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लड़कियों की गांड चुदाई पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 1,278 बार

तीन पत्ती गुलाब-41

प्रेम गुरु

21 Sep 2024 को प्रकाशित

तीन पत्ती गुलाब-41
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मैंने गौरी को अपनी गोद में उठा लिया।“ओह… रुको तो सही? मुझे कुल्ला करके हाथ तो धो लेने दो प्लीज…”

मैं गौरी को अपनी गोद में उठाए वाशबेसिन की ओर ले आया। उसने किसी तरह हाथ धोये और कुल्ला किया। अब मैं उसे उसे लेकर आर्म्स वाले सिंगल सोफे पर बैठ गया और उसे अपनी गोद में बैठा लिया। मेरी लुंगी इस आपाधापी में खुल कर नीचे गिर गई।“गौरी इन कपड़ों में तुम्हारे नितम्ब बहुत खूबसूरत लगते हैं। गौरी मेरा मन इनको प्यार करने को कर रहा है.”

“ओह… उस रात मुझे बहुत दर्द हुआ था.”“मेरी जान … पहली बार में थोड़ा दर्द होता है उसके बाद तो बस एक मीठी और मदहोश करने वाली चुनमुनाहट सी ही होती है और अगले कई दिनों तक उसकी याद रोमांचित करती रहती है.”“प्लीज … आज रहने दो… कल कर लेना.” गौरी ने मेरी आँखों में आँखें डालते हुए कहा।

दोस्तो, यह खूबसूरत लौंडियों के नखरे होते हैं। उनकी ना में भी एक हाँ छिपी होती है।

“गौरी प्लीज… कल तक का इंतज़ार अब मैं सहन नहीं कर सकूंगा। पता नहीं तुम्हारे रूप में ऐसी क्या कशिश है कि तुम्हें बार-बार अपनी बांहों में भरकर प्रेम करने को मन करता है। कहीं तुमने मेरे ऊपर कोई जादू तो नहीं कर प्रिया?” कह कर मैं हंसने लगा।

अब गौरी के पास रूप गर्विता बनकर मुस्कुराने ले सिवा क्या बचा था।“अच्छा आप रुको … मैं अभी आती हूँ.” कहकर गौरी दुबारा बाथरूम में चली गई।

कोई 5-7 मिनट के बाद गौरी वापस आई। उसके एक हाथ में नारियल तेल की शीशी पकड़ रखी थी और दूसरे हाथ से अपने अपने शरीर पर लिपटे हुए तौलिए को कसकर पकड़ रखा था। वह बेचारा तौलिया उसकी उफनती जवानी को ढक पाने में कहाँ सक्षम था, वह तो केवल उसके उरोजों और सु-सु को ही थोड़ा ढक सकता था।

मैं तो फटी आँखों से अपलक उसे देखता ही रह गया। गौरी मेरे सामने आकर खड़ी हो गई और उसने अपनी आँखें बंद कर के अपनी मुंडी झुका ली थी।

मैंने उसके तौलिये को हाथ से खींचकर हटा प्रिया। शर्म के मारे गौरी ने अपने दोनों हाथों से अपनी सु-सु को ढक लिया। अब मैंने उसे अपनी गोद में बैठा लिया।“आप तो मुझे पूरा ही बेशर्म बनाकर छोड़ोगे?”

“मेरी जान … भोजन और भोग में शर्म नहीं की जाती.” कहते हुए मैंने गौरी की गर्दन और कानों पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी और उसके उरोजों को मसलना शुरू कर प्रिया। मेरा लंड उसके कसे हुए नितम्बों के नीचे दबा कसमसा रहा था। गौरी जान बूझकर अपने नितम्बों से मेरे लंड को दबा सा रही थी।

“गौरी तुम्हारा लड्डू तुम्हारे प्यार के लिए तरस रहा है मेरी जान!”“आह… तरसने दो…” कह कर गौरी ने एक बार अपने नितम्बों को थोड़ा सा उठाया और फिर से मेरे लंड को दबाने लगी।“गौरी तुम अपने पैर इस सोफे की आर्म्स पर रख लो तो आसानी होगी।”

गौरी ने मेरे कहे अनुसार अपने पैरों को सोफे की आर्म्स पर रख लिया। मेरा लंड उछलकर उसके नितम्बों की दरार से होता हुआ आगे की तरफ निकलकर उसकी सु-सु के चीरे से लग गया था। अब मैंने पास पड़ी शीशी से तेल निकाल कर अपने पप्पू पर लगा लिया। फिर मैंने गौरी की गांड के छेद को टटोला तो मुझे उस पर चिकनाई का अनुभव हुआ। मुझे लगता है गौरी पूरी तैयारी के साथ आई थी। गौरी ने अपने नितम्बों को थोड़ा सा ऊपर उठा लिया और मेरे पप्पू को पकड़ कर अपनी गांड के छेद पर लगा लिया।

