होम पर वापस जाएं
जवान लड़की पठन समय: 16 मिनट पढ़ा गया: 969 बार

तीन पत्ती गुलाब-28

प्रेम गुरु

22 Jul 2024 को प्रकाशित

तीन पत्ती गुलाब-28
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

मीनूर का जन्मदिन उत्सव और गुलाब की दूसरी पत्ती

मेरे पुराने पाठक जानते हैं अगस्त महीने में मीनूर का जन्मदिन आता है। एक बात आपको बता दूं कि मीनूर के जन्मदिन का मुझे बेसब्री से इंतज़ार रहता है। उस दिन हम लोग गांडबाजी भरपूर आनन्द लेते हैं।

आप तो जानते ही हैं आजकल गांडबाज़ी तो दूर की बात है पिछले एक महीने से मीनूर ने तो मुझे चूत के लिए भी तरसा प्रिया है। हाल यह है कि वह तो मुझे छूने भी नहीं देती बहाना तो सावन में व्रत का है। एक लम्बे इंतज़ार के बाद बड़ी मुश्किल से कल ही सावन ख़त्म हुआ है। आप मेरी उत्सुकता का अंदाज़ा लगा सकते हैं कि उसके जन्मदिन पर मिलने वाले उस अनमोल तोहफे (गांडबाजी) का मैं कितनी सिद्दत से इंतज़ार कर रहा हूँ।

आज मीनूर का जन्म दिन है। वैसे उसे इस प्रकार की प्राइवेट पार्टी (निजी उत्सव) में ज्यादा तामझाम पसंद नहीं है। वह ‘बस हम दोनों हमारा कोई नहीं’ वाला हिसाब रखती है। किसी तीसरे व्यक्ति को उत्सव में शामिल होने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।

पर इस बार पता नहीं 2-3 दिनों से मीनूर के जन्मदिन की तैयारियां बहुत जोरों पर है। मीनूर ने पिछले 2 दिनों से स्कूल से छुट्टी ले रखी है और गौरी के साथ मिलकर पूरे घर की अच्छे से सफाई की है। कमरे और हॉल के परदे नये बनवाये हैं। हॉल में रखा सिंगल बेड ड्राइंग रूम में शिफ्ट कर प्रिया है और सोफे को एक तरफ कोने में सेट कर के हॉल के बीच में डाइनिंग टेबल लगा दी है।कल दोनों ने बाज़ार से भरपूर खरीददारी भी की लगती है। स्टोर रूम में पड़े पैकेट्स देखकर तो लगता है जैसे पूरा बाज़ार ही खरीद लाई हों।आज मेरा मन भी छुट्टी करने का था पर ऑफिस में काम ज्यादा था तो मुझे जाना पड़ा अलबत्ता मैंने आज थोड़ा जल्दी आने का वादा जरूर किया था।

आज सानिया मिर्ज़ा (मीठी बाई) भी सुबह ही आ गई थी। आज पूरे घर की सफाई का जिम्मा उसके ऊपर ही डाला हुआ था। उसने काले रंग की धारियों वाली पेंट और लाल रंग की गोल गले की टी-शर्ट पहन रखी थी। इन कपड़ों में उसके गोल कसे हुए नितम्ब और चीकू बहुत ही खूबसूरत लग रहे थे। आज सानिया का उत्साह तो देखने लायक था। वह बहुत खुश नज़र आ रही थी।

पर आज सुबह-सुबह गौरी ने उसे जिस प्रकार झिड़की लगाई थी बेचारी सानिया की शक्ल तो रोने जैसी हो गई थी। मुझे गौरी का यह बर्ताव अच्छा तो नहीं लगा पर मैंने कहा कुछ नहीं। अब बेचारी मीठी बाई (सानिया) को क्या पता कि यहाँ आने के बाद मेरी तोतेजान अब ‘महारानी गौरी’ बन बैठी है भला उसे ‘तोते दीदी’ कहलाना गवारा कैसे हो सकता है?

