टाइट ऐस्स एनल सेक्स कहानी में कुंवारी चूत फाड़ने के बाद मैं उस स्कूल गर्ल की गांड मारने को बेताब था. वह भी सेक्स के पूरे मजे लेना चाहती थी पर डरती थी दर्द होने की आशंका के चलते.
कहानी के आठवें भागकमसिन लड़की की चूत का पानीमें आपने पढ़ा कि मैं किरण को स्कूल ले गया और उसके प्रिन्सीपल से मिल कर उसकी समस्या हल कर दी।उसके बाद हम घर आ गए.
अब आगे टाइट ऐस्स एनल सेक्स कहानी:
अंदर आते ही भाभी ने पूछा, “प्रिंसिपल क्या बोला?”किरण ने खुश होते हुए भाभी को पूरी बात बताई और कहा कि कल से वो स्कूल जाएगी।
भाभी ने किरण की गाल पर हाथ फेरते हुए कहा, “बेटी, ऐसे ही खुश रहा कर! और देख, अब तू जवानी के खूब मजे लूट! यही उम्र है हँसने-खेलने की!”किरण बोली, “जी चाची!”
भाभी बोली, “चाची नहीं, मम्मी बोला कर तू मुझे!”किरण मुस्कुराते हुए बोली, “जी मम्मी!”
फिर भाभी ने किरण का हाथ पकड़कर कहा, “जा, अब तू देवर जी की गोद में बैठ जा और उन्हें भी खुश कर दे! वो जैसा बोलें, जो माँगें, उन्हें दे दे!”
किरण मुस्कुराते हुए मेरी गोद में बैठ गई और गर्दन घुमाकर मेरे होंठों को चूमते हुए बोली, “भैया, आई लव यू!”
मैंने भी उसके नरम होंठों को चूमते हुए अपने दोनों हाथ उसकी चिकनी टाँगों पर फिराते हुए कहा, “आई लव यू टू बेबी!”
किरण कसमसाकर मेरी बाहों में समा गई।मैंने धीरे-धीरे उसकी स्कर्ट को ऊपर उठाकर उसकी नंगी जाँघों पर हाथ फिराने लगा।हमारे होंठ पागल प्रेमियों की तरह एक-दूसरे से उलझे हुए थे।
थोड़ी देर तक किरण ने मेरे होंठ चूसकर और अपने चुसवाकर होंठों को अलग किया और उठकर मेरी तरफ मुँह करके मेरी टाँगों पर बैठ गई।
वो मुझसे लिपटते हुए बोली, “भैया, अब से आप ही मेरे बॉयफ्रेंड हो! मैं आपको अपनी सब सहेलियों से मिलवाऊँगी!”
भाभी, जो हमारे पास ही खड़ी थी, हँसते हुए बोली, “अरे बेटी, ऐसी गलती मत करना! देवर जी बहुत बड़े लड़कीखोर हैं! ये तेरी सारी सहेलियों की चूत फाड़ देंगे!”किरण इठलाते हुए बोली, “ये ऐसा करने की हिम्मत तो करके दिखाएँ! अब ये सिर्फ मेरे हैं!”
फिर वो अपना एक हाथ अपनी चूत के पास से मेरी जिप पर रखकर लंड को टटोलते हुए बोली, “और इनका लंड अब सिर्फ मेरा है! मैं अब भैया को किसी को भी हाथ नहीं लगाने दूँगी!”
किरण सही बोल रही थी क्योंकि जब कोई कमसिन लड़की किसी मर्द से अपनी चूत फड़वाकर कामसुख के चरम को पा लेती है, तो वो उस मर्द को दिल से चाहने लगती है।तब वो नहीं चाहती कि वो मर्द उसके बिना किसी को देखे भी।
इस समय किरण की यही हालत थी।पर वो ये नहीं जानती थी कि वो जिस मर्द को प्यार कर बैठी है, वो उसकी कामवासना को ऐसा भड़काएगा कि वो खुद अपनी सहेलियों को बुलाकर उनकी चूत में लंड डलवाएगी।
भाभी बोली, “अरे बेटी, ऐसा मत बोल! अगर तू ऐसा करेगी, तो मेरा क्या होगा? मेरी चूत तो प्यासी रह जाएगी!”किरण बोली, “मम्मी, क्या हुआ! मैं आपकी चूत से निकली नहीं हूँ! पर मुझे आपकी चूत का पूरा ख्याल है, क्योंकि आपकी वजह से ही भैया मुझे मिले हैं! आप जब चाहें भैया से चुदवाओ, मैं आपको कभी मना नहीं करूँगी!”भाभी खुश होते हुए बोली, “थैंक्स बेटी!”
