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Group Sex Story • पठन समय: 9 मिनट • पढ़ा गया: 623 बार

ट्रेन में धकाधक छुकपुक-छुकपुक-3

जूजाजी

05 Aug 2017 को प्रकाशित

ट्रेन में धकाधक छुकपुक-छुकपुक-3
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प्रेषक : जूजा जीमुझे अभी भी याद था कि दो छेद मेरे लंड का बड़ी बेकरारी से इंतजार कर रहे हैं। मैंने रीमा की तरफ देखा तो मैडम अपनी चूत में ऊँगली अन्दर-बाहर कर रही थीं।मैंने कहा- आओ रानी लेटो इधर.. तुम्हारा चुदाई का ख्वाव भी पूरा कर देता हूँ।वो बोली, “पहले शब्बो को तो निपटा दो।”मैंने कहा- दोनों को साथ साथ चोदूँगा.. तेरी इस मादरचोदी शब्बो को भी थोड़ा रिलेक्स मिल जाएगा।वो बोली- ठीक है.. पर जानूं मुझे जरा आहिस्ता से चोदना। मुझे बड़ा डर लग रहा है।वो वहीं बगल में जगह बना कर लेट गई और अपनी टांगों को फैलाकर अपनी चूत की छटा बिखरने लगी।मुझसे बोली- आ जाओ।मैं जैसे ही अपना लंड शब्बो की बुर से खींचा उसका भीमकाय रूप देख कर रीमा डर गई।मुझसे हकलाते हुए बोली- जानूं तुम्हारा ये मूसल मेरी जरा सी चूत में कैसे घुसेगा..? कहीं मेरी फाड़ तो नहीं दोगे..?मैंने कहा- आज तक के इतिहास में किसी औरत की कितनी भी छोटी बुर क्यों न हो और मोटे से मोटा लंड भी उसकी चूत में क्यों न घुसा हो.. मैंने तो कभी नहीं सुना कि किसी की चूत फट गई हो। हाँ चूत की अन्दर की झिल्ली जिसे सील कहते हैं, वो जरूर फटती है। सो ये तो चूतों का भाग्य होता है कि और ये प्राकृतिक भी है कि उसको एक बार जरूर फटना या खुलना तुम जो भी कहो, होता है।रीमा बोली- मैंने देखा था कि शबनम की चूत में तुमने जब घुसेड़ा था तो उसको बहुत दर्द हुआ था, पर जब तुमने उसके थन पिए तो उसका दर्द खत्म हो गया था, प्लीज तुम मेरे थन पहले दुह लो, ताकि मुझे शुरू से ही मजा मिले।मैंने कहा- ठीक है रीमा रानी मैं ऐसा ही करता हूँ।मैंने अपना लंड उसके मुँह में लगाया और कहा- जरा शब्बो की मलाई चाट कर मस्त हो जा, फिर तेरी चुसाई और चुदाई दोनों करता हूँ।उसने मेरे लौड़े को अपने मुँह में लेकर अपनी जीभ से चाटना शुरू कर प्रिया। उसने करीब एक मिनट तक लंड को अपनी जुबान से चाट कर साफ प्रिया। अब मैंने उसके चूत पर अपना लंड टिकाया और अपने होंठो से उसके गुलाबी निप्पलों को चूसना चालू कर प्रिया।मैंने उससे कहा- सुन माँ की लौड़ी अब अपनी चूत में मेरा लंड गटकने की कोशिश कर, नहीं तो मैं सूखा ही पेल दूँगा।रीमा बोली- ठीक है मेरे हरामी चोदू.. मेरी चूची पी साले… मैं अपनी बुर मे तेरा लंड खाती हूँ और सुन शब्बो.. मेरे चोदू का लंड मेरी चूत से फिसले नहीं जरा ध्यान रखना।शब्बो बोली- ठीक है मेरी जान आज तो पूरा अन्दर ही डलवा दूँगी तेरी चूत में… इस हरामी का डण्डा, फिर चाहे तेरी फट ही क्यों ना जाए।तभी अचानक मेरे लौड़े ने अपनी म्यान खोज ली और धीरे से रीमा की गुलावी चूत में आधा पेवस्त हो गया। रीमा की एक जोर की चीख निकली और वो ऊपर को उठने को हुई, पर मैंने और शब्बो ने उसको लंड पर से उठने नहीं प्रिया।शब्बो बोली- भागती किधर है कुतिया.. अब तो बाजा बजवा कर ही उठना।मैं समझ गया कि लौंडिया सिर्फ बकचोदू ही है इनके बस की चुदाई नहीं है, मुझे ही कुछ करना पड़ेगा और फिर मैंने नीचे से ही धक्के मारने चालू कर दिए।रीमा के मुँह से दर्द भरी आवाजें निकलने लगी, “आए ….. हाए….