चिंकीहैलो दोस्तो, कैसे हैं आप सब लोग..! उम्मीद करती हूँ कि आप सब ठीक होंगे। आप सब के मेल मिले, पढ़कर अच्छा लगा। अब मैं आपके लिए इस कहानी को आगे बढ़ा रही हूँ।अब तक अपने पढ़ा कि आरोही और जूही लैस्बो सेक्स करती हैं और पहली बार उनकी चूत ने पानी छोड़ा था।फिर विकास उनको गेम के लिए बोलता है और तब आरोही उसके साथ चली जाती है। विकास के रूम में आकर आरोही बेड पर बैठ जाती है। विकास उसके पास खड़ा हो जाता है। तभी विकास की नज़र आरोही के मम्मों पर जाती है।अब आगे…ब्रा ना पहने हुए होने की वजह से टी-शर्ट के गले में से दूध जैसे सफेद मम्मे साफ नज़र आ रहे थे। विकास आरोही के मस्त मम्मों को निहार रहा था, उसका लंड हरकत करने लगा था।दोस्तों विकास जानता है कि आरोही उसकी सग़ी बहन है, पर लौड़ा किसी रिश्ते को नहीं मानता है, उसे तो बस चूत से मतलब होता है। जब भी कोई मस्त माल दिखे, वो अपनी औकात में आ जाता है।आरोही को जब यह अहसास हुआ तो वो झट से खड़ी हो गई।विकास- क्या हुआ? बैठो ना..!आरोही- भाई आपने बताया नहीं कि कौन सा खेल खेलेंगे?तभी जूही भी कमरे में आ गई।जूही- हाँ भाई मैं भी आ गई हूँ, अब बताओ क्या खेलें?विकास- हम कुश्ती करेंगे.. मज़ा आएगा..!आरोही- क्या यह भी भला कोई खेल हुआ?विकास- अरे बहुत मज़ा आएगा.. तुम दोनों एक तरफ़ और मैं अकेला.. हम बड़ा वाला गद्दा ज़मीन पर डाल लेंगे.. अगर तुम दोनों ने मुझे पकड़ लिया और मेरी नाक ज़मीन पर लगा दी, तो तुम जीत जाओगी और अगर मैंने तुम्हारी लगा दी.. तो मैं जीत जाऊँगा.. ओके?जूही- ओके.. भाई.. लेकिन हम जीत गए, तो हमारा क्या फायदा.. पहले वो तो बताओ..!विकास- हारने वाला.. जीतने वाले को, जो वो माँगे, देना पड़ेगा..!आरोही- वाउ..! तब तो हम ही जीतेंगे और आप हमें शॉपिंग करवाओगे.. ओके..!विकास- ओके.. लेकिन मैं जीता तो?जूही- भाई आप हारने वाले हो, बस अगर ग़लती से जीत भी गए तो तब बता देना कि आपको क्या चाहिए.. ओके..!विकास- ओके.. पर कोई चीटिंग नहीं करना. सिर्फ नाक ही टिकानी है बाकी बदन से कोई मतलब नहीं होगा..!आरोही- ओके भाई..!जैसे ही विकास ने 1-2-3 बोल कर ‘स्टार्ट’ बोला, दोनों बहनें उसके पैरों को पकड़ कर खींचने लली, विकास गद्दे पर गिर गया।तब आरोही विकास को धक्का देकर पेट के बल करने की कोशिश करती है ताकि उसकी नाक ज़मीन पर लगा सके।मगर विकास भी कहाँ कम था, उसने आरोही को बांहों में भर लिया, उसके मम्मे विकास के सीने में धँस गए और विकास ने उसे कस कर दबोच लिया।विकास का लौड़ा तन कर सीधा आरोही की चूत पर सैट हो गया।आरोही ने पैन्टी नहीं पहनी थी और निक्कर भी पतली थी तो उसको लंड का अहसास सीधा अपनी चूत पर हो रहा था।उधर जूही आरोही को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी। आरोही तो लंड के अहसास से गनगना गई थी, उसने अपने आपको ढीला छोड़ प्रिया था और विकास भी लंड को चूत पर रगड़ रहा था।जूही- दीदी आप कोशिश करो ना छूटने की.. नहीं तो भाई जीत जाएँगे..!आरोही ने अपनी ताक़त लगाई और जूही ने विकास के हाथ खोल दिए, आरोही आज़ाद हो गई और उसने जल्दी से उठ कर विकास के पैर पकड़ लिए।तब उसकी नज़र विकास के लौड़े पर पड़ी जो एकदम अकड़ा हुआ था।विकास ने सूती पायजामा पहना हुआ था और शायद अन्दर कुछ नहीं पहना था, क्योंकि पायजामे पर विकास के लंड से पानी की बूँद निकली थीं, जो बाहर साफ दिख रही थीं।