लीलाधर
सत्यापित कहानीकार (Verified)@llthhara
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
लीलाधर की रचनाएं
केले का भोज-8
वह फिर मुझ पर झुक गई। कम से कम आधा केला अभी अन्दर ही था।‘खट खट खट !’… दरवाजे पर दस्तक हुई।मैं सन्न। वे दोनों भी सन्न। यह क्या हुआ?‘खट खट खट’… ‘रमेश, दरवाजा खोलो।’
केले का भोज-7
पूजा ने जब एक उजला टिशू पेपर मेरे होंठों के बीच दबाकर उसका गीलापन दिखाया तब मैंने समझा कि मैं किस स्तर तक गिर चुकी हूँ। एक अजीब सी गंध, मेरे बदन की, मेरी उत्तेजना की, एक नशा, आवेश, बदन में गर्मी का एहसास… बीच बीच में होश और सजगता के आते द्वीप।
केले का भोज-6
ओ ओ ओ ओ ओ ह… खुद को शर्म में भिगोती एक बड़ी लहर, रोशनी के अनार की फुलझड़ी… आह..एक चौंधभरे अंधेरे में चेतना गुम हो जाती है।‘यह तो नहीं हुआ? वैसे ही अन्दर है !’… मेरी चेतना लौट रही है- अब क्या करोगी?’कुछ देर की चुप्पी ! निराशा और भयावहता से मैं रो र...
केले का भोज-5
मैं कुछ नहीं सुन पा रही थी, कुछ नहीं समझ पा रही थी। कानों में यंत्रवत आवाज आ रही थी- निशा… बी ब्रेव…! यह सिर्फ हम तीनों के बीच रहेगा…..!’
केले का भोज-4
क्षितिज कहीं पास दिख रहा था। मैंने उस तक पहुँचने के लिए और जोर लगा प्रिया…कोई लहर आ रही है… कोई मुझे बाँहों में कस ले, मुझे चूर दे… ओह…कि तभी ‘खट : खट : खट’…मेरी साँस रुक गई। योनि एकदम से भिंची, झटके से हाथ खींच लिया…खट खट खट…
केले का भोज-3
मैंने योनि के छेद पर उंगली फिराई। थोड़ा-सा गूदा घिसकर उसमें जमा हो गया था। ‘तुम्हें भी केले का स्वाद लग गया है !’ मैंने उससे हँसी की।
केले का भोज-2
मुझे उसके दोस्तों को देखकर उत्सुकता तो होती पर मैं उनसे दूर ही रहती। शायद पूजा की बातों और व्यवहार की प्रतिक्रिया में मेरा लड़कों से दूरी बरतना कुछ ज्यादा था। वह नहीं होती तो शायद मैं उनसे अधिक मिलती-जुलती। उसके जो दोस्त आते वे उससे ज्यादा मुझे ही...
केले का भोज-1
प्रिय पाठको,आपने मेरी पिछली कहानियों स्वीटी और पुष्पा का पुष्प को जितना तहेदिल से पसंद किया है उससे मेरे इस विश्वास को बल मिला है कि हिन्दी में परिष्कृत भाषा में सुसंस्कृत पात्रों को लेकर रची गई कहानियाँ पसंद की जा सकती हैं और उनका पाठक वर्...