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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 590 बार

जीजू से पहली चुदाई-1

romasharma

16 Jan 2015 को प्रकाशित

जीजू से पहली चुदाई-1
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हेलो फ्रेंड्स, मेरा नाम रोमा है। आज मैं आप सभी को अपने जीवन की एक सच्ची घटना सुनाने जा रही हूँ। उम्मीद करुँगी, कि आप सभी को पसंद आएगी। ये बात उस समय की है, जब मेरी उम्र 20 साल की थी, और मैं कॉलेज में थी।

मेरा रंग गोरा और शरीर भरा-भरा है। मेरी एक बड़ी बहन भी है, और मेरी दीदी का नाम रोहिनी है और जीजू का नाम वरुण है। उनकी ये लव-मैरिज थी। जीजू का अपना ट्रांसपोर्ट का बिज़नस था। दीदी और जीजू ने घर से भाग कर शादी की थी इस लिए जब वो कोर्ट मैरिज करके घर आये, तो मेरे घर वालों ने तो उन्हें एक्ससेप्ट नही किया, और दीदी से सारे रिश्ते तोड़ कर उन्हें चले जाने के लिए कह दिया था।

दीदी जीजू से बहुत प्यार करती थी। तो उन्होंने भी मम्मी-पापा से माफी मांगी और जीजू के साथ चली गई।

धीरे-धीरे समय बीतने लगा।‌ मम्मी पापा तो दीदी से कभी बात नहीं करते थे, पर मेरी बात दीदी और जीजू से होती रहती थी। वो दोनों मुझे एक परफेक्ट कपल लगते थे।

दीदी और जीजू की शादी को करीब पांच महीने ही हुए थे, कि अचानक मेरी मम्मी को हार्टअटैक हुआ था, और वो हॉस्पिटल में थी। ये बात मैंने दीदी को बता दी थी, तो दीदी और जीजू दोनों ही बिना कुछ सोचे आ गए थे। टाइम ऐसा था, तो दीदी के आते ही पापा ने उन्हें गले लगा लिया और उन्हें उनकी गलती के लिए माफ भी कर दिया, और दीदी और जीजू के रिश्ते को एक्ससेप्ट कर लिया। मम्मी भी दीदी को देख कर बहुत खुश थी।

कुछ ही दिन में मम्मी हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हो कर घर आ गई थी। दीदी और जीजू भी साथ में ही घर में थे। घर में बहुत ही खुशी का माहौल था। एक दो दिन साथ रहने के बाद जीजू ने दीदी से कहा-

जीजू: ऑफिस से फोन आया है। मुझे जाना होगा। तुम कुछ दिन और यही रुक जाओ, मैं कुछ दिन के बाद तुम्हे लेने आ जाऊँगा।

फिर अगले दिन जीजू चले गए। हफ्ता बीता,‌ और फिर जीजू दीदी लो लेने के लिए आये। रात का खाना खा कर हम सब सोने के लिए कमरे में आये। मम्मी-पापा अपने कमरे में चले गए। मैं दीदी और जीजू अपने कमरे में आये। दीदी और जीजू तो बेड पर सो गये, और मैंने अपना बिस्तर बेड से कुछ दूरी पर लगा लिया, और सोने लगी।

रात के करीब 1 बजे मुझे दीदी और जीजू की कुछ आवाज आई। मैंने देखा तो दीदी के ऊपर जीजू थे, और वो उन्हें किस कर रहे थे। दीदी उन्हें कह रही थी।

दीदी: वरुण ये क्या कर रहे हो? कुछ तो सब्र करो। कल घर चल के कर लेना। रोमा इसी कमरे में है।

जीजू: रोहिनी मैं बहुत दिनों से तड़प रहा हूँ। मुझसे अब सब्र ही नहीं हो रहा है। पूरे दो हफ्ते हो चुके है मैंने तुम्हे चोदा नही है। अब तो मत तड़पाओ। और वैसे भी रोमा सो चुकी है।