आरोही ने पैर पकड़ने के बहाने से लंड को छू लिया, जिससे उसको बड़ा मज़ा आया।इधर विकास भी मज़े ले रहा था।करीब 15 मिनट तक इनका ये खेल चलता रहा, विकास कभी आरोही के मम्मों को दबाता, कभी अपने होंठ मम्मों पे रख देता, तो कभी आरोही की गाण्ड को हाथ से दबा देता, कभी-कभी जूही के मम्मों को भी दबाता, कभी उसको नीचे पटक कर अपना लौड़ा उसकी चूत पर रगड़ता।आख़िरकार विकास का लौड़ा बेहद गर्म हो गया, वो समझ गया कि अगर ये खेल यूं ही चलता रहा तो उसका पानी छूट जाएगा और उसने जानबूझ कर उनको मौका प्रिया और अपनी नाक जमीन पर टिका दी।दोनों बहनें खड़ी होकर कूदने लगी- हम जीत गए…हम जीत गए…विकास- अच्छा बाबा… मैं हारा.. पर रूको मैं दो मिनट में बाथरूम जाकर आया.. ज़ोर की ‘सूसू’ आई है..!विकास भाग कर बाथरूम में चला गया और अपने लण्ड, जो उसकी सगी बहनों के बदन से रगड़ कर खड़ा हुआ था, को निकाल कर मुठ्ठ मारने लगा, एक मिनट में ही उसके लौड़े ने पानी छोड़ प्रिया।इधर आरोही और जूही खुश थीं कि वो जीत गई हैं और शॉपिंग की बात कर रही थीं कि क्या-क्या लेना है।विकास बाहर आया तो दोनों की बातें चालू थीं।विकास- क्या बातें हो रही हैं दोनों में.. मैं ज़्यादा कुछ नहीं दिलाऊँगा.. बस एक-एक ड्रेस दोनों ले लेना.. ओके..!जूही- नहीं भाई आपने कहा था, जो हम चाहें आप दिलाओगे.. अब आप चीटिंग कर रहे हो..!आरोही- हाँ ब्रो.. यह गलत बात है.. हाँ.. जो हम चाहेंगे, आपको दिलवाना होगा..!विकास- ओके.. मेरी बहनों अब तैयार हो जाओ, दोपहर का खाना भी हम बाहर ही खाएँगे और शॉपिंग भी हो जाएगी।आरोही- वाउ.. भाई यू आर बेस्ट ब्रो इन दि वर्ल्ड..!जूही- नो.. भाई.. शाम को जाएँगे ना.. प्लीज़ दोपहर को मुझे अपनी सहेली के यहाँ जाना है, आज वहाँ लंच के लिए मुझे बुलाया है, बाकी सब सहेलियाँ भी आ रही हैं।विकास- नो.. अभी मतलब अभी.. तुमको नहीं जाना, तो आरोही को बता दो तुम्हें क्या चाहिए हम ले आयेंगे.. ओके..!जूही- ओके.. आप जाओ और दीदी जो आपको अच्छा लगे आप ले आना।आरोही- हाँ जूही, मैं ले आऊँगी।जूही- तो चलो.. हम तैयार हो जाते हैं। आप भाई के साथ चली जाना, मैं अपनी सहेली के यहाँ निकल जाऊँगी..!आरोही- मैं अनीता को बता कर आती हूँ कि लंच ना बनाए हम बाहर जा रहे हैं..!विकास- ओके.. अब जाओ, मैं भी रेडी हो जाता हूँ।दोनों वहाँ से निकल जाती हैं और विकास भी बाथरूम में फ्रेश होने चला जाता है।सुबह 11 बजे जूही अपनी सहेली के पास चली गई और विकास भी आरोही को लेकर शॉपिंग के लिए बाइक से निकल गया।विकास ने नीली जींस और सफ़ेद टी-शर्ट पहनी थी और आरोही ने काली टी-शर्ट और नीली जैकेट और काली जींस पहनी थी।बाइक पर वो विकास से चिपक कर बैठी हुई थी।आज पहली बार उसको विकास भाई से ज़्यादा कुछ महसूस हो रहा था। एक तो उसने जूही के साथ लैस्बो किया और फिर कुश्ती के दौरान जो हरकतें विकास ने की वो उसको बार बार बेचेन कर रही थीं। उसने भी तो विकास के लंड को कई बार छुआ था।विकास- हाँ.. तो आरोही बताओ..! कहाँ चलें.. शॉपिंग के लिए..!आरोही- भाई सिटी सेंटर से अच्छी जगह क्या होगी.. लंच भी वहीं कर लेंगे।विकास- हाँ.. यही ठीक रहेगा।