कमरे में यौवन की नदी उमड़ रही होगी। जेम्स उसमें डूब-डूबकर नहा रहा होगा। अर्चना की भरी-भरी मांसल बाँहें, जो मुझे अपनी गर्दन और कंधों पर महसूस होती थीं, वे जेम्स के गले में कस रही होंगी… मुझे आश्चर्य हुआ क्या ...