कमरे में अंधेरा था, और सिर्फ एक नाईट बल्ब जल रहा था। ज्यादा कुछ तो मुझे दिखाई नहीं दे रहा था, पर जीजू दीदी के ऊपर थे और बेतहाशा दीदी को चूमे जा रहे थे। शायद दीदी भी चुदाई की भूखी थी, और अब वो भी गर्म हो रही थी। तो अब दीदी भी जीजू का साथ देने लगी थी।

कुछ ही देर में वो दोनों एक दूसरे के कपड़े निकालने लगे और नंगे हो गए। फिर जीजू दीदी के ऊपर चढ़ कर उन्हें चोदने लगे। अंधेरे में ज्यादा कुछ मुझे दिखाई तो दे नहीं रह था। जीजू दीदी को धक्के मार रहे थे, ये साफ दिखाई दे रहा था। कुछ देर की चुदाई के बाद जीजू थक कर दीदी के ऊपर ही लेट गए। उनकी चुदाई पूरी हो चुकी थी।

अगले दिन दीदी और जीजू अपने घर चले गए। पिछली रात का सीन मेरी आँखों मे था, और वो बहुत सेक्सी नज़ारा था। करीब एक महीने बाद मेरे कॉलेज के एग्जाम ख़त्म हुए, और मेरी कुछ दिन की छुट्टियों थी। तो मैंने मम्मी-पापा से दीदी के घर जाने की बात की। उन्होंने भी मुझे दीदी के घर जाने की इजाज़त दे दी।

जब मैंने अपनी दीदी को अपने आने की खबर दी, तो वो भी खुश हो गई। सुबह की ट्रेन से मैं निकली और शाम तक मैं पहुंच गई। दीदी और जीजू दोनों ही मुझे स्टेशन पर लेने आए थे। उन्होंने मुझे शहर घुमाया, और रात का खाना हमने घर खाया।

अगले दिन जीजू सुबह जल्दी ऑफिस चले गए। दीदी और मैं घर में थे। हम दोनों खूब गप्पे मारते थे। ऐसे ही 2-3 दिन हो गए। फिर एक दिन जीजू जब शाम को घर आये, तो हमने खाना खाया और टीवी देखने लगे। कुछ देर बाद जीजू उठ कर चले गए। अब दीदी और मैं ही थे।

फिर कुछ देर बाद जीजू की आवाज आई: रोहिनी, रोमा को टीवी देखने दो। तुम आ जाओ, मैं कब से वेट कर रहा हूं तुम्हारी, अब और इंतजार नहीं हो रहा है।

उनकी ये बात सुन कर मैं समझ गई कि जीजू चुदाई करने की बात कर रहे थे। तो मैंने भी दीदी से बोला-

मैं: दीदी मुझे भी नींद आ रही है, तो मैं भी सो जाती हूं, और आप भी चले जाओ। जीजू आपको बुला रहे है।

तब दीदी ने टीवी बंद कर दिया। मैं रूम में आ गई और दीदी भी अपने रूम में चली गई। जैसे ही दीदी के कमरे की लाइट बंद हुई, मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गई। मैंने जल्दी से अपने कमरे की लाइट भी बंद कर दी, और चुपके से दीदी के कमरे के दरवाज़े से कान लगा कर खाड़ी हो गई। अंदर से फुसफुसाने की आवाज़ आ रही थी।

दीदी: क्यों जी, आज इतने उतावले क्यों हो रहे हो?

जीजू: मेरी जान, कितने दिन से तुमने दी नहीं। इतना ज़ुल्म तो ना किया करो।

दीदी: चलिए भी, मैंने कब रोका है आपको? आपको ही फुरसत नहीं मिलती अपने काम से।

जीजू: अब रोहिनी जी की इज़ाज़त हो तो चुदाई का प्रोग्राम आगे बढ़ाए।

दीदी: हे राम, कैसी बातें बोलते हो, शर्म नहीं आती?

