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भाभी की चुदाई पठन समय: 18 मिनट पढ़ा गया: 408 बार

चुदाई में शह और मात- 3

सनी वर्मा

01 Dec 2023 को प्रकाशित

चुदाई में शह और मात- 3
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हॉट वीमेन सेक्स कहानी में पढ़ें कि एक बांके जवान को बिल्डिंग की भाभियाँ सेक्स के लिए बुला रही थी. दो भाभियों ने उसे कैसे अपने जाल में फंसाकर अपना गुलाम बनाया.

अब आगे हॉट वीमेन सेक्स कहानी:

साढ़े आठ बजे तनुजा के फोन से आशु की आँख खुली।उसने कहा कि आता हूँ।

शेव करके और नहाकर वो तनुजा के फ्लैट पर पहुँचा।

उसे थकान थी, पर नहाकर उसने कॉफी पी तो फ्रेश हो गया।

तनुजा भी एक लॉन्ग फ्रॉक पहने थी।वो सुमन जैसी स्मार्ट तो नहीं थी, शरीर से भी हल्की सी भारी थी।

पर हाव-भाव और बातचीत में वो बहुत सेक्सी थी।उसकी आँखें खूब मटकती थीं और अपने फूहड़ और अश्लील मज़ाक़ों के लिए वो सोसाइटी में बदनाम थी।

आशु समझ ही नहीं पा रहा था कि उसे तनुजा ने बुलाया क्यों है, जबकि उसका फ्लैट तो चमक रहा था।

उसके दो बच्चे हैं, दोनों छोटे पर समझदार!पति भी खूब लाड़-लड़ाने वाला, पर अक्सर बाहर रहता।

ऐसा उसने मेमसाब लोगों के मज़ाक़ों में सुना है कि बिना चुदवाए तनुजा को नींद ही नहीं आती और उसका पति भी उसे बिना चोदे सोता नहीं है।पर सबसे खास बात ये कि तनुजा की चुदाई की भूख हर समय रहती। उसके हर मज़ाक में चुदाई शब्द जरूर आता।

खैर, तनुजा ने उसे बड़े प्यार से बिठाया और कहा कि उसे पर्दे धोने हैं तो आशु उन्हें उतार कर वाशिंग मशीन में डाल दे।

तनुजा ने उसे कॉफी और बर्गर प्रिया।आशु ने मना भी किया तो तनुजा बोली- घर का बना है, खा लो।

तनुजा ने उसे वहीं डाइनिंग टेबल पर ही बैठा लिया और लगी सुमन की बातें कुरेदने।आशु चुपचाप उसकी सुनता रहा।

तनुजा ने सुमन के पति के किस्से खूब मसाला लगा कर सुनाये, पर आशु कुछ नहीं बोला।

अब तनुजा ने आखिरी वार किया, बोली ज्यादा भोले मत बनो, तुम दोनों की आवाज़ें बाहर तक आ रही थीं, पर मुझे क्या। जब तुम बात ही नहीं करना चाह रहे तो छोड़ो।

अब आशु ने सोचा कि ज्यादा पंगा लेना ठीक नहीं, वो बोला- छोड़िए मेमसाब इन बातों को, आप बताइये मेरे लिए हुक्म?पर्दे उतारते हुए आशु ने फिर दोहराया- मैं कहीं ऐसे जाता नहीं, बस आप एक दो लोग इतना प्यार से कहते हो तो मैं मदद कर देता हूँ।

तनुजा पूरी घाघ थी। उसे कल से पेट में दर्द था, वो तो पूरा मामला जानना चाहती थी।

उसने एक चाल और फेंकी, बोली- पर्दे तो मैं खुद कर लेती पर परसों ज्यादा जवानी चढ़ गयी थी तेरे साब पर … तो मेरी कमर में नचका सा गया। जांघों में भी दर्द है।तनुजा की ये बातें आम थीं, वो लिफ्ट में आते जाते भी अपनी सहेलियों को छेड़ लेती।

अगर कोई कहती कि आज मुंह कड़वा सा हो रहा है शायद बुखार आएगा।तो तनुजा पूछ लेती कि क्यों क्या मुंह में कर लिया था रात को।

अगर किसी को पेर में दर्द की वजह से चलने में दिक्कत हो रही हो तो देख कर तनुजा पूछ लेती कि क्यों क्या आज गांड मरवाई थी?तो तनुजा के लिए ये आम भाषा थी।

