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गे सेक्स स्टोरी पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 558 बार

शादी में चूसा कज़न के दोस्त का लंड-4

हिमांशु बजाज

09 May 2021 को प्रकाशित

शादी में चूसा कज़न के दोस्त का लंड-4
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प्रिय पाठको, मैं अंश बजाज अपनी कहनी के अंतिम चरण की ओर बढ़ते हुए चौथे भाग के साथ आप सब के बीच में फिर से हाजिर हूँ..तीसरे भाग में मैंने आपको बताया था कि रवि ने किस तरह लड़की वालों के घर में मेरी गांड पर लंड लगाया था और उसके बाद उसने वहीं पर एक लड़की की चूत को भी शांत किया था..और विदाई के बाद हम घर पहुंच गए थे..

रवि तो अपनी सुहागरात मना चुका था लेकिन मैंने जो रवि को अंदर ही अंदर अपना पति मान लिया था, वो भावना मेरे भीतर घर कर गई थी जो मुझे हर पल बेचैन रखती थी..लेकिन करता भी तो क्या..रवि तो एक बांका जवान मर्द था..वो मुझे एक लड़की समझ कर कैसे प्यार कर सकता था और ना ही मैं उसको इस बात के लिए बाध्य कर सकता था.. उसने मेरी भावनाओं को समझा, मेरे लिए तो वही बहुत बड़ी बात थी।

खैर दुल्हन घर आ गई और सारे घर में खुशी और हंसी ठहाकों का माहौल बन गया और रस्में होने लगीं।रवि भी अब आकाश के साथ व्यस्त हो गया था और घर की महिलाएँ दुल्हन की देख रेख में लगी थीं।

रात का एक बज चुका था और सभी लोग बेहद थक गए थे। सारा दिन थका होने के बाद मुझे बहुत जोर की नींद आ रही थी और आँखें खुली रखना मुश्किल हो रहा था.. आखिरकार मैंने नींद के सामने घुटने टेक दिए और मैं छत पर सोने चला गया.. वही गद्दा.. वही चांदनी रात.. लेकिन कमी थी तो बस मेरी चांद की.. जो पता नहीं कहाँ लोगों की भीड़ में छुपा हुआ था..

मैं निढाल होकर गद्दे पर गिर गया.. और आँखें झपकी लेने लगी ही थी कि सीढ़ियों में किसी के पैरों की आवाज़ सुनाई देने लगी जो धीरे धीरे तेज़ होती जा रही थी।आँखें खोलीं तो रवि सीढ़ियाँ चढ़ चुका था.. ‘तू सोया नहीं अभी?’‘नहीं भैया, बस सोने ही वाला था!’

‘आज तो बहुत थक गए यार..’ कहते हुए उसने शर्ट निकाल दी और सेंडो बनियान पहने हुए वो मेरे पास आकर गद्दे पर गिर गया और उसके बदन की खुशबू मेरे चारों तरफ फैल गई जिससे मेरे मन में चल रही बेचैनी को थोड़ा सुकून मिला।

‘अंश यार, आज सिर थोड़ा भारी भारी सा लग रहा है पता नहीं नींद आएगी या नहीं.. क्या करुँ?’‘रवि भैया, आप बुरा ना मानो तो मैं आपका सिर थोड़ा दबा दूँ?’‘अरे पगले, बुरा मानने वाली क्या बात है इसमें.. तू तो मेरा भाई है.. आ जा…’

मैं उठकर उसके सिरहाने जा बैठा और उसका सिर अपनी गोद में रख लिया और उसके घने घने बालों में हाथ फेरने लगा।बस क्या बताऊँ दोस्तो, दिल से एक ही आरजू बार बार निकल रही थी कि यह रात कभी खत्म न हो..मैं यूं ही उसके बालों में हाथ फेरता रहूँ और वो मेरी गोद में लेटा रहे..

