सेक्सी लड़की के घर जाने का मौक़ा मुझे मिला. वो मेरे दोस्त की चचेरी बहन थी जिसे मैंने बहुत पहले से चाहता था पर अपनी इच्छा को उसके सामने जाहिर नहीं कर पाया था.
मेरे प्यारे दोस्तो और प्यारी-प्यारी, सोनी-सोनी, गर्मागर्म भाभियो,
मैं फिर आया हूँ अपनी एक और चुदाई स्टोरी लेकर जिसे लिखने की इजाजत मुझे मेरी दोस्त काजल ने आखिरकार दे ही दी।बहुत समय से मैं काजल से उसके और मेरे बीच बने सम्बन्ध को लिखने की अनुमति मांग रहा था पर वो सेक्सी लड़की इसको लेकर बिल्कुल भी सहज नहीं थी।
जैसा कि मैंने पहले भी बताया है कि मैं अपनी किसी भी कहानी को तभी लिखता हूँ जब मैं अपने पार्टनर से उसके और मेरे बीच बने सम्बन्ध के बारे में लिखने की अनुमति ले लेता हूँ।पार्टनर से अनुमति मिलने के बाद ही मैं उसके और मेरे बीच हुए हर क्रिया-कलाप को विस्तार में लिखता हूँ क्यूंकि मैं नहीं चाहता कि कहानी लिखने के कारण मेरे और मेरे पार्टनर के सम्बन्ध भंग हों।
चलिए, कहानी पर आते हैं।मैं आपको बता दूँ कि यह घटना मेरे साथ दो साल पहले ही घटी है और काजल मेरे एक घनिष्ठ मित्र तरुण की चचेरी बहन है।
आशा है कि सभी दोस्तों ने अपने अपने लण्ड को तैयार होने का इशारा कर प्रिया होगा.और सभी भाभियाँ भी अपनी मुनिया को एक दो बार तो मुट्ठी में लेकर मसोड़ ही चुकी होंगी क्यूंकि आज आपका ढेर सारा पानी निकलने वाला है।
तो दोस्तो और भाभियो, यह है मेरी तरफ से आप सबके लिए लॉक-डाउन का नायाब तोहफा!
काजल को मैं कई सालों से जानता था पर उससे कभी बात करने का मौका नहीं लगा था। तरुण और मेरी दोस्ती बहुत पुरानी है.
तरुण जयपुर का रहने वाला है। जब भी मैं जयपुर जाता तो तरुण के घर ही रुकता और तभी उसकी चचेरी बहन काजल से आँखें लड़ जाती।
आँखें तो लड़ जाती पर मैं हर बार बस तिलमिला कर रह जाता कि इतने सही माल को जाने कैसे भोग सकूंगा।
फिर एक दिन बातों के दौरान तरुण से पता चला कि काजल की शादी एक आर्मी वाले से तय हो गयी है और अगले महीने उसकी शादी है।यह सुनकर मैं बहुत उदास हुआ और जैसे मन मार कर रह गया।
पर कर भी क्या सकते थे.किसी ने बहुत खूब कहा है कि ‘मुँह मांगी तो मौत भी नहीं मिलती इस दुनिया में!’
