मैरिड सेक्स X कहानी में एक लड़की की शादी हुई तो उसे चुदाई का बहुत शौक था पर उसका पति उसे बहुत कम चोदता था. वह बेचारी पति का लंड लेने को तरस जाती थी.
दोस्तो, आज की कहानी एक पुरानी कहावत पर आधारित है.वो कहते हैं न कि आग और फूस का बैर होता है.कहीं फूस का ढेर हो और पास में आग जल रही हो तो फूस के ढेर में आग लगने की संभावना बहुत है.
ठीक उसी तरह अगर किसी के जिस्म में आग लगी हो और पास में कोई शोला बदन हो तो आग और भड़क जाती है.
आज की मैरिड सेक्स X कहानी है रिया और दिया की.दोनों एक ही उम्र की चचेरी बहनें हैं.रिया दिया से छह महीने बड़ी है.दोनों स्वप्न सुन्दरी जैसा सौन्दर्य और चंचलता लिए हुए हैं.
रिया की शादी सेठ मंगल दास सर्राफ के बड़े बेटे विजय के साथ हुई.
शादी में ही मंगल दास जी और उनकी पत्नी सावित्री देवी को रिया की चचेरी बहन दिया पसंद आ गयी अपने छोटे बेटे अजय के लिए.
स्वभाव में अजय ज्यादा बातूनी और स्मार्ट था.उन्हें लगा कि अजय और दिया की जोड़ी खूब जमेगी.
शादी के बाद सावित्री देवी ने बहू रिया से इस बाबत बात की तो उसने बताया- दिया अपनी मां से ज्यादा ही जुड़ी है. वह उनके बिना रहना ही नहीं चाहती. तो चाचाजी यह चाहते हैं कि दिया की शादी लोकल हो जाए ताकि वह बिना रोक टोक के मायके आ सके.
बात आई गयी हो गयी.पर मंगल दास और सावित्री देवी के दिलोदिमाग पर दिया बस चुकी थी.
उसका एक कारण ये भी था कि बहू रिया ने उनका घर इतनी अच्छे ढंग से संभाल लिया था.हालाँकि विजय शांत स्वभाव का सीधा सादा व्यक्ति था पर रिया और विजय खुश दिखते थे तो मंगल दास सोचते थे कि अगर दिया भी रिया जैसी ही हुई तो उनके छोटे बेटे अजय की जिन्दगी भी संवर जायेगी.
मंगल दास किसी सोसाइटी में टावर में रहते थे.नीचे मंगल दास और सावित्री देवी, उसके ऊपर के फ्लैट में विजय और रिया और ऊपर का तीसरा फ्लैट पूरा फर्निश्ड था अजय और उसकी बीवी के लिए.
ऊपर के दोनों फ्लैट्स को जोड़ता एक अंदर जीना (सीढ़ियाँ) था, जो अक्सर बंद ही रहता.
अजय मनमौजी था. जहां कुछ अच्छा बनता, खाना वहीं खाता.उसकी और रिया की खूब पटती थी. दोनों आपस में एक दूसरे का नाम लेते.
सावित्री देवी ने बहुत समझाया- ये तेरी भाभी है इसका नाम मत लिया कर, भाभी बोला कर!तो अजय अल्हड़पन से जवाब दे देता कि यदि रिया विजय को भैया और विजय उसे भाभी कहे तो मैं भी कह लूंगा.आखिर रिया ने ही हंसकर सावित्री देवी से कहा- लेने दीजिये नाम, है तो मेरे बराबर ही!
रिया अजय को भैया कहती तो अजय जवाब ही नहीं देता था.आखिर थक हारकर उसने भी नाम लेना ही शुरू कर प्रिया.
विजय और रिया की नयी नयी शादी हुई थी पर उनकीसेक्स लाइफबहुत सुस्त चल रही थी.सुबह 11 बजे विजय शॉप पर पहुंचता था और रात 9 बजे तक वापिस आ जाता था.उसके बाद बाद भी विजय नीचे थोड़ी देर मां के पास रुकता.
जब माँ उलाहना देती कि ऊपर बहू अकेली है, तब ऊपर आता और बस खाना खाकर थकान का बहाना बना कर सो जाता.
रिया की जवानी उबाल मारती थी.वह विजय को अपनी अदाओं से खूब रिझाती और उकसाती.पर हफ्ते में एक दो दिन के अलावा उनका सेक्स हो ही नहीं पाता.
विजय को हफ्ते पन्द्रह दिन में एक दिन सामान लेने दिल्ली जाना होता, तो वह साप्ताहिक छुट्टी से पहले दिन दोपहर बाद जाता, रात को दिल्ली रुकता और अगले दिन सुबह चलकर शाम तक वापिस आ जाता.यह उसका तय रूटीन था.
अजय सुबह 9.30 तक पहुंचकर शॉप खोलता.पर शाम को 6 बजे उसकी ड्यूटी खत्म हो जाती.
उसके बाद अजय घर जाकर खाना खाकर यार दोस्तों में घूमता और देर रात घर लौटता.
रात को मंगल दास विजय के साथ दुकान बढ़वाकर घर लौटते.