लेकिन जल्दी ही उसे नींद आ गई और उसके खर्राटें शुरु हो गए..थका तो मैं भी था लेकिन डर रहा था अगर मैं हिला तो उसकी नींद टूट जाएगी और वैसे ही उसके सिर में दर्द है..और रात तो लगभग बीत ही चुकी है और थोड़ी देर में सुबह हो जाएगी.. इसलिए मैं रात भर उसके सिर को गोद में रखे हुए बैठा रहा ..और समय बीतता गया, चिड़ियाओं ने चहचहाना शुरु कर प्रिया..

इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढता हुआ मैं वापस घर आया तो 8 बज चुके थे और सब लोग दुल्हन के वापस जाने की तैयारी में लगे हुए थे।मैं नहाया धोया, नाश्ता किया तब तक 10 बज गए और रवि ने गाड़ी तैयार कर दी। आकाश भी तैयार था, बस दुल्हन का आना बाकी था।

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दस मिनट बाद दुल्हन आई और वो दोनों गाड़ी मैं बैठे और आकाश की ससुराल के लिए निकल गए।धीरे धीरे करके मेहमान और रिश्तेदार जाने लगे।

शाम हो गई और मेरे अकेलेपन ने मुझे अंदर ही अदर काटना शुरु कर प्रिया.. रवि का अभी तक कोई अता पता नहीं था।फिर 6 बजे के करीब आकाश की कार घर के बाहर आकर थम गई और भाभी तथा आकाश भैया घर की तरफ आने लगे लेकिन रवि?? वो तो था ही नहीं.. अब मैं क्या करूँ.. किससे पूछूँ और कैसे पूछूँ.. किसी को भी हमारी दोस्ती के बारे में नहीं पता था..

लेकिन मेरा सवाल मौसी ने ही पूछ लिया- अरे आकाश.. रवि कहाँ है.. उसको कहाँ छोड़कर आ गए?‘माँ वो रास्ते में अपने किसी दोस्त के पास किसी काम से चला गया..!’

मैं समझ गया कि पीकर आएगा..अब इंतज़ार करने के अलावा के मेरे पास कोई चारा नहीं था।

8 बज गए.. घर में हमारे अलावा एक रिश्तेदार ही और बचा था, बाकी सब जा चुके थे और घर काफी खाली खाली लगने लगा था।खाने की तैयारी होने लगी.. सबने खाना खाया, तब तक 10 बज चुके थे लेकिन रवि की कोई खबर अभी तक मुझे नहीं मिल पाई थी.. मैं कभी छत पर जाता कभी गली में.. उसे देखने के लिए आंखें तरस गईं थीं।

12 बज गए और मुझे जोरों की नींद आने लगी क्योंकि पहली रात भी नहीं सो पाया था मैं और सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि मुझे ये पता नहीं लग पा रहा था कि आज रवि कहाँ सोने वाला है क्योंकि घर में दो कमरे खाली थे, एक पीछे वाला और एक छत पर.. लेकिन मैं पीछे वाले कमरे में ही उसका इंतज़ार करने लगा ताकि वो घर आए तो मुझे पता लग जाए।

लेकिन आखों ने मेरा साथ नहीं प्रिया और मैं गहरी नींद में सो गया..रात के करीब 1 बजे का समय रहा होगा कि अचानक मुझे महसूस हुआ कि कोई भारी भरकम वज़न मेरे ऊपर आकर गिर गया है..एकदम से आंख खुली तो रवि नशे में धुत्त मेरे ऊपर गिरा हुआ था.. उसका 80 किलो का भार मुझे टस से मस नहीं होने दे रहा था।

हालांकि मुझे सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी फिर उसके बदन का मेरे पूरे बदन को स्पर्श करना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.. उसका जिप वाला भाग मेरे लंड के ऊपर टिका हुआ था जिससे मुझे अति आनंद की अनुभूति हो रही थी..मैंने पेट पर रखे अपने हाथ बाहर निकाले तो उसने भी अपनी मजबूत बाजुओं मेरे दोनों हाथों बेड पर दबा लिया।

आगे की कहानी के लिए बस थोड़ा सा इंतज़ारआपका अंश बजाजsupport@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

अंकित राजावत

1 month ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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