कुछ महीनों बाद मुझे राजस्थान के बिज़नेस टूर पर जाना था और हमेशा की तरह मैं तरुण से मिलता हुआ ही जाने वाला था।
तरुण ने मेरा प्रोग्राम जान कर पूछा कि अगर मुझे दिक्कत ना हो तो जोधपुर में काजल के लिए कुछ सामान लेता जाऊँ।आज तो जैसे भगवान् ने मेरी सुन ही ली थी।
तरुण को नहीं पता था कि मेरे मन में काजल को लेकर क्या भावनाएं हैं।
खैर मैंने अगले दिन सुबह उठकर तरुण से काजल का सामान लिया और अपने टूर पर आगे बढ़ गया।
मैं अपना काम निपटाता हुआ दो दिन बाद जोधपुर पंहुचा और मैंने सबसे पहले काजल को फ़ोन करके मेरे जोधपुर पहुंचने की खबर दी.जिसे सुनकर वो बहुत खुश हुई और उसने मुझे अपने घर की गूगल लोकेशन भी भेज दी जिससे मुझे वहां पहुंचने में ज्यादा दिक्कत ना हो।
मैं शाम में ही तैयार होकर, अच्छा सा परफ्यूम लगा कर काजल के घर पहुंच गया और उसके घर की घंटी बजा दी।शाम के कोई 7 बजे होंगे और मैं अपने तेज़ धड़कते दिल के साथ काजल के दरवाज़ा खोलने का इंतज़ार कर रहा था।
क्यूंकि काजल की शादी एक आर्मी वाले से हुई थी तो मैं उसके पति के लिए एक इम्पोर्टेड स्कॉच की बोतल भी ले गया था।
कुछ देर बाद जैसे एक हुस्न की परी ने दरवाज़ा खोला।वो सेक्सी लड़की काजल ही थी।
दूध जैसा गोरा बदन, काली साड़ी में लिपटा ऐसे लग रहा था जैसे कोई अप्सरा धरती पर उतर आयी हो।
काजल ने अपनी साड़ी नाभि से नीचे बाँधी थी और उसकी अंडाकार नाभि मुझे आकर्षित कर रही थी।उसके बदन से आती मदमस्त करने वाली सुगंध मेरे नथुनों से टकरा रही थी और मुझे पागल कर रही थी।
मैं उसको देखते ही मन्त्र-मुग्ध हो गया और जाने कहाँ खो गया.कि काजल ने मुझे हिलाते हुए पूछा- यहीं खड़े रहोगे या अंदर भी आओगे?
मैं जैसे किसी निंद्रा से लौटा था और काजल के पीछे पीछे घर के अंदर चल प्रिया।काजल के मटकते चूतड़ जैसे मुझसे कह रहे थे कि आओ और हमे भींच दो, रगड़ दो, चोद दो।पर मेरे पास सिवाए आँखें गर्म करने के और कोई चारा बाकी नहीं था।
काजल मुझे ड्राइंग रूम में ले गयी और मुझे बैठने को कह कर पानी लेने रसोई की तरफ बढ़ गयी।
मैं एकटक उसको जाते हुए देखता रहा।
काजल एक ऐसे जिस्म की मालकिन थी कि एक मुर्दे को भी ज़िंदा कर दे।अब तक मेरा छोटू भी बगावत करने लगा था पर मैंने उसको हलके से सहला कर आश्वासन प्रिया कि ये माल तेरी मलाई जरूर चखेगा।
थोड़ी ही देर में काजल वापस आ गयी और मुझे पानी देने लगी।मेरी नज़र तो सिर्फ उसका हुस्न-पान करने में लगी थी।
उसका झुकना था कि मेरी नज़र उसके ब्लाउज के गहरे गले से अंदर होती हुई उसके चूचों के बीच की कोमल और गहरी नाली पर जा टिकी।
मैं काजल के जिस्म का पूरा लुत्फ़ ले रहा था।मैंने काजल से उसके पति के बारे में पूछा तो पता चला कि रोहित (काजल के पति का नाम) की पोस्टिंग राजस्थान से बाहर है और वो शादी के कुछ दिनों बाद ही वहां शिफ्ट हो गया था।
मुझे समझ आया कि ये एक प्यासी, तड़कती-फड़कती जवानी है और कुछ हो ना हो, लण्ड पाने को बेताब भी जरूर होगी।
मैंने बात आगे बढ़ाई- नयी जगह पर पूरा दिन अकेले बिताना तो बहुत मुश्किल होता होगा?काजल- अब तो आदत पड़ गयी है। किसी भी तरह से आर्मी का हिस्सा होना बहुत गौरव की बात है पर पति-पत्नी का वियोग बहुत परेशान करता है।
