हॉट बॉडी सेक्स कहानी में दो सहेलियों की पक्की दोस्ती थी, दोनों साथ में लेस्बो भी करती थी. पर उन्होंने अपनी चूत अपने पति के लिये सीलबंद रखी थी.
दोस्तो, आज बात कर रहे हैं सिम्मी और दीपा की.दोनों बचपन की सहेलियां. दोनों का परिवार समृद्ध, आधुनिक सोच के और जयपुर की एक ही कॉलोनी में रहते थे.
बचपन से सिम्मी और दीपा एक ही क्लास में पढ़ी और कॉलेज तक साथ रहीं.दोनों में आपस में सगी बहनों जैसा प्यार था.किसी की कोई बात दूसरी से छिपती नहीं.
क्लास V के बाद सिम्मी के पिता ने उसका एडमिशन अजमेर करा प्रिया तो अगले साल ही जिद करके दीपा भी उसके पास आ गयी.दोनों क्लासमेट, रूममेट हो गयीं.
पढ़ने में और खेल में होशियार होने से दोनों की जोड़ी पूरे स्कूल में चर्चित थी.दोनों को ही स्विमिंग का शौक था.
स्कूल के बाद इन्होंने अपनी मर्जी से दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया.यहाँ इन्हें बिगड़ने का भरपूर माहौल मिला.
जयपुर बैठे माता पिता अपने राग रंग में व्यस्त रहते और जवान लड़कियों पर किसी का काबू रहा है क्या!रूममेट होने से लेस्बियन होना तो आम बात है.
साथ ही ड्रिंक्स, स्मोकिंग और बॉय फ्रेंड्स इनसे भी आज की तारीख में कौन अछूता है.
पर हाँ, पढ़ाई में दोनों कभी नहीं पिछड़ी.फर्राटेदार इंग्लिश बोलती थी दोनों और सलीकेदार थीं.ये तो परिवार की विरासत थी.
पर हाँ, इन तीन सालों में सिम्मी और दीपा ने दिल्ली में रहकर जिन्दगी के हर रूप के मजे लिए.हाँ, नहीं किया तो दोनों ने किसी लड़के के साथ सेक्स नहीं किया.चूमा चाटी, गले लगना या किसी भी हद तक ये गयीं, पर इनकी सोच स्पष्ट थी कि चूत तो अपने पति के लिए ही है.और जब सोच स्पष्ट हो तो किसी लड़के की हिम्मत कहाँ जो उनकी पेंटी में घुस सके.
हॉट बॉडी सेक्स, चूत की आग दोनों रात को आपस में अपने रूम में मिटातीं.बिना कपड़ों के लिपट कर सोतीं, चूत में उंगली करतीं या फिर मम्मे चूसती एक दूसरे के.
दोनों ही माध्यम कद काठी की थीं पर थीं सुंदर और स्मार्ट. पढ़ाई और खानदानी संस्कार की झलक उनके व्यक्तित्व पर झलकती थी.
सिम्मी की जॉब एम्बेसी में लग गयी और दीपा कॉलेज में लेक्चरर हो गयी.
सिम्मी का एक भाई था बड़ा.वो अब पिता के साथ व्यापार में था.
दीपा के माता पिता दोनों ही किसी जमींदार परिवार के थे और फौज से जल्दी ही रिटायरमेंट लेकर जिन्दगी की एश करते थे.
दीपा उनकी एकमात्र संतान थी तो दीपा के लिए वो खासी जायदाद छोड़ने वाले थे.
जॉब लगने के बाद भी दोनों एक पोश कॉलोनी में फ्लैट लेकर रहती थीं और उनकी रातें हमेशा की तरह आज भी उतनी ही गरम होतीं.
सिम्मी ज्यादा खुराफाती थी.
वो वाईब्रेटर से खुद भी मजे लेती दीपा को भी परेशान रखती.
एक बार तो उसने मसाज बॉय को बुला लिया फ्लैट में.वो तो दीपा ने उसे डांट कर बीच मसाज में भगाया वरना उस दिन सिम्मी तो सील तुड़वा ही बैठती.