मैं किरण की शर्ट का बटन खोलकर उसकी एक चूची को चूस रहा था और दूसरी चूची को मुट्ठी में लेकर मसल रहा था।
किरण अपनी गांड हिलाकर चूत को मेरी जींस के ऊपर से लंड पर रगड़ रही थी।वह एकदम चुदास कुतिया की तरह मेरी गोद में, “आह भैया, उफ्फ भैया!” करते हुए मचल रही थी।
तभी भाभी ने मेरे पैरों के बीच बैठते हुए पीछे से किरण की स्कर्ट उठाकर उसके दोनों चूतड़ पकड़कर फैला दिए और अपनी जीभ उसकी गांड के छेद पर फिराने लगी।
जैसे ही भाभी ने जीभ को किरण की गांड से लगाया, किरण जोर से ऊपर को उछल गई।
भाभी जीभ फिराते हुए बोली, “देवर जी, हमारी बेटी की गांड का छेद देखो, कितना सुंदर है! इसको भी अपने लंड से खोल दो ना!”मैंने कहा, “रंडी, पहले तेरी बेटी से पूछ! ये गांड में लंड लेने के लिए नखरे तो नहीं करेगी ना!”
मैंने किरण को गोद से उठाकर सोफे पर लिटा प्रिया और उसकी स्कर्ट उठाकर टाँगें फैला दीं।किरण की फूली हुई चूत मेरे सामने थी।
प्यारी सी चूत देखकर मेरे से रहा नहीं गया।मैंने अपनी जीभ निकालकर उसकी चूत के कोमल होंठों से भिड़ा दी और जीभ को ऊपर से नीचे तक फिराने लगा।
किरण मेरे बालों को पकड़कर ‘आह भैया, बहुत मजा आ रहा है! उफ्फ आह, करो ना!’ बोलते हुए मचलकर अपनी गांड उठाकर चूत को मेरे मुँह से रगड़ रही थी।
भाभी ने किरण की शर्ट के सभी बटन खोलकर उसकी शर्ट निकाल दी और उसके निपल्स चूसने लगी।
किरण सुबह से गर्म थी और इस डबल मजे को बर्दाश्त नहीं कर पाई।उसका कोमल बदन काँपते हुए अकड़ गया, उसकी चूत ने भरभराकर पानी छोड़ प्रिया।किरण लंबी-लंबी साँसें लेते हुए निढाल हो गई।
मैंने किरण को वहीं छोड़कर अपने कपड़े उतार फेंके और भाभी को जमीन पर बिठाकर लंड उसके मुँह में दे प्रिया।
भाभी भी मुस्कुराते हुए लंड को किसी रंडी की तरह गले तक अंदर लेकर चूसने लगी।
मैंने उसके गाल पर थप्पड़ मारते हुए कहा, “रंडी, तेरी बेटी तो खलास भी हो गई!”भाभी ने लंड बाहर निकालकर कहा, “देवर जी, गुस्सा क्यों करते हो! ये अभी नई-नई है! आप देखना, ये मुझसे भी बड़ी रंडी बनेगी और एक दिन ये एक साथ दो-दो लंड लेगी!”
