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माँ की चुदाई पठन समय: 15 मिनट पढ़ा गया: 578 बार

माँ बेटी की चूत गांड की पूरी चुदाई- 1

टोबी मैग्योर

06 Aug 2016 को प्रकाशित

माँ बेटी की चूत गांड की पूरी चुदाई- 1
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Xxx माँ सेक्स हाउस कहानी में मैंने अपनी अम्मी को अपने भाईजान से चुदाई का मजा लेती देखा. वे दोनों अब्बू के दूकान जाते ही शुरू हो जाते थे. मैं उनकी चुदाई देखती थी.

दोस्तो! मेरा नाम फातिमा है और मेरी उम्र 23 साल है.मेरा फिगर 34-26-34 है. मेरा रंग गेहुआं है और मेरी हाइट थोड़ी कम, सिर्फ 4 फीट 10 इंच है.

इस वजह से मैं चेहरे से उम्र से काफी छोटी और फिगर से उम्र से बड़ी लगती हूँ.

आज मैं आपको अपनी Xxx माँ सेक्स हाउस कहानी सुनाने जा रही हूँ.इसमें बीच-बीच में मेरी भी कहानी आएगी लेकिन मैं अपनी पूरी सेक्स कहानी अगले भाग में बताऊंगी.मेरे परिवार में चार लोग हैं.

अब्बू अहमद, अम्मी रुखसार, भाई साहिल और मैं.

मेरे अब्बू अम्मी से उम्र में काफी बड़े हैं.अब्बू अम्मी से 12 साल बड़े हैं और उनकी उम्र अभी 59 साल है.अम्मी की उम्र 47 और भाईजान की 29 है.

अम्मी की शादी बहुत कम उम्र में हो गई थी.क्योंकि नानी ने नानू को अम्मी को चोदते हुए देख लिया था तो उन्होंने जल्दी से अम्मी की शादी करवा दी.

मेरी अम्मी बहुत बड़ी चुदक्कड़ औरत हैं और उनके अन्दर बिल्कुल शर्म-हया नहीं है.

अम्मी अपना फिगर बहुत मेंटेन करके रखती हैं.उनका फिगर 36-30-38 का है और उनकी शक्ल देखकर कोई उनकी उम्र का अंदाज़ा नहीं लगा सकता.वे बेहद खूबसूरत हैं!

मेरा फिगर बिल्कुल अम्मी पर गया है.अम्मी की हाइट भी ज्यादा नहीं, वे मेरे बराबर की ही हैं.

हम दोनों का फिगर भी एक जैसा है.

साहिल भाईजान मुझसे पूरे 6 साल बड़े हैं और वे अम्मी को बहुत चोदते हैं.मैं बच.पन से उन्हें अम्मी को चोदते हुए देख रही हूँ.

मेरे अब्बू का कपड़े का बिजनेस है, वे सुबह 10 बजे दुकान चले जाते हैं और शाम को 8-9 बजे लौटते हैं.इसलिए घर पर हम तीनों ही रहते हैं क्योंकि भाईजान की अभी शादी नहीं हुई है.

अब्बू के दुकान जाते ही भाईजान अम्मी को नंगी करके सुबह-सुबह चोदते हैं.फिर अब्बू के बाद वे भी दुकान चले जाते हैं.

सबसे पहली बार की मुझे याद है, जब मैंने भाईजान को अम्मी को चोदते हुए देखा था.

अब्बू दुकान का सामान लेने दूसरे शहर जाने वाले थे.रात की ट्रेन थी तो हम सबने खाना खाया.

उसके बाद भाईजान अब्बू को स्टेशन छोड़ने चले गए.

आधे घंटे बाद भाईजान वापस आए.मैं टीवी देख रही थी और अम्मी रसोई में बर्तन धो रही थीं.

भाईजान ने अम्मी को आवाज़ दी- कहां हो, अम्मी जान!अम्मी ने रसोई से जवाब प्रिया- इधर, मेरे लाल … आ जा!भाईजान रसोई में चले गए.

मैं टीवी देखती रही.

दस मिनट बाद मुझे प्यास लगी तो मैं पानी पीने रसोई में गई.वहां मैंने देखा कि अम्मी नंगी खड़ी हैं और भाईजान अपने घुटनों पर नंगे बैठे हैं.उनका लंड एकदम तना हुआ था और वे अम्मी के चूतड़ों के बीच में अपना मुँह डालकर उनकी गांड चाट रहे थे!

मैं जैसे ही पहुंची, अम्मी बोलीं- तुम यहां क्या लेने आई? जाओ, टीवी देखो!मैंने कहा- प्यास लगी थी.भाईजान अभी भी अम्मी के बड़े-बड़े चूतड़ों के बीच मुँह डाले हुए थे.

अम्मी बोलीं- पी लो पानी और जाओ, सो जाओ!