आरोही एकदम कस कर विकास को पकड़े हुई थी। उसके मम्मे विकास की पीठ में धंसे हुए थे और उसके दोनों हाथ विकास की नाभि पर थे। जैसे ही स्पीड ब्रेकर आते.. वो जानबूझ कर अपना हाथ लौड़े पर ले जाती।उसकी इस हरकत से विकास के लौड़े में भी तनाव आ गया था, पर जींस के कारण इतना पता नहीं चल रहा था।जैसे ही बाइक सिटी सेंटर के पास रुकी, एक कार भी ठीक उनके बराबर में आकर रुकी।आरोही भी नीचे उतर गई, विकास ने बाइक को साइड में लगाया, तभी कार से एक 22 साल का लड़का उतरा जो काफ़ी हैण्डसम था।उसे देख कर विकास चौंक जाता है और जब उसकी नज़र विकास पर पड़ी, तो वो भी आँखें फाड़े विकास को देखने लगा।विकास- हे.. आई डोंट विलीव रेहान.. तू कब आया यार..!रेहान- अबे साले मैं तो कब से यहीं हूँ तेरा कोई अता-पता ही नहीं है। पूरे 5 साल बाद मिला है तू..!विकास- आरोही, यह मेरा बेस्ट-फ्रेंड है रेहान.. और दोस्त, यह मेरी छोटी बहन आरोही है..!रेहान- हाय आरोही.. यू आर लुकिंग वेरी नाइस यार..!आरोही- थैंक्स ..!रेहान ऊपर से नीचे आरोही को निहार रहा था और आरोही भी उसकी नज़र को देख रही थी।तभी विकास ने कहा- यार हम लोग शॉपिंग के लिए आए हैं। तुम इतने समय बाद मिले हो तो साथ में लंच करेंगे.. ओके .!और वे एक-दूसरे को अपने फोन नम्बर दे देते हैं।रेहान- सॉरी यार.. अभी तो एक बहुत जरूरी काम के सिलसिले में आया हूँ। अब तो तेरे घर आकर ही कभी खाऊँगा..!विकास- ओके दोस्त.. जरूर आना.. मैं तुम्हारा वेट करूँगा..!रेहान वहाँ से चला गया और वो दोनों भी अन्दर चले गए।विकास- हाँ तो मेरी बहना क्या चाहिए.. बताओ?आरोही- अभी तो देख रही हूँ भाई।विकास- ये देखो, यह ब्लू टी-शर्ट कितनी अच्छी है ना.. यह ले लो..!आरोही- नहीं भाई ये तो बकवास है.. मुझे नहीं लेनी..!विकास- ओके तुम्हें जो अच्छी लगे, वो ले लो और जूही के लिए भी ले लेना, मैं थोड़ा उस तरफ अपने लिए कुछ देखता हूँ। तुम्हें जो लेना है ले लो ओके..!आरोही अपने और जूही के लिए दो ड्रेस ले लेती है और दूसरी साइड जाकर ब्रा और पैन्टी भी ले लेती है।विकास भी कुछ शर्ट और जींस ले आता है।विकास- क्यों आरोही हो गया सब.. या कुछ बाकी है..!आरोही- हाँ हो गया भाई.. आप मुझे पैसे दे दो, मैं काउंटर पर बिल दे देती हूँ।विकास- साथ चल रहे हैं ना.. मैंने भी तो कपड़े लिए ही लिए हैं.. सब कपड़े एक जगह कर दो, मैं बिल दे देता हूँ।आरोही ने ब्रा-पैन्टी ली थी, इसलिए वो नहीं चाहती थी कि विकास को पता चले, पर विकास के ज़िद करने पर उसने सारे कपड़े एक जगह कर दिए।काउंटर पर जब एक-एक करके सारे कपड़ों के कोड मारे जा रहे थे, तब विकास की नज़र रेड ब्रा-पैन्टी के सेट्स पर गई।उसके बाद और भी ब्रा-पैन्टी सामने आईं, पिंक और ब्लैक एक ब्राउन भी थी।आरोही विकास से अपनी नज़रें चुरा रही थी और विकास भी उसकी तरफ़ ज़्यादा ध्यान नहीं दे रहा था। वहाँ से निकलकर दोनों रेस्तरा में बैठ जाते हैं।विकास- क्या खाओगी आरोही..!आरोही- जो आपको अच्छा लगे..।विकास- नहीं तुम बताओ, जब कपड़े अपनी पसन्द के लिए हैं, तो खाना भी तुम ही बताओ..!आरोही- इश्श.. भाई.. सॉरी.. प्लीज़ मत सताओ ना आप..!विकास- ओके एक शर्त पर..! अगर तुम अपने सारे कपड़े जो लिए हैं, एक-एक करके मुझे पहन कर दिखाओगी तो..!आरोही- ओके.. भाई घर जाकर पक्का दिखाऊँगी..!विकास- देखो बाद में नाटक मत करना.. वरना मैं तुमसे बात भी नहीं करूँगा।आरोही- हाँ भाई.. कहा ना, दिखा दूँगी..!