नितम्बों में बीच लंड के चुभन स्त्री को बहुत जल्दी कामतुर बना देती है। अब मैं एक हाथ से उसकी सु-सु के पपोटे मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसके उरोजों की नुकीली फुनगियों को मसलने लगा था। साथ में उसके गालों और गर्दन पर चुम्बन की बौछारें भी चालू कर दी थी।

गौरी तो अब उछलने ही लगी थी। मेरी जाँघों पर उसके गद्देदार नितम्बों स्पर्श पाकर आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि अपने लैंडर रोवर को उसके ऑर्बिटर में डालने मेरी इच्छा कितनी बलवती होती जा रही थी।“गौरी मेरी जान… अब बेचारे पप्पू को और ज्यादा मत तरसाओ.” मैंने उसके गालों को चूमते हुए कहा।“आह… उईइ माँ… आपने पता नहीं मेरे ऊपर क्या जादू-टोना कर प्रिया है? आप पूरे कामदेव हो… आआईईई…”

गौरी का पूरा शरीर लरजने लगा था। गौरी तो रोमांच के मारे उछलने ही लगी थी। इस समय मेरा पप्पू अपने पूरे जलाल पर था। उसका सुपारा फूल सा गया था और लंड पूरा कठोर हो गया था।मेरा मन तो कर रहा था जैसे ही गौरी जल्दी से थोड़ी ऊपर उठे मैं अपने पप्पू को उसकी गांड के गुलाबी छेद के ठीक नीचे लगा दूं। और जैसे ही वह नीचे आये मेरा पप्पू एक ही झटके में अन्दर चला जाए। पर अभी जल्दबाजी में ऐसा नहीं किया जा सकता था।

मैंने उसकी मदनमणि पर अपनी तर्जनी अंगुली फिरा दी।“आआआईईई” रोमांच के कारण गौरी की किलकारी निकल गई।“गौरी तुम एक बार थोड़ा सा ऊपर उठो मैं अपने पप्पू को सेट करता हूँ फिर धीरे-धीरे उस पर बैठ जाना.”“ओहो… आप रुको… तो सही… एक मिनट…” कहते हुए गौरी ने अपने नितम्ब थोड़े से ऊपर उठा लिए। उसने मेरे पप्पू की गर्दन पकड़ ली और मेरे लिंगमुंड को अपनी गांड के गुलाबी छेद पर लगा लिया।

लगता है वह पहले से ही अपने आप को इस स्थिति के लिए तैयार कर चुकी थी। वह धीरे-धीरे नीचे होने लगी। एक दो बार तो लंड थोड़ा फिसला पर गौरी ने 2-3 बार निशाना साधे हुए अपने नितम्बों को ऊपर नीचे किया तो मेरा सुपारा उसकी गांड में सरकने लगा।

ये पल गौरी के लिए बहुत ही संवेदनशील थे। मैं दम साधे उसी तरह बैठा रहा। हाँ मैंने उसकी कमर को जरूर सहारा दिए रखा। वह थोड़ा सा रुकी और फिर धीरे-धीरे उसने अपने नितम्बों को नीचे करना शुरू कर प्रिया।मेरा पप्पू उसकी गांड को चीरता हुआ अन्दर समा गया।

उसके साथ ही गौरी की हल्की चीख सी निकल गई- उईईईईई…

मैंने कसकर उसे अपनी बांहों में भर लिया। उसने मेरी जाँघों पर हाथ रखकर थोड़ा उठने की कोशिश की पर मैंने उसे अपनी बांहों में जकड़ रखा था तो उसकी कोशिश बेकार थी। वह जोर-जोर से साँसें लेने लगी थी। उसका शरीर कांपने सा लगा था।

थोड़ी देर हम ऐसे ही बैठे रहे। गौरी अब थोड़ा संयत हो गई थी। अब मैंने गौरी को फिर से चूमना शुरू कर प्रिया। लंड अन्दर और ज्यादा कठोर होकर ठुमके लगाने लगा था।“गौरी तुम अपने शरीर को ढीला छोड़ दो फिर कोई दिक्कत नहीं होगी.”“आप मेरी जान लेकर मानोगे? आह…”“अरे नहीं मेरी जान … कोई अपनी जान कैसे ले सकता है… तुम तो मेरी जान हो… आई लव यू…”

गौरी को थोड़ा दर्द तो जरूर हो रहा था पर गौरी ने खूब सारी क्रीम और तेल अपनी गांड में लगा लिया था और मैंने भी अपने पप्पू पर ढेर सारा तेल लगा लिया था तो चिकनाई के कारण पूरा लंड झेलने में उसे ज्यादा परेशानी नहीं आई।