मैंने किरण की तरफ देखा, तो वो उलटी लेटकर हमें ही देख रही थी।
किरण की मदमस्त गांड फैली हुई थी।उसके दोनों चूतड़ खुले हुए थे जो किरण के हिलने से थिरक रहे थे।
मैं किरण की कसी हुई गांड के बारे में सोचते हुए भाभी का मुँह चोदने लगा।भाभी के मुँह में मेरा लंड अंदर-बाहर हो रहा था।
थोड़ी देर बाद मैंने भाभी के मुँह से लंड बाहर खींचकर किरण की तरफ लपका और उसे दोनों बाहों में लेकर ऊपर उठा लिया।किरण छोटी ब.च्ची की तरह मेरी बाहों में हँसने लगी।
मेरा लंड एकदम तना हुआ था और लंड का सुपाड़ा बुरी तरह फूलकर छत की तरफ उठा हुआ था।मैंने किरण को थोड़ा नीचे खिसकाकर सुपाड़े पर उसके चूतड़ टीका दिए।
सुपाड़ा उसकी गांड के छेद के आसपास लगा हुआ था।वो मेरी कमर में अपनी टाँगें लपेटकर, बाहों को मेरी गर्दन में डालकर मुझसे लिपटी हुई थी।किरण का कुछ वजन मेरे लौड़े पर पड़ रहा था।
पर जब लौड़ा अपने विकराल रूप में हो, तो उसे लड़की के वजन से कहाँ कोई फर्क पड़ता है!किरण मेरी बाहों में झूलते हुए बोली, “भैया, बड़े जोश में लग रहे हो!”
मैं उसकी बात का जवाब दिए बिना उसके होंठ चूसते हुए उसे गोद में उठाए ही कमरे की तरफ बढ़ गया।
अंदर जाकर मैंने किरण को बेड पर पटका और उसकी टाँगों के बीच आकर लंड को उसकी चूत के होंठों पर रगड़ते हुए उसके होंठ चूसने लगा।मेरे दोनों हाथ उसकी नरम चूचियों को मसल रहे थे।
मैंने किरण के होंठों को छोड़कर उसके कान में कहा, “चल किरण, तुझे गांड में मजा देता हूँ!”
किरण मेरे नीचे लेटी हुई, मेरी आँखों में आँखें डालकर बोली, “भैया, क्या ये जरूरी है?”मैंने कहा, “मेरी ब.च्ची, जैसे चूत मरवाना जरूरी होता है, वैसे गांड मरवाना भी बहुत जरूरी होता है! अगर तुम गांड में लंड नहीं लोगी, तो तुम्हारा बदन पूरा खुल नहीं पाएगा!”
किरण मासूमियत से बोली, “वो तो ठीक है भैया, पर मैंने सुना है पीछे बहुत दर्द होता है!”मैंने उसकी गाल थपथपाते हुए कहा, “मेरे पे भरोसा है ना?”किरण बोली, “बहुत ज्यादा!”
मैंने कहा, “चल फिर ठीक है! मेरे पर भरोसा है, तो चुपचाप लंड अपनी गांड में ले ले! तुझे बहुत मजा आएगा!”किरण बोली, “ठीक है भैया, पर प्लीज ध्यान से करना!”
मैंने किरण के चूतड़ों के नीचे तकिया लगा प्रिया और किरण की दोनों टाँगें उठाकर उसे पकड़ा दीं।किरण ने घुटनों के पीछे से दोनों टाँगों को हाथों से कसकर पकड़ लिया।
भाभी हमारे पास खड़ी हमें देख रही थी।
मैंने अपने लंड को हाथ से हिलाते हुए किरण की गांड के गुलाबी छेद के पास ले जाकर भाभी की तरफ देखते हुए कहा, “साली रंडी की औलाद, देख क्या रही है! अपनी बेटी की गांड सूखे लंड से ही फड़वाएगी क्या!”भाभी जैसे नींद से एकदम उठी हो, वैसे बोली, “अरे नहीं देवर जी! रुको थोड़ा, आपका मूसल इसकी गांड के नन्हें से छेद में ऐसे नहीं जाएगा!”
फिर वो अलमारी की तरफ लपकी और उसे खोलकर वैसलीन की डब्बी निकाल लाई।भाभी ने काफी सारी वैसलीन निकालकर मेरे लंड को चिकना करने लगी।
मैंने भी वैसलीन की डब्बी में अपना अंगूठा डालकर उस पर वैसलीन लगा ली और अंगूठे को किरण की गांड के छेद के बाहर फिराने लगा।फिर मैंने धीरे से अंगूठा किरण के छेद में डाल प्रिया।
अंगूठा अंदर जाते ही किरण ने कमर को उछालकर हँसते हुए कहा, “आह भैया, मत करो ना! गुदगुदी होती है!”