मीनूर ने मेगा साइज़ केक का आर्डर पहले ही दे रखा था पर ऑफिस से आते समय केक और मिठाइयां आदि लेकर घर पहुँचने में 6:30 बज ही गए। लगता है गौरी और मीनूर ने तो पूरा घर ही सजा प्रिया था। दरवाजों पर बंदरवार, हॉल में रंग बिरंगे फर वाले कागजों की झालर और उनके बीच में बहुत से गुब्बारे। सामने वाली दीवार पर मोटे-मोटे अक्षरों में हैप्पी बर्थडे लिखा पेपर लगा था जिसके चारों ओर रंगीन रोशनी वाली लड़ियाँ लगाईं हुई थी।

मुझे हैरानी हो रही थी मीनूर अपना जन्म दिन पर इतना तामझाम पहले तो कभी नहीं करती थी। इस बार तो ग्रेट ग्रांड फिनाले जैसा प्रोग्राम लगता है।

मैंने साथ में लाया सारा सामान डाइनिंग टेबल पर रख प्रिया। मीनूर और गौरी नज़र नहीं आ रही थी। मैंने मीनूर को आवाज लगाईं तो सानिया (गौरी की बहन) स्टडी रूम से बाहर आई।

उसने गहरे सुनहरी रंग का लाचा (जवान लड़कियों का एक परिधान- भारी लहंगा, छोटी कुर्ती और चुनरी जैसा दुपट्टा) पहन रखा था जिसके बटन खुले हुए और अस्त-व्यस्त से लग रहे थे। सानिया बटनों को बंद करने की कोशिश कर रही लग रही थी। पर जिस प्रकार वो कुर्ती के बटन बंद करने की कोशिश कर रही थी मुझे लगता है या तो इस कुर्ती की साइज़ कुछ छोटी है या फिर सानिया के दोनों परिंदे इस तंग कुर्ती में कैद होने से इनकार कर रहे हैं।

हे भगवान् … इन कपड़ों में तो वह पूरी फुलझड़ी ही लग रही थी। आज उसने बालों को ढंग से संवारा था। उसने बालों का जूड़ा बना रखा था और उस पर एक गज़रा भी लगा रखा था। कटार जैसी पैनी आँखों में पायल, माथे पर बिंदी, होंठों पर लाल लिपस्टिक और चहरे पर फेशियल भी किया लगता था।

एक खास बात तो आपको और बताता हूँ उसने हाथों की कलाइयों में लाल रंग की चूड़ियाँ पहन रखी थी और अपने दोनों बाजुओं पर भी एक-एक गज़रा बाँध रखा था जैसे कोई बाजूबंद पहना हो।

“वो … आंटी ओल तोते दीदी बेडलूम में तैयाल हो लही हैं।”मैं सानिया की आवाज सुनकर चौंका, मैं तो उसके मस्त कबूतरों की हिलजुल में हो खोया हुआ था।“ओह … अच्छा” कह कर मैं सोफे पर बैठ गया।

“आपके लिए पानी लाऊँ?”“ओह … हाँ” मेरी नज़र तो सानिया के खूबसूरत टेनिस की गेंद तरह गोल उरोजों से हट ही नहीं रही थी। उसने कुर्ती के अन्दर ब्रा की जगह छोटी साइज़ की झीनी सी समीज पहन रखी थी। जिसमें हल्के ताम्बे जैसे गुलाबी रंगत लिए ये परिंदे तो मानो कह रहे हैं हमें आजाद कर दो … उड़ जाने दो।

आइलाआआआ …

सानिया एक हाथ से अपने ब्लाउज को पकड़े रसोई में पानी लेने जाने लगी। हालांकि उसके नितम्ब इतने ज्यादा बड़े तो नहीं थे पर उनकी हिलजुल से तो पता चलता है बस थोड़े ही दिनों में यह किसी को भी क़त्ल करने में सक्षम हो जायेंगे। एकबार मुझे अंगूर या गौरी ने बताया था कि यह गौरी से केवल 9 महीने ही छोटी है इसका मतलब उम्र के हिसाब से तो यह पूरी जवान हो चुकी है।