सुनकर आशु मुस्कुराया।

तनुजा आगे बोली- वो 201 वाली बता रही थी कि उसकी बेटी के पैर में बैडमिंटन खेलते नचका आ गया था तो तुमने मालिश कर के ठीक किया। क्या तुम मेरा दर्द भी ठीक कर सकते हो?आशु चुप रहा।

तनुजा बोली- अरे मुफ्त में नहीं कराऊँगी, तुम मेरा दर्द ठीक कर दो, मैं तुम्हें खुश कर दूँगी।

अब तनुजा की बात के मतलब तो तनुजा ही जाने!पर आशु को देखकर वो जैसे मुस्कुरा रही थी, आशु को आज अपनी इज़्ज़्त लुटती नज़र आई।वो बोला- उनकी बेटी तो बच्ची थी और पैर की मोच ठीक करना तो उसे जिम ट्रेनिंग में सिखाया जाता है।

पर तनुजा बोली- मैं भी तो बच्ची ही हूँ। चल पर्दे से निबट कर कोशिश करके देख ले।

पर्दों और कार्पेट के लोड लगाने के बाद आशु ने निकलना चाहा पर तनुजा पीछे पड़ गयी- मैं किसी से नहीं कहूँगी, पर मेरी मालिश कर दो।

तनुजा ने उसके लिए खाना भी बना रखा था और अभी बच्चों के आने में दो तीन घंटे थे।

तब तनुजा ने कपड़े चेंज किए और शॉर्ट्स और टीशर्ट डाल ली।आशु बोला- मैं जींस पहने हूँ, इन कपड़ों में मालिश कैसे करूँ, कल कर दूँगा।

पर तनुजा ने उसे अपने पति का बरमुडा दे प्रिया और कहा- यह पहन कर कर दो, यहाँ कौन आ रहा है।

अब आशु कैसे कहे कि मेरी टीशर्ट खराब हो जाएगी।वो कुछ सकुचा रहा था तो तनुजा ने उससे कहा- तुम्हारे पास पेटीएम है क्या?आशु बोला- है, पर क्यों?तनुजा बोली- कुछ नहीं।

आशु जींस उतारकर बरमुडा पहन रहा था कि उसका मोबाइल बज उठा।

तनुजा ने उसके खाते में दो हज़ार ट्रान्सफर किए थे।आशु ने बाहर आकर पूछा- इतनी पैसा क्यों?तनुजा मुस्कुराई- काम भी तो बड़ा है … अब चलो शुरू हो जाओ. और हाँ अगर टी शर्ट खराब होने का डर हो तो उतार दो, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता!

कहकर तनुजा नीचे बिछी चादर पर उल्टे पेट लेट गयी।

उसका फिगर सेक्सी होने के साथ साथ बहुत नर्म और ग्लो कर रहा था।शॉर्ट्स और टीशर्ट में उसे देख कर आशु समझ सकता था कि उसका पति उसका दीवाना क्यों है।

वो कामकला की साक्षात देवी लग रही थी।लंबे रेड पेंटेड नेल्स, महकता बदन, गोरी मखमली काया; बस शरीर थोड़ा मांसल था, पर उतने ही मासल मम्मे भी तो थे।

तनुजा बोली- शुरू करो … कहाँ खो गए?

आशु का तो तम्बू बनना शुरू हो गया था।वो सोच रहा था कि पता नहीं तनुजा मेमसाब के मन में क्या है. पर उसे तो कल से सिर्फ हर औरत में सेक्सी जिस्म ही दिख रहा था।

खैर उसने तनुजा की जांघों पर तेल बिखेरकर उसकी शॉर्ट्स के नीचे से घुटनों तक मालिश करनी शुरू की।थोड़ा तेल उसने तनुजा की टी शर्ट को हल्के से सरका कर उसकी कमर पर भी लगाया।

तनुजा खेली खाई थी, उसने आशु को हाथ का दबाब बढ़ाने को कहा तो आशु को मजबूरी में अपनी टांगें फैलाकर उसके ऊपर बैठ कर मालिश शुरू करनी पड़ी।

वो बहुत संभाल कर अपने घुटनों पर बैठा था और उसे ये भी डर था कि तेल से तनुजा के कपड़े खराब न हो जाएँ।

तनुजा ने पूछ ही लिया कि उसकी शॉर्ट्स और टी शर्ट अगर रुकावट हो तो वो अपने हिसाब से उसे ऊपर नीचे कर ले।पर आशु अभी खुला नहीं था तो वो टी शर्ट के अंदर ही उँगलियाँ डाल कर मालिश करता रहा।

