लीलाधर
सत्यापित कहानीकार (Verified)@llthhara
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
लीलाधर की रचनाएं
विदुषी की विनिमय-लीला-1
पाठकों से दो शब्द : यह कहानी अच्छी रुचि के और भाषाई संस्कार से संपन्न पाठकों के लिए है, उनके लिए नहीं जिन्हें गंदे शब्दों और फूहड़ वर्णन में मजा आता है। इसे लिखने में एक-एक शब्द पर मेहनत की गई है। यौन क्रिया के सारे गाढ़े रंग इसमें मिलेंगे, बस कहानी...
शालू की गुदाई-3
उसने कहा- लगातार चुभन से कभी कभी सिहरन होती है इसलिए उसे उसके हाथों को कुर्सी के हत्थों से बांधना होगा।
शालू की गुदाई-2
21 मई का बेसब्री से प्रतीक्षित दिन ! हमारी शादी की सालगिरह ! शालू को उसका तोहफा देने का दिन !
शालू की गुदाई-1
दोस्तो, आपने मेरी पिछली कहानीकेले का भोजको तहेदिल से पसंद किया।शुक्रिया।
केले का भोज-9
योनि खाली हुई लेकिन सिर्फ थोड़ी देर के लिए। उसकी अगली परीक्षाएँ बाकी थीं। सुरेश को दिया वादा दिमाग में हथौड़े की तरह बज रहा था,‘जो इज्जत केले को मिली है वह मुझे भी मिले।’समस्या की सिर्फ जड़ खत्म हुई थी, डालियाँ-पत्ते नहीं।काश, यह सब सिर्फ एक दु:स्...
केले का भोज-8
वह फिर मुझ पर झुक गई। कम से कम आधा केला अभी अन्दर ही था।‘खट खट खट !’… दरवाजे पर दस्तक हुई।मैं सन्न। वे दोनों भी सन्न। यह क्या हुआ?‘खट खट खट’… ‘सुरेश, दरवाजा खोलो।’
केले का भोज-7
नेहा ने जब एक उजला टिशू पेपर मेरे होंठों के बीच दबाकर उसका गीलापन दिखाया तब मैंने समझा कि मैं किस स्तर तक गिर चुकी हूँ। एक अजीब सी गंध, मेरे बदन की, मेरी उत्तेजना की, एक नशा, आवेश, बदन में गर्मी का एहसास… बीच बीच में होश और सजगता के आते द्वीप।
केले का भोज-6
ओ ओ ओ ओ ओ ह… खुद को शर्म में भिगोती एक बड़ी लहर, रोशनी के अनार की फुलझड़ी… आह..एक चौंधभरे अंधेरे में चेतना गुम हो जाती है।‘यह तो नहीं हुआ? वैसे ही अन्दर है !’… मेरी चेतना लौट रही है- अब क्या करोगी?’कुछ देर की चुप्पी ! निराशा और भयावहता से मैं रो र...
केले का भोज-5
मैं कुछ नहीं सुन पा रही थी, कुछ नहीं समझ पा रही थी। कानों में यंत्रवत आवाज आ रही थी- निशा… बी ब्रेव…! यह सिर्फ हम तीनों के बीच रहेगा…..!’
केले का भोज-4
क्षितिज कहीं पास दिख रहा था। मैंने उस तक पहुँचने के लिए और जोर लगा दिया…कोई लहर आ रही है… कोई मुझे बाँहों में कस ले, मुझे चूर दे… ओह…कि तभी ‘खट : खट : खट’…मेरी साँस रुक गई। योनि एकदम से भिंची, झटके से हाथ खींच लिया…खट खट खट…
केले का भोज-3
मैंने योनि के छेद पर उंगली फिराई। थोड़ा-सा गूदा घिसकर उसमें जमा हो गया था। ‘तुम्हें भी केले का स्वाद लग गया है !’ मैंने उससे हँसी की।