मंगल दास तो नीचे अपने फ्लैट पर खाना खाकर थोड़ी देर टीवी देखकर सो जाते.
पर ऊपर विजय और रिया की जिन्दगी अगले 12 घंटों के लिए बिल्कुल निजी होती.किसी की कोई दखलंदाजी नहीं.पर विजय उसका कोई फायदा रिया को नहीं देता था.
विजय रोजाना एक पेग लेता था.उसे रिझाने के लिए रिया ने उसके साथ पीने की भी कोशिश की पर विजय बहुत शुष्क रहता.
रिया तितली की तरह उन्मुक्त आसमान में उड़ना चाहती थी पर विजय उसे टोकता तो कभी नहीं था पर साथ भी नहीं देता था.
और रिया को फेशन का बहुत शौक था.वह अकेले में अक्सर फ्रॉक या शोर्ट मिडी ही पहनती.सावित्री देवी कभी ऊपर आती नहीं थीं.
विजय को शॉप भेजकर रिया ही पूरी दोपहर नीचे सवित्री देवी के पास रहती, फिर शाम को जब ऊपर आ जाती.तब अगले दिन ही उसकी सावित्री देवी से मुलाक़ात होती.
जब विजय शॉप जा रहा होता, तब रिया ढंग से कपड़े पहनकर नीचे आती और सावित्री देवी और मंगल दास के पैर छूकर आशीर्वाद लेती.
हाँ कभी अजय डिनर पर या ब्रेकफास्ट पर आ जाता तो रिया लॉन्ग फ्रॉक या नाईट सूट डाल लेती.
अजय और उसके बीच कोई लिहाज वाली बात अब नहीं रही थी.दोनों बेबाक थे.
कई बार तो अजय उसे छेड़ देता- रिया तुम्हारी गर्दन पर किसी बड़े मच्छर के काटने का निशान है.रिया भागी जाती शीशे में देखने कि कहीं विजय ने काट कर कोई निशाँ तो नहीं बना प्रिया.
अजय कभी भी रिया के गले लग जाता, रिया भी हंसकर उसे धक्का दे देती.उन दोनों के मन में ही कोई खोट नहीं था.विजय भी उन्हें एसा करते देखकर खूब हंसता.
विजय रिया की शादी को एक साल होने को आया.उन लोगों ने शादी की वर्षगाँठ पर एक पार्टी रखी.
पार्टी में दिया और उसका परिवार भी आया.
दिया गजब की खूबसूरत लग रही थी.मंगल दास से अब रहा नहीं गया.
उन्होंने दिया के पिताजी से दिया को अजय के लिए मांग ही लिया.
दिया के पिताजी को इतने बड़े घर का रिश्ता मना करने का कोई कारण ही नजर नहीं आया.पर दिया कुनमुनाई कि मम्मी से दूर मैं नहीं रहूंगी.
अनजानी दुनिया में अपने-6
तो सावित्री देवी और रिया ने उसे समझाया- यहाँ से तुम्हारी मम्मी का घर मात्र चार छह घंटे का ही तो रास्ता है. जब मन करे, चले जाना, एक दो दिन रहकर आ जाना.
दिया और रिया बराबर की ही उम्र की थीं.रिया का मन भी ससुराल में उचाट हो रहा था तो उसने सोचा कि बचपन की सहेली दिया के आने से उसका मन लगेगा.
आखिर रिया के बार समझाने और अच्छा परिवार की दुहाई देने पर दिया की शादी अजय से हो ही गयी.
अजय विजय के मुकाबले ज्यादा ही आशिक मिजाज साबित हुआ.हनीमून पर वे मालदीव्स गए.
अजय तो निहाल हो गया था दिया जैसे सेक्सी वाइफ पाकर!वह तो दिया को टांगें सीधी करने का मौक़ा ही नहीं देता था.दिया भी उसका भरपूर साथ देती.
पर हाँ, रात को जब तक वो एक घंटा अपनी मम्मी से बात नहीं कर लेती, उसे नींद नहीं आती.
अब उसके और अजय के बीच इसी बात को लेकर तनातनी होने लगी.अजय का मन लिपटा लिपटी का हो रहा होता और दिया मम्मी से फोन पर लगी होती.
या सेक्स के बाद अजय का मन होता कि वह दिया को आगोश में लेकर सोये और दिया … वह अपनी मम्मी को फोन मिला रही होती.
अजय सेक्स का इतना शौक़ीन था कि उसे बिना दो-तीन सेशन लगाये चैन नहीं पड़ता.दिया उसका साथ तो देती पर बार बार अजय को यह अहसास होता कि वह केवल जिस्मानी तौर पर उसके साथ है, दिमाग में उसके अपना मायका चल रहा होता.
अजय अब अपने सारे शिकवे रिया से कहता.रिया भी क्या कहती … वह बस यही कह देती कि समझाऊंगी उसे!
दो तीन महीने तो जैसे तैसे निकले … अब हर पन्द्रह दिन बाद दिया दो तीन दिनों के लिए नए नए बहाने बनाकर मायके जाने लगी.