कई बार तो उन्होंने सोचा की शादी-वादी के लफड़े में पड़ने से क्या फायदा, ऐसे ही एश करते जिन्दगी काट लेंगी.
पर किसी ने समझाया कि पति और बच्चों के बिना बुढ़ापा नहीं कटता और दोनों के परिवार इनकी शादी कराने को लड़का देखने में जुटे थे.
आखिरकार सिम्मी के लिए किसी एमएनसी में अच्छी जॉब का लड़का विनय पसंद किया गया.विनय और सिम्मी की जोड़ी खूब जमती थी.
विनय भी हॉस्टल का पढ़ा हुआ था, स्मार्ट था और उसने रिश्ता तय करते समय ही सिम्मी से कह प्रिया कि वो जिन्दगी खुलकर जीने में विश्वास रखता है.सिम्मी ने मुस्कुरा कर उसका साथ देने का वायदा किया.बस यह बता प्रिया कि उसकी जिन्दगी में दीपा से बढ़कर कोई नहीं. दोनों अपनी अपनी जिन्दगी जियेंगी पर उनके बीच कोई नहीं आ सकता; पति भी नहीं.
विनय ने मुस्कुरा कर सहमति दे दी.पर छेड़ते हुए कह प्रिया कि वे दोनों अपने गेंग में उसे तो शामिल कर लेंगी न!
सगाई से लेकर शादी के बीच इन लोगों का आपस में खूब मिलना हुआ.दीपा की विनय से खूब पटती.
आखिरकार एक ही तो साली थी विनय की.दीपा ने अभी शादी को अगले तीन साल के लिए मना कर प्रिया था.उसकी पीएचडी चल रही थी.विनय अक्सर सिम्मी को छेड़ते हुए कहता की मुझे अगर पहले दीपा मिल गयी होती तो मैं उससे शादी करता.
सिम्मी भी कह देती कि तुम्हें जरूरत क्या है उससे शादी करने की. तुम्हें तो एक के साथ एक फ्री मिल रही है.दीपा बात बात पर विनय के गले लग जाती, उसे चूम लेती.सिम्मी को बिलकुल भी बुरा नहीं लगता था.
सिम्मी और विनय की शादी खूब धूमधाम से हुई.शादी में सबसे ज्यादा मस्ती किसी ने की तो वो दीपा थी.
शादी के तीसरे ही दिन तय कार्यक्रमानुसार सिम्मी और विनय हनीमून के लिए लक्षदीप चले गए.असल में दोनों को ही ज्यादा छुट्टी नहीं मिली थीं.
अभी तो इन्हें सुहागरात मनाने का मौक़ा भी नहीं मिला था.शादी की रात तो रात भर फेरे और अन्य रस्मों में निकल गए.
अगले दिन में भी सोने का मौक़ा नहीं मिला तो रात को कमरे में जाते ही दोनों सो गये.उन्होंने ये तय कर लिया था कि अब सुहागरात तो रिसोर्ट में ही मनाएंगे.
वहां रिसोर्ट वालों को कमरे की डेकोरेशन के लिए बोल प्रिया गया था.
रिसोर्ट समुद्र के बीच बना था.दोनों लक्षदीप में एअरपोर्ट से स्पीडबोट से अपने रिसोर्ट पहुंचे.बहुत सुंदर और मस्त जगह थी.
सब पर्यटक अपनी मस्ती में थे.किसी को किसी से कोई मतलब नहीं.
पर हाथ भर चूड़ियों से सजे मेहंदी लगे हाथ… सबको अंदाज़ लगा कि ये नव विवाहित हैं तो जो मिलता वो इन्हें बधाई देता.सिम्मी विनय से लिपटी जा रही थी.
सब पर्यटक विदेशी थे कम से कम कपड़ों में.
अधिकाँश लड़कियां तो टू पीस बिकनी या शोर्ट फ्रॉक में थीं.मर्द केवल शॉर्ट्स में.कुल मिलाकर सब मस्ती में सराबोर.खुले आम चूमाचाटी, लिपटा लिपटी का माहौल था.
सिम्मी और विनय अपनी कॉटेज में पहुंचे.कॉटेज का गेट बंद होते ही सिम्मी तो विनय से जा लिपटी.