सानिया ठन्डे पानी की बोतल और उस पर खाली गिलास को ओंधा रखकर ले आई। दूसरे हाथ से वह अपना ब्लाउज संभालने की भी कोशिश कर रही थी जिसके बटन शायद बंद नहीं हो रहे थे। पानी की बोतल टेबल पर रखने के लिए जैसे ही वह झुकी उसके कसे ब्लाउज ने साथ छोड़ प्रिया और दोनों परिंदे उस झीनी कुर्ती को जैसे फाड़ कर बाहर निकलने को बेताब से नज़र आने लगे।

हे भगवान् !!! शरीर के अन्य भागों से थोड़े गोरे रंग के उभरे हुए से दो गोल अमरुद और उनके ऊपर छोटे से जामुन जैसे चूचक। उफ्फ्फ … क्या गज़ब की नक्कासही है … काश! मैं इन रसभरे गोल इलाहाबादी अमरूदों को छू सकता, होले से दबा सकता और मुंह में लेकर चूस सकता!हे लिंग महादेव! एक बार फिर से तेरी जय हो!!

सानिया थोड़ा सा पीछे हटकर फिर से अपने ब्लाउज के बटन बंद करने की कोशिश करने लगी।“अरे सानिया! क्या हुआ?”“ये बटन तो बंद ही नहीं हो लहे?”“ओह … लाओ … मुझे दिखाओ?”

सानिया मेरे सामने आकर खड़ी हो गई। मेरा दिल जोर से धक-धक करने लगा था और पप्पू महाराज को आपा खोने की आदत ही पड़ी है।“अरे पागल लड़की!” मैंने हंसते हुए कहा।“क्या हुआ?”“तुमने यह ब्लाउज ही उलटा पहना है, इसके हुक पिछली ओर बंद होते हैं.”“ओह … अच्छा … तभी यह बंद नहीं हो लहा है.”“लाओ मैं बंद कर देता हूँ? इसे उतारकर पिछली तरफ से पहनो.”“हओ”लगता है इस परिवार के सभी सदस्यों को ‘हओ’ और ‘किच्च’ बोलने की आदत खानदानी विरासत में मिली है।

अब सानिया ने वह कुर्ती उतार दी। कुर्ती उतारते समय मेरा ध्यान उसकी बगलों (कांख) पर चला गया। हल्के-हल्के बाल थोड़ी सी दूर में उगे हुए उसके जवानी की दहलीज पर खड़ी होने का संकेत कर रहे थे। अब वह सिर्फ झीनी समीज में थी और नीचे लहंगा।

याल्लाह … फिर तो उसने लहंगे के नीचे पेंटी भी कहाँ पहनी होगी!!!उसकी पिक्की के गुलाबी पपोटे और उनके बीच की झिर्री तो जरूर लाल रंग को होगी। याखुदा … उसकी पिक्की पर भी इसी तरह के नर्म मुलायम रेशम जैसे हल्के-हल्के बाल होंगे। मैं तो अपने होंठों पर जीभ फिराता ही रह गया।

उफ्फ्फ … पतली कमर में पहना लहंगा तो ऐसे लग रहा था जैसे अभी सरक कर नीचे आ जाएगा। उभरा हुआ सा पेडू और गोल मटोल से पेट के बीच गहरी नाभि। पतली छछहरी लम्बी सुतवां बाहें और पसलियों से थोड़ा ऊपर उस झीनी सी समीज में झांकते हुए हल्के गुलाबी रंग के दो नन्हे परिंदे ऐसे लग रहे थे जैसे अभी अपने पंख खोल कर उड़ जायेंगे।उसके चूचक तो स्पंज की तरह गोल उभरे हुए से लग रहे हैं इसका मतलब अभी उसकी घुन्डियाँ (निप्पल्स) नहीं बनी हैं। मेरा दिल इतनी जोर से धड़क रहा था कि मुझे लगा जैसे मेरा दिल हलक के रास्ते अभी बाहर आ जाएगा।