विकास- समझ सकता हूँ पर शादी के बाद कुछ समय तो नए जोड़े को साथ रहना ही चाहिए। आखिर तुम्हारे भी कुछ अरमान होंगे।
काजल मेरी बात काटते हुए- आप डिनर तो नहीं कर आए? जब आपका फ़ोन आया था तो मैं खुश हो गयी थी कि बहुत दिनों बाद आज अकेले डिनर नहीं करना पड़ेगा।विकास- तुम्हारे साथ डिनर जरूर करूँगा। अगर करके आया भी होता तो तुम्हारे साथ दोबारा कर लेता।
काजल मुस्कुराते हुए- ऐसी भी कोई ज़बरदस्ती नहीं है विकास! मैं आपको विकास बुलाऊँ तो आपको कोई दिक्कत तो नहीं?विकास- जो चाहो, कहकर बुला सकती हो। मैं इतना भी फॉर्मल नहीं। पहले अपना सामान तो देख लो।
काजल जैसे खुश हो गयी।उसने उठ कर अपना सामान देखा और मेरी नज़र फिर से उसके पूरे शरीर का जैसे x-ray करने में लग गयी।
उसकी नज़र स्कॉच की बोतल पर पड़ी तो उसने कहा- इसकी क्या जरुरत थी?विकास- मैंने सोचा आर्मी वाले के लिए इससे अच्छा तोहफा कुछ नहीं हो सकता तो साथ ले आया। सोचा था दो-दो पैग भी लगा लेंगे पर …काजल- तो अब भी कोई दिक्कत नहीं, आप अपने पैग लगाओ। आपको कोई नहीं रोकेगा।
विकास- अकेले पीने में वो मज़ा कहाँ काजल! रोहित होते तो बात ही कुछ और होती। वैसे भी आर्मी वालों के साथ शराब पीने की बात ही कुछ अलग होती है।काजल- ऐसी बात है तो आज आर्मी वाले की पत्नी के साथ एक जाम लगा लो। उतना मज़ा ना सही, कुछ कम में ही गुजारा कर लो।विकास- नेकी और पूछ पूछ! चलो फिर, इसी से शुरू करते हैं।
इतना कह कर मैं खड़ा होकर काजल की तरफ बढ़ा और उसको ग्लास, बर्फ, सोडा और नमकीन लाने को कहा।काजल ने भी बिना देर किये, थोड़े ही समय में सब चीज़ों को टेबल पर लगा प्रिया।
मैंने सब चीज़ों को ठीक से लगाया और अपने मोबाइल पर हलके गाने चला कर थोड़ा समां बाँधने की कोशिश की।काजल ने भी कमरे की लाइट थोड़ी कम की और एक परफेक्ट समां बना प्रिया।
कुछ ही देर में मेरे सपनों की परी मेरे सामने (टेबल की दूसरी तरफ), मेरे साथ शराब पीने के लिए तैयार थी।मन में जाने कैसे कैसे ख्याल आ रहे थे।
पर यह ख्याल बहुत ज़ोर मार रहा था कि आज काजल के साथ रास जरूर रचेगा।मन में यह ख्याल भी आ रहा था कि काजल ने शराब कब से पीनी शुरू की क्योंकि इनके खान-दान में सिवाय तरुण के कोई दारु पीना तो दूर, छूता तक नहीं।पर जो भी हो, अभी बहुत सी बातें बाकी थी और पूरी रात भी बाकी थी।
मैंने छोटे छोटे से पैग बनाने शुरू किये और चोर निगाहों से काजल को देखता रहा।काजल की हर सांस के साथ मैं उसके चूचों को ऊपर नीचे झूलते साफ़ देख सकता था। काजल के चूचों में शायद अचानक से वृद्धि हुई थी क्यूंकि शादी से पहले काजल के चूचे कोई 32″ के रहे होंगे जबकि अब वो 36″ या उससे भी कुछ बड़े महसूस हो रहे थे।
होने को तो ये काम रोहित का भी हो सकता है पर कुछ ही महीनों में इतने बड़े होना, मेरे लिए अचम्भे की बात थी।
मैंने पैग काजल की तरफ बढ़ाते हुए उसको एक बार फिर आँखें भर कर निहारा और उसको सोडा-पानी खुद डालने को बोला।
काजल- स्कॉच पीने का मज़ा सिर्फ ‘ऑन दी रॉक्स’ आता है मुझे! आप पानी से लेंगे या सोडे से?विकास- मैं भी कंपनी पूरी देता हूँ काजल। आप ‘ऑन दी रॉक्स’ हैं तो हम भी आग से कम नहीं।काजल सवालिया निगाहों से देखते हुए- तो हो जाए ‘बॉटम्स अप’?
