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दोस्त की बहन के साथ बितायी एक रात- 2

राहुल मुआअह

23 Jul 2021 को प्रकाशित

दोस्त की बहन के साथ बितायी एक रात- 2
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माउथ सेक्स विद हॉट गर्ल का मजा मैंने अपने दोस्त की मैरिड सिस्टर के साथ उसी के घर में लिया. मैंने उसके हाव भाव से जान लिया था कि लड़की गर्म है.

कहानी के पहले भागदोस्त की बहन को पाने की चाहमें आपने पढ़ा कि मैं अपने दोस्त की चचेरी बहन को पसंद करता था पर कुछ होने से पूर्व ही उसकी शादी हो गयी.उसके बाद एक बार मुझे उसके घर जाने का अवसर मिला तो मैं वहां गया.मैंने उसके हाव भाव से भाम्प लिया कि लड़की मेरे साथ वक्त बिताने में नहीं हिचकेगी.

अब आगे माउथ सेक्स विद हॉट गर्ल:

काजल ने साइड टेबल पर रखा पैग उठाया और एक झटके में उसको अपने गले से नीचे उतार प्रिया।

मेरे मर्दाना हाथों का स्पर्श जैसे काजल को मतवाला बना रहा था।मैं भी काजल की मक्खन सी जाँघों को अब मसलने सा लगा था।

अब काजल का खुद पर काबू नहीं था और काजल उठ कर मेरी गोद में आ बैठी थी।मैंने भी अपने होठों को काजल के होठों पर रख उनको चूसना शुरू कर प्रिया था।

अब मेरे हाथ काजल की जाँघों से थोड़ा ऊपर हो चले थे और मैं उसकी गीली पैंटी को महसूस कर सकता था।काजल भी अब सिसकारी लेने लगी थी और उसका बदन हल्का हल्का काँप रहा था।

पर ये कहना झूठ नहीं होगा कि काजल के हुस्न का जादू मेरे पर अब हावी होने लगा था।मेरा लण्ड पूरा तना था और काजल की गांड में जैसे कुछ खोदने को बेकरार था।

काजल भी मेरे लण्ड को पूरी तरह से महसूस करने के लिए अपनी गांड को हिला रही थी।

कमरे में मौसम बदल रहा था और माहौल गर्माने लगा था।

मेरे हाथ खुद-ब-खुद काजल के स्तनों की तरफ बढ़ गए थे।

काजल पागलों की तरह मेरे होठों को सिर्फ चूस ही नहीं रही थी बल्कि बुरी तरह से काटने लगी थी।जैसे किसी भूखी शेरनी को कोई शिकार मिल गया हो।

एक हाथ को काजल के चूचों पर छोड़, दूसरे को मैं काजल की चूत पर ले गया और काजल की चूत को उसकी पैंटी के ऊपर से रगड़ना शुरू कर प्रिया।कुछ देर काजल की चूत को रगड़ने के बाद मैंने धीरे धीरे उसकी पैंटी के साइड से जगह बना कर पहली बार तो काजल की चूत को छुआ … अरे ये क्या, काजल तो यूँ काँपने लगी कि क्या बताऊँ।

काजल का पूरा बदन थिरक रहा था।उसकी सिसकारियाँ जैसे किलकारियों में तब्दील हो गयीं थी और कुछ ही पलों में काजल की चूत ने मेरी उँगलियों को अपने कामरस से भिगोना शुरू कर प्रिया।

काजल के चेहरे पर एक असीम संतुष्टि साफ़ पढ़ी जा सकती थी। काजल ने अपनी बड़ी बड़ी आँखों से मुझे यूँ देखा जैसे कोई बच्चा किसी शरारत को करने के बाद देखता है।मैंने भी सवालिया निगाहों से काजल को देखा और अपनी उँगलियों को एक एक करके चाटना शुरू किया।

काजल मेरा हाथ थामते हुए- ये क्या कर रहे हो विकास? तुम्हें ऐसा करते देख मुझे कुछ कुछ हो रहा है.विकास उँगलियों को चाटते हुए- इतना नशा तो किसी शराब में भी नहीं काजल जान। मैं तेरे शरीर का सारा रस और हर बून्द पी जाना चाहता हूँ। आज मुझे मत रोकना।