मैंने कुर्ती को अपने हाथ में ले लिया और फिर सानिया से उसमें एक हाथ डालने को कहा। उसने कुर्ती की एक बांह में हाथ डालने के लिए जैसे ही अपना हाथ थोड़ा सा ऊपर उठाया तो उसकी नर्म मुलायम स्निग्ध हल्के रेशमी बालों युक्त कांख एक बार फिर से नज़र आ गई।

वाह … क्या सांचे में ढला बुत तराशा है। अब मैं सोच रहा था इसे भगवान् की कारीगरी कहूँ या फिर गुलाबो का धन्यवाद करूँ!

सानिया ने अब थोड़ा घूमकर अपना दूसरा हाथ भी कुर्ती की बांह में डाल प्रिया। अब उसकी नर्म मुलायम चिकनी पीठ मेरे सामने थी। मैंने अब हुक लगाने की कोशिश की। कुर्ती कुछ तंग (कसी हुई) लग रही थी। अगर उसके चीकुओं को आगे से थोड़ा सा सेट कर प्रिया जाए तो फिर कुर्ती के हुक आसानी से बंद हो जायेंगे। मैंने अपना एक हाथ उसकी कुर्ती के अन्दर डालकर उसके एक चीकू को हाथ में पकड़ कर एडजस्ट किया।

आह … फोम के तरह गुदाज़ और नर्म मखमली सा अहसास बताने के लिए मेरे पास कोई शब्द ही नहीं हैं।

प्रिय पाठको! अगर मैं कोई बहुत बड़ा कवि या महान लेखक होता तो सानिया के इस सौन्दर्य का वर्णन करते हुए जरूर कोई ग़ज़ल, कविता या प्रेम-ग्रन्थ ही लिख डालता पर मैं कोई महान लेखक या कवि या लेखक कहाँ हूँ? जो देखा और महसूस किया साधारण सी भाषा में लिख प्रिया है।

“उईईईई …” सानिया थोड़ा सा झुककर हंसने लगी।“क्या हुआ?”“मुझे गुदगुदी हो लही है.”“बस हो गया … हो गया … बस एक मिनिट … इस दूसरे दूद्दू को भी एडजस्ट कर दूं.”और फिर मैंने उसके दूसरे चीकू को अपने हाथ में लेकर थोड़ा एडजस्ट किया सानिया थोड़ा झुककर फिर हंसने लगी।

मेरा मन कर रहा था काश! वक़्त थम जाए और मैं सानिया के इन नन्हे परिंदों का मखमली और स्पंजी स्पर्श इसी तरह महसूस करता रहूँ।

मैंने एक बार फिर से अपनी अंगुलिओं को उसके चुचकों पर फिराई और अब तो हुक बंद करने की मजबूरी थी।

हुक अब तो ठीक से बंद हो गए थे। मैंने सानिया के नितम्बों पर एक हल्की सी थपकी लगाईं और फिर कहा- लो भई सानिया मिर्ज़ा! अब तुम आराम से टेनिस खेल सकती हो. तुम्हारे दूद्दू यानि हुक्स की समस्या ख़त्म।“थैंक यू अंकल.” सानिया ने हंसते हुए मेरा धन्यवाद किया।

यह ‘थैंक यू’ तो ठीक था पर उसका मुझे अंकल संबोधन बिलकुल अच्छा नहीं लगा। मैंने ध्यान प्रिया इस आपाधापी में उसके होंठों पर लगी लिपस्टिक भी थोड़ी फ़ैल सी गयी है और गालों पर भी जो रंग रोगन किया हुआ है वह भी फ़ैल सा गया है।

मेरे लिए तो यह सुनहरी मौक़ा था।मैंने सानिया को अपने पास आने का इशारा करते हुए कहा- अरे सानिया, यह तुम्हारी लिपस्टिक तो लगता है खराब हो गई है. लाओ मैं इसे भी साफ़ कर दूं.