हम दोनों ने तक़रीबन एक साथ ही पैग ख़त्म किया पर काजल ने जितना इसको एन्जॉय किया, मैं उतना नहीं कर सका।मेरा दिमाग तो कहीं और ही चल रहा था।
इससे पहले मैं अगला पैग बनाता, काजल ने बोतल उठा ली और अगला पैग खुद बनाने लगी।काजल जैसे इस काम में माहिर हो चुकी थी।
उसने पैग भी पूरा बनाया, मेरी तरह छोटा नहीं।मुझे समझते देर नहीं लगी कि काजल कुछ ही महीनों में पूरी खिलाड़ी हो चुकी थी।
पर अभी मैंने बहुत कुछ जानना था और वैसे भी, किसी के साथ ज्यादा समय बिताना हो तो बातें जरूरी हो जाती हैं।और मुझे तो पूरी रात इसके साथ ही बितानी थी दोस्तो।
स्वीटी-1
मैंने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए काजल से कहा- बुरा ना मानो तो कुछ जान सकता हूँ?काजल- कहीं ये तो नहीं जानना चाहते कि मैं शराब कब से पी रही हूँ?
विकास- ये तो बिल्कुल नहीं … पर तुमने जिक्र किया है तो अब बता भी दो।काजल- आर्मी वालों के यहाँ जो ये सब नहीं करता उसको पिछड़ा हुआ मानते हैं। और रोहित इन सब बातों को ज्यादा महत्व नहीं देते। जब भी पीते हैं तो एक पैग मेरा भी साथ ही बनाते हैं। फिर उनके जाने के बाद, समय काटने को एक-एक से शुरू हुआ और आज सब आपके सामने है। पर मेरे घर वालों को ये सब नहीं पता।
विकास- तुम बेफिक्र रहो, मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगा।काजल- धन्यवाद।
विकास- तुमने मेरे साथ दारु पी कर मुझे मान ही प्रिया है और मैं इसका पूरा सम्मान करूँगा।काजल- आप दारु के साथ खाने में कुछ और लेंगे क्या?विकास- जो भी आपने डिनर में बनाया है, वही सब्ज़ी ले आइये। दारु का मज़ा और बढ़ जाएगा।
काजल ने दूसरा पैग भी झट से खींचा और उठ कर रसोई की तरफ बढ़ गयी।मैं अपने पैग को आराम से पीता हुआ आगे की तैयारी में था कि कैसे बात बढ़ाई जाए।
बंदी तो तक़रीबन तैयार सी ही थी पर अगर मैं गलत सोच रहा हूँ तो … मेरे तो लग जाने थे।
वैसे भी अकेली बंदी के साथ … उसके घर में … और वो भी आर्मी कैंटोनमेंट में … गुरु, अगर कुछ भी उन्नीस इक्कीस हुआ तो बे-भाव की पड़ेगी।मैं ये सब सोच ही रहा था कि काजल हाथ में सामान लिए कमरे में वापस आ गयी।
उसकी चाल में थोड़ी लहक थी और ये पक्का था कि उसको दारु चढ़ने लगी है।तब मैंने सोचा, अगर ये एक दो पैग और लगा ले तो मेरी रात तो रंगीन हो जानी है।
मैंने थोड़ी थोड़ी सब्ज़ी कटोरी में करते हुए अगले पैग के लिए बोतल उठायी ही थी कि काजल ने अपना ग्लास खींच लिया और अगले पैग को मना करने लगी।
विकास- ये क्या बात हुई? साथ निभाने का कह कर, बीच में ही साथ छोड़ रही हो?काजल- मेरा हो गया। मैं इतना ही लेती हूँ।विकास- वो तो जब अकेली होती हो, तब ना … रोहित के साथ भी बस इतनी ही लेती हो क्या?
काजल- रोहित के साथ कुछ सोचना नहीं पड़ता। वो होता है तो मैं बेफिक्र होती हूँ।विकास- मेरे साथ भी बेफिक्र हो सकती हो। मेरे से क्या डर?
काजल- डरने की कोई बात नहीं। आप कह रहे हो तो एक-एक और हो जाए पर उसके बाद नहीं। फिर बस डिनर करेंगे।विकास- जैसे तुम कहो। कहोगी तो यहीं बंद करते हैं।
काजल- ठीक है … बस एक-एक और पर ये मेरा आखिरी होगा। उसके बाद नहीं। तुम पैग बनाओ, मैं अभी आती हूँ। जाने क्यूँ … गर्मी बहुत लग रही है आज!