काजल- आज रोहित को गए 3 महीनों से ज्यादा हो गए और तुम तो समझ सकते हो कि नयी नयी शादी के बाद इतनी लम्बी जुदाई कैसी खटकती है। बस इसलिए मैं खुद को रोक नहीं सकी।

विकास- शायद मेरी किस्मत में तेरा हुस्न पीना लिखा था आज! इसीलिए रोहित और तुम्हारे वियोग के बीच मैं तुमसे मिलने पंहुचा हूँ। तुम्हारे काम-रस की सुगंध मुझे मदहोश कर रही है काजल जान।काजल- मदहोशी तो मुझ पर भी चढ़ी हुई है आज! पर तुमने शरारत की है मेरे साथ। तुमने जानबूझकर पैग ज्यादा बड़े बना दिए।

विकास- पैग तो एक भी बड़ा नहीं बनाया पर मेरे हाथों ने जो तुम्हारे पैग बनाये उनमें तुम्हारे हुस्न का नशा जरूर मिला था। ये जादू उस बढ़े नशे का ही है।काजल मेरे कंधे पर सिर रखते हुए- ये सब सिर्फ मुझे बहलाने को कह रहे हो तुम! मैंने तुम्हें अपनी शादी से पहले भी देखा है … मुझे घूरते हुए!

विकास काजल के चूचों पर हाथ फेरते हुए- तुम्हारा ये हुस्न है ही इतना कातिल कि शिकारी खुद शिकार हो जाए काजल जान। पर एक बात तो बताओ, शादी से पहले तुम्हारे चूचे कोई 32 के रहे होंगे। इतनी जल्दी ये इतने बड़े कैसे हो गए?काजल- तुम्हें ये भी पता है कि तब कितने थे और अब कितने हैं? बहुत गुंडे निकले तुम तो?विकास- जब जब तुम्हें देखता हूँ, दिल बेईमान हो ही जाता है काजल जान।

और इतना कहते कहते मैंने एक बार फिर काजल के होठों पर अपने होंठ रख दिए।

देखते ही देखते हम दोनों के बीच की दूरियां कम होती गयीं और हम एक दूसरे को चिपक कर चूमते रहे।मेरे हाथ काजल की गोलाइयों को नाप रहे थे और काजल सिसकारियाँ भर रही थी।

काजल की चूत तो पहले ही पानी छोड़ चुकी थी और उसकी मादक खुशबू अब भी मेरे हाथ में थी।जब-जब मैं उसके होठों को चूसता, मेरा लण्ड बेताब हुए जाता।

काजल अपने हाथों को मेरे बालों में घुमा रही थी।मैंने अपने हाथ काजल की पीठ पर ले जाकर उसकी नाईटी की स्ट्रैप खोली जिससे मैं उसके नंगे बदन को हांसिल कर सकूँ।काजल बिन पानी मछली जैसी तड़पती जा रही थी और मैं धीरे धीरे अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा था।

मैंने काजल की गर्दन को चूमना चाटना शुरू किया और हाथों से उसकी पीठ को सहलाता रहा।काजल से ज्यादा देर रहा ना गया और उसने मेरे लण्ड को जैसे खोजना शुरू किया।

मैंने देर ना करते हुए काजल को अपनी गोद में उठा लिया और उसको दीवान पर लिटा कर पीछे हट गया।काजल किसी नागिन जैसी कमसिन … दीवान पर पड़ी बेचैन जवानी … कोई हुस्न की देवी लग रही थी।

उसकी छोटी और पारदर्शी नाईटी उसके हुस्न को मेरी आँखों से छुपाने को नाकाफी थी।यहाँ तक कि अब काजल की नाईटी इतनी तंग सी हो गयी थी कि उसकी पैंटी भी साफ़ नज़र आने लगी थी।पैंटी भी जानलेवा थी … भीनी, जालीदार, काली पैंटी जिसपर एम्ब्रायडरी से छोटे छोटे फूल बनाये गए थे जिससे सिर्फ चूत छुपी रहे और बाकी सब पारदर्शी कपड़े से आसानी से देखा जा सकता था।

मैं अपने लण्ड को हाथ से सहलाते हुए दिल भर के उसके हुस्न को अपनी आँखों से ही पी रहा था।काजल बेचैन थी और बेइंतहा तड़प रही थी।उसकी नज़रें मुझे लाचार सी देख रही थीं, जैसे जन्म-जन्मांतर की बातें अभी करना चाहती हों।