पीछे खाने की तो कोई दिक्कत थी ही नहीं.रिया डिनर में वही बनाती जो अजय को पसंद होता और उसे बड़े स्नेह से खिलाती.
अब उसके और अजय के हंसी मजाक नॉन वेज भी होने लगे थे.
रिया कहीं न कहीं अपने आप को गुनाहगार मानने लगी थी दिया के मसले में!वह जानती थी कि ऐसा होगा और फिर क्यों उसने अजय को नहीं रोका.
अजय और रिया में बहुत लगाव था.जब विजय नहीं होता था तो शादी से पहले अजय उस शाम अपना पूरा समय रिया को देता, उसे अपनी बाइक पर खूब घुमाता.
रिया के मम्मे मांसल थे और वह शहर से बाहर बाइक से घूमने पर दोनों ओर टांगें करके अजय से चिपक कर बैठती.उन्हें देखकर कोई भी यह समझ सकता था कि ये लैला मजनू हैं, इश्क फरमाने निकले हैं.
दोनों जम कर मस्ती करते.मन में कोई खोट नहीं था और मंगल दास और सावित्री देवी उन्हें कोई टोका टाकी नहीं करते थे.
बल्कि अजय को बियर पीने का या सिगरेट की कोई लत नहीं थी, ये तो आहिस्ता से रिया ने अजय को डलवा दी.
अजय केवल रिया के साथ ही कभी कभार ले लेता, वरना अलग वो अपने दोस्तों में भी कभी नहीं लेता था.
कुल मिलाकर शादी से पहले अजय और रिया अच्छे दोस्तों की तरह रहते थे.
अब अजय शाम को शॉप से सीधा घर आ जाता और फिर दिया के साथ ही पूरा टाइम बिताता.रिया और दिया अपनी अपनी सेक्स लाइफ खुलकर बात कर लेतीं.
पर बस दिया की सूई केवल मायके जाने की बात पर अटक जाती.दिया जब अजय की आशिकी का जिक्र रिया से खुलकर करती तो कहीं न कहीं रिया के मन में मलाल आ ही जाता.
एक दिन दिया ने हल्ला मचा प्रिया- मेरी मम्मी की तबियत खराब है, मुझे तुरंत जाना है.उसी दिन विजय भी दिल्ली जाने वाला था.
रिया ने दिया को बहुत समझाया- चाची जी की ऐसी तबियत खराब नहीं है कि तुम जाओ.पर दिया किसकी सुनती थी … वह तो टैक्सी लेकर सुबह ही मायके चली गयी.लगता था इस बार वो तीन चार दिन रुक कर ही आएगी.
अजय का मुंह फूला हुआ था.दोपहर बाद विजय को भी जाना था तो अजय सुबह बिना नाश्ता किये ही गुस्से में शॉप पर चला गया.
रिया ने मंगल दास ज़ी के साथ नाश्ता भेजा भी, पर उसने नहीं खाया.तो रिया ने विजय से कहा- अजय को एक घंटे के लिए जबरदस्ती घर भेज दो.
अजय घर आया तो रिया उसे लेकर अपने फ्लैट में गयी और उसका हाथ पकड़कर जबरदस्ती नाश्ता कराने लगी.लेकिन अजय बहुत गुस्से में था.उसने रिया से कहा- ऐसे मेरी जिन्दगी कैसे चलेगी?
अजय ने बताया कि रात उसका मूड बहुत अच्छा था, दिया भी सेक्सी नाईटी पहन कर बेड पर आ गयी थी. उनके बीच प्यार शुरू ही हुआ था कि दिया की मम्मी का फोन आ गया. उनकी कमर में कुछ नचका आ गया था. साधारण सी बात थी. पर बस दिया का मूड उखड़ गया. उसने तो रोना शुरू कर प्रिया. फिर इस शर्त पर चुप हुई कि सुबह वह मायके जायेगी.
अजय बोला- इससे तो मेरी शादी नहीं होती तो अच्छा था, कम से कम मैं तुम्हारे साथ खुश तो था.
रिया उठी और फ्लैट का मेन डोर बंद करके आई और फिर अजय से बोली- तुम तो अब भी मेरे साथ खुश रह सकते हो.अजय बोला- तुम और विजय कितने खुश रहते हो. और एक हम हैं.
रिया ने अजय का हाथ थामा और बोली- तुमसे आज तक नहीं कहा. पर तुम क्या जानो मैं किस तरह समय काट रही हूँ विजय के साथ!वह रो पड़ी.
उसने अपनी सारी मैरिड सेक्स X कहानी अजय को बता दी.रिया बोली- सिर्फ जितने समय तुम मेरे साथ होते हो, उतने समय ही मैं हंसती हूँ. बाकी समय तो घुटती रहती हूँ. जब दिया मुझे तुम्हारे सेक्स के बारे में बताती है तो भी मुझे रश्क होता है. काश मैं तुम्हारी बीवी होती.
अजय हक्का बक्का सा था.उसने रोती हुई रिया को चुप कराते हुए गले लगाया.रिया कस के चिपक गयी उससे.
अजय ने भी उसे थाम लिया और लिपटा लिया अपने से!
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