जीजू: शर्म की क्या बात है? अब तो शादी को इतना टाइम हो गया है, और तुम्हे तो पता है सेक्स के टाइम मुझे ऐसी बातें करने में कितना मजा आता है फिर अपनी ही बीवी को चोदने में शर्म कैसी।

दीदी: बड़े ख़राब हो तुम आआआआह्ह्ह्ह ऊऊऊफ्फ्फ्फ्फ्फ् अहहहहहह, धीरे करो ना, इतनी जल्दी क्या है? अभी तो सारी रात बाकी है।

जीजू: कैसे धीरे करूं मेरी जान? इतने दिन बाद तो कर रहा हूँ। धीरे नहीं कर सकता।

दीदी: आह्ह्ह्ह्ह्ह् ऊऊऊफ्फ्फ्फ्फ्फ् अहहहहहहहह

जीजू: ले साली और ले, जोर-जोर से ले साली रंडी ले…..

दीदी: धीरे बोलो, तुम्हारी साली दूसरे कमरे में सो रही है कही वो सुन ना ले (दीदी हँसते हुए बोली )।

जीजू: उसे भी चोद दूंगा आखिर साली भी तो आधी घर वाली होती है।

दीदी: आज तो कुछ ज्यादा ही मूड में हो तुम।

जीजू: हाँ मेरी जान, ब्रा क्यों नहीं उतार रही हो मेरी जान? तुम्हे पता है ना मुझे तुम्हे पूरी तरह नंगी करके ही तो चोदने में मज़ा आता है? तुम्हारी तरह खूबसूरत औरत को चोदना हर आदमी की किस्मत में नहीं होता।

दीदी: अब बातें ही करते रहोगे या चोदोगे भी?

अंदर से दीदी के कराहने की आवाज के साथ साथ फुच फुच फुच जैसी आवाज़ भी आ रही थी। मैं दरवाजे पर और ना खड़ी रह सकी। दीदी और जीजू की ये बातें सुन कर मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैं पसीने में गीली हो गई थी, और मेरी चूत में तो जैसे आग लग गई हो।

फिर मैं अपने कमरे में जा कर बेड पर लेट गई। पर नींद मेरी आँखों से कोसो दूर थी। सारी रात मैं जीजू के बारे में ही सोचती रही। ज़िंदगी मे पहली बार जीजू के बारे में सोच कर मेरी चूत गीली हुई थी।

अगले दिन सुबह मैं जल्दी ही उठ गई, क्यूंकि रात भर तो मुझे नींद ही नहीं आई थी। दीदी किचन में नाश्ता बना रही थी। मैं जब किचन में गई, तो दीदी ने कहा-

दीदी: आज बड़ी जल्दी उठ गई तुम?

मैंने कहा: रात में नींद ही नहीं आई अच्छे से।

दीदी ने पूछा: क्या हुआ?

तो मैंने उस बात को टाल दिया।

फिर दीदी ने कहा: जाओ जाकर देखो तो तुम्हारे जीजू ऑफिस के लिए तैयार हुए या नहीं।

तो मैं दीदी के कमरे की तरफ गई, और जो मैंने देखा, वो देख कर मैं हैरान हो गई। मैं कमरे के दरवाजे पर ही थी, और जीजू कमरे में ड्रेसिंग टेबल के सामने बिलकुल नंगे खड़े थे, और अपने लंड को सहला रहे थे।‌ बॉडी एक दाम कासी हुई थी, और उनका लंड एकदम खड़ा हुआ था। जीजू को देख कर तो मेरा दिल फिर से जोर-जोर से धड़कने लगा। जीजू का लंड 8 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा तो होगा ही।