इतना कह कर काजल अपना ग्लास मेरे तरफ बढ़ा कर उठी और चली गयी.शायद अपने बेड रूम की तरफ।
मैंने उसके ग्लास को पहले चूमा फिर जहाँ काजल के लिपस्टिक के निशान थे, वहां चाटा और उसके बाद उसका ‘सो-कॉल्ड’ आखिरी पैग बनाने लगा।
मैंने जानबूझ कर इस बार पैग को थोड़ा और दमदार बनाया जिससे काजल को अच्छा नशा हो जाए और मैं मौके का फायदा उठा सकूँ।
कुछ ही देर में काजल के वापस आने की आहट सुन मैंने उसका पैग उसकी तरफ बढ़ाते हुए जो उसकी तरफ देखा तो जैसे मैं सपनों की दुनिया में चला गया।
काजल अपनी साड़ी बदल कर एक भीनी और तंग नाईटी पहने मेरे सामने खड़ी थी।रंग इसका भी काला ही था पर ये नाईटी काजल के संगेमरमर दूधिया बदन को मेरी प्यासी निगाहों से छुपाने को नाकाफी थी।
काजल की नाईटी उसके घुटनों से जरा ज्यादा ऊँची थी और उसका गला भी अच्छा बड़ा पर थोड़ा टाइट था।इस वजह से काजल के चूचे उसकी नाईटी से बाहर को झाँक रहे थे और मुझ पर उसके हुस्न के बाण चला रहे थे।
काजल के चूचों के बीच की घाटी अब पहले जितनी खुली नहीं दिख रही थी पर मेरे को अब पहले से ज्यादा लुभा रही थी।
और नाईटी का कपड़ा कुछ ज्यादा महीन था जिसके कारण मैं थोड़ा गौर से देखने पर काजल के बदन को उस कपड़े के पार भी देख सकता था।मेरे अंदर जैसे कई काले कुत्ते जागने लगे थे।
मैंने काजल को ‘बॉटम अप’ कहते हुए अपने पैग को झट से गटक लिया और काजल ने भी अपना पैग ख़त्म करने में कोई देर ना करते हुए खाली ग्लास को मेज पर जैसे पटक सा प्रिया था।
मैंने देर ना करते हुए बात आगे बढ़ाई- चलो बताओ, रोहित को मिस करती हो ना बहुत?काजल- दिन तो जैसे तैसे कट जाता है पर रात नहीं काटी जाती।
विकास- मैं तो जब टूर पर होता हूँ, तब एक दो दिन को ही घर से निकलता हूँ। फिर भी मन नहीं लगता। कल भी रात भर बस करवटें बदलता रह।काजल- तो आप आज यहीं रुक जाओ ना! वैसे भी हमें इतना बड़ा घर मिला हुआ है। सारे कमरे तो खाली ही हैं। मुझे तो बैडरूम और ड्राइंग के अलावा किसी कमरे में गए भी हफ़्तों हो जाते हैं।
विकास- मुझे रुकने में कोई दिक्कत नहीं काजल … पर मुझे अकेले नींद नहीं आती। तो मैं चाहे यहाँ रुकूँ या अपने होटल में, मेरे लिए तो एक ही बात हुई ना।काजल- ऐसा करते हैं, जब तक हो सकेगी बातें करेंगे और फिर मैं सोने अपने कमरे में चली जाउंगी। बाकी जैसा आपको ठीक लगे।
विकास- क्यूँ ना हम दोनों आज रात इस ड्राइंग रूम में ही बिताएं। तुम दीवान पर सो जाना और मैं सोफे पर सो जाऊँगा। इसी बहाने बातें भी हो जाएंगी … मैं भी एक दो पैग और लगा लूंगा।
काजल उठ कर रसोई से रोटियां भी ले आयी और अपनी प्लेट लगाने लगी।मैंने भी देर ना करते हुए अपनी प्लेट उठायी और भोजन परोस कर काजल के साथ की कुर्सी पर ही बैठ गया।
काजल के बदन से मदहोश करने वाली खुशबू आ रही थी पर काजल मुझसे ज्यादा मदहोश थी।शायद शराब अपना काम बखूबी कर रही थी और नसीब भी मेरा दरवाज़ा खटखटा रहा था।
मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने अपनी जांघ को काजल की जांघ से छुआ प्रिया और निरंतर भोजन करने में व्यस्त रहा जिससे यह पता चले कि इसमें काजल को कोई आपत्ति तो नहीं पर काजल ने कोई आपत्ति नहीं दिखाई।