विकास- आज जो जो लिया है.. सब.. ओके..!आरोही को विकास की बात समझ नहीं आ रही थी कि आख़िर वो चाहता क्या है।आरोही- हाँ भाई हाँ.. अब क्या लिख कर दूँ..!विकास की आँखों में एक चमक सी आ गई और ना चाहते हुए भी उसका हाथ अपने आप लंड पर चला गया, लेकिन जल्दी ही वो संभल गया।विकास ने खाने का ऑर्डर कर प्रिया, दोनों ने आराम से खाना खाया और कुछ इधर-उधर की बातें करने लगे।लंच के बाद वो वहाँ से घर के लिए निकल पड़े।घर पहुँच कर आरोही ने एक मादक अंगड़ाई लेते हुए कहा- ओह भाई बहुत खाना खा लिया.. अब तो नींद आ रही ही.. आआ उउउ..!कहानी जारी रहेगी।अब जल्दी आप मुझे support@mohakkisse.com पर मेल करके बताओ कि आपको मेरी कहानी का यह भाग कैसा लगा और आरोही के बारे में आपकी क्या राय है।
जूही और आरोही की चूत की खुजली-2
पिंकी सेन
19 Mar 2025 को प्रकाशित
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जूही और आरोही की चूत की खुजली
कुल भाग: 37
भाग 1
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भाग 2
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भाग 3
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भाग 4
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भाग 5
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भाग 6
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भाग 7
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भाग 8
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भाग 9
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भाग 10
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भाग 11
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भाग 12
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भाग 13
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भाग 14
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भाग 15
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भाग 16
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भाग 17
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भाग 18
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भाग 19
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भाग 20
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भाग 21
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भाग 22
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भाग 23
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भाग 24
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भाग 25
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भाग 26
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भाग 29
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भाग 30
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भाग 31
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भाग 32
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भाग 33
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भाग 36
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