मेरी चूत गीली होने लगी थी। फिर जीजू अपने कपड़े पहनने लगे और ऑफिस के लिए तैयार हो गए। तब मैं कमरे के अंदर गई, और जीजू से बोली कि दीदी उन्हें नाश्ते के लिए बुला रही थी।

जीजू और दीदी दोनों ही नाश्ता करके ऑफिस चले गए। मुझे भी अब जीजू से चुदवाने का मन करने लगा था। अब तो मुझे जब भी मौका मिलता मैं जीजू को अपने बूब्स दिखाने की कोशिश करती। कभी मैं उनसे चिपक कर बैठती, तो कभी कुछ और करती। मैं हमेशा जीजू को उकसाने की कोशिश करने लगी। जीजू भी मेरी इन हरकतों से कुछ-कुछ तो समझ चुके थे।

फिर एक दिन मैं अपने कमरे में कपड़े बदल रही थी। मैं एक दम नंगी थी, कि तभी जीजू आये और मुझे इस तरह एक दम नंगी देख कर वापस पीछे मुड़ गए।

उन्होंने कहा: दरवाजा तो बंद कर लेती जूही।

जीजू मुझे तिरछी नज़रो से देख रहे थे।

मैंने कहा: ओह्ह सॉरी जीजू, मैंने सोचा कि यहाँ दीदी और मेरे अलावा और कोई नही है, इस लिए दरवाजा बंद नहीं किया था। आपको कुछ काम था क्या?

जीजू बोले: तुम्हारी दीदी बुला रही है तुम्हे।

जीजू अभी भी मुझे तिरछी नजरों से देख रहे थे। मैं भी उन्हें अपने जिस्म की ख़ूबसूरती दिखना चाहती थी। फिर

मैंने कहा: जीजू आप चलिए, मैं अभी कपड़े पहन कर आती हूँ।

2-3 दिन और बीत गए। अब तो जीजू भी मेरे साथ छेड़-छाड़ करने लगे थे। अब हम दोनों ही एक दूसरे के साथ काफी घुल मिल गए थे। जीजू रोज शाम के टाइम जिम जाते थे। फिर एक दिन शाम को जब जीजू जिम जा रहे थे, तो उन्होंने दीदी से कहा कि वो जिम जा रहे थे और उन्हें ऑफिस में भी कुछ काम था। तो आने में थोड़ा लेट हो जाएगा।

तो दीदी ने कहा: घर का कुछ सामना लाना है, आते टाइम आप लेते आइयेगा।

तो जीजू ने थोड़ा गुस्सा करते हुए कहा: तुम हमेशा ऐसा ही करती हो। बिल्कुल टाइम पर ही बोलती हो। मुझे वैसे ही ऑफिस जाना है कुछ काम से, और तुम ऊपर से ये अलग काम बता रही हो।

तब मैंने कहा: कोई बात नहीं, सामान मैं ले आती हूँ। जीजू आप मुझे मार्केट ड्राप कर दो।

तो उन्होंने कहा: हाँ ये ठीक है, मेंरे ऑफिस के पास ही एक स्टोर है, मैं तुम्हे वहाँ छोड़ देता हूँ, तुम सामान खरीद लेना और ये लो मेरे ऑफिस की चाबी। जब सामान खरीद लो, तो तुम मेंरे ऑफिस में मेरा वेट करना। मैं जिम से लौट कर ऑफिस का काम कर लूंगा, और फिर हम घर आ जायेंगे।

बाकी अगले भाग में।

तो दोस्तों ये थी मेरी आज की कहानी। बताना ज़रूर कैसी लगी कहानी पड़ कर। आप सभी मुझे इस कहानी का फीडबैक जरूर दीजियेगा, कि आप को कहानी कैसी लगी, ताकि मैं आगे और अच्छी कहानीयां लेकर आउंगी,‌ और मैं आप सभी के मेल का इंतज़ार करुँगी।

मेरी मेल आई डी- support@mohakkisse.com

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जीजू से पहली चुदाई

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