तनुजा हल्की सी उठी और अपनी शॉर्ट्स और टी शर्ट दोनों थोड़ी-थोड़ी ऊपर कर लीं।अब उसकी टी शर्ट उसकी आधी पीठ से भी ऊपर थी और शॉर्ट्स से तो उसके चिकनी जांघें साफ नजर आ रही थीं।

अब आशु ये नहीं समझा कि कमर में दर्द है तो इतनी ऊपर टी शर्ट क्यों उठाई मेम साब ने।

खैर अब उसके हाथ बेफिक्री से मचलने लगे और उसके हाथों के साथ तनुजा का दिल भी मचलने लगा, चूत तो उसकी पहले ही पानी छोड़ चुकी थी।

अब तो दोनों को ही इंतज़ार था उस पल का जब ये शर्म का बांध टूट जाये।

तनुजा की जांघों से घुटने तक तेल फैला कर आशु ने रगड़ना शुरू किया तो तनुजा ने अपनी दोनों टांगें फैला दीं।

आशु को भी अब मजा आ रहा था, किसी ताज़ा तरीन जवानी की मालिश करने में।

तनुजा का मांसल शरीर था और उसका खुला निमंत्रण था कहीं भी हाथ लगाने को।आशु के हाथ अब उसके जांघों की गोलाइयों से होते हुए उसकी गांड के दरार की टच कर रहे थे।

उसने अपने ऊपर काबू रखते हुए अब उसकी पीठ पर मालिश शुरू की तो तनुजा कसमसा गयी।वो अचानक सीधी हो गयी और आशु से बोली- मेरे पेट और बगल की भी मालिश कर दो.कहते कहते उसने अपना टॉप थोड़ा और ऊपर कर प्रिया।

अब बस उसके मम्मे ढक ही रहे थे।

आशु के हाथ उसके नर्म पेट, नाभि से होते हुए ऊपर जा तो रहे थे पर आशु को संकोच हो रहा था।

तनुजा ने आँखें बंद कर रखी थीं, वो मालिश का आनंद लेते हुए धीमे धीमे मुस्कुरा रही थी।

अचानक उसने आँखें खोलीं और आशु के हाथ पकड़कर अपनी टी शर्ट के अंदर अपने पुष्ट और मांसल मम्मों पर रख दिये।

अब लावा फूट चुका था।

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आशु के हाथों की पकड़ उसके नर्म-नर्म मम्मों पर मजबूत होती गयी।तनुजा की सीत्कार निकलने लगी।उसने एक झटके में अपनी टी शर्ट उतार फेंकी और आशु का चेहरा अपनी ओर खींच लिया और होंठों से होंठ भिड़ा दिये।

आशु भी नंगे बदन था, उसकी चौड़ी और मजबूत छाती ने तनुजा के मम्मों पर दबाव बना लिया था।अब आशु का लंड बहुत मजबूती के साथ तनुजा की चूत पर दबाव बना रहा था।

तनुजा ने अपने एक हाथ को खाली किया और सीधे आशु के लंड को पकड़ कर मसला।अब आशु भी संभला और खड़ा हो गया और बोला- मेमसाब ये गलत है, मुझे जाना चाहिए।

तनुजा शेरनी की तरह बिफर कर उठी और बोली- मदरचोद, आग लगा कर कहता है कि ये गलत है। अब चुपचाप मेरी आग बुझा … वरना गलत तो अब हो जाएगा।आशु सन्न रह गया।

तनुजा अब नर्म पड़ कर उससे चिपट गयी और बोली- आशु, कुछ गलत नहीं है, बस अपनी अपनी प्यास बुझानी है। अब रुको मत, मुझे ज्यादा मत तड़फाओ। आओ मस्ती करते हैं।

कह कर उसने आशु का बरमुडा नीचे खींच प्रिया और नीचे बैठ कर उसका लंड लोलिपोप बना कर चूसने लगी।

तनुजा किसी पॉर्न स्टार की तरह बार बार नजर ऊपर उठाती फिर पूरे मनोयोग से लंड पर पिल जाती।वो हर मिनट उसके लंड को थूक से चिकना करके हाथों से भी मसल देती।सुपारे को तो उसने अपनी अदा से चूस कर बेहाल कर प्रिया था।

अब तनुजा खड़ी हुई और आशु को लेकर बेड पर आ गयी।

आशु ने तनुजा को बेड पर लिटाया और उसकी टांगें चौड़ा कर अपनी जीभ अंदर कर दी।

तनुजा ने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत की फाँकों को चौड़ा लिया ताकि आशु की जीभ गहराई तक उसे मजा दे सके।

अब तनुजा आशु के लंड को अंदर लेने को बेताब थी।उसने आशु से खुशामद करके कहा- एक बार मेरी आग बुझा दो, दोबारा में जैसे मर्ज़ी आए कर लेना।