बाहर का गर्म माहौल देख कर अब दोनों बेकाबू हो गए थे.ऐसा लगता था कि अब शारीरिक मिलन के लिए रात का इंतज़ार नहीं हो पायेगा.
बजाये सुहागरात के सुहागदिन ही मनेगा.पूरी कॉटेज फूलों से सजी थी और मेज पर एक छोटा सा केक रखा था.
तभी उनका इंटरकॉम बजा.लंच तैयार था.उनसे पूछा गया था कि लंच बाहर रेस्तौरेंट में लेंगे या यहीं कॉटेज में.दोनों ने तय किया कि फ्रेश होकर बाहर ही चलते हैं रेस्तौरेंट में.
अभी तक दोनों साथ साथ नहीं नहा पाए थे.एक दूसरे को बिना कपड़ों के देखा ही नहीं था.
पति के बॉस ने मेरे दोनों छेद चोदे
सिम्मी शर्माती हुई विनय से बोली- चलो साथ ही नहाते हैं.कहते हुए वो विनय से लिपट गयी.
विनय ने उसे अपनी बाहों के घेरे में बांधा और होंठों पर चूमते हुए कहा- सिर्फ नहायेंगे और कुछ नहीं.
दोनों कपड़े उतार कर खुले आसमान के नीचे बने बाथ एरिया में चले गए.चारों और उंची बांस की दीवारें थीं.पूर्ण निजता थी.
कुछ सेकंड का तो संकोच रहा सिम्मी को, फिर वो विनय से लिपट गयी.पहली बार दो नग्न जिस्म मिले थे.
विनय ने उसे कस के अपने बाहुपाश में जकड़ लिया.दोनों के होंठ मिले हुए थे.
ऊपर से गिरती शावर की झरने जैसी धार उनकी आग और बढ़ा रही थी.
बगल में निजी स्विमिंग पूल था.विनय ने सिम्मी को गोदी में उठाया और धीरे से पूल में उतर गया.
विनय को सिम्मी के मम्मे ललचा रहे थे.पर तय था कि सिर्फ नहायेंगे और कुछ नहीं.
बात अब बेईमानी की आ रही थी.विनय पूल में दीवार के सहारे खड़ा था.सिम्मी आकर उससे लिपट गयी, पीठ पीछे करके.
अब विनय ने उसके मम्मे दबोच लिए.सिम्मी की आह निकली.
उसने सर घुमाया तो दोनों के होंठ मिले और जीभ मचल गयीं.
सिम्मी अब घूम गयी.उसके मम्मे विनय की छाती में घुस गए.नीचे विनय का तना हुआ लंड सिम्मी की चूत पर टक्कर मार रहा था.
एक बार तो सिम्मी ने उसे पकड़ा भी पर ये सोच कर छोड़ प्रिया कि वो उसे ज्यादा देर अपनी चूत से दूर नहीं रख पाएगी.
दोनों बाहर आकर शावर लेकर कॉटेज में आ गए.सिम्मी ने एक फ्रॉक पहनी और विनय ने शोर्ट और टी शर्ट. दोनों हाथों में हाथ लेकर बाहर आ गये.
रेस्तौरेंट में उनके लिए एक अलग खानसामा था.
उसने आकर उनसे उनकी पसंद पूछी और कहा- मुझे आधा घंटा दीजिये. जो आपने चाहा है, वो मैं अभी ताजा बनाकर लाता हूँ. तब तक आप सलाद, जूस इत्यादि लीजिये.विनय को बड़ा अच्छा लगा कि यह सिर्फ हमारे लिए खाना बनाएगा और वो भी वो सब कुछ जो हम चाहें.यही ताज की मेहमाननवाज़ी थी.
लंच से फ्री होकर दोनों समुद्र किनारे बैठ गए.उनको वेटर बियर की ठंडी केन दे गया.
सभी जोड़े अठखेलियाँ कर रहे थे.किसी को किसी की परवाह नहीं.
सिम्मी भी नीचे रेत पर लेट गयी विनय के होंठ से होंठ मिलाकर.दोनों ऐसे ही पड़े रहे.
अब नींद सी आ रही थी तो दोनों वापिस कॉटेज में आये और दोबारा शावर लेकर थोड़ी देर के लिए सो गये.