भाभी, जो मेरे लंड को अभी भी वैसलीन से चिकना कर रही थी, ने किरण की बात पर हँसते हुए कहा, “अरे बेटी, इसे गुदगुदी नहीं, खुजली बोलते हैं! अब देवर जी का लंड तेरी गांड में घुसकर तेरी खुजली मिटाएगा!”
मैं किरण के बहुत ही कसे हुए छेद में अंगूठा घुमाकर उसे अंदर से चिकना कर रहा था।मैंने चार-पाँच बार अंगूठे और अंगुली से किरण के छेद को पूरा चिकना कर प्रिया।
एक्स-गर्लफ्रेंड की शादी के बाद चुदाई-3
भाभी ने मेरा लंड छोड़कर किरण के पास बैठते हुए उसके बालों में हाथ फिराते हुए कहा, “बेटी, बिल्कुल ढीला छोड़ दे अपनी गांड को! तू गांड को जितना ढीला छोड़ेगी, लंड उतनी ही आराम से अंदर जाएगा!”
किरण ने भाभी का एक हाथ कसकर पकड़ते हुए कहा, “जी मम्मी, एकदम ढीला छोड़ रखा है मैंने!”
मैंने किरण के घुटनों के पीछे, जहाँ से किरण ने अपनी टाँगों को पकड़ा था, वहाँ अपनी बाँह रखकर टाँगें दबाते हुए उसके पेट से लगा दीं और दूसरे हाथ से लंड को बॉल्स के पास से पकड़कर किरण की चूत के होंठों पर फिराने लगा।
किरण छोटी ब.च्ची की तरह मेरे नीचे दबी हुई थी।
भाभी ने बड़ी फुर्ती से मेरा लंड पकड़कर किरण की गांड के छेद से लगाकर कहा, “देवर जी, कर दो मुहूर्त मेरी बेटी की गांड का!”
मैंने किरण की आँखों में देखते हुए सुपाड़े को उसके छेद पर दबाते हुए किरण से कहा, “तैयार हो किरण!”किरण के चेहरे पर थोड़े डर के भाव थे।वो उन्हें छुपाते हुए सिर हिलाकर धीरे से बोली, “जी भैया!”
उसकी हाँ सुनते ही मैंने सुपाड़े को किरण के छेद पर दबाते हुए अंगूठे से अंदर धकेल प्रिया।किरण की गांड और मेरा लंड बहुत ज्यादा चिकना होने से सुपाड़ा फच करके अंदर चला गया।
सुपाड़ा अंदर जाते ही मैंने कसकर धक्का मार प्रिया, जिससे किरण संभल नहीं पाई और अपनी बहुत ही टाइट और अनचुदी गांड में उसकी कलाई से मोटा और लोहे जैसा आधा लंड जाते ही बिलबिला उठी।
वो पूरे जोर से मुझे पीछे धकेलते हुए लंड बाहर निकालने की मिन्नतें करने लगी।बेचारी कमसिन, मासूम और प्यारी सी गुड़िया जैसी किरण की टाइट गुफा में मैं आधा लंड फंसाए हुए उसके गिड़गिड़ाने के मजे ले रहा था।
वो हाथ जोड़कर बोली, “प्लीज भैया, निकालो बाहर अपना लंड! आह, आप मेरी चूत मार लो! आह, छोड़ दो मुझे!”
उसकी मासूम और भोली बातों पर मुझे हँसी आ गई।मुझे हँसता हुआ देखकर भाभी ने किरण के दोनों बूब्स पर अपना एक हाथ फिराते हुए कहा, “देख बेटी, इन मर्दों के लंड के सामने हम औरतों की औकात सिर्फ एक रंडी जैसी होती है! हम कितना भी चीखें-चिल्लाएँ, इनका लंड एक बार थोड़ा सा भी अंदर चला गया, तो समझो वो, हमारी चूत हो चाहे गांड, फाड़ के ही बाहर आएगा!”
किरण बोली, “मम्मी जी, मेरी जान निकल रही है! इतना बड़ा लंड मैं और अंदर नहीं रख सकती!”
