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भाभी की चुदाई पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 671 बार

गांव वाली विधवा भाभी की चुदाई की कहानी-6

महेश कुमार चूत फाड़

21 Aug 2025 को प्रकाशित

गांव वाली विधवा भाभी की चुदाई की कहानी-6
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अब तक आपने पढ़ा..मैंने सुमन भाभी को अपने वश में कर लिया था और उनकी चूत को चाट रहा था।अब आगे..

कुछ देर तक मैं ऐसे ही अपनी जीभ को भाभी के चूतद्वार पर गोल-गोल घुमाता रहा.. मगर मैंने जीभ को चूत के अन्दर नहीं डाला।

कुछ देर तक जब मैं ऐसे ही करता रहा तो भाभी ने अपने दोनों हाथों से मेरे सर के बालों को पकड़ लिया और फिर खुद ही अपने कूल्हों को उचका कर अपने चूतद्वार को मेरे होंठों से लगा प्रिया।

मैंने भी सुमन भाभी के चूतद्वार को एक बार प्यार से चूम लिया और फिर अपनी जीभ को नुकीला करके उनके चूतद्वार में घुसा प्रिया.. जिससे उनके मुँह से बड़ी जोरों से सिसकी ‘आह्ह..’ निकल गई।

अब उन्होंने मेरे सर को अपनी दोनों जाँघों के बीच जोर से दबा लिया। मैंने धीर से सुमन भाभी की जाँघों को फिर से फैला प्रिया और धीरे-धीरे अपनी जीभ से उनके चूतद्वार में हरकत करने लगा।

मेरी जीभ अब भाभी की चूत द्वार में पूरी तरह से घूम रही थी.. जिससे उनके मुँह से जोर-जोर से सिसकारियाँ फूटने लगीं। मेरी जीभ के साथ साथ उनकी कमर भी हरकत में आ गई थी।

धीरे धीरे सुमन भाभी ने अपनी कमर की हरकत को तेज कर प्रिया और वो जोर-जोर से मादक सिसकारियां भरने लगीं। मैं समझ गया कि भाभी का रस स्खलित होने वाला है।

मैंने सोचा कि कहीं आज भी मैं कल की तरह प्यासा ना रह जाऊँ.. इसलिए मैंने भाभी की जाँघों के बीच से अपना सर निकाल लिया और सुमन भाभी की तरफ देखने लगा।उन्होंने आँखें बन्द कर रखी थीं, उत्तेजना के कारण उनके होंठ कंपकंपा रहे थे और गोरा चेहरा बिल्कुल गुलाबी हो रखा था।

जब कुछ देर तक मैंने कोई हरकत नहीं की.. तो सुमन भाभी ने हल्की से आँखें खोलकर मेरी तरफ देखा, उत्तेजना व खीझ के भाव उनकी आँखों में स्पष्ट नजर आ रहे थे।

भाभी को देखकर मैं हल्का सा मुस्कुरा प्रिया और जल्दी से अपने कपड़े उतारने लगा। सुमन भाभी ने मेरी मुस्कुराहट का कोई जवाब नहीं प्रिया और फिर से अपनी आँखें बन्द कर लीं।

सुमन भाभी को पता था कि मैं क्या कर रहा हूँ और अब आगे उनके साथ क्या करने वाला हूँ.. फिर भी वो चुपचाप ऐसे ही लेटी रहीं।

मैं अपने सारे कपड़े उतार कर सुमन भाभी के ऊपर लेट गया.. जिसका सुमन भाभी ने कोई विरोध नहीं किया।

अब सुमन भाभी का मखमल सा मुलायम और नाजुक शरीर मेरे नीचे था और उनके सख्त उरोज व तने हुए चूचुक मुझे अपने सीने में चुभते हुए से महसूस हो रहे थे।

सुमन भाभी को पता था कि अब क्या होने वाला है इसलिए मेरे ऊपर आते ही उन्होंने खुद ही अपनी जाँघों को फैलाकर मुझे अपनी दोनों जाँघों के बीच में ले लिया।