सानिया इठलाती सी मेरे पास आकर खड़ी हो गयी। मेरा मन तो उसे बांहों में भर लेने या गोद में बैठा लेने को करने लगा था और पप्पू तो पैंट में कोहराम ही मचाने लगा था। मीनूर और गौरी तो कमरे में पता नहीं अभी कितनी देर और लगाएंगी, तब तक तो मैं इस नादान और कमसिन फुलझड़ी के गालों और होंठों को कम से कम छूकर तो देख ही सकता हूँ।

सानिया अब मेरे पास आकर मेरे सामने फर्श पर बैठ गई। मैं तो चाहता था सानिया मेरे पास सोफे पर ही मेरी बगल में चिपक कर बैठ जाए पर यह कहाँ संभव था।साली ये मीनूर भी गौरी और सानिया को कितना डराकर रखती है? मजाल है कोई बेअदबी (अशिष्टता) कर दे।

मैंने अब उसका चेहरा अपने हाथों में भर लिया। रूई के फोहे जैसे रेशम से मुलायम गाल मेरे हाथों के बीच में थे। मुझे गौरी का वह पहला चुम्बन याद आ गया। अगर इस समय गौरी मेरे सामने होती तो मैं उसके होंठों को जबरदस्ती चूम लेता पर सानिया के साथ अभी यह सब कहाँ संभव था।

अब मैंने उसके होंठों पर हाथ फिराया। गुलाब की पंखुड़ियों जैसे नाजुक होंठ फड़फड़ा से रहे थे। मैंने जेब से रुमाल निकाला और उसके होंठों पर फैली लिपस्टिक को करीने से साफ़ कर प्रिया। अब मैंने सानिया को अपने होंठों पर जीभ फिराने को कहा। सानिया ने मेरे कहे मुताबिक़ किया तो सच कहता हूँ मुझे एकबार यही विचार आया अगर यह मेरे पप्पू के सुपारे पर इसी तरह जीभ फिरा दे तो साला दूसरे जन्म (पुनर्जन्म) का झंझट ही ख़त्म हो जाए।

अब मैंने फिर से उसके गालों पर हाथ फिराया और अपने उसी रुमाल से उसके चहरे लगे पाउडर और रूज को थोड़ा ठीक कर प्रिया। और फिर मैंने सानिया के गालों पर एक हल्की सी चिकोटी काटते हुए कहा- लो भई सानिया मैडम तुम्हारे गाल और होंठ भी अब मस्त हो गए हैं।

‘आआईईईई …” करती हुई सानिया स्टडी रूम में भाग गई और मैं लोल की तरह बैठा अपने हाथों की उन खुशकिस्मत अँगुलियों को देख और चूम रहा था जिसने अभी-अभी दो खूबसूरत परिंदों की हिलजुल और उसके नरम रेशमी गालों और गुलाबी होंठों का स्पर्श महसूस किया था।

और फिर मैं अपनी आँखें बंद कर बैडरूम का दरवाज़ा खुलने का इंतज़ार करने लगा जिसमें मीनूर और गौरी आज मुझ पर बिजलियाँ गिराने के लिए पता नहीं कौन-कौन से अस्त्र-शस्त्र से अपने आप को लेश करने वाली हैं??

दिया पाठको और पाठिकाओ! आप लोग जरूर सोच रहे होंगे इन छोटी-छोटी बातों को लिखने का यहाँ क्या अभिप्राय है? यह कहानी तो गौरी के बारे में है? फिर इस नए मुजसम्मे (गुलाब की दूसरी पत्ती) का किस्सा यहाँ लिखने क्या प्रयोजन है?