उसकी यह तड़प अब मुझसे देखी नहीं जा रही थी।

एक पल गंवाए बिना ही मैं काजल के पैरों के बीच पहुंच गया और उसके पैरों को चूमने लगा।काजल के पैर भी उसके जिस्म जितने ही सुन्दर थे।

कभी मैं उसके पैर की उँगलियों को चूमता … कभी चाट लेता … तो कभी काट लेता।मुझे काजल की उत्तेजना बढ़ाने में अत्यंत आनंद आ रहा था और शायद काजल भी इसका भरपूर मज़ा ले रही थी।

काजल बेचैनी से भरी बीच बीच में अपने चूचों और चूत को खुद ही दबा रही थी।

एक तो उसकी रोहित से इतनी लम्बी दूरियां और उस पर अब उसको मेरा यूँ तड़पाना शायद उसकी बर्दाश्त से बाहर था।ऊपर से मैं कभी उसकी चूत को मसोड़ देता तो कभी उसके बम्म मसल देता।

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काजल की सिसकारियां तो पहले ही ज़ोरों पर थीं पर अब उसमें एक कशिश – एक दर्द – एक ख़ुशी – एक सुख की सी मिली जुली झलक थी।

कुछ ही देर में मैं काजल के पैरों से ऊपर होता हुआ अब उसकी जाँघों पर चोट कर रहा था।काजल मेरी हर छुअन पर जैसे तड़प के रह जाती पर मज़ा उसको भी बहुत ज्यादा आ रहा था।

मैंने अपने हाथ से महसूस किया था कि उसकी चूत बीच बीच में थोड़ी बहुत बहती जा रही थी और वो शायद पूर्ण स्खलित ना होकर स्खलित होने में लम्बा समय ले रही थी।मैं कभी उसकी चूत तो कभी उसके कूल्हों तो कभी उसके चूचों को मसल रहा था।

आज जैसे सालों पुरानी चाहत पूरी हो रही थी और मैं किसी जल्दी में नहीं था।मैंने काजल की जांघों को चूमना चाटना शुरू किया ही था कि काजल ने अपनी टांगें खोल कर मुझे जैसे खुला निमंत्रण दे प्रिया।

अब मैं उसकी गीली पैंटी से आ रही मादक खुशबू से मतवाला हुआ उसकी जाँघों को चूमने – चाटने और काटने लगा।

धीरे धीरे पूरे कमरे में वही खुशबू समाती जा रही थी।काजल पागल और मैं पूरा पागल हो चुका था।

मैं हाथों से काजल के चूचों को मसलता हुआ जो उसकी चूत पर पंहुचा और उसकी चूत को अपनी नाक से सूंघा तो जैसे मैं किसी अलग दुनिया में पहुंच गया।खुद पर कोई वश नहीं था अब मेरा और मंज़िल मेरे आग़ोश में थी.

पर पिक्चर अभी बाकी थी मेरे दोस्त …

मैंने किसी भूखे शेर की तरह काजल की चूत पर अपना मुँह पूरा खोल कर रख प्रिया जैसे उसकी चूत को खाना चाहता हूँ।

काजल के पास सिवाय तड़पने के कोई चारा बचा नहीं था; उसने मेरे सिर पर हाथ रख मुझे अपने अंदर धकेलना शुरू किया।

क्यूंकि मैंने काजल की ब्रा को अभी तक उसके बदन से अलग नहीं किया था, मेरे हाथ उसके चूचों की घुंडियों को ब्रा के ऊपर से ही बेदर्दी से मसल रहे थे और काजल अब सिसकारियों की जगह जैसे कराहने लगी थी।

उसके पैर चौड़े खुले हवा में उठे थे जिससे मुझे उसकी चूत में समा जाने को भरपूर जगह मिल रही थी।

मैंने काजल की चूत से उसकी पैंटी को अलग करने के लिए एक तरफ से उसकी इलास्टिक को अपने दांतों से पकड़ा ही था कि काजल ने अपनी गांड उठा दी।बिना एक पल गवाएं मैंने काजल की पैंटी को उसकी चूत से अलग कर प्रिया पर अभी उसके जिस्म से अलग नहीं किया था।

अब काजल की चूत और मेरी जीभ के दरमियान कुछ नहीं था और मुझे उसकी मादकता अपना गुलाम बनाये जैसे हुक्म दे रही हो कि ‘ऐ गुलाम, आ और मुझे पी जा!’