भाभी ने मुझे इशारे से करते रहने को बोलकर किरण की चूत के दाने को मसलते हुए उसके होंठ चूसने लगी।
मैंने बिना किसी परवाह के एक धक्का और मारकर लंड को पूरा का पूरा किरण की गांड की सुरंग में उतार प्रिया।
किरण जोर से बोली, “आह मम्मी, मर गई! उफ्फ, निकाल बहनचोद बाहर! साले कुत्ते, आह, मार प्रिया!”और बिफरते हुए रोने लगी।
भाभी बिना रुके किरण की चूत को हथेली से मसल रही थी और उसके होंठ और चूचियों को चूस रही थी।
मैंने किरण की परवाह न करते हुए धीरे-धीरे उसकी गांड में लंड अंदर-बाहर करना शुरू कर प्रिया।मेरे हर झटके के साथ किरण के नर्म, गद्देदार और चिकने चूतड़ थिरकते हुए मेरी जाँघों से टकरा रहे थे।
किरण की दूध जैसी गोरी टाँगें मेरी गर्दन में थीं।मैं उसकी टाँगों को चूमता हुआ उसकी संकरी गुफा में लंड पेल रहा था।
किरण मेरे हर झटके पर, “आह ओह भैया!” बोल रही थी।
थोड़ी देर बाद किरण जोर से बोली, “भैया, रुको ना! मेरी टाँगें बुरी तरह थक चुकी हैं! प्लीज, थोड़ा रुको, फिर कर लेना!”
मैंने लंड बाहर निकाले बिना किरण पर झुककर उसके होंठ चूसकर कहा, “किरण, कैसा लग रहा है?”किरण बोली, “भैया, पहले बहुत दर्द था, पर अभी कुछ ठीक है!”
मैंने उसकी बात सुनकर अपना लंड बाहर खींच लिया।जैसे ही मैंने किरण को ढीला छोड़ा, वो लंबी साँस लेते हुए बोली, “उफ्फ भैया, आप बड़े बेरहम हो! बिल्कुल भी तरस नहीं करते! आपका लंड ऐसा-ऐसा लग रहा था, जैसे मेरी रीढ़ की हड्डी में जाकर फंस गया हो! मुझे तो अब साँस आया है!”
उसकी बात सुनकर भाभी बोली, “कुछ दिन की बात है मेरी बच्ची! फिर तो तू खुद एक साथ दो-दो लंड माँगेगी!”किरण बोली, “कभी नहीं! मैं तो सिर्फ भैया की ही हूँ! और अब मेरा सब कुछ भैया का है!”
तभी मेरे मोबाइल की घंटी बजने लगी।मैंने भाभी को फोन लाने को कहा, तो वो उठकर हॉल में चली गई और फोन ले आई।
तब तक मैंने किरण को घोड़ी बनाकर उसकी गांड के छेद पर अपना लंड लगा चुका था।मैंने धीरे-धीरे किरण की गांड में लंड डालते हुए भाभी को फोन स्पीकर पर डालने को कहा और खुद किरण की कमर में हाथ डालकर जोर से धक्का मार प्रिया।
जैसे ही मैंने धक्का मारा, किरण जोर से ‘हाय मम्मी!’ करते हुए चीखी।
उधर भाभी ने फोन उठा लिया।
फोन उठाते ही मेरी पत्नी जोर से बोली, “क्या कर रहे हो? ये चीख कैसी थी?”मैंने लापरवाही से कहा, “किरण की गांड मार रहा हूँ! ये किरण की चीख थी!”
मेरी पत्नी बोली, “थोड़ी बकवास कम किया करो! पता भी है वो कितनी छोटी है आपसे और आपको भैया बोलती है! उसके बारे में भी ऐसी गंदी बातें कर रहे हो!”मैंने हँसते हुए कहा, “अरे नहीं यार, मैं और किरण उसके स्कूल आए हुए हैं! मैं गाड़ी में बैठा हूँ, किरण बाहर अपनी सहेलियों के साथ है और कोई लड़की खेलते हुए चीखी थी!”
मेरी पत्नी बोली, “जानू, मुझे मालूम है आप दूसरी लड़कियों के बारे में सिर्फ गंदा बोलते ही हो, ऐसा कभी करोगे नहीं! और रही बात आपके लंड की, उसे सिर्फ मैं ही बर्दाश्त कर सकती हूँ! दूसरी लड़की झेल नहीं पाएगी!”मैंने कहा, “यार, जो भी है, किरण की गांड है बड़ी मस्त! साली जब स्कर्ट पहनकर चलती है, तो उसके चूतड़ कैसे मटकते हैं! मेरा तो लंड खड़ा हो चुका है उसको देखकर!”