आशु चढ़ गया उसके ऊपर और अपना लंड तनुजा के हवाले कर प्रिया।तनुजा ने बड़ी अदा से उसे चूमा और फिर अपनी चूत के मुहाने पर रख प्रिया।

आशु ने एक जोरदार शॉट मारा और बॉल सीधी गोल में!फनफनता लंड सारी दीवारों को तोड़ता सीधे उसकी बच्चेदानी से जा टकराया।

तनुजा की चीख निकली, बोली- फाड़ोगे क्या?पर फिर आशु ने जो धकापेल मचाई तो तनुजा भी रेलमपेल में शामिल हो गयी।

आज आशु का तनुजा और सुमन की चुदाई में फर्क मालूम पड़ा।तनुजा चुदाई की हर कला में पारंगत थी। उसका चूसना और चुदते समय अपनी चूत सिकोड़ लेना, आशु को हैरत में डाल गया।

चुदाई का जो मज़ा आज आशु को आ रहा था, वो मज़ा कल सुमन की चुदाई में नहीं था।तनुजा की चूत इतनी चुदने के बाद भी कसी हुई थी।

बाद में तनुजा ने उसे बताया कि ये सब के लिए वो स्पेशल योगा करती है।

अब तनुजा ने उसे नीचे धकेला और 69 होकर अपनी चूत तो आशु के मुंह में दे दी और खुद उसका लंड पूरा गले तक लेने लगी।

उसकी चुसाई वो जबरदस्त थी कि आशु उसे झेल नहीं पाया और बार-बार बाहर निकालने की खुशामद करने लगा।पर तनुजा ने उसे नहीं छोड़ा।

आशु ने तनुजा के मुंह में ही फव्वारा छोड़ प्रिया।तनुजा उसके वीर्य को आखिरी बूंद तक गटक गयी।

तभी डोरबेल बजी।दोनों सकते में आ गए।

घड़ी देखी तो बच्चों के आने में तो अभी आधा पौना घंटा था।

आशु ने अपने कपड़े संभाले और बाथरूम में घुस गया।तनुजा ने शॉर्ट्स और टी शर्ट पहनीं, कमरे की बिखरी चादर को ठीक किया।

घंटी दोबारा बजी, तो तनुजा ने गेट खोला।सामने सुमन खड़ी थी।

तनुजा ने अपने को संभालते हुए कहा कि बस आँख लग गयी थी, इसीलिए खोलने में देर हो गयी।

सुमन जबरदस्ती अंदर आ गयी और बोली- मैं पूछ थोड़े ही रही हूँ कि क्यों देर लगी। चल चाय पिला।

तनुजा घबरा गयी।नीचे मैट पड़ा था, उसके पास बॉडी ऑयल।सब हालात बयां हो रहे थे।

तनुजा बोली- अभी तू चल … अभी मैं तेरे को थोड़ी देर में फोन करती हूँ, चाय के साथ पकोड़े भी खिलाऊँगी।सुमन हंस कर बोली- क्यों? अभी क्या अकेली चुदवाएगी?तनुजा हकला कर बोली- क्या बकवास कर रही है तू?

सुमन ने हंस कर आशु को आवाज़ दी और कहा- बाहर आ जा … वरना अभी सेक्युरिटी को बुला लूँगी।

आशु झेंपता हुआ बाहर आ गया।सुमन ज़ोर से हंस पड़ी।

उसने तनुजा से पूछा- कैसी रही चुदाईतनुजा चुप रही तो सुमन बोली- कल इसने मेरी चुदाई की है, आज तेरी कर रहा है। ये तो बड़ा चुदक्कड़ हो गया। पर है माल जबरदस्त इसके पास! चल अब हम दोनों की प्यास बुझा एक साथ।आशु ने बहुतेरे हाथ-पाँव जोड़े कि आज तो माफ कर दो, थक गया हूँ.पर सुमन ने आँख तरेरी और कहा- बेटा नसीब अपना देख कि एक साथ दो दो मिल रही हैं।

अब तनुजा भी खुल गयी और तीनों वापिस बेड पर पहुँच गए।तीनों के कपड़े वापिस उतर गए।

अब चुसवाने की बारी सुमन की थी। उसके मम्मे तो तनुजा ने लपके और चूत में जीभ घुसाई आशु ने!

सुमन सब कुछ सोच कर आई थी।चुसवाने के थोड़ी देर में सुमन ने तनुजा से कहा कि वो उसे अपनी चूत चूसने को दे और आशु से उसने अपनी चूत चूसने को कहा.