दोस्तो! मुझे लगता है मैं कोई पिछले जन्म की अभिशप्त आत्मा हूँ। पता नहीं मैं अभी तक अपनी सिमरन को क्यों नहीं भूल पा रहा हूँ? सच कहूं तो मिक्की, पलक, अंगूर, निशा, सलोनी और अब गौरी, मीठी या सुहाना में कहीं ना कहीं मुझे सिमरन का ही अक्स (छवि) नज़र आता है। जब भी मैं सुतवां जाँघों के ऊपर कसे हुए नितम्ब देखता हूँ मुझे बरबस वह सिमरन की याद दिला देती है।मुझे लगता है मैं किसी भूल भुलैया में भटक रहा हूँ और इस मृगतृष्णा में कहीं ना कहीं अपनी सिमरन को ही खोज रहा हूँ पता नहीं यह तलाश कब ख़त्म होगी?

मैं अभी इन विचारों में खोया हुआ था कि बैडरूम का दरवाज़ा खुला और …कहानी जारी रहेगीsupport@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

तीन पत्ती गुलाब

कुल भाग: 42
भाग 1
भाग 1: पढ़ें
भाग 2
भाग 2: पढ़ें
भाग 3
भाग 3: पढ़ें
भाग 4
भाग 4: पढ़ें
भाग 5
भाग 5: पढ़ें
भाग 6
भाग 6: पढ़ें
भाग 7
भाग 7: पढ़ें
भाग 8
भाग 8: पढ़ें
भाग 9
भाग 9: पढ़ें
भाग 10
भाग 10: पढ़ें
भाग 11
भाग 11: पढ़ें
भाग 12
भाग 12: पढ़ें
भाग 13
भाग 13: पढ़ें
भाग 14
भाग 14: पढ़ें
भाग 15
भाग 15: पढ़ें
भाग 16
भाग 16: पढ़ें
भाग 17
भाग 17: पढ़ें
भाग 18
भाग 18: पढ़ें
भाग 19
भाग 19: पढ़ें
भाग 20
भाग 20: पढ़ें
भाग 21
भाग 21: पढ़ें
भाग 22
भाग 22: पढ़ें
भाग 23
भाग 23: पढ़ें
भाग 24
भाग 24: पढ़ें
भाग 25
भाग 25: पढ़ें
भाग 26
भाग 26: पढ़ें
भाग 27
भाग 27: पढ़ें
भाग 28
भाग 28: पढ़ें
भाग 29
भाग 29: पढ़ें
भाग 30
भाग 30: पढ़ें
भाग 31
भाग 31: पढ़ें
भाग 32
भाग 32: पढ़ें
भाग 33
भाग 33: पढ़ें
भाग 34
भाग 34: पढ़ें
भाग 35
भाग 35: पढ़ें
भाग 36
भाग 36: पढ़ें
भाग 37
भाग 37: पढ़ें
भाग 38
भाग 38: पढ़ें
भाग 39
भाग 39: पढ़ें
भाग 40
भाग 40: पढ़ें
भाग 41
भाग 41: पढ़ें
भाग 42
भाग 42: पढ़ें
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

अब्बू के दोस्त और मेरी अम्मी की बेवफाई -3
जवान लड़की
अध्यापक के ऑफिस में
जवान लड़की

अध्यापक के ऑफिस में

प्रेषक : बाघ द टाईगर

8 मिनट 609
दोस्त की गर्लफ़्रेण्ड निम्मी माय लव
जवान लड़की

दोस्त की गर्लफ़्रेण्ड निम्मी माय लव

मेरा नाम अरिन्दम ठाकुर है और मैं मुम्बई में माडलिंग करता हूँ। मेरी उम्र 26 साल और लम्बाई 5 फीट 11 इंच है और मैं देखने में बेहद स्मार्ट हूँ।

10 मिनट 675

पाठकों की राय

1 टिप्पणी

राहुल स्मार्टी

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।