मुझे समझ नहीं आया कि ये सब क्या हो रहा है.मैंने पानी पिया और अपने कमरे में चली गई.

एक घंटे बाद भाईजान नंगे ही कमरे में आए और सो गए.मैं और भाईजान एक ही कमरे में सोते थे.

भाईजान रात में सोते वक्त कभी कपड़े नहीं पहनते थे इसलिए उन्हें नंगा देखने की मुझे आदत थी.लेकिन उस दिन मैंने पहली बार अम्मी को नंगी देखा था.

सुबह मेरी आंख जल्दी खुल गई.

अम्मी मेरे कमरे में थीं, नंगी.भाईजान उनकी टांगें फैलाकर उनकी बुर में लंड डाले हुए चोद रहे थे.

अब्बू के घर पर न होने का पूरा फायदा अम्मी और भाईजान ले रहे थे.

रात में चुदाई, सुबह उठते ही फिर चुदाई शुरू!

थोड़ी देर बाद भाईजान ने अम्मी की चूत में अपना माल गिरा प्रिया और उनके ऊपर लेट गए.

फिर वे उनके मम्मे चूसने लगे.

कुछ देर बाद दोनों नंगे ही कमरे से बाहर चले गए.

थोड़ी देर बाद मैं भी उठकर बाहर गई.अम्मी ने नाइटी पहनी थी, जिसमें से उनका पूरा नंगा बदन दिख रहा था.

भाईजान ने बस एक हाफ पैंट पहनी थी.मुझे उनकी बातों से पता चला कि वे कहीं नहीं जा रहे थे.

मैंने भी पेट दर्द का नाटक किया और स्कूल नहीं गई ताकि अम्मी की चुदाई देख सकूँ.

उस वक्त मुझे नहीं पता था कि ये सब क्या होता है.मुझे लगा शायद ऐसा ही होता होगा.

शायद एक-दूसरे को खुश करने के लिए कोई भी किसी के साथ ऐसा कर सकता है.क्योंकि वो दोनों बहुत खुश दिख रहे थे!

कुछ देर बाद अम्मी नाश्ता बनाने लगीं.भाईजान उनके पीछे खड़े होकर उनके मम्मे सहलाने लगे.

वे कभी अम्मी के मम्मे सहलाते, कभी कुछ और करते.

कभी भाईजान अम्मी की चूत की दरार में उंगली डाल रहे थे.

फिर उन्होंने अम्मी के चूतड़ों के बीच में अपना हाथ डाला.

गांड में दो उंगलियां डालते ही उनका छेद फैलने लगा.अम्मी बोलीं- अभी साफ करके आई हूँ! ज्यादा गंदा न करना!

भाईजान बोले- आज सारा माल इसमें ही तो गिरेगा सारे दिन! आज तो सारा दिन तुम्हारे मोटे चूतड़ों के बीच में ही रहेगा मेरा लंड!अम्मी हँसकर बोलीं- अच्छा, ऐसी बात है तो मेरी चूत बुरा मान जाएगी!

भाईजान ने जवाब प्रिया- उसे भी खुश कर देंगे, टेंशन मत लो!ये सब बातें करते हुए भाईजान अम्मी की गांड में उंगली डालकर उन्हें उठा रहे थे.

उनकी एड़ियां उचक रही थीं.कुछ देर बाद वे उंगली बहुत तेजी से अन्दर-बाहर करने लगे.

अम्मी की आंखें बंद होने लगीं.सिसकारियां लेती हुई वे बोलीं- ऐसे ही करता रह मेरे लाल!

भाईजान अम्मी की गांड को उंगली से चोद रहे थे.साथ ही उनकी गर्दन को चूमते हुए दूसरे हाथ से उनके मम्मे मसल रहे थे.

मैं आराम से बैठकर ये सब देख रही थी. उन्हें पता भी नहीं था और शायद फर्क भी नहीं पड़ता.

कुछ देर बाद भाईजान अम्मी की गांड में लंड डाले हुए ही रसोई से बाहर आ गए.टीवी के पास पड़े बेड पर उन्हें झुकाकर चोदने लगे.

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मैं पीछे सोफे पर बैठी थी. उनकी नजर मुझ पर पड़ी ही नहीं.

वे अम्मी के चूतड़ों पर तमाचे मारते हुए उनकी तारीफ करते हुए उनकी गांड चोद रहे थे.

अम्मी के बड़े-बड़े स्तन झुकी हुई अवस्था में लटकते हुए झूल रहे थे.

भाईजान बोले- ये मोटे-मोटे चूतड़ों का मजा अब्बू ढंग से नहीं ले पाते! ये तो मेरे लिए ही बने हैं!

अम्मी बोलीं- हां मेरे लाल, तुम्हारे ही हैं! खूब चोदो अपनी अम्मी को, पूरे दो दिन लगातार … चोद-चोदकर मेरी बुर और गांड का कचूमर निकाल दो!