एक बार सोये तो शाम को 7 बजे आँख खुली.
सिम्मी ने फटाफट कॉफ़ी बना ली.कॉफ़ी पीकर दोनों ने बाहर जाने की सोची.
सिम्मी ने अपनी एक पाश्चात्य ड्रेस निकाली और आँखों के इशारे से विनय से पूछा की क्या इसे पहन लूं.विनय ने मुस्कुरा कर हाँ कह दी- यहाँ हमें कौन जानता है, कुछ भी पहनो.
सिम्मी की वो पोशाक आग लगाने वाली थी.बिना ब्रा के ब्लाउज और नीचे धोती.कुछ मछुआरिन सी लग रही थी.पैरों में काजल और गले में पत्थरों का हार.
विनय ने सिगरेट जलाई तो सिम्मी ने उससे लेकर एक सुट्टा मारा और धुंआ विनय के चेहरे पर छोड़ प्रिया.
दोनों बाहर आ गये.बाहर सभी लोग सिम्मी की ड्रेस की तारीफ़ कर रहे थे.
विनय तो इतना हॉट फील कर रहा था कि एक झाड़ी की ओट में उसने सिम्मी को जकड़ लिया और उसके होंठ से होंठ भिड़ा दिए.सिम्मी भी गर्म हो रही थी.उसने कांपते हुए विनय से कहा- चलो वापिस कॉटेज में चलते हैं.विनय ने हँसते हुए उसके हाथ पकड़े और आगे ले गया.
ज्यादा भीड़ नहीं थी.पर सभी जोड़े थे अधिकाँश विदेशी.
रेस्तौरेंट में डिनर लेते लेते रात के 9 बज गए.कॉटेज में वापिस आने की दोनों को जल्दी थी.
कॉटेज में आकर सिम्मी विनय से बोली- मुझे 15-20 मिनट दो, तुम बाहर घूम आओ. मुझे तुम्हारे किये सजना है.आखिर बात सुहागरात की थी.
विनय मुस्कुराता हुआ बाहर चला गया फ्रिज से एक कोक की केन निकाल कर.सिम्मी फटाफट शावर लेकर तैयार होने में लग गयी.
15 मिनट बाद विनय ने दरवाजा नोक किया.सिम्मी ने आहिस्ता से दरवाजा खोला.कॉटेज में अन्धेरा था, सिर्फ बेड के पास हल्की रोशनी थी.
सिम्मी विनय से बोली- तुम शावर ले लो. तुम्हारा कुर्ता पायजामा बाहर ही रखा है. अंदर की लाइट मत खोलना.सिम्मी की काजल और हाथ की चूड़ियाँ खनखन कर रही थीं.
विनय फ्रेश होकर वापिस आया तो सिम्मी बेड पर बैठी हुई थी.उसने एक ब्रा पेंटी सेट के ऊपर एक झिलमिल सी ड्रेस पहनी थी.परी सी सुंदर लग रही थी वो!
जब विनय बेड के पास आया तो सिम्मी ने हाथ आगे बढाया.विनय ने उसका हाथ थामा और बेड पर आ गया.
विनय उसकी सुन्दरता देखता रह गया.उसने कभी सपने में अपनी बीवी के इसे रूप की अर्चना नहीं की थी.
विनय ने सिम्मी का हाथ चूम लिया.आगे बढ़ा तो सिम्मी खुद उसके आगोश में आ गयी.पूरा जिस्म महक रहा था उसका.
विनय ने हाथों से उसका चेहरा पकड़ा और धीरे से अपनी और करते हुए बहुत आहिस्ता से उसके होंठों पर किस किया.सिम्मी लिपट गई उससे.
दो सुलगते जिस्म एक होने को मचल उठे.दोनों इसे लिपट रहे थे मानों कब के बिछड़े हों.
सिम्मी की खनकती चूड़ियाँ और काजल माहौल बना रही थीं.पिछले तीन दिनों से बहुत रोका था दोनों ने अपने आपको.
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हॉट बॉडी सेक्स कहानी का अगला भाग:सेक्स बिना जिया जाता नहीं- 2