काजल को खाते खाते थोड़ी धसक सी हुई तो मैंने सीधा काजल की पीठ सहलानी शुरू की।मैं काजल की ब्रा स्ट्रैप को महसूस कर सकता था।
एकदम पतली सी स्ट्रैप, जैसे कोई डिज़ाइनर ब्रा पहनी हो।मेरा लण्ड तो इतना महसूस करके ही ऐसे तन गया जैसे फटने को तैयार हो।
पर मंज़िल इतनी भी आसान नहीं थी।काजल की तरफ बढ़ता मेरा हर कदम मुझे जैसे एक विजेता सा महसूस करा रहा था।
पर इस बार मेरा खड़ा लण्ड काजल की नज़र से बच नहीं सका।
काजल ने मुझे अपनी मदहोश निगाहों से देखा और धन्यवाद देती हुई फिर भोजन करने लगी।
कुछ ही देर में हम दोनों भोजन करके टीवी के सामने बैठ गए बस फ़र्क़ इतना था कि अब हम एक दूसरे के साथ नहीं पर साइड में थे।
मैं अलग सोफे पर और वो अलग सोफे पर लेकिन बिल्कुल बराबर बराबर!हमारे बैठने का तरीका कुछ यूँ था कि अगर मैं थोड़ा प्रयास करूँ तो आसानी से काजल की टांगों, घुटनों या जांघ को अपने हाथ या पैरों से रगड़ और छू सकता था।
अभी काजल में चेतना बाकी थी और ये मेरे लिए बिल्कुल अच्छा नहीं था।
टीवी चल रहा था और मौसम भी मदहोशी से भरा था।
मैंने एक और पैग बनाया और काजल की तरफ बढ़ा प्रिया।काजल पैग को साइड टेबल पर रखती हुई- मैं इतनी भी शराबी नहीं कि एक के बाद एक पैग लगाती जाऊँ।विकास- तो कितनी शराबी हो, वही बता दो काजल जान … ओह! मेरा मतलब …
काजल मेरी बात काटते हुए- मैं सारे मतलब समझती हूँ विकास।विकास- नहीं नहीं वो तो बस शराब के नशे में मुँह से निकल गया।काजल- थोड़ी ही तो पी है आपने और इल्जाम सब शराब पर?
विकास- तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे तुम्हें शराब का नशा नहीं चढ़ता.काजल- शराब का नशा चढ़ता तो है पर मुझे तो कंपनी का नशा सुहाता है।
काजल का इतना कहना था कि मेरे पैर खुद-ब-खुद काजल की तरफ हो लिए और कुछ ही पलों में मेरे घुटने काजल के घुटनों और जाँघों को छू रहे थे।वह भी इस बात से अनजान नहीं थी और उसकी बॉडी लैंग्वेज से पता चलता था कि उसको भी इस सब का भरपूर आनंद आ रहा है।
मैंने सिलसिला आगे बढ़ाया- तो मेरी कंपनी का नशा कैसा लगा तुम्हें?काजल- अगर अच्छा नहीं लगा होता तो मैं आपको डिनर के बाद यहाँ रुकने नहीं देती।
अब मैंने कोई देर ना करते हुए काजल के घुटने पर हाथ रख प्रिया और उसको सहलाने लगा।काजल निर्विरोध थी और मैं धीरे धीरे अपने भाव को जाहिर कर रहा था।
मैं अब सिर्फ उसके घुटनों को ही नहीं पर हल्की जाँघों को भी छूने लगा था और काजल की सांसें तेज़ होती जा रही थी।काजल की नाईटी तो पहले ही तंग थी और जैसा आप सब जानते हैं कि बैठने पर नाईटी थोड़ी ऊँची सी हो जाती है।
नाईटी भी उसकी जाँघों को मुश्किल से ही ढक पा रही थी और फिर मैं तो आज मतवाला था ही!अगर ढक भी रही होती तो मुझ पर क्या असर पड़ना था.
मैं काजल की अंदरूनी जाँघों तक पहुंच चुका था और काजल अपनी आँखें बंद किये गहरी सांसें ले रही थी।काजल की छाती ऊँची – नीची होती देख मुझमें जोश बढ़ता जा रहा था।वह शराब के नशे में मदहोश थी या मेरे नशे में … यह कहना तो मुश्किल था पर मैं काजल के नशे में पूरा मदहोश था और इसका पता हम दोनों को ही था।
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कहानी का अगला भाग:दोस्त की बहन के साथ बितायी एक रात- 2