भाईजान ने अम्मी को आधा घंटा तक अलग-अलग पोजीशन में खूब चोदा.फिर अपना सारा माल उनके मोटे चूतड़ों के बीच में भर प्रिया.

जब भाईजान ने अम्मी को सीधा करके चोदना शुरू किया, तब उन्होंने मुझे देख लिया.फिर भी बिना कुछ बोले वे अम्मी को चोदते रहे.

वे बीच-बीच में मेरी तरफ देख रहे थे और मैं दोनों को लगातार देख रही थी.

Xxx माँ सेक्स के बाद भाईजान वैसे ही नंगे मेरे पास आए और बैठकर बोले- मजा आया देखकर?मैंने कहा- हां!

वे बोले- थोड़ा बड़ी हो जा, फिर तुझे भी अम्मी जितना मजा मिलेगा!पीछे से अम्मी बोलीं- अभी से न बिगाड़ उसे, नहीं तो तेरा बंटवारा हो जाएगा!

भाईजान बोले- आपके अब्बू ने भी तो आपको बचपन में चोद-चोदकर जवान बनाया था न!अम्मी बोलीं- हां, ये तो है! मेरी शादी के बाद भी तेरे नानू जब यहां आते थे, तो मुझे हर दिन चोदते थे. फातिमा के होने के दो साल बाद तक भी चोदते थे, जब भी आते थे या मैं जब वहां जाती थी. अब तो बस चूचियां दबाते हैं या चूत रगड़कर मजा ले लेते हैं.

भाईजान बोले- बुड्ढे में अब भी जवानी है!अम्मी बोलीं- ऐसे नहीं बोलते! नानू हैं तुम्हारे और नानू क्या, अब्बू हैं तुम दोनों के!

भाईजान बोले- हम दोनों के लिए उनका बीज लगा था?अम्मी बोलीं- हां, तू तो जब मैं शादी करके आई थी, तब पेट में था. एक महीने की प्रेगनेंट थी मैं … और फातिमा जब मैं घर पर थी, तो एक रात जोश में गलती से अब्बू ने सारा माल मेरी बुर की गहराई में भर प्रिया. नौ महीने बाद ये हो गई.

ये सब बातें करते हुए अम्मी भाईजान के माल को, जो उनके चूतड़ों के बीच में गिराया था, पौंछकर साफ कर रही थीं.फिर वे भी नंगी ही सोफे पर आकर बैठ गईं.

अम्मी बोलीं- तुम्हें पता है तुम्हारे भाईजान और मैं अभी क्या कर रहे थे?मैंने कहा- नहीं!

अम्मी ने भाईजान का लंड हाथ में लिया और बोलीं- इसे प्यार कहते हैं! जब ये तुम्हारे किसी भी छेद में जाता है और दो लोग एक-दूसरे के नंगे बदन को चूमते हैं, एक-दूसरे से चिपकते हैं, एक-दूसरे का पानी निकालते हैं, उसे प्यार करना कहते हैं. जब तुम थोड़ी बड़ी हो जाओगी, तब तुम्हें भी प्यार मिलेगा!

मैंने पूछा- अब्बू भी करेंगे प्यार?अम्मी बोलीं- हो सकता है, क्या पता!

भाईजान अम्मी के बड़े-बड़े मम्मे चूसने में लगे थे.अम्मी के मम्मे बहुत बड़े हैं.

गोरी-गोरी बड़ी-बड़ी चूचियों पर हल्के भूरे रंग के निप्पल बहुत सूट करते हैं.अम्मी की चूचियां बड़ी होने के बावजूद कसी हुई हैं. उनकी चूत एकदम चिकनी, बिना बालों वाली थी, जो मेरे सामने खुली थी क्योंकि अभी-अभी चुदाई हुई थी.

उनकी चूत हल्की भूरी और उसकी दोनों फांकें मोटी-मोटी हैं, जैसी अब मेरी हो गई हैं.अम्मी बाहर जाने पर बड़े फैशन में जाती हैं. ज्यादातर लैगी और टॉप पहनती हैं.

उनकी चूत की फांकें लैगी के ऊपर से अलग-अलग दिखती हैं. लैगी बीच में घुसी रहती है, क्योंकि वे उसे खींचकर ऊपर पहनती हैं.उनकी लैगी गांड पर चिपक जाती है, जिससे उनके मोटे-मोटे चूतड़ और भी मोटे नजर आते हैं.

Xxx माँ पैंटी सिर्फ पीरियड में पहनती हैं, बाकी समय वे कभी पैंटी पहनतीं ही नहीं हैं.

दस साल पहले भाईजान ने मुझे भी अपनी रखैल बना लिया और तब से भाईजान मुझे और अम्मी को रोज चोदते हैं.दिन में दोनों को साथ में और रात में मुझे अकेले!

