नौकर-नौकरानी
कामुक, बोल्ड और रोमांचक हिंदी कहानियों का बेहतरीन संग्रह।
मेरा गुप्त जीवन -30
कम्मो जब लखनऊ में आई तो उसके पास धन के नाम मेरे दिए हुए थोड़े से रूपए ही थे। जब तक वो चले वो एक छोटी सी धर्मशाला में रही और जब वो खत्म हो गए तो वो मजबूरन लोगों के घर का काम-काज करने लग गई और एक सज्जन परिवार में उसको आसरा भी मिल गया लेकिन घर के मालि...
मेरा गुप्त जीवन -29
मैं दो औरतों को चोद कर उनके बीच खड़े लंड को लेकर लेटा था और हैरान हो रहा था कि पारो कैसे मेरे मन मर्ज़िया हो गई।एक हाथ पारो के मोटे मम्मों के साथ खिलवाड़ कर रहा था और दूसरे से मैं गंगा की चूत को सहला रहा था।पारो के साथ चुदाई एक क्षण में हो गई, पारो इ...
मेरा गुप्त जीवन-28
मम्मी मेरा इंतज़ार कर रही थी और हम दोनों ने मिल कर मेरा सूटकेस तैयार कर प्रिया।यह फैसला हुआ था कि मैं अपनी लखनऊ वाली कोठी, जो कभी कभी इस्तेमाल होती थी, में जाकर रहूँगा। वहाँ एक चौकीदार अपने परिवार के साथ नौकरों की कोठरी में रहता था, उसको फ़ोन पर सब बत...
मेरा गुप्त जीवन-27
मैं बोला- चम्पा, आज हम तीनों चुदाई करते हैं, पहले गंगा को चोदते हैं हम दोनों फिर तुझको चोदते हैं हम दोनों।क्यों कैसी रही यह?
मेरा गुप्त जीवन-26
जैसे जैसे मेरे लखनऊ जाने के दिन निकट आ रहे थे मेरे हाथ पैर फूलने लगे और इसका मुख्य कारण था कि मेरा वहाँ की चुदाई का प्रबंध नहीं हो पा रहा था।एक दिन शाम को घर लौटा तो देखा कि हवेली में बड़ी चहल पहल हो रही थी।निर्मला को बुला कर पूछा- यह क्या हो रहा ह...
मेरा गुप्त जीवन -24
अगले दिन चम्पा निर्मला को लेकर मम्मी से मिलने आई। थोड़ी देर बाद वो दोनों मम्मी के साथ मेरे कमरे में आईं। मम्मी ने आते ही कहा- सोमू, चम्पा इस निर्मला को ले कर आई है तुम्हारे काम के लिए! बोलो ठीक है यह?मैंने कहा- मम्मी, आप जो फैसला कर लो, वही ठीक है।
मेरा गुप्त जीवन- 23
बसंती के जाने का दुःख किसी को नहीं हुआ क्यूंकि वो कुछ दिनों में सिर्फ मेरे साथ ही सम्बन्ध बना पाई थी। कई बार मैं सोचता था कि बसंती का व्यवहार अजीब ज़रूर था लेकिन इतना भी अजीब नहीं कि संभव न हो सके।ऐसे किस्से तो सुनने में आते रहते थे कि अमुक को रात ...
मेरा गुप्त जीवन- 22
मैंने अपना पायजामा खोला और खड़े लंड को उसकी चूत पर टिका प्रिया।तभी देखा कि उसने भी झट से अपनी टांगें पूरी खोल कर फैला दी जिस वजह से मुझ को लंड को उसकी चूत में डालने में कोई दिक्कत आई।
मेरा गुप्त जीवन- 21
पहले चम्पा और अब फुलवा दोनों ही गर्भवती हो गई तो मुझको ऐसा नहीं महसूस हुआ कि उन दोनों को गर्भवती करने में मेरा कोई रोल है लेकिन एक दिन चम्पा और फुलवा मुझको मिलने आई उसी कॉटेज में, दोनों के चेहरे चमक रहे थे और दोनों बेहद खुश थी।चम्पा का चौथा माह चल...
मेरा गुप्त जीवन- 20
‘छोटे मालिक, मेरे बाद बिंदू है न… आपकी हर तरह की सेवा करेगी। क्यों बिंदू करेगी न? वैसे बिंदू छोटे मालिक हर तरह तेरी मदद करेंगे, पैसे और कपड़े लत्ते से, क्यों छोटे मालिक करोगे न?मैंने कहा- यह भी कोई कहने की बात है। फुलवा, ला वो मेरा बटुवा दे।
मेरा गुप्त जीवन- 19
बिंदू और फुलवा का आपस का प्रेमालाप देख कर मन बड़ा विचिलत हो गया था।उधर फुलवा को शायद बिंदू के साथ प्रेम बहुत अच्छा लगा क्यूंकि वो भी उसके पीछे पीछे लगी हुई थी। मेरे सारे काम भुला कर बिंदू के पीछे लगी हुई थी।उसको बार बार याद करवाना पड़ रहा था कि मेरे...
मेरा गुप्त जीवन- 17
यह प्रसंग कोई 10 मिन्ट तक चला और तब तक बिंदू की झिझक काफ़ी दूर हो गई थी। अब वो बेझिझक मेरे लंड पर हाथ फेरने लगी और मेरा लंड और अकड़ गया।फुलवा ने जानबूझ कर मेरा पयजामा लंड के ऊपर से खिसका प्रिया और लंड एकदम आज़ाद होकर लहलहाने लगा।दबी आँख से मैंने देखा क...