मार प्रिया मादरचोद कुछ तो रहम कर मेरी चूत को बुलंद दरवाजा बना कर छोड़ेगा क्या?”कुछ देर में ही रीमा को मजा मिलना शुरू हो गया और उसने सिसकारी भरते हुए मेरा सहयोग करना चालू कर प्रिया। उसके हाथ भी मेरी छाती पर टिक गए थे और वो अब पूरा मजा लेने लगी थी।अब मेरा ध्यान फिर अपने प्लान पर गया और मैंने शब्बो से कहा- चल छिनाल अब तू एक ओवर डाल दे।रीमा को उठाकर शब्बो ने मेरे लंड की सवारी गांठनी शुरू कर दी और रीमा मेरी छाती पर बैठ कर अपनी चूत को मेरे मुँह की ओर करके बैठ गई और बोली- ले राजा अपना रस पी ले मेरी चूत में छप गया है।माँ की लौड़ी ने मुझे मेरा माल ही चटवा प्रिया। खैर और मैं इस प्रकार अपने मुँह और लंड दोनों से दो-दो चूतों का मजा लेने लग गया था।इस तरह बारी-बारी से दोनों ने मेरे हथियार की 15 मिनट तक चुदाई की, अब रीमा का ओवर चल रहा था। उसने जोर-जोर से घस्से लगाना स्टार्ट कर दिए थे। धकाधक इंजन चल रहा था और लंड और चूत की शंटिग चल रही थी।तभी रीमा हांफने लगी और बड़बड़ाने लगी, “अनिल मैं झड़ने वाली हूँ जरा नीचे से धक्का….मार …मेरे राजा….”मैंने नीचे से उसकी चूत में टक्कर देनी चालू कर दीं और, “ले माँ की लौड़ी… ले साली… ले मेरा लंड गटक कुतिया…चुदैल …!”“अब बस मैं गईइइइ….!” और रीमा का काम तमाम हो गया था पर मेरा पानी अभी नहीं छूटा था। मैंने लौड़ा बाहर निकाल लिया और शब्बो की पिच पर चौके-छक्के लगने लगे। मैं उसकी चूचियों को अपनी हथेलियों में भर कर आटे जैसा गूंथ रहा था।“उई ई .. धीरे मसक कमीन साले .. रण्डी समझ रहा है क्या ?? मादरचोद मेरी अपनी चूचियाँ हैं किसी से किराए पर नहीं लीं कुत्ते ..!”मैं मस्त था … धकाधक चुदाई चल रही थी.. बगल में रीमा अपनी चूत पोंछ रही थी और उसके बाद उसने उठ कर एक गिलास में रम भरी। मैंने देखा तो मेरा मन भी हुआ, पर सोच रहा था कि कहीं भांग के ऊपर रम कुछ हरकत न कर दे .. फिर मैंने रीमा से कहा- एक गिलास मुझे भी दे.. और एक सिगरेट और जला दे।चुदाई रोक कर उससे रम का गिलास लिया और बड़ा सा घूँट खींचा तब तक रीमा ने सिगरेट जला कर मुझे थमा दी चखना की जगह सिगरेट भी खूब मजा देती है ..सो लम्बा सुट्टा मारा और ऊपर की तरफ मुँह करके हवा में धुआँ छोड़ प्रिया।नीचे से शबनम ने अपनी कमर उचका कर मेरे लौड़े को टुनयाया, “अबे चोदू मुझे देना सिगरेट ..!”मुझे उसकी सिगरेट मांगने की अदा पर बड़ी हँसी आई। मैं सोच रहा था कि आज कितनी बड़ी चुदक्कड़ लौंडियाँ मिलीं.. मजा आ गया।लंबा सा कश खींच कर उसने मुझे सिगरेट बापस कर दी मैंने भी एक लम्बा कश खींचा और रीमा को दे दी। अब शब्बो की चूत में फिर से लौड़ा सटासट चलने लगा।शब्बो बोली- अब तू नीचे आजा, मुझे घुडसवारी करने दे..!मैं नीचे और शब्बो ऊपर.. लण्ड-चूत की कुश्ती जारी थी। मुझे रम ने हिला प्रिया था, साली रम मेरी खोपड़ी पर सवार हो चली थी, थकान-वकान तो कुछ थी ही नहीं सो नीचे से शब्बो की चूत में वो टापें पड़ रही थीं कि शब्बो की चूत ने रोना शुरू कर प्रिया था उसका बदन ऐंठने लगा था, “ ऊ ओ ..ईई.. गई मैं गई … !” और वो बिल्कुल निढाल हो कर मेरे सीने के ऊपर ढेर हो गई। मेरा लौड़ा भी पिघलने की कगार पर था.. सो नीचे से उठ कर, उसको नीचे किया, इस दौरान मेरा लौड़ा उसकी मुनिया में ही घुसा रहा। ऊपर आकर मैंने ताबड़-तोड़ 20-25 धक्के मारे… मेरी हर चोट पर शब्बो की चीखें निकल रही थीं ..।