और अब तो वैसे भी मेरी तोतेजान की गूपड़ी इसकी अभ्यस्त हो ही गई है। गौरी ने अपने नितम्बों का संकोचन शुरू कर प्रिया था। सच कहता हूँ उसकी गांड अन्दर से इतनी कसी हुई थी कि मुझे लग रहा था जैसे किसी ने मेरे पप्पू की गर्दन ही दबोच रखी है।Gand Me Lundअब तो गौरी ने भी अपने नितम्ब हिलाने शुरू कर दिए थे। मैं उसके गालों गर्दन पर चुम्बन लेते जा रहा था। फिर मैंने अपना हाथ नीचे करके उसकी भगनासा को उँगलियों में लेकर मसलना शुरू कर प्रिया और दूसरे हाथ से उसके स्तन के निप्पल को भी मसलना चालू कर प्रिया। वह तो अब जोर-जोर से उछलने लगी थी साथ में आह… उईई… भी करती जा रही थी।

मैंने उसके चीरे पर अंगुलियाँ फिरानी चालू रखी और कभी-कभी उसके मदनमणि को भी मसलता जा रहा था। अचानक मुझे लगा गौरी की साँसें तेज होने लगी है और बुर ने संकोचन शुरू कर प्रिया है और उसका शरीर भी हिचकोले से खाने लगा है। और फिर अचानक उसके मुंह से एक रोमांच भरी किलकारी सी निकली और उसके साथ ही उसकी बुर ने पानी छोड़ प्रिया। मेरी अँगुलियों पर चिपचिपा सा पानी महसूस होने लगा।

लंड तो गांड के अन्दर बैठा अपने भाग्य को सराह रहा था। गौरी 3-4 बार और ऊपर-नीचे उछली और फिर उसका शरीर ढीला सा पड़ गया और वह लम्बी-लम्बी साँसे लेने लगी। मैंने उसे बांहों में भरे रखा और उसके गालों को चूमता रहा।

गौरी के पैर अभी भी सोफे के हत्थे पर ही थे। उसने अपने नितम्बों को थोड़ा ऊपर कर लिया था। अब मैंने नीचे से हलके हलके धक्के लगाना शुरू आकर प्रिया था। गौरी की मीठी सित्कारें निकलने लगी थी।

कोई 8-10 मिनट के बाद मुझे लगा गौरी थोड़ा थक सी गई है। पर मेरी ख़ुशी के लिए हर दर्द सहन कर रही है।“गौरी मेरी जान… अब दर्द तो नहीं हो रहा ना?”“दर्द तो इतना नहीं है पर मेरे पैर दुखने लगे हैं?”“तुम अपने पैर नीचे रख लो फिर आराम मिलेगा.”

गौरी ने धीरे-धीरे अपने पैर नीचे जमीन पर कर लिए। ऐसा करने से उसकी गांड का छेद बहुत ही कस गया था और अब धक्के नहीं लगाए जा सकते थे। बस उस आनंद को महसूस किया जा सकता था कि मेरा पूरा लंड गौरी के अन्दर समाया हुआ है। उसकी मखमली जांघें मेरी जाँघों से सटी हुई थी।

“एक… बात बोलूं?” गौरी ने शर्माते हुए कहा।“हम्म?” मैंने गौरी की कांख पर जीभ फिराते हुए कहा।“वो… वो…”ईइईस्सस्स स्सस… गौरी की यह शर्माने की आदत तो मेरा कलेजा ही चीर देगी।

“प्लीज बोलो ना?”“वो डॉगी स्टाइल में हो जाऊं क्या?”“अरे वाह… मेरी जान… तुमने तो मेरे मुंह की बात छीन ली? नेकी और पूछ-पूछ?”“ज्यादा दर्द तो नहीं होगा ना?”“अरे मेरी जान … तुम्हारे भैया की तरह मैं कोई अनाड़ी थोड़े ही हूँ? तुम चिंता मत करो.”

मेरे ऐसा कहने पर गौरी ने मेरी गोद से उठने का प्रयास किया तो मैंने उसके कमर पकड़ते हुए उठने से मना कर प्रिया। मैं जानता था एक बार अगर मेरा लंड बाहर निकल गया तो वापस डालने में बड़ी दिक्कत हो सकती है। इसलिए लंड अन्दर डाले हुए ही गौरी को डॉगी स्टाइल में करना ठीक रहेगा।

“गौरी मैं तुम्हें कमर से पकड़ कर गोद में उठाता हूँ फिर हम धीरे-धीरे बड़े वाले सोफे पर शिफ्ट हो जाते हैं. पर आराम से, जल्दबाजी मत करना!”“हओ”

गौरी को अपनी गोद में उठाये हुए मैं बड़े वाले सोफे की ओर आ गया। गौरी ने अपने घुटने मोड़ दिए और डॉगी स्टाइल में हो गई। लंड थोड़ा तो बाहर निकला था पर आधा तो अन्दर ही फंसा रहा था।

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तीन पत्ती गुलाब

कुल भाग: 42
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भाग 3
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भाग 4
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भाग 5
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भाग 6
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भाग 7
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भाग 8
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भाग 9
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भाग 10
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भाग 11
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भाग 12
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भाग 13
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भाग 14
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भाग 15
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भाग 16
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भाग 17
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भाग 18
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भाग 19
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भाग 20
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भाग 25
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