जब भाईजान ने मुझे चोदना शुरू किया, तब तक घर में और भी लड़के आने लगे थे जो भाईजान के दोस्त ही थे.

भाईजान के बहुत से दोस्त दिन में घर पर आने लगे.कभी-कभी तो भाईजान के न होने पर भी आते थे और सब अम्मी को चोदने के लिए ही आते थे!

उनके दोस्तों की नजर धीरे-धीरे मुझ पर भी पड़ने लगी.

एक दिन उनके एक दोस्त ने कहा- साहिल, अब तो लड़की बड़ी हो गई है! उसकी मिठाई कब खिलाएगा, या सारी अकेले ही खाएगा? अब तो उसकी चूचियों में भी रस आ गया है और चूतड़ भी गोल-गोल, मोटे-मोटे हो गए हैं!

भाईजान बोले- मैंने कब मना किया? तुम लोग कभी बोले ही नहीं!

भाईजान बैठकर दारू पी रहे थे और उनके पांच दोस्त अम्मी को चोदने में लगे थे.

उन सबने भी दारू पी रखी थी और अम्मी ने भी!

भाईजान के कोई भी दोस्त अकेले नहीं आते थे.वे हमेशा कम-से-कम तीन-चार लोग ही आते थे, कभी-कभी ज्यादा.

जब अब्बू शहर से बाहर होते थे, तब यह खुल कर होता था.

भाईजान के पांचों दोस्त अगले दो दिन घर में ही रहने वाले थे क्योंकि अब्बू पिछली रात ही निकले थे और उनके जाने के बाद ही रात में वो पांचों लड़के दारू-वारू लेकर आ गए थे!

भाईजान उठकर कमरे में नंगे आए और मुझे चूमने लगे.वे बोले- आज तुझे अलग-अलग भाईजान चोदेंगे!

तब तक भाईजान मुझे दो साल से चोद चुके थे तो मुझे चुदने की अच्छी-खासी आदत लग चुकी थी और पूरा मजा आने लगा था.

भाईजान मेरी गांड भी मारते थे और चूत भी. इसलिए मेरे दोनों छेद ढंग से खुल चुके थे.भाईजान ने मुझे बेड से खड़ा किया और अपनी उंगली पर थूक लगाकर मेरी गांड में डालते हुए बोले- गांड साफ है कि नहीं?

मैं बोली- हां! अभी थोड़ी देर पहले तो की थी!

भाईजान ने मुझे गोद में उठाया और अम्मी के कमरे में ले आए, जहां अम्मी को उनके पांच दोस्त पूरी दम लगाकर चोद रहे थे.भाईजान बोले- लो, पी लो नई चूत का रस भी आज! फिर मत कहना सारी जवानी मैंने अकेले लूटी बहन की!

तब तक भाईजान को कुछ याद आ गया.मुझे नीचे उतार कर बेड पर बैठते हुए बोले- अबे सोनू! तू कब चखाएगा अपनी बहन की बुर हम सबको?

सोनू भाई बोले- अरे यार, तुझे पता है वह साली नखरे बहुत करती है! झांट सी है और भोली तेरी बहन के जैसी ही!

मैं बोल पड़ी- अच्छा!सोनू- हां, अभी परसों रात में ही जब मैं उसे चोद रहा था, तो उसने बताया कि चाचा ने उसकी चूत में उंगली डाली, फिर अपना लंड चुसवाया और फिर चूत भी मारी.

मैं मजे से सुनने लगी.

सोनू- वह कह रही थी कि चाचा को मना करो, मुझे उनके साथ नहीं करना! जब मैंने पूछा कि क्यों नहीं करना? तो वह बोली कि मुझे और लंड नहीं भाते!

भाईजान बोले- मुझे नहीं पता ये सब! कल लेकर आ अड्डे पर! चार लंड एक साथ देखकर खुश हो जाएगी!भाईजान सोनू से बातें कर रहे थे और सोनू अम्मी की गांड मारने में लगा था.

उनके बाकी दोस्त मेरे बदन से खेल रहे थे!

दोस्तो, यह गर्म और रसीली सेक्स कहानी पढ़ कर आपकी टांगों के बीच में रस आ गया होगा, ऐसी उम्मीद करती हूँ.इस Xxx माँ सेक्स हाउस कहानी के अगले भाग में आपको और भी ज्यादा मजा आएगा क्योंकि यह एक फैमिली सेक्स कहानी है न!

तो बस जल्दी से कमेंट्स लिखेंsupport@mohakkisse.com

Xxx माँ सेक्स हाउस कहानी का अगला भाग:माँ बेटी की चूत गांड की पूरी चुदाई- 2

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माँ बेटी की चूत गांड की पूरी चुदाई

कुल भाग: 2
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