फिर मेरा लावा छूट गया… मेरे गरम रस से उसकी चूत भर गई..एक पल के लिए मुझे नशा सा आया फिर मेरे चेहरे पर अजय की मुस्कान थी। शब्बो के ऊपर से उठा ही था कि दारु के नशे में टुन्न नीलू जो बगल में ही आ गई थी। उसने मेरे मुरझाए लवड़े को सीधे अपने मुँह में ले लिया, मुझे तब ध्यान आया कि अभी ये भी बाक़ी है ..कुछ ही पलों में मैं आराम से सीट पर अपने पैर पसारे बैठा था और नीलू रानी मेरा लण्ड चचोर रही थी। रीमा ने मुझे और शबनम को पानी प्रिया फिर मैंने उससे एक स्माल पैग भी माँगा और उसने मुझे एक पैग और एक सिगरेट सुलगा कर दी.. मैंने मजे से दारू और सिगरेट के साथ लौड़ा चचुरवाने का आनन्द उठाना शुरू कर प्रिया। मैंने लौड़े के ऊपर से थोड़ी सी रम टपकाई तो नीलू के मुँह में भी रम की बूँदें जाने लगीं। कुछ ही देर में मेरा लौड़ा एक बार फिर तैयार था। मैंने नीलू को अपनी गोद में ही बैठा लिया। उसकी नंगी छाती मसलने से मेरी उत्तेजना बढ़नी लगी।तभी शब्बो बोली- राजा इसकी सील तोड़नी पड़ेगी .. साली की चूत अभी तक पैक है ..!मेरा लण्ड गनगना गया, जीवन में पहली सील तोड़ने का अवसर था।मुझसे फेसबुक पर भी जुड़ सकते हैं और ईमेल आईडी भी लिख रहा हूँ।कहानी जारी है।

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ट्रेन में धकाधक छुकपुक-छुकपुक

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी
प

प्रदीप मिश्रा ‘पिक्कू जी’

5 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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