अब मेरा उत्तेजित लिंग सुमन भाभी की चूत के ठीक ऊपर था, उनकी चूत के बाल मुझे अपने लिंग पर महसूस हो रहे थे।

मेरी काजल भाभी ने मुझे इस खेल का कुशल खिलाड़ी बना प्रिया था इसलिए मैंने सीधा सुमन भाभी की चूत में अपना लिंग डालने की बजाए उन पर लेटे-लेटे ही एक हाथ से अपने लिंग को पकड़ कर धीरे-धीरे उनके चूतद्वार पर घिसने लगा जिससे उनके मुँह से फिर हल्की-हल्की सिसकारियाँ फूटने लगीं ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

सुमन भाभी की चूत प्रेमरस से पूरी तरह गीली हो रही थी.. इसलिए मेरा लिंग आसानी से उसमें फिसल रहा था। मैं अपना लिंग भाभी की चूत में घिसते हुए ही उनके चेहरे की तरफ देखने लगा, उन्होंने आँखें बन्द कर रखी थीं। उत्तेजना के कारण उनके होंठ कंपकंपा रहे थे, साँसें बड़ी जोर से चल रही थीं।

वो मेरे लिंग प्रवेश करवाने का बेसब्री से इन्तजार कर रही थीं। कुछ देर भाभी की चूत पर अपने लिंग को घिसता रहा और फिर धीरे से चूत के मुहाने पर रखकर एक झटका लगा प्रिया।

सुमन भाभी की चूत प्रेम रस से पूरी तरह गीली हुई पड़ी थी और वो शारीरिक और मानसिक रूप से लिंग का स्वागत करने के लिए तैयार भी थीं.. इसलिए एक ही झटके में मेरा आधे से ज्यादा लिंग उनकी चूत में समा गया।भाभी की एक तेज चीख निकल पड़ी- इईई.. श्शशश.. अ..आआह.. आउऊच.. श्श..वो दर्द से चीख पड़ीं।

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मैंने अपने आपको व्यवस्थित करके एक बार अपने लिंग को थोड़ा सा बाहर खींच लिया और फिर से एक झटका लगा प्रिया। इस बार फिर से सुमन भाभी के मुँह से ‘अ..आआहह.. आउऊचश्श..’ की आवाज निकल गई। इस बार मेरा समस्त लिंग उनकी चूत में समा गया था।

मनोज भैया के स्वर्गवास के बाद शायद भाभी ने किसी से सम्बन्ध नहीं बनाए थे। मैंने उन्हें काफी उत्तेजित भी कर प्रिया था.. इसलिए उत्तेजना के कारण भी चूत में काफी संकुचन हो रहा था।

मैंने एक बार फिर से भाभी के चेहरे की तरफ देखा, अब भी उन्होंने आँखें बन्द कर रखी थीं। हल्की सी पीड़ा और उत्तेजना के मिले जुले भाव उनके चेहरे पर उभर रहे थे।

भाभी का मासूम सा चेहरा देखकर मुझे उन पर प्यार आ गया। इसलिए मैंने एक बार उनके माथे को चूम लिया और फिर गालों पर से होते हुए उनके होंठों पर आ गया। चूमने के साथ ही मेरी कमर भी हरकत में आ गई। मैं धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा.. जिससे मेरा लिंग सुमन भाभी की चूत में अन्दर बाहर होने लगा, उनके मुँह से हल्की-हल्की सी सिसकारियाँ फूटने लगीं। साथ ही अपने आप ही सुमन भाभी के हाथ मेरी पीठ पर आ गए और मेरी पीठ पर धीरे-धीरे इधर-उधर रेंगने लगे।

अभी तक मैं सुमन भाभी के होंठों को चूस रहा था.. मगर अब पहली बार सुमन भाभी ने भी हल्का सा मेरे होंठों को अपने होंठों के बीच दबाया था। अब थोड़ा-थोड़ा वो भी मेरे चुम्बन का जवाब देने लगी थीं इसलिए मैंने अपनी जीभ उनके मुँह में डाल दी.. जिसे वो कभी कभी हल्का सा चूसने लगीं।