मेरी पत्नी हँसते हुए बोली, “मेरे लिए तो अच्छा ही है! जब आप बाहर से किसी लड़की को देखकर लंड खड़ा करके आते हो, तो मुझे डबल मजा देते हो! मैं तो कहूँगी, किरण की स्कर्ट उठाकर उसके चूतड़ भी देख लो, ताकि घर आकर आप पूरी रात मेरी चुदाई कर सको!”
मैंने कहा, “ठीक है, किरण आ गई, हम निकलते हैं!”मेरी पत्नी बोली, “ठीक है, मैं भी फ्री थी और किरण की चाची के घर जाने की तैयारी कर रही थी!”
मैंने कहा, “यार, मैं किरण को उसके घर छोड़कर सीधा घर आ रहा हूँ! तुम घर पर ही रहो!”मेरी पत्नी बोली, “ठीक है, आप आ जाओ! मैं उनके घर शाम को चली जाऊँगी!”
मैंने फोन काटकर एक हाथ की अंगुली को किरण की चूत में डालकर उसकी गांड में पूरी स्पीड से लंड पेलना शुरू कर प्रिया।
मेरे हर झटके के साथ किरण, “आह भैया, धीरे! उफ्फ, थोड़ा स्लो करो ना! उफ्फ आह!” बोल रही थी।पर मैं अपनी मस्ती से उसकी टाइट गांड में अपना लंड पेल रहा था।
थोड़ी देर बाद मेरे लंड ने जवाब दे प्रिया और झटके मारते हुए किरण की टाइट ऐस्स में वीर्य की बरसात कर दी।मैंने अंगुली से किरण की चूत चोदते हुए उसकी चूत का भी पानी निकाल प्रिया।
टाइट ऐस्स एनल सेक्स करके हम दोनों पसीने से भर चुके थे।
भाभी ने मुझे तौलिया लाकर प्रिया।मैंने अपने चेहरे से पसीना पोंछते हुए किरण की गांड से लंड बाहर खींचकर उसे भी साफ किया।
लंड बाहर निकलते ही किरण बेड पर उलटी ही लेट गई और लंबी साँसें लेते हुए हाँफने लगी।
मैंने बेड से उठकर भाभी से कहा, “भाभी, मेरी पत्नी आने वाली थी!”भाभी मेरे थोड़ा ढीले हो चुके लंड को सहलाते हुए मेरी आँखों में देखकर बोली, “देवर जी, हमें ऐसे ही छोड़कर जाओगे क्या?”
मैंने कहा, “भाभी, मेरे लंड में इतना दम है कि मैं तुम्हें, तुम्हारी दोनों बेटियों और इस किरण को पूरी रात एक साथ चोद सकता हूँ!”
भाभी बोली, “अरे देवर जी, हमारा मतलब वो नहीं था! बस जब आप किरण की गांड में लंड पेल रहे थे, तो हम भी अपनी चूत को सहलाते हुए आपके लंड लेने के बारे में सोच रहे थे!”
वो आगे बोली, “चलो छोड़ो, कोई बात नहीं! आप बस ये बताइए, किरण की गांड मारकर आपको कैसा लगा?”मैंने भाभी को चूमते हुए कहा, “सच में यार, ये किरण बड़ी मस्त है! मजा आ गया इसको चोदकर! देख, साली की गांड से कैसे मेरे लंड का पानी बह रहा है और वो कैसे मस्ती से चुदवाकर लेटी हुई है!”
भाभी बोली, “जी देवर जी, अब आप जाइए! कहीं देवरानी जी ना आ जाएँ!”
मैंने भाभी को छोड़कर किरण पर झुककर उसकी गाल चूमते हुए कहा, “ठीक है किरण, फिर मिलते हैं! अभी तुम आराम करो!”किरण ने मेरे गले में बाँह डालते हुए कहा, “भैया, आई लव यू!”
फिर मैंने उन दोनों से विदा ली और घर आ गया।
आगे की कहानी की प्रतीक्षा कीजिये.
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