आशु का लंड तनुजा के मुंह में आ गया।

अब तीनों एक गोला बनाकर एक दूसरे को चूस रहे थे।

सुमन ने तनुजा से कहा- आशु का लंड जैसी ही तन जाये तो इसे मेरी चूत में कर देना। अगर ये बाहर ख़लास हो गया तो मेरी चूत का क्या होगा, वैसे ही सुबह से मोमबत्ती से कर रही हूँ।

आशु को मालूम था कि सुमन बिना चुदवाए जाने नहीं देगी तो उसने तनुजा से अपना लंड छुड़ाकर सुमन की टांगें फैलाईं और बोला- लाओ मेमसाब पहले तुम्हारी चूत की आग ठंडी कर देता हूँ।

सुमन भी अपनी टांगें चौड़ा कर तैयार हुई तो आशु ने पेल प्रिया अपना मूसल सुमन की चिकनी चूत में!वो चीखी, बोली- कमीने, तनुजा ने क्या खिला प्रिया, तेरा मूसल तो कल से भी ज्यादा मोटा हो गया, अब पेल ज़ोर लगा कर!

आशु के धक्के बढ़े तो सुमन की आवाज़ें बढ़ती गईं।अब तनुजा भी आहिस्ता से सुमन के मुंह पर बैठ गयी।

सुमन ने अपनी जीभ तनुजा की चूत में कर दी।तनुजा ने आगे झुककर सुमन के मम्मे मसलने शुरू कर दिये।

कमरे का माहौल एकबार फिर गर्मा गया।सुमन की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद तनुजा ने आशु को अपनी ओर खींचा और उसका लंड अपनी चूत में कर लिया।

तनुजा की दोनों टांगें ऊपर उठी हुई थीं पर तनुजा ने उन्हें चौड़ाया नहीं था, इससे उसकी चूत सिकुड़ गयी और आशु को चुदाई में मज़ा दोगुना हो गया।

सुमन तनुजा के मम्मों पर पिल गयी, बोली- मोटी, तेरे आदमी ने तो तेरे मम्मे खूब मजेदार कर दिये हैं, चूस चूस कर! कभी कभी मेरे भी चुसवा प्रिया कर!

अब आशु का होने वाला था, उसने तनुजा से पूछा- कहाँ निकालूँ?तो तनुजा बोली- मैंने कॉपर टी लगवा रखी है, तुम अंदर ही निकाल दो।

आशु ने अपने माल से तनुजा की चूत भराई की रस्म पूरी कर दी।

तीनों निढाल होकर वहीं पड़ गए।तनुजा की निगाह घड़ी पर पड़ी, उसने हड़बड़ी से सबको उठाया- फटाफट निकलो, बच्चे आते होंगे।

तीनों ने अपने अपने को ठीक किया, तनुजा ने रूम ठीक किया।

तभी सुमन ने एक बम फोड़ा।उसने आशु से कहा- सुन आशु या तो नोएडा छोड़ के चला जा या सिर्फ हम दोनों तक ही सीमित रहना. वरना कल और आज का ये सेशन मेरे मोबाइल में कैद है और तू अविनाश को जानता है, वो तुझे मिनट में बर्बाद करवा देगा। आगे तेरी मर्ज़ी!

आशु ने उनके बहुत हाथ जोड़े- मैं बर्बाद हो जाऊंगा.

तो सुमन हंस कर बोली- बहनचोद … जिस समय तू मुझे चोद रहा था तब तूने नहीं सोचा कि हम ये रिस्क कैसे ले रही हैं. और सुन, मेरे आने का प्लान तो सुबह ही मैंने और तनुजा ने मिल कर बना लिया था। हमें तुझ से कोई शिकायत नहीं बस तेरे पर कतरने थे, सो क़तर दिये। अब तू भी मजे ले, पैसे ले और हमें भी मजे दे। पर अगर अपना दायरा बढ़ाया तो जेल के अंदर ही दिखेगा।आशु ने उसने ये वादा किया कि उन्हें उससे कोई शिकायत नहीं होगी।

अब तो सुमन और तनुजा का गुलाम हो गया था आशु!जब वो दोनों हॉट वीमेन सेक्स चाहती तब सोलो या थ्रीसम करती।आशु भी अब खुश था कि चुदाई के साथ पैसे भी मिलते हैं।

दोस्तो, कैसी लगी ये हॉट वीमेन सेक्स कहानी, लिखिएगा मेरी मेल आईडी support@mohakkisse.com पर!

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चुदाई में शह और मात

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