धीरे धीरे धीरे मैं अपनी कमर की हरकत को बढ़ाने लगा.. जिससे सुमन भाभी की सिसकारियाँ और तेज होने लगीं। अब धीरे धीरे भाभी भी खुलने लगी थीं क्योंकि अब वो मेरी जीभ को जोरों से चूसने लगी थीं। साथ ही उन्होंने अपने पैरों को भी मेरे पैरों में फँसा लिया और वो भी धीरे-धीरे अपने कूल्हों को उचकाने लगीं।

अब सुमन भाभी भी मेरा साथ दे रही थी इसलिए मैंने अपनी गति बढ़ा दी और तेजी से धक्के लगाने लगा। मेरे साथ साथ भाभी भी जल्दी-जल्दी अपने कूल्हे उचकाने लगीं और उनकी सिसकारियाँ भी तेज हो गईं।

पूरा कमरा सुमन भाभी की सिसकारियों से गूँजने लगा, भाभी की सिसकारियों का शोर सुनकर मेरा जोश बढ़ता जा रहा था इसलिए मैं अपनी पूरी ताकत के साथ धक्के लगाने लगा।

भाभी भी कहाँ पीछे रहने वाली थीं वो भी जोर जोर से सिसकारियाँ भरते हुए मेरे धक्कों का जवाब दे रही थीं। मेरी और भाभी की साँसें उखड़ने लगी थीं.. शरीर पसीने से तर हो गए थे मगर हम दोनों में से कोई भी पीछे रहना नहीं चाह रहा था, हम दोनों को ही अपनी अपनी मंजिल पर पहुँचने की जल्दी लगी थी।

फिर तभी भाभी के गर्भ की गहराई में जैसे कि कोई विस्फोट सा हो गया, भाभी बड़ी जोरों से चिल्ला ही पड़ीं- इईई.. श्शश.. अआआ.. आह्ह्ह्हह..उनके हाथ-पैर मुझसे लिपटते चले गए, शरीर अकड़ गया और उनकी चूत ने मेरे लिंग व अण्डकोष को अपने प्रेमरस से नहला प्रिया।

सुमन भाभी का इतना उत्तेजक कामोन्माद देखकर मैं भी जल्दी ही चरम पर पहुँच गया और दो-तीन धक्कों के बाद ही मैंने अपने भीतर का सारा लावा सुमन भाभी की चूत में उड़ेल प्रिया।

रसखलित होने के बाद कुछ देर तक तो मैं सुमन भाभी के ऊपर ही पड़ा रहा और फिर पलट कर उनके बगल में लेट गया।

अब सब कुछ शाँत हो गया था ऐसा लग रहा था जैसे कि अभी-अभी कोई तूफान आकर चला गया है। कमरे में बस मेरी और सुमन भाभी की उखड़ी हुई साँसों की आवाज ही गूँज रही थी.. जिन्हें हम दोनों काबू में करने की कोशिश कर रहे थे।

कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे और फिर सुमन भाभी उठ कर अपने कपड़े ठीक करने लगीं।मैंने सुमन भाभी की तरफ देखा तो उन्होंने नजरें झुका लीं.. मगर संतुष्टि के भाव उनके चेहरे पर स्पष्ट नजर आ रहे थे।

कपड़े ठीक करके सुमन भाभी कमरे से बाहर चली गईं। सुमन भाभी के बाद मैं भी उठकर बाहर आ गया और फिर तैयार होकर रोजाना की तरह ही खेतों में चला गया।

इसके बाद करीब महीने भर तक मैं गाँव में रहा और काफी बार सुमन भाभी से सम्बन्ध बनाए। पहले एक-दो बार तो वो मना करतीं.. मगर फिर बाद में तो वो खुद ही मेरे पास आने लगीं।

आपको मेरी सेक्स स्टोरी कैसी लगी.. प्लीज़ मुझे जरूर लिखें।support@mohakkisse.com

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