इतनी प्यारी और कोमल सी चूत … होने को तो काजल शादीशुदा थी पर उसने अपने पति के साथ बहुत सारा समय नहीं बिताया था और इसलिए उसकी चूत एकदम कसी थी।

तो दोस्तो, जो होता है आज भी वही हुआ …मैंने काजल की चूत की ताबड़तोड़ चुसाई शुरू कर दी।

थोड़ी देर चूसने के बाद जो मैंने उसकी चूत में उंगली करनी चाही तो काजल जैसे सिहर सी गयी।जैसे पहली बार किसी कुंवारी लड़की की चूत में उंगली हुई हो।

वैसे भी काजल की शादी को कुछ ही महीने हुए थे और उसमें भी पिछले 3 महीनों से वो अपने पति से दूर थी तो आज तो मेरी चांदी ही चांदी थी।

थोड़ी मेहनत करने पर मेरी उंगली ने काजल की चूत में अपने लिए जगह भी बना ली थी।अब कभी मैं उसकी चूत में उंगली करता तो कभी जीभ अंदर तक उतार देता।

जब भी मैं काजल की चूत में उंगली या जीभ डालता, काजल हर बार सिहर के रह जाती।

कभी मैं उसकी चूत के होंठों को चूसता तो कभी उनको काट लेता!पर मेरा मन था कि माउथ सेक्स विद हॉट गर्ल से भरने का नाम ही नहीं ले रहा था।

अब मैंने काजल की चूत में 2 उँगलियाँ डालनी शुरू की और साथ में उसकी चूत से बाहर आती खाल को चूसने लगा।

काजल के मुँह से आती आवाज़ें रात के साथ बढ़ती ही जा रही थी।मैं चाहता था कि काजल की चूत मेरे मोटे लण्ड के लिए तैयार हो जाए।

कुछ ही पलों में काजल की चूत से अमृत की वो धारा बहने लगी जिसके लिए मैं कितने सालों से तरस रहा था।काजल ने एक ज़ोरदार चीख के साथ अपना बाँध तोड़ प्रिया और उसकी सांसें उखड़ी उखड़ी सी हो गयी।

मैंने काजल की चूत से बहते रस को पीना शुरू कर प्रिया पर उंगली को बाहर नहीं निकाला जिससे मैं हल्का घर्षण करता रहूं और काजल के शरीर में गर्मी बनी रहे।

जो दोस्त और भाभियाँ मेरी पुरानी कहानियां पढ़ चुके हैं, वे जानते हैं कि काजल की चूत से पहले भी मैंने कई चूतों का पानी पीया है पर काजल के पानी में एक अलग ही बात थी।उसका स्वाद बहुत अलग था क्यूंकि काजल ना तो कुंवारी थी और ना ही काजल की गिनती शुमार चुदी हुई लड़कियों या भाभियों में की जा सकती थी।

और फिर नयी दुल्हन की चूत तो वैसे भी दुल्हन सी ही होती है यारो …

मैंने भी काजल की चूत से एक एक बून्द को माउथ सेक्स के दौरान स्वाद ले कर चाटा और यह भी सुनिश्चित किया कि काजल मेरी हर चुसकी पर तड़पे।जब मेरी जीभ काजल की चूत को छूती तो जैसे काजल के बदन में आग सी लग जाती थी।

मैंने ऐसा गर्म माल पहली बार हासिल किया था और मुझे इस बात पर गर्व हो रहा था।मैं भी बीच-बीच में काजल की चूत को सपाट करके उस पर 2-4 थप्पड़ लगा देता जिससे माहौल में उत्तेजना, थोड़ा जंगलीपन और थोड़ी सख्ती बनी रहे।

अगले भाग में आप पढ़ेंगे कि काजल ने अपने दिल के अरमां मेरे साथ कैसे पूरे किये.अपने विचार कमेंट्स में लिखेंsupport@mohakkisse.com

माउथ सेक्स विद हॉट गर्ल कहानी का अगला भाग:दोस्त की बहन के साथ बितायी एक रात- 3

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दोस्त की बहन के साथ बितायी एक रात

कुल भाग: 4
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

उषा मस्तानी

2 months ago

क्या दीदी को पता चल गया था? अगला पार्ट जल्दी डालो यार।

मो.शाहिद आलम

2 months ago

बहुत ही उत्तेजक और रोमांचक कहानी लिखी है भाई। मजा आ गया।

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